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परमाणु प्लांट तक पहुंची इजरायल की बमबारी, बढ़ा रेडिएशन का खतरा

नई दिल्ली. 21 मार्च 2026 को ईरान के खूजिस्तान प्रांत में देजफुल शहर के पास वाहदाती एयरबेस (4) पर जबरदस्त बमबारी हुई है। अमेरिका और इजरायल प्रेसीजन मिसाइलों ने बेस के गोला बारूद के बंकरों को निशाना बनाया है। हमले के बाद बंकरों में स्टोर किये गये हथियार स्वयं फटने लगे। सेकेंडरी एक्सप्लोजन की चेन रिएक्शन शुरू हो गयी है। आसमान में मशरूम क्लाउड उठा और आग की लपहेंट कई किमी दूर से दिखाई दी। स्थानीय लोगों ने मोबाइल व वीडियों बनाया है। जिससे धमाकों की आवाज, पक्षियों की चहचहाहट औरे लगातार रंबलिंग शॉकबेव सुनाई दे रही थी। यह बेस 1980 से ईरान के पुरान एफ-5 टाइगर ।। फायटर जेट्स का घर था।
डिमोना पर हमला अब इजरायल परमाणु प्लांट निशाने पर
इजरायल के डिमोना न्यूक्लीयर रिसर्च सेंटर पर भी हमला हुआ है। यह इजरायल का मुख्य परमाणु रिएक्टर है। जहां परमाणु हथियार से जुडी रिसर्च होती है। ईरान की ओर से मिसाइल या ड्रोन हमला बताया जा रहा है। हमले से रेडिएशन लीक होने का खतरा है। डिमोना पहले भी ईरान के टारगेट पर रहा है। लेकिन इस बार भी यह सीधे हिट हुआ। इजरायल ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया । स्थानीय रिपोर्ट्स में धुएं और आग की खबरें आ रही है।
न्यूक्लियर कितना है खबरनाक
परमाणु प्लांट्स पर बमबारी से रेडियेशन लीका का बहुत ही बड़ा खबरा पैदा हो गया हे। डिमोना और ईरान के प्लांट्स में यूरेनियम और प्लूटोनियम स्टॉक है। अगर रेडिएशन फैला तो आसपास के इलाकों में लोग बीमार हो सकते है। मिट्टी और पानी प्रदूषित हो सकता है। लेकिन अभी तक कोई न्यूक्लियर बम या न्यूक्लियर वेपन का उपयोग नहीं हुआ है।
ईरान के परमाणु सुविधाओं पर हर हमला
ईरान जंग के 22 दिन में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर सेंटर्स पर कई हमले किए…
नतांज – यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट. मार्च 2026 में पांचवीं बार हमला हुआ. सेंट्रीफ्यूज मशीनें तबाह. एंट्रेंस ब्लॉक हो गया है।
फोर्डो – पहाड़ के नीचे अंडरग्राउंड प्लांट. हाई-लेवल यूरेनियम एनरिचमेंट होता था. बंकर बस्टर बम से हमला, लेकिन कुछ हिस्से बच गए है।
इस्फहान – यूरेनियम कन्वर्जन और फ्यूल फैब्रिकेशन सेंटर. 40 साल पुराना. हमलों से मेटल प्रोडक्शन यूनिट नष्ट.
पारचिन – मिलिट्री कॉम्प्लेक्स, टेलघान-2 साइट पर न्यूक्लियर हथियार टेस्टिंग. क्लस्टर मुनिशन से हमला, एक्सप्लोसिव टेस्टिंग लैब्स तबाह.
मिन्जादेही – तेहरान के पास अंडरग्राउंड साइट. न्यूक्लियर वेपन कंपोनेंट डेवलपमेंट पूरी तरह नष्ट. ये सभी साइट्स पर बंकर बस्टर और प्रेसीजन मिसाइलों से हमले हुए. कई टॉप न्यूक्लियर वैज्ञानिक भी मारे गए.
महायुद्ध की तस्वीर क्यों डरावनी लग रही है
देजफुल और डिमोना के हमले से युद्ध की भयावह तस्वीर साफ हो गई है. पहले सिर्फ मिलिट्री बेस टारगेट थे, अब तेल हार्टलैंड और परमाणु साइट्स निशाने पर हैं. ईरान का खूजिस्तान तेल प्रांत है जहां से 90% तेल निकलता है. हमले के बाद एम्यूनिशन डिपो खुद फटने लगा है।
इजरायल के डिफेंस मिनिस्टर ने अंडरग्राउंड बंकर से कहा स्ट्राइक्स सिग्निफिकेंटली बढ़ाए जाएंगे. 48 घंटे का अल्टीमेटम चल रहा है. नतांज पर पांचवां हमला हो चुका है।  ये सब देखकर दुनिया डर गई है कि कहीं पारंपरिक युद्ध न्यूक्लियर वॉर तक न पहुंच जाए ।

