जीवाजी यूनिवर्सिटी की रिव्यू पिटीशन खारिज, 7वें वेतनमान पर हाईकोर्ट की मुहर

ग्वालियर- जीवाजी यूनिवर्सिटी को स्थायी कर्मियों के 7वें वेतनमान मामले में हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने यूनिवर्सिटी की रिव्यू पिटीशन खारिज कर 12 नवंबर 2025 को पारित अपने उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें स्थायी कर्मियों को 7वें वेतन आयोग के अनुरूप संशोधित वेतनमान का लाभ देने के निर्देश दिए गए थे।
जस्टिस आशीष श्रोती की अदालत के समक्ष यूनिवर्सिटी ने तर्क दिया कि याचिका दायर करने वाली कर्मचारी यूनियन मान्यता प्राप्त नहीं है। कोर्ट ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि स्वयं यूनिवर्सिटी ने यूनियन के चुनाव कराने के लिए चुनाव अधिकारी नियुक्त किया था। निर्वाचित पदाधिकारियों को मान्यता दी थी। ऐसे में यूनियन की प्रतिनिधिक क्षमता पर आपत्ति स्वीकार नहीं की जा सकती।
यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा कि स्थायी कर्मियों को 7 अक्टूबर 2016 की नीति के तहत फिक्स वेतन दिया जा रहा है। इस पर अदालत ने लक्ष्मीनारायण मामले में खंडपीठ के फैसले का हवाला देते हुए दोहराया कि स्थायी कर्मियों को पूरे सेवाकाल तक एक निश्चित वेतन पर नहीं रखा जा सकता तथा वे संशोधित न्यूनतम वेतनमान और एरियर के हकदार हैं। सीनियर वकील बीपी सिंह ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों का पक्ष रखा है।

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