नई परिवहन नीति – दो मार्च से बेमुद्दत हड़ताल की चेतावनी स्टेज कैरिज बस नीति वापस लेने की मांग, प्रदेशभर में ठप हो सकता है संचालन
ग्वालियर। मध्यप्रदेश में नई परिवहन नीति को लेकर विवाद गरमाता जा रहा है। प्रदेशभर के बस ऑपरेटर्स ने 2 मार्च से बेमुद्दत हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। ऑपरेटर्स का कहना है कि यदि स्टेज कैरिज बसों के संचालन को लेकर लागू की गई नई नीति को वापस नहीं लिया गया तो वे सामूहिक रूप से बसों का संचालन बंद कर देंगे। इससे प्रदेशभर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा सकती है और लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बस ऑपरेटर्स का आरोप है कि नई नीति में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जो निजी बस संचालकों के हितों के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि नीति लागू होने से आर्थिक बोझ बढ़ेगा और छोटे व मध्यम स्तर के संचालकों के लिए व्यवसाय चलाना मुश्किल हो जाएगा। इस मुद्दे को लेकर कई दौर की चर्चाएँ भी हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। शहर में संचालित होती हैं 3 हजार बसें शहर में प्रतिदिन तीन हजार बसें संचालित होती हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बसें ही प्रमुख यातायात साधन हैं। हड़ताल की स्थिति में न केवल त्योहार मनाने जा रहे लोगों को परेशानी होगी, बल्कि रोजाना कामकाज, पढ़ाई और व्यापार के लिए यात्रा करने वालों पर भी असर पड़ेगा। व्यावहारिक गतिविधियों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। होली के मौके पर बाजारों में चहल-पहल बढ़ जाती है। यदि परिवहन व्यवस्था बाधित होती है तो सामान की आपूर्ति और लोगों की आवाजाही दोनों प्रभावित हो जाएँगी।
ग्वालियर से यूपी, दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान तक जाती हैं बसें बसों की बड़ी चिंता की बात यह है कि हड़ताल का ऐलान होली से ठीक दो दिन पहले किया गया है। इस दौरान प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की ओर लौटते हैं। त्योहार के समय ट्रेनों में पहले से ही भारी भीड़ बनी हुई है।
सामान्य कोच ओवरलोड चल रहे हैं, जबकि स्लीपर, एसी थ्री टियर और एसी टू टियर कोच में एक सप्ताह पहले से ही वेटिंग लिस्ट चल रही है। आगरा और झाँसी रूट से कई राज्यों में जाने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनों में त्योहार के दौरान नो रूम की स्थिति बन चुकी है।
हरिशंकर पटेल, महामंत्री, बस ऑपरेटर यूनियन