 

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लारिजानी की मौत के बाद ईरान को 2 बड़े नुकसान मारे गये IRGC के प्रमुख जनरल इस्माइल अहमदी -प्रवक्ता मोहम्मद नैनी

नई दिल्ली. इजरायल के ताजा हमले में ईरान को 2 बड़े झटके लगे है। ईरान ने बताया है कि इजरायली हवाई हमले में इस्लामिक रिव्यूलेशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी और दूसरे हमले में ईरान के बासिज फोर्स के खुफिया प्रमुख जनरल इस्माइल अहमदी की मौत हो गयी है। इजरायल के ताजा हमले में ईरान को एक और बड़ा नुकसान हुआ है। ईरान ने कहा है कि इजराइली हवाई हमले में इस्लास्मिक रिव्यूलेश्नरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी की मौत हो गयी है। ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता और जनसंपर्क के उप-प्रमुख थे।
उन्हें जुलाई 2024 में IRGC  के कमाण्डर इन चीन हुसैन सलामी ने इस पद पर नियुक्त किया गया था। 1957 में जन्मे नैनी ईरान-इराक युद्ध के अनुभवी सैनिक थे। इस युद्ध के दौरान यह जख्मी भी हुए थे। नैनी के पास उनके सेकेंण्ड ब्रिगेडियर जनरल का पद था। नैनी अक्सर आईआरजीसी की तरफ से बयान जारी करते थे। जिनमें ईरान की सैन्य तत्परता, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं के संबंध में चेतावनियां होती थी।
17 मार्च को अली लारिजानी मारे गए
इससे पहले इजरायल के हमले में ईरान के डी फैक्टो लीडर अली लारिजानी की 17 मार्च 2026 को मौत हो गई थी।  यह हमला रात में हुआ था जब वे अपनी बेटी के घर पर थे. इस हमले में उनके बेटे, कुछ अंगरक्षक और अन्य साथी भी मारे गए।  लारिजानी को खामेनेई की मौत के बाद ईरान का अस्थायी प्रमुख माना जा रहा था।  उनकी मौत ने ईरान के नेतृत्व में बड़ा संकट पैदा किया है।

 

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हीलियम संकट से दुनिया में आया संकट, कतर पर ईरानी हमले से पूरी टेक इंडस्ट्री लाइफ सपोर्ट पर

नई दिल्ली. ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध में अब एक नया मोड़ आ गया है। ईरान ने कतर के सबसे बड़े गैस प्लां टरास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल और ड्रोन हमला कर दिया है। यह प्लांट दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) प्लांट है। हमले से प्लांट में आग लग गयी और भारी नुकसान हुआ है। कतर एनर्जी के सीईओ ने बताया है कि प्लांट की 17 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही है। फिलहाल 3-5 वर्ष तक के लिये बन्दर रहेगी। इसे ठीक करने में इतना वक्त लगेगा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हीलियम गैस का उत्पादन भी रूक गया है। कतर दुनिया का 33प्रतिशत हीलियम सप्लाई करता था। अब पूरी दुनिया का एक तिहाई हीलियम एक रात में गायब हो गया।
क्या है हीलियम और क्यों है जरूरी
ळीलियम एक बहुत हल्की और ठंडी गैस है यह चिप फैक्ट्री (सेमीकंडक्टर) में मशीनों को ठंडा रखने के लिये, एमआरआई मशीन में, रॉकेट फ्यूल औरकई इंडस्ट्री में उपयोग लाई जाती है। इसके कोई सस्ता विकल्प नहीं है। अब सप्लाई बन्द होने से कीमतें दुगुनी हो गयी है। कई देशों में संकट शुरू हो गया है।

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IRGC ने एफ-35 मार गिराया, वीडियो भी जारी किया

