News

Newsमप्र छत्तीसगढ़

नगर निगम में अनुशासनहीनता पर कड़ा कदम, कर्मचारी को अनिवार्य सेवा निवृत्ति

ग्वालियर – नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने अनुशासनहीनता और लगातार अनुपस्थित रहने के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए सहायक राजस्व निरीक्षक अवधेश भारद्वाज को अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान कर दी है। यह कार्रवाई लंबे समय से जारी लापरवाही, जांच में सहयोग न करने और बार-बार अनुपस्थित रहने के कारण की गई।
नगर निगम आयुक्त द्वारा जारी आदेशानुसार अवधेश भारद्वाज जो सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर कार्यरत थे, को जांच प्रक्रिया के दौरान कई बार उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद उन्होंने न तो निर्धारित समय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा और न ही कोई लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। विभागीय रिकॉर्ड में भी उनकी अनुपस्थिति लगातार दर्ज पाई गई।
जांच अधिकारी उपायुक्त सम्पत्तिकर द्वारा जारी नोटिस के बाद भी कर्मचारी के रवैये में कोई सुधार नहीं आया। यहां तक कि निलंबन अवधि के दौरान भी वे मुख्यालय पर उपस्थित नहीं हुए। इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए।नगर निगम आयुक्त द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कर्मचारी का आचरण शासकीय सेवा के अनुरूप नहीं पाया गया, जिसके चलते उन्हें मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 10(7) के प्रावधान अंतर्गत अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा दी गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि में उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा, अन्य भत्ते राजसात किए जाएंगे।

Newsमप्र छत्तीसगढ़

न्यू कलेक्ट्रेट से अलापुर वाया सिरोल तिराहा तक बनी 2.7 किमी व्हाइट टॉपिंग सड़क की गुणवत्ता की जांच

ग्वालियर। शहर में न्यू कलेक्ट्रेट से अलापुर वाया सिरोल तिराहा तक निर्मित 2.7 किलोमीटर लंबी व्हाइट टॉपिंग सड़क की गुणवत्ता को परखने के लिए तकनीकी टीम द्वारा विस्तृत जांच की गई। इस दौरान आधुनिक तकनीक और सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली का उपयोग कर सड़क निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।
जांच प्रक्रिया के तहत कोर कटिंग मशीन की मदद से सड़क का कोर टेस्ट किया गया। इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रैंडम ऑनलाइन चेकिंग पॉइंट जनरेट किए गए, जिससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। हालांकि सड़क की कुल लंबाई के हिसाब से एक ही पिट का चयन कर उसका परीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उच्च स्तरीय तकनीकी टीम मौजूद रही। टीम में एमपीआरडीसी से मुख्य अभियंता सुनील जैन तथा पीडब्ल्यूडी परिक्षेत्र रीवा से मुख्य अभियंता केके लक्षे शामिल थे। इनके अलावा अधीक्षण यंत्री वसीम खान, कार्यपालन यंत्री देवेंद्र सिंह भदौरिया, एसडीओ ओएन शर्मा एवं उपयंत्री सुखेंद्र लोधी भी जांच में उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि इस व्हाइट टॉपिंग सड़क का निर्माण ठेकेदार प्रताप सिंह तोमर द्वारा कराया गया है। जांच के दौरान सड़क की गुणवत्ता, मोटाई एवं निर्माण मानकों के अनुरूप कार्य होने की पुष्टि के लिए तकनीकी परीक्षण किए गए। संबंधित अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की तकनीकी जांच से निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ भविष्य में बेहतर कार्यप्रणाली अपनाने में भी मदद मिलती है।

Newsमप्र छत्तीसगढ़

जल संसाधन विभाग के कार्यालय के सामान की कुर्की, टेबिल-कुर्सी, कम्प्यूटर और पंखे तक ले गये अधिकारी

