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मुरार नदी को पुर्नजीवित करने के लिये किस -किस विभाग से क्या मदद चाहिये-हाईकोर्ट

ग्वालियर. मुरार नदी को पुर्नजीवित करने के मामले में अब हाईकोर्ट ने अब डिटेल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये हे। नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत नदी की सफाई का काम किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का काम कर रही एजेंसी को अब यह बताना है कि उसे कि विभाग से क्या मदद चाहिये। ऐजेंसी को इस संबंध में एक सूची तैयार कर हाईकोर्ट में पेश करना होगी।
सेकण्ड फेज के लिये 32 रूपये स्वीकृत
न्मामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत मुरार नदी को साफ करने के लिये पहले चरण में 39 करोड़ रूपये मिले थे। पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल के मुताबिक इसमें से अभी तक केवल 12 करोड़ रूपये खर्च किये गये है। यह राशि खत्म होती है उससे पहले ही दूसरे चरण के लिये 32 करोड़ रूपये स्वीकृत कर लिये गये। नमामि गंगे प्रोजेक्ट सफाई पर फोकसकर रहा है। लेकिन जब नदी में पानी नहीं रहेगा तो सफाई किस काम आयेगी।
नदी के बहाव क्षेत्र में कई जगह चौड़ाई 20 फीट से कम
नदी के 12 किमी लंबे स्ट्रेच में जगह-जगह अतिक्रमण
मुरार नदी में लोग धड़ल्ले से फेंक रहे हैं कचरा
मुरार नदी को पुनर्जीवित करने का मामला
मुरार नदी को पुनर्जीवित करने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। इसकी सुनवाई में एनजीटी के उस आदेश को पेश किया गया, जिसमें नदी क्षेत्र में अतिक्रमण सहित अन्य समस्याओं को उजागर किया गया। इसमें दावा किया गया कि 12 किमी लंबे स्ट्रेच यानी कि रमौआ से जडेरुआ बां‍ध के बीच जगह-जगह अतिक्रमण के चलते नदी का बहाव प्रभावित हो रहा है। कई जगह नदी की चौड़ाई घटकर 20 फीट तक पहुंच गई है। यहां तक की कई जगह तो नदी क्षेत्र पर ही अतिक्रमण करते हुए बाउंड्रीवाल बना दी गई है।

 

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