तेल अवीव. मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध के बीच इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड से जुडे प्रोसेसिंग प्लांट पर हमला इजराइल ने अकेले ही किया था। इसमें अमेरिका शामिल नहीं था। नेतन्याहू ने गुरूवार की देर रात पत्रकारों से चर्चा कर बताया है कि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल से ऐसे हमलों को फिलहाल रोकने के लिये कहा है। इजराइल इस पर अमल कर रहा है। नेतन्याहू ने कहा है कि ट्रम्प ने हमसे भविष्य में ऐसे हमले रोकने के लिये कहा है हम फिलहाल रूके हुए हैं।
युद्ध के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स (आईआरजीसी) ने कहा है कि उसने अमेरिकी एफ-35 फायटर जेट पर हमला कर उसे नुकसान पहुंचाया है। आईआरजीसी ने इस हमले का वीडियो भी जारी किया है। जिसमें जेट को निशाना बनाते हुए दिखाया गया है। हालांकि इस वीडियो की पुष्टि नहीं हो पायी है। एफ-35 दुनिया के सबसे एडवांस फायटर जेट में गिना जाता है। इसकी कीमत 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा होती है।

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युद्ध जारी है ईरान ने यूएई और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को फिर से किया टारगेट

Iran new attacks

नई दिल्ली. ईरान ने शनिवार को युद्ध के 49वें दौर में ऑपरेशन टू प्रॉमिस-4 शुरू किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भारी मिसाइलों और ड्रोन से संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और कुवैत में 3 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अटैक किया है। इससे पहले दिन में 47वें और 48वें दौेर में ईरान ने इजरायली ठिकानों और क्षेत्र के अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया हे। ईरान का कहना है कि यह जवाबी हमले अमेरिका-इजरायल के लगातार हमलों के खिलाफ है।
खार्ग द्वीप पर अमेरिका का हमला-90 से अधिक सैन्य ठिकाने तबाह
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग द्वीप पर बड़े पैमाने पर हमले किये हैं। द्वीप पर 90 से अधिक सैन्य ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया है। इनमें नेवल माइन स्टोरेज, मिसाइल बंकर और कई अन्य सैन्य सुविधायें पूरी तरह नष्ट हो गयी है। लेकिन तेल संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर को जानबूझ कर बचाया गया। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया है कि खार्ग द्वीप पर स्थिति अब नियंत्रण में है। हमले के तुरंत बाद द्वीप की एयर डिफेंस सिस्टम फिर शुरू कर दी गयी। हमलावर अपने मकसद में असफल रहे।
इजरायल ने 2 सीनियर ईरानी अधिकारियों को मार गिराया
इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने बताया है कि तेहरान पर हवाई हमले में खातम अल-अनबिया इमरजेंसी कमांड के 2 वरिष्ठ अधिकारी अब्दोल्लाह जलाली-नासब और अमीर शरीअत मारे गये। इजरायल ने पिछले 24 घंटों में ईरान के पश्चिमी और मध्यभाग में 200 से अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर साइटों पर हमले किये। इनमें दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर (कुछ तो लोडेड और फायर करने के लिये तैयार थे)। एयर डिफेंस सिस्टम, लांच पैड और हथियार स्टोरेज सुविधायें शामिल थी। इजराइल का कहना है कि यह हमले ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करने के लिये किये गये है।
युद्ध का पूरा ताजा अपडेट और स्थिति
इस युद्ध में अब ईरान लगातार जवाबी हमले कर रहा है। जबकि अमेरिका और इजरायल सैन्य ठिकानों पर फोकस्ड स्ट्राइक्स जारी रखे हुए है।  खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले के बावजूद ईरान ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस फिर सक्रिय हो गई है। दोनों तरफ से सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन इस्तेमाल हो रहे है।  सऊदी अरब और UAE जैसे खाड़ी देश भी अब सीधे प्रभावित हो रहे है।  स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है और दोनों पक्ष आगे के हमलों की तैयारी में लगे है।  तेल कीमतें बढ़ रही हैं और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है।

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तालिबान ने पाकिस्तान के नाम जारी किया डेथ वारंट, करांची, इस्लामाबाद और क्वेटा को दहलाने की धमकी

