ग्वालियर में रेमडेसिविर की कालाबाजारी के रैकेट में कुछ नर्सिंग होम व कर्मचारियों के नाम सामने आए
ग्वालियर. रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में महाराष्ट्र के नागपुर और प्रदेश के छिंदवाड़ा के कुछ नर्सिंग होम, उनके कर्मचारियों के नाम सामने आए है। शुक्रवार की रात को एसटीएफ की टीमें नागपुर, छिंदवाड़ा पहुंच गई है और शाम तक वहां से कुछ लोगों की धरपकड़ हो सकती है। नागपुर के एक मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की महिला नर्स को 3 दिन पहले एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था, उससे यह नाम सामने आए है। महिला ने अभी तक आधा सैकड़ा इंजेक्शन बेचना कबूला है।
यह है पूरा मामला
एसटीएफ ग्वालियर की टीम ने 8 मई को ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर रेमडेसिविर इंजेक्शन को ब्लैक में बेचने आए सिवनी के रघुनाथ कॉलोनी निवासी 43 वर्षीय कमलेश्वर प्रसाद दीक्षित को गिरफ्तार किया था उसके पास से 5 इंजेक्शन मिले थे। जब इससे पूछताछ की तो पता लगा कि वह इंजेक्शन की कालाबाजारी के रैकेट का एक मोहरा मात्र है। वह नागपुर, बालाघाट व मंडला के कुछ अस्पताल कर्मचारियों के संपर्क में था। वहीं उसको इंजेक्शन उपलब्ध कराते थे। उसने बालाघाट निवासी संगीता कुमारी का नाम एसटीएफ को बताया था साथ ही यह भी बताया था कि संगीता अभी महाराष्ट्र के नागपुर में एक मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में बतौर नर्स पदस्थ है। जब एसटीएफ ने संगीता को उठाया तो पता लगा कि वह भी रैकेट का एक हिस्सा है।
नर्स ने 5 हॉस्पिटल के नाम लिए
तीन दिन से एसटीएफ के पास रिमांड महिला नर्स संगीता ने छिंदवाड़ा, नागपुर के 5 नर्सिंग होम के नाम लिए है जिनके कर्मचारी उनको इंजेक्शन उपलब्ध कराते थे। अभी तक वह 50 से ज्यादा इंजेक्शन को 20 से 25 हजार रुपए प्रति इंजेक्शन बेच भी चुकी है। इतना ही नहीं इन नामों के सामने आने के बाद एसटीएफ की दो अलग-अलग टीमें शुक्रवार रात को ही छिंदवाड़ा और नागपुर पहुंच गई है, शाम तक यहां से कुछ गिरफ्तारी हो सकती है।

