सिंधिया स्कूल के बर्खास्त कर्मचारी को हाईकोर्ट नहीं मिली राहत, तंबाकू और गुटखा बेचने के मामले में किया था बर्खास्त
ग्वालियर. द सिंधिया स्कूल परिसर में तम्बाकू और गुटखा बेचने के आरोप में बर्खास्त किये गये कर्मचारी को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट की खंडपीठ में न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहावत की एकलपीठ ने कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया । विभागीय जांच और श्रम न्यायालय केआदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं जिसमें हस्तक्षेप किया जाये। मामला प्रयाग नारायण से जुड़ा है। वष्र 1984 से सिंधिया स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूपमें कार्यरत थे। वर्ष 2012 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि वह स्कूल परिसर (जो एक आवासीय इलाका है, जिसमें छात्रावास व खेल मैदान भी शमिल है) में तम्बाकू, सिगरेट, बीडी और गुटखा जैसे प्रतिबधित उत्पाद बेच रहे थे।
निराशा श्रम न्यायालय से भी मिली
सेवा से हटाये जाने के बाद प्रयाग नारायण ने श्रम न्यायलय में मामला दायर किया था। वहां से आवेदन खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उन्हें उचित सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। विभागीय जांच निष्पक्ष नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा है कि आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराये गये।
कोर्ट ने माना जांच प्रक्रिया सही
दूसरी ओर, स्कूल प्रबंधन ने कोर्ट को बताया कि सेवा नियमों के तहत विधिवत घरेलू जांच की गई थी। प्रबंधन का यह भी कहना था कि कर्मचारी ने अपने जवाब में आरोप स्वीकार किए थे। कोर्ट ने पाया कि श्रम न्यायालय ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद बर्खास्तगी को उचित ठहराया था। ऐसे में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। इस फैसले के साथ ही कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी गई है।