नई दिल्ली. अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव अब आर-पार की जंग में तब्दील होता हुआ दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान द्वारा की गयी एयरस्ट्राइक के बाद अब तालिबान के एक सीनियर अधिकारी ने पाकिस्तान के प्रमुख शहरों पर हमले की धमकी दी है। यह चेतावनी कथित तोर पर अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों के बाद सामने आयी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत के तालिबान गवर्नर के प्रवक्ता हाजी जाहिद ने बताया है कि यदि पाकिस्तान की तरफ से ऐसे हमले जारी रहते हैं तो पाकिसतान के बड़े शहरों को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से इस्लामाबाद, करांची और क्वेटा का उल्लेख किया है। यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किये है। इन हमलों में राजधानी काबुल और कंधार समेत कुछ अन्य इलाकों को भी निशाना बनाये जाने की खबरें आ रही है।

 

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युद्ध के बीच अमेरिका का रीफ्यूलिंग प्लेन क्रैश, प्लेन में 5 क्रू मेम्बर थे सवार

नई दिल्ली. अमेरिकी सेना का एक रिफ्यूलिंग विमान इराक में क्रैश हो गया, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसकी ने बताया है कि ईरान में जारी जंग के दौरान उनका केसी-135 रिफ्यूलिंग विमान क्रैश हो गया है। इस विमान में 5 क्रू मेम्बर सवार थे।
सेना ने बयान में कहा है कि कुल 2 विमान थे। जिसमें एक विमान की सुरक्षित लैंडिंग हुई जबकि दूसरा विमान क्रैश हो गया। सेना ने कहा है कि यह हादसा ना तो दुश्मन की गोलीबारी से हुआ और न ही फ्रेंडली फायर की वजह से। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। जांच की जा रही है। बयान में कहा गया है कि घटना ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान फ्रेंडली हवाई इलाके में हुई है। बचाच अभियान जारी है। यह ऑपरेशन ईरान को निशाना बनाने वाली अमेरिकी सैन्य कार्यवाही का पार्ट है।
आपको बता दें कि अमेरिका का यह केसी-135 विमान लम्बी दूरी के अभियानों के दौरान लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य विमानों में हवा में ही फ्यूल भरने के लिये उपयोग किया जाता था। हाल के दिनो ंमें अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ मध्यपूर्व में बड़ी संख्या में अपने विमान तैनात किये है। यह ऑपरेशन 28 फरवरी को उस वक्त शुरू हुआ। जब अमेरिकी और इजरायली बलों ने ईरानी ठिकानों पर हमले किये थे। इसके बाद यह जंग एक व्यापक क्षेत्री सैन्य ऑपरेशन में तब्दील हो गयी।
विमान दुर्घटना ऐसे वक्त हुई है जब इस संघर्ष में हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हमलों की शुरूआत के बाद से अभी तक 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध में लगभग 150 अमेरिकी सैनिक घायल भी हुए है।

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भारत आने में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कितने दिन लगते हैं ड्रोन और मिसाइलों से इन्हें कौन बचायेगा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल के जहाजों और टैंकरों को ईरानी नौसेना सुरक्षा मुहैया कराती है. (Photo: Getty)

नई दिल्ली. भारत के लिये तेल और गैस का बड़ा हिस्सा अभी पारस की खाड़ी (पर्सियन गल्फ) से लाया जाता है। यह सब जहा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकरे समुद्र के रास्ते से निकलते है। अगर कोई तेल टैंकर या भारतीय जहा इस स्ट्रेट से निकलते हुए गुजरात के कांडला बंदरगाह या मुंबई पहुंचना चाहे तो कितना समय लगेगा? कितनी दूरी है? और सबसे आवश्यक है मिसाइल -ड्रोन हमलों के बीच यह जहाज सुरक्षित कैसे आयेंगे।

Strait of Hormuz India oil tanker route
कितनी दूरी और कितना समय लगेगा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर निकलने के बाद गुजरात के कांडला बन्दरगाह तक करीब -करीब 1000किमी की दूरी है। मुंबई तक यह दूरी लगभग 1450-1560 किमी तक है। तेल टैंकर आमतोर पर 24-31 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चलते है। औसत गति 27.78 किमी प्रतिघंटा माने तो कांडला पहुंचने में करीब 37 घंटे यानी डेढ़ दिन लगेंगे। मुंबई पहुंचने में लगभग 53 घंटे दिन यानी 2 दिन से अधिक ज्यादा वक्त लग सकता है। दरअसल, में मौसम, लोड और रूट के हिसाब से यह समय 2-3 दिन तक हो सकता है। यह जहाज बहुत भारी होते हैं। इसलिये तेज नहीं चलते, लेकिन लगातार चलते रहते हैं।

