मोरों का शिकार करने वाला गैंग सक्रिय, दाना डालकर 28 मोरों की मौत, अभी तक 40 मोरों की मौत
ग्वालियर. रिठौरा-शनिचरा के बीच वन चौकी के पास दौलसा में रविवार को 28 राष्ट्रीय पक्षी मोर मृत पाये गये और इनके मरने की खबर मिलने पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मौके पर जहरीले चावल के दाने बरामद किये है। इससे साफ है कि क्षेत्र में मोरों का शिकार करने वाला गिरोह सक्रिय है।
व्जह, 4 दिन पूर्व यहां 12 मोरों की इसी तरह मौत हुई थी। पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने 17 जून को इनका पोस्टमार्टम किया था। रविवार को मृत मिली 28 मोरों को पोस्टमार्टम के लिये सोमवार को बानमोर लाया जायेगा। 4 दिन में 40 मोरों को मौत के बाद भी वन विभाग ने इस इलाके में न चैकिंग प्वाइंट बनाये और न ही शिकारी पकड़े गये। मोरों के शिकार के इस मामले को वन विभाग लगातार छिपा रहा है। लगातार 2 मामलों के बाद भी कोई गंभीर कदम नहीं उठाया गया है।
पंख और मांस की वजह से मारा जाता
मोर के शिकार के 3 बड़े कारण हैं। पहला, फसल बचाने के लिए। सब्जी और फसल की कोपलें मोर चुगता है। किसी भी पौधे की कोपल चुग जाने पर उसका दाना नहीं पड़ता। दूसरा, मोर के पंख। मोर के पंख के लिए भी शिकार होता है। तीसरा, मोर का मांस। ज्यादातर लोग मांस के लिए मोर का शिकार करते हैं। यह शिकार का सबसे बड़ा कारण है। बड़ी संख्या में मोरों के मारे जाने से भी इस बात को बल मिलता है। मोर का शिकार करने के लिए कीटनाशक में बीज को भिगोकर खेत और जंगल में फेक दिया जाता है। इसे खाने पर इनकी मौत हो जाती है। कीटनाशक के कारण इनके वाइटल ऑर्गन फेल होने से मोर की मौत तो हो जाती है लेकिन कीटनाशक के जहर का मांस पर असर नहीं पड़ता हैए इसलिए शिकारी इस तरीके को अपनाते हैं।
संजय कुमार, वन्य जीव विशेषज्ञ
28 मोरों का आज होगा पोस्टमार्टम
28 मोरों के मरने की जानकारी लगी है। इन मोरों का बानमोर में सोमवार को पोस्टमार्टम कराया जायेगा। 4 दिन पहले 12 मोरों का भी पोस्टमार्टम किया गया था।
डॉ. रामकुमार त्यागी, डिप्टी डायरेक्टर, पशु चिकित्सा विभाग, मुरैना

