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अरबों की जमीन के दस्तावेजों स्याही फैलाकर तथ्य छिपाये, जलाश्य की जमीन को बनाया निजी, रिकॉर्ड में छेड़छाड पर लोकायुक्त की कार्यवाही

ग्वालियर. अरबों रूपये की जमीन से जुड़़े प्रकरणों में लोकायुक्त पुलिस की जांच तेज हो गयी है। गुरूवार को विशेष सत्र न्यायालय में पेश स्टेट्स रिपोट्र में लोकायुक्त पुलिस ने बताया है कि प्रकरण वर्ष 2025 में दर्ज किया जा चुका है। लेकिन अभी तक कलेक्टर ऑफिस से मांगी गयी तथ्यात्मक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई। इस पर न्यायालय ने कलेक्टर 24 अप्रैल को प्रतिवेदन के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिये है। मामला ललितपुर मौजे में कुलदीप नर्सर के पास स्थित जमीन का है। जो पहले नहर, बाग, सड़क और पुल जैसी सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में दर्ज थी। आरोप है कि बाद में इसमेंबदलाव कर इसे निजी और आवासीय उपयोग में परिवर्तित कर दिया गया है। लोकायुक्त पुलिस ने बताया है कि कलेक्टर ग्वालियर से 12 अगस्त 2025, 8 नवंबर 2025, और 8 फरवरी 2026 को रिपोर्ट मांगी गयी ।लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। इसके बाद कलेक्टर की पेशी तय की गय है। जिससे प्रशासनिक हलको मंें हलचल मच गयी है।


स्याही फैलाकर तथ्य छिपाया रिकॉर्ड में की कांटछांट
जांच के बीच पुराने राजस्व रिकॉर्ड खंगाले गये, जिसमें खसरों में कांटछांट और कूटरचना के संकेत मिल है। कुछ जगह स्याही फैलाकर मूल त्थ्यों को मिटाने का प्रयास भी सामने आया है। अहम बात यह है कि शासन स्वयं भी इस जमीन को अपनी बतो हुए सिविल कोर्ट में केस लड़ रहा है।
शिकायत के बाद बढ़ा मामला, 2005 में बदला गया लैंड यूज
इस मामले की शिकायत कैलाश अग्रवाल ने की थी। उन्होंने जमीन को खुर्दबुर्द करने का आरोप लगाया था। शुरुआती स्तर पर बयान तो दर्ज हुए, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी, जिसके चलते मामला जिला न्यायालय तक पहुंच गया।
मास्टर प्लान 2005 में इस जमीन का लैंड यूज जलाशय से बदलकर आवासीय कर दिया गया। रिकॉर्ड के अनुसार यहां 30 मीटर चौड़ी नहर थी, जो समय के साथ नाले में बदली और अब मौके से पूरी तरह गायब है। 2011 में सामने आई कूटरचना तत्कालीन तहसीलदार आरके पांडे ने 2011 में पुराने रिकॉर्ड का मिलान किया, जिसमें गड़बड़ी सामने आई। इसके आधार पर कुछ सर्वे नंबरों की जमीन को शासकीय घोषित किया गया। हालांकि मामला अब सिविल न्यायालय में लंबित है और मालिकाना हक का अंतिम फैसला आना बाकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि जमीन के मालिकाना हक का विवाद कोर्ट में लंबित होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा निर्माण की अनुमतियां जारी कर दी गईं।

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म्यूल एकाउंट गैंग का क्राइम ब्रांच ने किया खुलासा, इंस्टाग्राम पर चल रहा था एकाउंटों का व्यापार