Strait of Hormuz India oil tanker route
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का यातायात कौन कंट्रोल करता है
यह स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच है। इसका सबसे संकरा हिस्सा सिर्फ 21-33 किमी चौड़ा है। यातायात को अंर्तराष्ट्रीय समुद्री कानून और इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गनाईजेशन के ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम के तहत काबू किया जाता है। लेकिन असल में ईरान की नौसेना और इस्लामिक रिलॉवशनरी गार्ड कॉर्प (आईआरजीसी) इस इलाके पर मजबूत पकड़ रखती है। ओमान दक्षिणी हिस्से को देखता है। अमेरिका की फिफ्थ फलीट भी यहां सुरक्षा के लिये तैनात रहती है। सामान्य दिनों में हर दिन 80-130 जहाज गुजरते हैं। लेकिन तनाव के समय ईरान इसे ब्लॉकक र सकता है।

Strait of Hormuz India oil tanker route
भारतीय जहाजों को कौन सुरक्षित ले जायेगा
भारत सरकार और भारतीय नौसेना इस वक्त बहुत सतर्क है। 28-36 भारतीय झंडे वाले जहाज (जिनमें तेल और एलएनजी टैंकर शामिल) अभी फारस की खाड़ी में फंसे हुए है। सरकार ने कहा है कि भारतीय नोसेना युद्धपोत भेजकर इन जहाजों को एस्कॉर्ट दे सकती है।
पहले भी ऑपरेशन संकल्प के तहत नौसेना ने भारतीय जहाजों की सुरक्षा की थी। अभ्भी भी उच्चस्तर पर चर्चा चल रही है कि नौसेना के जहाज टैंकरों के साथ चलेंगे। उन्हें स्ट्रेट से बाहर निकालेंगे। 778 भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिये 24 घंटे कंट्रोल रूम काम कर रहा है।
भारत ऊर्जा का सुरक्षा का रास्ता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत के जीवन रेखा है। यहां से तेल न आया तो पेट्रोल के दाम बढ़ेंगे। अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। सरकार, नौसेना और शिपिंग कम्पनियां मिलकर काम कर रही है। आम नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। जहाजों को सुरक्षा के पूरे इंतजाम हो रहे हैै। अगर स्थिति और बिगड़ी तो वैकल्पिक रूट जैसे चाबहार बन्दरगाह का उपयोग बढ़ाया जा सकता है। लेकिन फिलहाल नौसेना का एस्कॉर्ट सबसे बड़ास भरोसा है।
मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचते हुए भारत कैसे पहुंचेंगे?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खतरा मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से है. ईरान ने चेतावनी दी है कि दुश्मन देशों के जहाज पर हमला होगा. बचने के मुख्य तरीके ये हैं…
नौसेना का एस्कॉर्ट: भारतीय नौसेना या अमेरिकी युद्धपोत आगे-पीछे चलेंगे, ड्रोन और मिसाइल को मार गिराएंगे.
ओमान की तरफ रूट: जहाज जितना हो सके ओमान के पानी में रहकर चलेंगे जहां ईरानी खतरा कम है.
न्यूट्रल सिग्नल: कुछ जहाज अपना मालिक देश (जैसे चीन या तुर्की) दिखाकर गुजर गए. लेकिन भारतीय जहाजों के लिए नौसेना एस्कॉर्ट सबसे सुरक्षित है.
तेज निगरानी: रडार और हवाई कवर से हमलों का पता लगाकर जवाब दिया जाता है.