गुना. जल संसाधन विभाग की सिंचाई कॉलोनी में स्थित ऑफिस का सामान कोर्ट के फैसले के पालन में कुर्क कर लिया गया है। एक किसान के खेत में बिना मुआवजा दिये नहर डालने और अदालत के आदेश के बाद भी मुआवजा नहीं देने की वजह से अदालत ने सामान की कुर्की के आदेश दिये थे। न्यायालय की टीम दफ्तर से कूलर, कम्प्यूटर और पंखे सब उतार कर ले गयी। अदालती आदेशों की अनदेखी करना जल संसाधन विभाग को आज भारी पड़ गया। ग्राम रेंझाई में 2 दशक पुराने एक मामले में जब विभाग ने कोर्ट के आदेश के बावजूद किसान परिवार को मुआवजा की राशि नहीं चुकाई तो न्यायालय ने कड़ा रूख अपनाते हुए विभाग के कार्यालय की ही कुर्की के आदेश जारी कर दिये। बुधवार को गुना जिला न्यायालय की टीम ने जल संसाधन विभाग के ऑफिस पहुंचकर वहां से टेबिल, कुर्सी, कम्प्यूटर और पंखे जप्त कर लिये हैं।
रातों-रात खेत में डाली थी अवैध नहर
मामले कीर जड़ें करीब 20 वर्ष पुरानी है। रेंझाई निवासी पीयूष रघंवंशी ने बताया है कि गांव में तालाब निर्माण के बीच जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने उनके खेत से रातों-रात एक अवैध नहर का निर्माण कर दिया था। दस्तावेजें में यह नहर किसी और के खेत से निकालनी थी। लेकिन विभाग ने फरियादी के खेत को बर्बाद कर दिया। इस बीच 10-12 वर्ष विभाग के चक्कर लगाये। कोई सुनवाई नहीं हुई तो इस अन्याय के खिलाफ अर्जुन सिंह रघुवंशी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। लगभग 10-12 साल लम्बी कानूनी लड़ाई केबाद न्यायालय ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाया और विभाग पर जुर्माना लगाया।
जप्त हो गया दफ्तर का सामान
दरअसल, प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीश (कनिष्ठ खंड) आयुषी मित्तल के न्यायालय द्वारा जारी 1,00,475/- रुपए (ब्याज सहित) की वसूली के लिए जिला नाजिर राजेश शर्मा के नेतृत्व में टीम केंट रोड स्थित जल संसाधन विभाग के कार्यालय पहुंची। कोर्ट के वारंट की तामीली करते हुए टीम ने दफ्तर से कंप्यूटर सेट, फर्नीचर, कुर्सियां और पंखे जप्त करना शुरू कर दिया। जिला कोर्ट के नाजिर राजेश शर्मा ने बताया कि विभाग ने बार-बार समय लेने के बाद भी राशि जमा नहीं की थी, इसलिए अब यह सामान जप्त कर न्यायालय में जमा कराया जाएगा, जिसकी बाद में नीलामी कर पीडि़त को राशि दी जाएगी।
2022 में कुर्की का आदेश जारी हुआ था
स मामले में कोर्ट के नाजिर राजेश शर्मा ने बताया कि कई दिनों से मामला विचाराधीन था। बार-बार वारंट जारी हुए थे। विभाग द्वारा न्यायालय से समय भी लिया गया था। उसके बाद भी राशि जमा नहीं की गई थी तो आज कुर्की की कार्रवाई की जा रही है। कुर्की का आदेश 2022 में जारी हुए थे। अभी हम सामान लेकर न्यायालय में ले जाकर जमा करेंगे। वहां से नीलामी होगी। यह केस अर्जुन सिंह रघुवंशी निवासी रेंझाई ने जल संसाधन विभाग पर लगाया था।

Newsमप्र छत्तीसगढ़

गुना में स्कॉर्पियों 1 नहीं 4 करोड़ रूपये थे, 2 करोड़ पुलिस ने थे, पुलिस व्यापारी को लाये चौकी प्रभारी ने डील की, 4 पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली


गुना. हवाला काण्ड में गाड़ी से 1 करोड़ रूपये मिले और इनमें से 20 लाख रूपये लेकर पुलिस ने आरोपियों को छो़ दिया था। पुलिस ने पूरे खेल की यही कहानी बताई थी। लेकिन सच्चाई कुछ और है। इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल की तो पता चला है कि गाड़ी में 4 करोड़ रूपये थे। और पुलिस ने इनमें से 2 करोड़ रूपये अपने पास रख लिये थे, इसकी प्रॉपर डील और सभी पुलिसकर्मियों की भूमिका अलग-अलग थी।