ग्वालियर. बढ़ते सायबर अपराधों के दौरान क्राइम ब्रांच पुलिस ने म्यूल एकाउंट नेटवर्क का बड़ा पर्दाफाश किया है। कार्यवाही में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। जो सायबर ठगी के लिये बैंक खातों की सप्लाई और लेन-देन में सक्रिय था। पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान मुकेश गुर्जर 26, निवासी नाका चंद्रवदनी, गली नम्बर 5 के रूप में हुई है। सूचना मिली थी वह म्यूल खातों के माध्यम से साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने का कार्य करता है।
पुलिस ने आरोपी का मोबाइल जब्त कर जांच की, जिसमें व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर बैंक खातों की खरीद-फरोख्त और ठगी के पैसों के लेन-लेन से जुड़े चैट मिले है। पुलिस ने मोबाइल का पंचनामा तैयार किया है। सूचना के आधार पर इस्पेक्टर धर्मेन्द्रसिंह कुशवाह के नेतृत्व में टीम ने आरोपी के घर पर दविश दी। उसे हिरासत में लेकर अपराधा शाखा थाने लाया गया और यहां पूछताछ में आरोपी ने महत्वपूर्ण खुलासे किये है।
खाते में ठगी का ट्रांजेक्शन, कई राज्यों के साइबर फ्रॉड से जुड़ा कनेक्शन
मुकेश ने बताया कि उसने अपने केनरा बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक के खाते करीब एक साल पहले प्रिंस लोधी नामक युवक को दे दिए थे। इसके अलावा उसने अन्य लोगों के बैंक खाते भी उसी को उपलब्ध कराए थे। जांच में सामने आया कि आरोपी का केनरा बैंक खाता राजस्थान, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में दर्ज साइबर ठगी के मामलों से जुड़ा हुआ है। इससे साफ है कि वह ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश शुरू कर दी है। साथ ही मनी ट्रेल को लेकर पूछताछ जारी है, हालांकि आरोपी फिलहाल ज्यादा जानकारी देने से बच रहा है।

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BJP नेता द्वारा बाउंड्रीवॉल तोड़ने पर विवाद ने लिया हिसक रूप लिया, मारपीट करने FIR दर्ज

ग्वालियर. कॉलोनी निर्माण को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक बीजेपी नेता पर साथियों के साथ पहुंचकर जेसीबी से बाउंड्रीवॉल तुड़वाने और मारपीट करने का आरोप लगाने के बाद जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है। इस पूरी वारदात ने कॉलोनी में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गयी है।
फरियादी विजय अग्रवाल 40, निवासी गणपति बिहार कॉलोनी, तानसेन रोड़ हजीरा ने अपने साथियों के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया है कि उनकी पत्नी वर्षा अग्रवाल और सहयोगी अनिल शिवहरे ने गिरवाई थाना इलाके गोकुलपर गांव के सामने एबी रोड किनारे लगभग 7 बीघा जमीन खरीदी है। जहां वैधानिक अनुमति के साथ कॉलोनी विकसित की जा रही है।
शिकायत के अनुसार 8 अप्रैल 20269 की सुबह लगभग 8 बजे पड़ोसी जमीन मालिक और भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य किशन मुदगल, जितेन्द्र मुदगल और राधारमन शर्मा कई लोगों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। आरोप है कि सभी हथियार लेकर आये थे। गाली-गलोज करते हुए जेसीबी मशीन से कॉलोनी की बाउंड्रीवॉल तोड़ना शुरू कर दिया है।
क्या है मामला
ग्वालियर में जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। कॉलोनी निर्माण को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक भाजपा नेता पर साथियों के साथ पहुंचकर जेसीबी से बाउंड्रीवाल तुड़वाने और मारपीट करने का आरोप लगा है। पूरी घटना कॉलोनी में लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है। फरियादी विजय अग्रवाल (49) निवासी गणपति विहार कॉलोनी, तानसेन रोड हजीरा ने अपने साथियों के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी वर्षा अग्रवाल और सहयोगी अनिल शिवहरे ने गिरवाई थाना क्षेत्र के गोकुलपुर गांव के सामने AB  रोड किनारे करीब 7 बीघा जमीन खरीदी है, जहां वैधानिक अनुमति के साथ कॉलोनी विकसित की जा रही है।
जेसीबी से तोड़ी दीवार
शिकायत के मुताबिक 8 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 9 बजे पड़ोसी जमीन मालिक और भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य किशन मुदगल, जितेंद्र मुद्गल और राधारमन शर्मा कई लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप है कि सभी हथियार लेकर आए थे और गाली-गलौज करते हुए जेसीबी मशीन से कॉलोनी की पक्की बाउंड्रीवाल तोड़ना शुरू कर दिया।

