ब्लैक फंग्स के नकली इंजेक्शन की ईमेल से खुली पोल, पुलिस ने दबोचे
नई दिल्ली. ब्लैक फंगस के नकली इंजेक्शन और असली इंजेक्शनों की कालाबाजारी मामले की परतें धीरे-धीरे खुल रही है। पकड़े गये 10 आरोपियों से पुलिस को इस गोरखधंधे के बारे में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।
पुलिस को ईमेल से मिला सुराग
दिल्ली पुलिस के अनुसार एबीबीओटी इंटरनेशनल फार्मा कंपनी को कुछ ईमेल मिले थे। जिनमें कहा गया था कि दिल्ली में ब्लैक फंगस की दवायें आसानी से मिल रही हैं। जबकि पूरे देश में इनकी किल्लत हो रही है। इन ईमेल में कुछ दवाओं के फोटो भी भेजे गये थे। कंपनी ने जब उन दवाओं के बैच नम्बर जांचे तो वह फर्जी निकले, जिसके बाद दिल्ली ड्रग्स कन्ट्रोल डिपार्टमेंट को शिकायत दी गयी। ड्रग कंट्रोल ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए उसे जांच के लिये दिल्ली पुलिस को फॉरवर्ड कर दिया है।
तीन व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे थे
इस मामले में एक आरोपी वसीम ने 3 व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे थे। इनके नाम कोविड रिलीफ दिल्ली, हिम्युनिटी नेवर dies और कोविड ग्रुप थे। इन ग्रुपों के जरिए ग्राहकों से संपर्क किया जाता था। जांच में पता चला है कि गिरोह अब तक करीब 500 नकली इंजेक्शन (Black Fungus) बेचने का खुलासा हुआ।
भागीरथ पैलेस से खरीदते थे दवाएं
पुलिस की पूछताछ में पकड़े गए दोनों डॉक्टरों ने खुलासा किया है कि वे लो दिल्ली के भागीरथ प्लेस से ब्लैक फंगस (Black Fungus) की एक्सपायरी दवाएं 3 हजार रुपये में खरीद लेते थे। इसके बाद उन पर नकली बैच नंबर और स्टिकर लगाकर आगे 15 से 20 हजार रुपये में बेच देते थे। जांच में यह भी पता चला कि दिल्ली के अबु फ़जल एंक्लेव के अल खिदमत मेडिकोज के जरिये ब्लेक फंगस (Black Fungus) के नकली इंजेक्शन आगे बेचे जा रहे थे। इस मेडिकोज को शोएब खान चलाता था, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

