सिंधिया परिवार के समझौते में पड़ी दरार, प्रतिमा देवी बोलीं मुझे हिस्सा नहीं मिला
ग्वालियर. सिंधिया राजपरिवार की संपत्तियों से जुड़े वर्षों पुराने विवादों को समाप्त करने की प्रक्रिया के बीच नया मोड़ आ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी ने जिला न्यायालय में आवेदन देकर दावा किया है कि उन्हें उनका वैधानिक हिस्सा नहीं मिला है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि प्रस्तावित समझौते पर कोई निर्णय लेने से पहले उनकी आपत्तियों पर भी सुनवाई की जाए। मामले में अब 28 जुलाई को सुनवाई होगी।
प्रतिमा देवी के आवेदन ने नया कानूनी सवाल खड़ा कर दिया
सिंधिया परिवार की संपत्तियों को लेकर अलग-अलग अदालतों में डेढ़ दर्जन से अधिक मुकदमे लंबित हैं। इन्हें समाप्त करने के लिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे समेत अन्य पक्षकारों ने अदालतों में आवेदन प्रस्तुत किए हैं। इसी बीच प्रतिमा देवी की ओर से दायर आवेदन ने पूरी प्रक्रिया पर नया कानूनी सवाल खड़ा कर दिया है।
अदालत में पेश आवेदन में कुछ तथ्य भ्रामक हैं
आवेदन में कहा गया है कि उनके नाम से प्रस्तुत पावर ऑफ अटॉर्नी केवल 24 जून तक ही प्रभावी थी। इसके बावजूद बाद की प्रक्रिया में उसका उपयोग किया गया। यह भी आरोप लगाया गया है कि अदालत में पेश आवेदन में कुछ तथ्य भ्रामक हैं और फैमिली सेटलमेंट से जुड़ी पूरी जानकारी भी प्रस्तुत नहीं की गई। प्रतिमा देवी की ओर से उनके रिश्तेदार ने यह आवेदन जिला न्यायालय में दाखिल किया।
कौन हैं प्रतिमा देवी
प्रतिमा देवी, ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी हैं। पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा राजपरिवार में हुआ था। प्रतिमा देवी के साथ ही उनकी बहन कनिका देवी भी इस संपत्ति विवाद की पक्षकार हैं। कोर्ट में प्रतिमा देवी के परिजन आवेदन लेकर पहुंचे थे।