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वीरपुर बांध पर 7 महीने में 5 मौत, साल भर में पिकनिक नहीं बन पाने से आवंटित राशि अटकने का भी संदेह

ग्वालियर. शहर के बीचों बीच बना वीरपुर बांध को पिकनिक स्पॉट के रूप डवलप करने की प्लानिंग की गयी थी। लेकिन हकीकत में हालात इसके विपरीत है। एक साल पहले शासन ने 5 करोड़ रूपये से ज्यादा की राशि स्वीकृत की थी। मगर अभी तक पिकनिक स्पॉर्ट के काम शुरू नहीं हो पाये है। इसके साथ ही सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम तार फेंसिंग और जाली नहीं लगने से बांध अब सुसाइड स्पॉट बन चुका है। पिछले लगभग 7 माह में 5 लोग आत्महत्या कर चुके है। स्थिति चिंताजनक है इसलिये है क्योंकि मुख्य मार्ग पर स्थित इस बांध पर कोई निगरानी या सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। यहां तक कि नवजात शिशुओं को फेंकने जैसी घटनाये भी हो चुकी है। काम नहीं होने से स्वीकृत 5 करोड़ रूपये की राशि के अटकने की आशंका है।
जल्द फेंसिंग करायेंगे-सहायक यंत्री
निगम के सहायक यंत्री अमित गुप्ता ने बताया है कि बांध को पिकनिक स्पॉर्ट के रूप में डवलप करने के लिये 5 करोड़ रूपये का बजट मिला था। सड़क की तरफ से तार फेंसिंग व जाली लगाने का काम कराया जायेगा। यह काम पूर्व में हुए ठेके पर नहीं था।
सड़क किनारे और तार फेसिंग भी नहीं
कर्ज के दबाव में दी जान: वीरपुर बांध में 9 अप्रैल को शैलेंद्र सिंह सिकरवार निवासी इमली नाका का शव मिला था। मृतक युवक के पत्नी व बच्चे को घर में सोता हुआ छोड़कर तड़के लगभग 3 बजे निकला था। सुसाइड नोट में उसने सट्टे में हारने के कारण कर्जदारों द्वारा परेशान किए जाना भी लिखा था।
नशे की लत में मौत: 3 सितंबर 2025 जसवीर जाटव निवासी कचरा फैक्ट्री श्मशान के पास का शव मिला था। जसवीर मृतक नशे का आदी था।
बांध में मिला शव, नशे की शंका : बांध में सूरज कुशवाहनिवासी कचरा फैक्ट्री श्मशान के पास का शव 12 फरवरी को मिला था। पुलिस के अनुसार मृतक नशे का आदी था। ।
परिजनों ने बचाई जान : इमली नाका क्षेत्र से विगत सप्ताह एक वृद्वा अपने घर में विवाद के बाद चुपके से खुदकुशी के लिए वीरपुर बांध की ओर निकल गई थी। वृद्वा को घर में न देख उसके परिजन पीछे भागे अौर वृद्वा को वीरपुर बांध के पास ही पकड़ लिया था।
दो नवजात भी फैंके : बांध में अक्टूबर व फरवरी माह में पुलिस को दो नवजात के शव भी मिले। इनको किसने फेंका इसकी भी पुलिस जांच कर रही है।
बांध में खुदकुशी की घटनाएं बढ़ी, गश्त भी बढ़ाया गया
बांध में खुदकुशी के मामले सामने आए हैं। बांध पर गश्ती दल को बढ़ाया है। इस क्षेत्र में नशा करने वालों पर कार्रवाई करेंगे।
सुरेंद्र नाथ सिंह, थाना प्रभारी
काम क्यों रुका
इस बार अच्छी बारिश होने से बांध ज्यादा पानी आया। इस कारण काम नहीं हुआ।

