साफ होने लगी बिलौआ की हवा, कलेक्टर सख्त, अवैध खदानें पूर्ण रूप से बंद

ग्वालियर। हर समय हवा में बड़ी मात्रा में धूल के कण होने से बिलौआ गांव व उसके आसपास के कुछ लोगों में हर समय धुंध सी छाई रहती थी, लेकिन इन दिनों इस इलाके के धुंध गायब है। लोगों को सांस लेने के लिए साफ हवा मिलने लगी है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण इस इलाके में चलने वाली मिट्टी और रेत की खदानों का इन दिनों बंद होना है।
किसी भी इलाके में जहां पर फैक्ट्री अथवा क्रेशर का संचालन किया जाता है, वहां पर आमतौर पर वातावरण बदल जाता है। बिलौआ और उसके पास स्थित सूखापाठा आदि गांवों में 35 खदानें हैं। इस इलाके में एम सेण्ड अर्थात् पत्थर को तोड़कर रेत बनाने वाली खदानें भी हैं। जब सभी खदानें संचालित होती थीं तो न केवल क्रेशरों से धूल के कण हवा में शामिल होते थे, बल्कि यहां से निकलने वाले डंपर्स की वजह से भी सड़कों से अत्यधिक धूल उड़ती थी। इस वजह से न चाहते हुए भी लोगों के फैफड़ों तक यह कण पहुंचते हैं। जिससे कि कई प्रकार के रोग पैदा होते हैं।
आदेश डेढ़ दर्जन को बंद, लेकिन सभी हो गईं बंद
कोर्ट में बिलौआ की खदानों को लेकर विचाराधीन प्रकरण के चलते डेढ़ दर्जन खदानों को बंद कराया गया है। इसके साथ ही प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग ने नियम और कानून को लेकर इलाके में काफी सख्ती कर दी है। ऐसा होने की वजह के पीछे कुछ माह से इस इलाके की खदानों पर मिट्टी, रेत लेने के लिए डंपर्स का आना लगभग बंद हो गया है। क्रेशरों से तोड़कर बनाई गई मिट्टी व रेत का बिकना लगभग बंद हो गया है।ऐसा होने की स्थिति में उन खदान संचालकों ने भी अपने क्रेशर बंद कर दिए हैं। जिन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
12 हजार से अधिक है बिलौआ की जनसंख्या
बिलौआ नगर पंचायत क्षेत्र है। यदि यहां जनसंख्या की बात करें तो वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 12 हजार से अधिक लोग यहां रहते हैं। जो धूल आदि से परेशान होते हैं।रेत और मिट्टी आदि परिवहन करने वाले डंपर, ट्रक बड़ी संख्या में इस इलाके में आते थे। बताया जाता है कि हर रोज इस इलाके में एक हजार से अधिक डंपर और ट्रकों का आवागमन होता था।
बीमारियों में मिलेगी राहत
धूल के बारीक कण जब लगातार लंबे समय सांस के माध्यम से फैफड़ों तक पहुंचते हैं, तो फैफड़े कमजोर होने लगते हैं, सीओपीडी, श्वास लेने में तकलीफ, अस्थमा, आईएलडी जैसी बीमारी होने लगती है। काम की क्षमता कम हो जाती है। कैंसर का भी खतरा पैदा हो जाता है। जब साफ और स्वच्छ वायु मिलेगी, तो इन सभी बीमारियों के रोगियों को लाभ होगा।
डा. मनीष शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, जीआरएमसी मेडिसिन विभाग

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