RSS में संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, मालवा प्रांत होंगे खत्म

इंदौर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक चल रही है। बैठक में संगठन के अगले तीन साल की कार्ययोजना पर चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही संघ के संगठनात्मक ढांचे में बडे बदलाव की तैयारी भी रही है। बैठक का दूसरा दिन था। इस दौरान संगठन के मौजूदा ढांचे में बदलाव को लेकर मंथन हुआ। इसमें मालवा प्रांत को खत्म कर इंदौर और उज्जैन के दो अलग-अलग संभाग बनाने की योजना पर चर्चा हुई। इसके अलावा देशभर में संगठनात्मक जिलों की संख्या बढाकर 1600 तक करने की भी तैयारी है। इन बदलावों का उद्देश्य संगठन के कामकाज को अधिक व्यवस्थित करना और उसकी पहुंच बढाना बताया जा रहा है। इसके अलावा संगठन की नई व्यवस्था का मकसद कामकाज को अलग-अलग स्तरों पर बांटना और छोटे से छोटे कस्बे और बस्ती तक संघ की पहुंच बढाना है। इंदौर के डेली कॉलेज स्थित संत रविदास महाराज सभागार में चल रही अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक के पांच सत्रों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई।


2 भागों में बांअकर संचालन होगा
मध्य प्रदेश में इस बदलाव की शुरूआत मालवा प्रांत से हो सकती है। अभी संघ के मालवा प्रांत में इंदौर और उज्जैन दोनों क्षेत्र शामिल है। नई व्यवस्था के तहत मालवा प्रांत को दो हिस्सों में बांटने की तैयारी है। इसमें एक संभाग इंदौर और दूसरा उज्जैन के नाम से होगा। इसके बाद मालवा प्रांत का मौजूदा ढांचा खत्म हो जाएगा। यह बदलाव सिर्फ मालवा में नहीं होगा। देशभर के 46 प्रांतों के संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव की तैयारी है। इसके लिए क्षेत्र की भौगोलिक स्थित, आबादी और संघ से कामकाज को ध्यान में रखा जाएगा।

बैठक में देशभर से करीब 400 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
प्रांतों की जगह संभागीय व्यवस्था
प्रस्तावित बदलाव के तहत प्रांतों की सीमाएं और उनके अंदर आने वाले क्षेत्रों को नए सिरे से तय किया जाएगा। इसके लिए मौजूदा भौगोलिक और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखा जाएगा। आने वाले समय में संघ में प्रांतों की जगह संभागों को ज्यादा महत्व दिया जा सकता है।

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