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MPRDC के शट डाउन के कारण 24 अप्रैल को कई क्षेत्रों में जलापूर्ति रहेगी बाधित

ग्वालियर – मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम, ग्वालियर द्वारा जेएएच के 1000 बिस्तर अस्पताल के मध्य अंडरपास निर्माण कार्य किया जा रहा है। उक्त निर्माण कार्य के दौरान बाधा बन रही जलापूर्ति लाइनों को शिफ्ट करने का कार्य मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा प्रगति पर है।
सहायक यंत्री महेंद्रप्रसाद अग्रवाल ने बताया कि जेएएच 1000 बिस्तर अस्पताल के मध्य अंडरपास का निर्माण कार्य किया जा रहा है अंडरपास निर्माण कार्य के मध्य आ रही वाटर लाइनों को शिफ्ट करने का कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम ग्वालियर के द्वारा किया जा रहा है। शिफ्टिंग में बिछाई गई नई लाइनों का मिलान पुरानी एक्जिस्टिंग लाइन से किए जाने हेतु प्रबंधक मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम ग्वालियर द्वारा अपने पत्र 23 से 24 अप्रैल तक एक्जिस्टिंग सप्लाई लाइन को बंद करने की मांग की गई है। इस कारण एक्जिस्टिंग वाटर लाइन बंद करने से क्षेत्रों जैसे नेहरू पार्क कंपू, नयाबजार, लोहिया बाजार, रॉक्सी पुल, लक्कड़खाना रोड तवल पुल के पास, ईदगाह कंपू, जवाहर कॉलोनी लोहिया बाजार, जिंसी नाला नंबर 01 एवं 02, निम्बालकर की गोठ नंबर 01, टापू मोहल्ला, कैलादेवी कॉलोनी ,महावीर कॉलोनी, अवाडपुरा, किरार कॉलोनी, माणिक की गोठ इत्यादि क्षेत्रों में 24 अप्रैल को जलप्रदाय बाधित रहेगा।

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ST के रामलाल रौतेल, SC के आयोग के अध्यक्ष कैलाश जाटव, CM की स्वीकृति के बाद आदेश जारी, बाल और महिला आयोग के अध्यक्षों के नाम भी तय

भोपाल. मप्र अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के नामों का ऐलान कर दिया गया है। पूर्व विधायक कैलाश जाटव को अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं अनुसूचित जनजाति का आयोग के अध्यक्ष के तौर पर पूर्व विधायक रामलाल रौतेल की नियुक्ति की गयी है। गुरूवार की शाम को सरकार ने आदेश भी जारी कर दिये है। सीएम मोहन यादव ने इन नामों को हरी झंडी दे दी थी। इसके अलावा राज्य महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का रास्ता भी साफ हो गया है। एक या दो दिन में घोषणा होने की संभावना है।