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सीरिया-इराक से लेकर सऊदी -यूएई -कतर तक कितनी गयी जानें

नई दिल्ली. अमेरिका और ईरानके बीच सीधा युद्ध 6 दिन में पहुंच रहा है। शुरूआत में हुए संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनई की मौत की खबर के बाद हालात और ज्यादा खराब हो गयी है।इसकेबाद दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले तेज होगये है। ईरान ने जवाबी कार्यवाही करते हुए इजरायल के शहरों जैसे तेल अवीव और यरूशलम को निशाना बनाया है। उसने कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और कुछ नागरिक ठिकानों पर भी हमले किये है। इससे पूरा इलाका तनाव में है।
यह संघर्ष अब सिर्फ मध्यपूर्व तक सीमित नहीं है। ऐसी खबर है कि श्रीलंका के पास हिन्द महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया है। इससे यह साफ हो गया है कि युद्ध का प्रभाव दूर-दूर तक फैल रहा है।
बहरीन में मिसाइल को रोकने की कार्रवाई के बाद सलमान इंडस्ट्रियल सिटी में आग लग गई, जिसमें एक शख्स की मौत हो गई. यह जानकारी बहरीन के गृह मंत्रालय ने दी ।
कुवैत में ईरानी हमलों में तीन लोगों की जान गई है। इनमें दो कुवैती सैनिक शामिल है। यह जानकारी कुवैत के स्वास्थ्य और विदेश मंत्रालय ने दी है।
ओमान के तट के पास मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले उत्पाद टैंकर एमकेडी व्योम पर एक प्रोजेक्टाइल गिरने से एक शख्स की मौत हो गई है।
संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने तीन लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार कुवैत में एक सैन्य सुविधा पर हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए है।
सीरिया के दक्षिणी शहर स्वेइदा में एक इमारत पर ईरानी मिसाइल गिरने से 4  लोगों की मौत हुई, यह जानकारी सरकारी समाचार एजेंसी साना ने दी है।
इराक के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक वहां कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है। इनमें 11 मिलिशिया सदस्य, एक सेना का जवान और एक आम नागरिक शामिल है।
इन आंकड़ों से साफ है कि यह संघर्ष सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है।  खाड़ी देशों और आसपास के इलाकों में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।  बढ़ती मौतों और हमलों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और डर का माहौल बना दिया है।
ईरान ने सबसे ज्यादा नुकसान होने की बात कही है. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 1230 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 175 स्कूली छात्राएं और स्कूल स्टाफ भी शामिल हैं, जिनकी मौत युद्ध के पहले दिन दक्षिणी शहर मिनाब के एक प्राथमिक स्कूल पर मिसाइल हमले में हुई. यह जानकारी ईरान की मानवीय संस्था ईरानी रेड क्रेसेंट सोसाइटी ने दी है. यह साफ नहीं है कि कुल मृतकों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सैनिक भी शामिल हैं या नहीं है।
इजरायल में अब तक 10 नागरिकों की मौत की पुष्टि की गई है. इनमें से नौ लोगों की मौत 1 मार्च को यरूशलम के पास बीट शेमेश में ईरानी मिसाइल हमले में हुई. यह जानकारी इजरायल की एंबुलेंस सेवा मागेन डेविड एडोम ने दी है. इजरायली रक्षा बलों ने अब तक किसी सैन्य हताहत की पुष्टि नहीं की है।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इजरायली हमलों में वहां 77 लोग मारे गए है।

 

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इजराइल-अमेरिका हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गये, खामेनेई के बेटी-दमाद और पौती की भी मौत

नई दिल्ली. ट्रम्प और इजराइल के दावे के बाद अब ईरान की सेना, सरकारी न्यूज एजेंसी और मुख्य समाचार चैनल प्रेस टीवी ने आधिकारिक तौर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि कर दी है। जिस वक्त यह हमला किया गया, उसी समय खामेनेई अपने कार्यालय में मौजूद थे। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड क्रॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अपने बयान में इमाम खामेनेई की शहादत पर शोक व्यक्त करते हुए। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। संगठन ने उनकी मौत को सम्मानित शहादत बताते हुए कहा है कि उनका रास्ता जारी रहेगा। बयान में अमेरिका और जायोनी शासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ी कार्यवाही और बदले की चेतावनी दी गयी है। जनता से राष्ट्रीय एकता और मजबूती दिखाने की अपील की गयी है।
इससे पहले प्रेस टीवी ने लिखा है कि इस्लामिक क्रांति के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अमेरिका और इजरायल द्वारा कियेगये संयुक्त हवाई हमलों में मारे गये है। खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन के सार्वजनिक शोक की घोषणा की गयी है।
खामेनेई की बेटी-दामाद, पोता और बहू की मौत
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स ने कन्फर्म किया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर के परिवार के कई सदस्य मारे गए हैं। इनमें उनकी बेटी, दामाद, पोता और बहू शामिल हैं।