TMC मुख्यालय पर कब्जा, सांसद -विधायकों ने की बगावत

नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम, चुनाव चिंह और संगठन पर नियंत्रण की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गयी है। सोमवार का ममता बनर्जी और बागी गुट चुनाव आयोग के सामने अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज और सबूत पेश करेंगे। पार्टी के 28 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि 2 गुट स्वयं का असली टीएमसी साबित करने की कोशिश कर रहे है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि विधायकों और सासंदों के बागी होे जाने के बाद अब ममता के हाथ से पार्टी छिन जाने का भी खतरा बना हुआ है।
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को सोमवार की शाम 5.30 बजे तक संगठन से जुड़े दस्तावेज, रिकॉर्ड और समर्थन के सबूत जमा करने के लिये कहा है। पिछले सप्ताह आयोग ने दोनों गुटों की शुरूआती दलीलें सुनी थी। इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा टीएमसी का प्रसिद्ध घास-फूल चुनाव चिन्ह, पार्टी का नाम, संगठन, संपत्ति, फंड और कोलकाता स्थित मुख्यालय ‘तृणमूल भवन’ पर नियंत्रण है।
चुनाव चिन्ह उनसे नहीं छीनेगा
उधर ममता बनर्जी ने बागी नेताओं के दावों को खारिज करते हुए विश्वास जताया है कि चुनाव आयोग पार्टी का चुनाव चिन्ह उनसे नहीं छीनेगा। उन्होंने कहा है कि मुझे चुनाव चिन्ह की चिंता नहीं है। मुझे पता है िकवह इसे नहीं छीन पायेंगे। अगर ऐसा करने का प्रयास भी हुआ तो मैं चुनाव चिन्ह गले में लटका कर जनता के बीच जाऊंगी। उन्होंने बागी नेताओं पर भाजपा के इशारे पर पार्टी से विश्वासघात करने का भी आरोप लगाया है।

 

 

 

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