अनुसूचित जाति आयोग में एक अध्यक्ष 2 सदस्य
अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष के लिये पूर्व विधायक कैलाश जाटव की नियुक्ति हो गयी है। वहीं सदस्यों के तौर पर रामलाल मालवीय और बारेलाल अहिरवार के नाम है। जाटव अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष भी रह चुके है। वर्ष 2013 में वह पहली बार नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव सीट से विधायक चुने गये थे। वर्ष 2018 में वह इसी सीट से दूसरा चुनाव हार गये थे। पार्टी ने 2023 में उन्हें टिकट नहीं दिया और अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया था।
6 साल बाद राज्य महिला आयोग में नियुक्ति
सरकार आठ साल से खाली पड़े राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष और दो सदस्यों की भी नियुक्ति करने जा रही है। पूर्व विधायक रेखा यादव को महिला आयोग का अध्यक्ष बनाने पर सहमति बनी है। वहीं पूर्व विधायक साधना स्थापक और ग्वालियर की पूर्व मेयर समीक्षा गुप्ता को सदस्य बनाया जा सकता है। साल 2020 में कमलनाथ सरकार के गिरने के बाद राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष का पद कानूनी पचड़े में फंस गया था। तत्कालीन अध्यक्ष शोभा ओझा और सदस्यों को उस समय शिवराज सरकार ने हटा दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए सदस्यों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बाल संरक्षण आयोग में अध्यक्ष के साथ 4 सदस्य
इसके अलावा बाल संरक्षण आयोग के लिए भी अध्यक्ष और सदस्यों के नाम पर सहमति बन चुकी हैं। डॉ. निवेदिता शर्मा को अध्यक्ष बनाया जाएगा। वो पहले से ही बाल संरक्षण आयोग की सदस्य हैं। उनके अलावा सोनम निनामा, अर्चना गुप्ता, मोनिका बट्टी और सीमा सिंह को सदस्य बनाने पर सहमति बनी है।

 

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CHMO ने 16 नर्सिंग होम के लायसेंस किये निरस्त, बिना नवीनीकरण चल रहे थे अस्पताल

ग्वालियर. 16 नर्सिंग होम और अस्पतालों के जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने बड़ी कार्यवाही करते हुए पंजीयन (लायसेंस) निरस्त कर दिये है। यह कार्यवाही मप्र उपचर्यागृह तथा रूग्णोपचार संबंधी स्थापनायें ( रजिस्ट्रेशन एवं लायसें्िरगंग) अधिनियम 1993 और नियम 1997 संशोधित 2008 एवं 2021 के तहत कार्यवाही की गयी है। इसके बावजूद कई नर्सिंग होम संचालकों ने समय-सीमा में आवेदन नहीं किया है। जिसके चलते उनका पंजीयन स्वतः समाप्त होकर पोर्टल से हट गया है। नियमों के अनुसार बिना वैघ पंजीयन के किसी भी नर्सिंग होम का संचालन अवैध माना जायेगा।
सीएमएचओ डॉ. सचिन श्रीवास्तव के अनुसार नियमों के तहत सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होमा का पंजीयन हर 3 साल में नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। इसके लिये निर्धारित समय-सीमा में कम से कम एक माह पहले नर्सिंग होम पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। विभाग द्वारा पहले ही 12 दिसम्बर 2025, 23 दिसम्बर 2025, और 2026 में संबधित संस्थाओं को नोटिस जारी कर सूचित किया गया था। 28 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि तक पोर्टल खुला रहेगा। शासन स्तर से राहत देते हुए 22 मार्च 2026 तक अंतिम मौका भी दिया गया। इसके बावजूद कई नर्सिंग होम संचालकों ने समय-सीमा में आवेदन नहीं किया। जिसके चलते उनका पंजीयन स्वतः ही समाप्त होकर पोर्टल से हट गया है। नियमों के मुताबिक बिना वैध पंजीयन के किसी भी नर्सिंग होम का संचालन भी अवैध माना जायेगा।
16 नर्सिंग होमों के लाइसेंस हुए निरस्त
कल्याण जी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, बझेरा टेकनपुर, वाईएसएम अस्पताल, तिघरा रोड, आशा देवी मेमोरियल अस्पताल, मोतीझील,  राम कृष्णा अस्पताल, साडा क्षेत्र, केयर एंड क्योर हॉस्पिटल, काउंटर मेगनेट,. लीला मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, गोला का मंदिर, प्राइम केयर एंड क्योर हॉस्पिटल, एबी रोड, पीतांबरा माता नर्सिंग होम, मदनपुरा  ,मयूर नर्सिंग होम, मुरार, श्री कृष्णा अस्पताल, हुरावली रोड, गौतम स्पेशलिटी अस्पताल, डबरा, चोपड़ा चेस्ट अस्पताल, चेतकपुरी  ,के.के. अस्पताल, कटी घाटीवसुन्धरा राजे अस्पताल, लश्कर, शिवानी आई अस्पताल, मुरार, महादेव अस्पताल, भिंड रोड,

