कालों का बन गई काल उस शौर्य-तेज का वंदन है
ग्वालियर= संस्कार मंजरी द्वारा आयोजित वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर ऑनलाइन काव्य पाठ कार्यक्रम में प्रदेश के प्रतिष्ठित कवियों ने रचना पाठ किया और वीरांगना के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित की।
कविता की पंक्तियां
जो राष्ट्रधर्म की यज्ञवेदि पर आहुति अपनी चढ़ा गई, उस शूरवीर मरदानी की स्मृति का नित अभिनंदन है!
जो कालों का बन गई काल उस शौर्य-तेज का वंदन है! उसकी वह संचित चिता भस्म जन-गण का पावन चंदन है!
रमा सिंह, गुना
झांसी वाली रानी तेरा, अमर रहेगा जग में नाम।
हम सब तेरी महिमा गाते,शत-शत करते तुझे प्रणाम।।
पुष्पा शर्मा
“रुकी नहीं वो,थकी नहीं, और न मानी हार ।
झांसी की रानी तुम्हें, नमन करें शत् बार ।।
प्रतिभा द्विवेदी
थाम ली अपने हाथों में मैंने अब ये कमान,प्राणों से प्यारा है मुझको मेरा हिन्दुस्तान।
सोने की चिड़िया जिसने लूटी थी, बिजली बन उस वैरी पर मैं टूटी थी,
दुश्मनों का करती रही हूं मैं शर संधान] प्राणों से प्यारा है मुझको मेरा हिन्दुस्तान।
डॉ मुक्ता सिकरवार
देता हूं मैं आज चुनौती शत्रु मिटाने की आशा में. कभी नहीं दिखेगा कोई सैनिक घिरा निराशा में.
अलग तरह करते हैं सब पूजा अपने मालिक की करता हूं मैं राष्ट्र वंदना वेद मंत्र की भाषा में.
आलोक शर्मा, ग्वालियर
वीर थी छबीली बड़ी , शस्त्र शास्त्र में निपुण,
दबंग झांसी की शान, रानी वो महान थी।
पुष्पा मिश्रा
देशहित के लिए सदा लड़ रही थी। झांसी की रानी ही वह कहलाती थी।
छक्के तो छुड़ा दिए उसने दुश्मनों के। रणभूमि में उसने तो वीरगति पाई थी।
विभा भटोरे, इंदौर
जिसको लड़ता देख मैदान मे शूरमा भी शर्माते थे सात समंदर पार थे दुश्मन पर फिर भी घबराते थे ।
जिसके साहस का परिचय सुन वायु वेग रुक जाते थे। जिसकी एक झलक पाने को अंबर भी झुक जाते थे ।
डॉ.मुकुल तिवारी,जबलपुर
मातृभूमि के हित लड़ी,दे दी अपनी जान। याद रखेंगे हम सदा, रानी का बलिदान।।
प्रेरक है सबके लिए, जीवन चरित महान। हैं कृतज्ञ हम सब अतुल, गाते गौरव गान।।
राजहंस त्यागी
मनु, लक्ष्मी या कहूँ छबीली] नाना साहेब की बहन मुँह बोली
तलवार कटार बरछी से खेले] स्मरण करते सदा बुन्देले ॥
हृदय में ममता की धार लिए, दुर्गा, चंडी का प्रहार लिए।।
उनतीस वर्ष की अल्प वय, हुकूमत विरूद्ध तलवार लिए ।।
स्वतंत्रता का शंखनाद किए, पीठ पर दामोदर, हाथ ढाल, कटार लिए ।।.
डा.ज्योति प्रियदर्शिनी श्रीवास्तव जबलपुर
निकल पड़ी थी झांसी से रणचंडी खप्पर लेकर] काट रही थी अरि-दल को जैसे हों मूली गाजर
क्रांति पर्व ने जब मांगी थी आहुति बलिदान की]हंसते-हंसते हुई निछावर भेंट चढ़ा दी प्राण की
महामना जगदीश गुप्त
हरेक आसूँ की अपनी बात होती है हरेक आँसू की अपनी बिसात होती है
सीमा पे जा रहे सैनिक की माँ बहिन और पत्नी तीनों की आँखे आँसू भीगोती हैं
पर तीनों के आंसुओ की अलग अलग बात होती है माँ कोख के लिये बहिन राखी के लिये पत्नी मांग के लिये रोती है ! अनूप गुप्ता
काशी की बेटी झांसी की वधु अस्मिता भारती
सत्तावन की रणचंडी की करता है ग्वालियर आरती
नीलम जगदीश गुप्ता
महारानी लक्ष्मी बाई पर बुंदेली में गीत-
“धर लयो चंडी जैसो रूप] जे निकली युद्ध करन मनु बाई
तोर दये उनके तीखे तीर] तमंचा ,तोप ,तीर,तलवार
बना दई युद्ध भूमि श्मशान। जे निकलीं युद्ध करन मनु बाई।
डॉ. ज्योति उपाध्याय
इसमें हैरत न थी ना ही थी दिल्लगी,
जज्बा माटी का था और दीवानगी
आशा पाण्डे
आज देश की आंतरिक स्थिति] पड़ी हुई है,विपदा में भारी
जागो देशवासियों अब जागो] मां भारती तुम्हें पुकारती।
सुबोध चतुर्वेदी
जहां हवा भी जम जाती है] तुम भरते हुंकार .
नज़र जमाए सीमा पर] हर आहट पर टंकार .
सर्दी गर्मी वर्षा क्या है] तुम कर्त्तव्य मगन . मातृभूमि के पहरेदारो मेरा तुम्हें नमन
गिरिजा कुलश्रेष्ठ
स्वर्ण अक्षरों में अंकित, उस बलिदानी को नमन करूं ।
भारत मां का चंदन, रानी लक्ष्मी को मैं नमन करूं ।
देशभक्ति की अनुपम गौरव,गरिमा को मैं नमन करूं।
उमा उपाध्याय
जन्म लिया इस भारत भू पर मैं गीत इसी के गाउंगी मैं शत् शत् शीश झुकाऊँगी ….
शेष है जब तक बूंद लहू की इसका मान बढाऊंगी मैं शत-शत शीश झुकाऊँगी …
सीता चौहान पवन
रणचंडी,महाकाली,दुर्गा अनगिन रूप है नारी केl
वीर लक्ष्मीबाई बन के, खेले खेल कटारी के l
अबला मत जानो नारी को,नारी पैनी धार है ।
डॉ. दीप्ति गौड़ “दीप