सीएमएचओ की चेतावनी
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना लाइसेंस संचालित होने वाले अस्पतालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि इलाज के लिए केवल पंजीकृत और अधिकृत अस्पतालों का ही चयन करें। यह कार्रवाई जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

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नगर निगम में अनुशासनहीनता पर कड़ा कदम, कर्मचारी को अनिवार्य सेवा निवृत्ति

ग्वालियर – नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने अनुशासनहीनता और लगातार अनुपस्थित रहने के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए सहायक राजस्व निरीक्षक अवधेश भारद्वाज को अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान कर दी है। यह कार्रवाई लंबे समय से जारी लापरवाही, जांच में सहयोग न करने और बार-बार अनुपस्थित रहने के कारण की गई।
नगर निगम आयुक्त द्वारा जारी आदेशानुसार अवधेश भारद्वाज जो सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर कार्यरत थे, को जांच प्रक्रिया के दौरान कई बार उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद उन्होंने न तो निर्धारित समय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा और न ही कोई लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। विभागीय रिकॉर्ड में भी उनकी अनुपस्थिति लगातार दर्ज पाई गई।
जांच अधिकारी उपायुक्त सम्पत्तिकर द्वारा जारी नोटिस के बाद भी कर्मचारी के रवैये में कोई सुधार नहीं आया। यहां तक कि निलंबन अवधि के दौरान भी वे मुख्यालय पर उपस्थित नहीं हुए। इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए।नगर निगम आयुक्त द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कर्मचारी का आचरण शासकीय सेवा के अनुरूप नहीं पाया गया, जिसके चलते उन्हें मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 10(7) के प्रावधान अंतर्गत अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा दी गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि में उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा, अन्य भत्ते राजसात किए जाएंगे।

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न्यू कलेक्ट्रेट से अलापुर वाया सिरोल तिराहा तक बनी 2.7 किमी व्हाइट टॉपिंग सड़क की गुणवत्ता की जांच

ग्वालियर। शहर में न्यू कलेक्ट्रेट से अलापुर वाया सिरोल तिराहा तक निर्मित 2.7 किलोमीटर लंबी व्हाइट टॉपिंग सड़क की गुणवत्ता को परखने के लिए तकनीकी टीम द्वारा विस्तृत जांच की गई। इस दौरान आधुनिक तकनीक और सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली का उपयोग कर सड़क निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।
जांच प्रक्रिया के तहत कोर कटिंग मशीन की मदद से सड़क का कोर टेस्ट किया गया। इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रैंडम ऑनलाइन चेकिंग पॉइंट जनरेट किए गए, जिससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। हालांकि सड़क की कुल लंबाई के हिसाब से एक ही पिट का चयन कर उसका परीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उच्च स्तरीय तकनीकी टीम मौजूद रही। टीम में एमपीआरडीसी से मुख्य अभियंता सुनील जैन तथा पीडब्ल्यूडी परिक्षेत्र रीवा से मुख्य अभियंता केके लक्षे शामिल थे। इनके अलावा अधीक्षण यंत्री वसीम खान, कार्यपालन यंत्री देवेंद्र सिंह भदौरिया, एसडीओ ओएन शर्मा एवं उपयंत्री सुखेंद्र लोधी भी जांच में उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि इस व्हाइट टॉपिंग सड़क का निर्माण ठेकेदार प्रताप सिंह तोमर द्वारा कराया गया है। जांच के दौरान सड़क की गुणवत्ता, मोटाई एवं निर्माण मानकों के अनुरूप कार्य होने की पुष्टि के लिए तकनीकी परीक्षण किए गए। संबंधित अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की तकनीकी जांच से निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ भविष्य में बेहतर कार्यप्रणाली अपनाने में भी मदद मिलती है।

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जल संसाधन विभाग के कार्यालय के सामान की कुर्की, टेबिल-कुर्सी, कम्प्यूटर और पंखे तक ले गये अधिकारी

गुना. जल संसाधन विभाग की सिंचाई कॉलोनी में स्थित ऑफिस का सामान कोर्ट के फैसले के पालन में कुर्क कर लिया गया है। एक किसान के खेत में बिना मुआवजा दिये नहर डालने और अदालत के आदेश के बाद भी मुआवजा नहीं देने की वजह से अदालत ने सामान की कुर्की के आदेश दिये थे। न्यायालय की टीम दफ्तर से कूलर, कम्प्यूटर और पंखे सब उतार कर ले गयी। अदालती आदेशों की अनदेखी करना जल संसाधन विभाग को आज भारी पड़ गया। ग्राम रेंझाई में 2 दशक पुराने एक मामले में जब विभाग ने कोर्ट के आदेश के बावजूद किसान परिवार को मुआवजा की राशि नहीं चुकाई तो न्यायालय ने कड़ा रूख अपनाते हुए विभाग के कार्यालय की ही कुर्की के आदेश जारी कर दिये। बुधवार को गुना जिला न्यायालय की टीम ने जल संसाधन विभाग के ऑफिस पहुंचकर वहां से टेबिल, कुर्सी, कम्प्यूटर और पंखे जप्त कर लिये हैं।
रातों-रात खेत में डाली थी अवैध नहर
मामले कीर जड़ें करीब 20 वर्ष पुरानी है। रेंझाई निवासी पीयूष रघंवंशी ने बताया है कि गांव में तालाब निर्माण के बीच जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने उनके खेत से रातों-रात एक अवैध नहर का निर्माण कर दिया था। दस्तावेजें में यह नहर किसी और के खेत से निकालनी थी। लेकिन विभाग ने फरियादी के खेत को बर्बाद कर दिया। इस बीच 10-12 वर्ष विभाग के चक्कर लगाये। कोई सुनवाई नहीं हुई तो इस अन्याय के खिलाफ अर्जुन सिंह रघुवंशी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। लगभग 10-12 साल लम्बी कानूनी लड़ाई केबाद न्यायालय ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाया और विभाग पर जुर्माना लगाया।
जप्त हो गया दफ्तर का सामान
दरअसल, प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीश (कनिष्ठ खंड) आयुषी मित्तल के न्यायालय द्वारा जारी 1,00,475/- रुपए (ब्याज सहित) की वसूली के लिए जिला नाजिर राजेश शर्मा के नेतृत्व में टीम केंट रोड स्थित जल संसाधन विभाग के कार्यालय पहुंची। कोर्ट के वारंट की तामीली करते हुए टीम ने दफ्तर से कंप्यूटर सेट, फर्नीचर, कुर्सियां और पंखे जप्त करना शुरू कर दिया। जिला कोर्ट के नाजिर राजेश शर्मा ने बताया कि विभाग ने बार-बार समय लेने के बाद भी राशि जमा नहीं की थी, इसलिए अब यह सामान जप्त कर न्यायालय में जमा कराया जाएगा, जिसकी बाद में नीलामी कर पीडि़त को राशि दी जाएगी।
2022 में कुर्की का आदेश जारी हुआ था
स मामले में कोर्ट के नाजिर राजेश शर्मा ने बताया कि कई दिनों से मामला विचाराधीन था। बार-बार वारंट जारी हुए थे। विभाग द्वारा न्यायालय से समय भी लिया गया था। उसके बाद भी राशि जमा नहीं की गई थी तो आज कुर्की की कार्रवाई की जा रही है। कुर्की का आदेश 2022 में जारी हुए थे। अभी हम सामान लेकर न्यायालय में ले जाकर जमा करेंगे। वहां से नीलामी होगी। यह केस अर्जुन सिंह रघुवंशी निवासी रेंझाई ने जल संसाधन विभाग पर लगाया था।