पुलिसकर्मियों ने गुजरात की इसी कार को 19 मार्च 2026 को रोका था।
एएसआई हवाला व्यापारी को गाड़ी से लेकर आया। रूपये की डल थाना प्रभारी ने की थी। इस पूरे काण्ड में एसपी कार्यालय और निवास पर इसमें शामिल पुलिसकर्मियों की लोकेशन मिली है और इतना ही नहीं, व्यापारी भी वहां मौजूद था। पुलिस की इंटरनल जांच रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। मार्च में हुए हवालाकाण्ड की जांच रिपोर्ट ग्वालियर आईजी की टेबिल तक पहुंच चुूकी है। आईजी अरविंद सक्सैना के निर्देश पर गुना एसपी ने चारों पुलिसकर्मियों को चार्जशीट जारी कर दी है। अब इस मामले में विभागीय जांच के बाद ही आगे कार्यवाही की जायेगी।
क्या है घटनाक्रम
19 मार्च 2026 की रात रूठियाई चौकी, नेशनल हाइवे-46 पर पुलिस ने गुजरात पासिंग गाड़ी को रोका था और ऐसा दावा किया गया कि सर्चिंग के दौरान कार में 1 करोड़ रूपये मिले थे। इनमें से पुलिस को 20 लाख रूपये लेकर गाड़ी को छोड़ दिया था। अगले दिन गुजरात से एक आईपीएस का कॉल आया तो पुलिस ने वह रूपये भी लौटा दिये। 20 मार्च को गाड़ी वापिस लेने गुना आये और 5 घंटे तक यही रहें। 22 मार्च को ग्वालियर डीआईजी अमित सांघी गुना पहुंचे और उन्होंने शुरूआत में 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इसके बाद गुना एसपी अंकित सोनी को भी हटा दिया गया। मामले की जांच आईपीएस आयुष जाखड़ को सौंपी गयी। 25 दिनों तक चली जांच के बाद आईजी अरविंद सक्सैना को यह रिपोर्ट सौंप दी गयी है। रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों, व्यापारियों और इससे जुड़े लोगों के बयान भी दर्ज किये हैं। रिपोर्ट में निलंबित 4 पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है।
व्यापारियों ने मानी एसपी से मुलाकात की बात
गुजरात के व्यापारी ने अपने बयानों में एसपी से मुलाकात की बात स्वीकार की थी। सूरत के मसाला व्यापारी दक्षित पटेल ने बताया था कि उनके पास केवल 9.50 लाख रुपए थे, जो गुजरात से दिल्ली भेजे थे, लेकिन जब दिल्ली में दूसरा व्यापारी नहीं मिला तो उनका ड्राइवर स्कॉर्पियो गाड़ी नंबर GJ05 RK 9351 से पैसे वापस लेकर इंदौर लौट रहा था। इसी बीच गुना की रुठियाई पुलिस चौकी के पास स्थित टोल नाके पर पुलिस ने चैकिंग में गाड़ी रोक ली। जब हमने बताया कि हमारा पैसा एक नंबर का है तो हमें जाने दिया। हमने इंदौर पहुंचकर देखा तो बैग में 8.50 लाख रुपए थे। पैसे गिनने में गलती हो गई थी, इसलिए वापस गुना पहुंचकर एसपी अंकित सोनी से मुलाकात की और एक लाख रुपए गायब होने के बारे में बताया।
एसपी साहब ने कहा कि लिखित शिकायत कर दो, जांच करवाते हैं। हमने कहा कि एक बार दोबारा रुठियाई थाने में जाकर देखते हैं, कहीं पैसा किसी ने निकाला तो नहीं। रुठियाई थाने पहुंचकर पता किया तो पुलिस की कोई गलती नहीं थी, बल्कि बैग में शुरू से ही एक लाख रुपए कम थे। हमने किसी भी तरह की शिकायत नहीं की और वहां से वापस आ गए।

 

LatestNewsमप्र छत्तीसगढ़राज्य

राज्यसभा की तीसरी सीट पर कमलनाथ को लड़ा सकती है कांग्रेस

भोपाल. मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर कांग्रेस में गहन मंथन चल रहा है। आंकडे के हिसाब से पार्टी भले ही मजबूत हो लेकिन परिस्थितियां कुछ ओर ही बता ही है। ऐसे में दिल्ली दरबार कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है। उन्हें समझ आ रहा है कि कमलनाथ ही है जो कि सीट जीत कर दे सकते है। हालांकि राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन को ही बताया जा रहा है तो दिग्विजय सिंह चाहते है कि पीसी शर्मा को मौका दिया जाए।
तीसरी सीट के लिए 58 वोट चाहिए
प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही है जिसके चुनाव होना है। विधायकों की संख्या के हिसाब से दो पर भाजपा की एक तरफा जीत होनी है तो तीसरी सीट के लिए 58 वोट चाहिए और कांग्रेस के पास कुल 66 वोट थे लेकिन विधायक मुकेश मल्होत्रा को वोटिंग का अधिकार नहीं है तो दतिया विधायक राजेंद्र भारती भी संकट में है।
गहन मंथन जारी
इसके अलावा निर्मला सप्रे का वोट भी नहीं मिलेगा। इस गणित से 63 वोट ही बच रहे है जिससे रिस्क फेक्टर बडा हो गया। वहीं हरियाणा में क्रॉस वोटिंग कराके भाजपा खेल कर चुकी है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस में प्रत्याशी को लेकर गहन मंथन चल रहा है। कांग्रेस सुप्रीमो व लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन है जो मध्य प्रदेश के मंदसौर से सांसद भी रह चुकी है और वर्तमान में मैनेजमेंट संभाल रही है।

LatestNewsमप्र छत्तीसगढ़राज्य

ग्वालियर से 4 मई से बढ़ेंगी फ्लाइट्स, अब सप्ताह में 6 दिन फ्लाइट दिल्ली के लिए

ग्वालियर. यात्रियों के लिए राहतभरी खबर है। शहर की एयर कनेक्टिविटी अब और मजबूत होने जा रही है। 4 मई से अकासा एयर नई फ्लाइट सेवा शुरू होगी जिसके बाद ग्वालियर से दिल्ली के लिए उडानों की संख्या बढकर सप्ताह में 6 दिन हो जाएगी। अब तक इंडिगो की फ्लाइट्स मंगलवार, गुरूवार और शनिवार को संचालित हो रही थी। नई व्यवस्था के तहत अकासा एयर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को उडान भरेगी। इससे यात्रियों को लगभग पूरे सप्ताह फ्लाइट सुविधा मिल सकेगी।
व्यापारियों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को बडा फायदा होगा
दिल्ली पहुंचने के बाद यात्रियों को बेंगलुरू, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई जैसे बडे शहरों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे व्यापारियों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को बडा फायदा होगा। टर्मिनल डायरेक्टर लोकेंद्र कुमार यादव के अनुसार दिल्ली के लिए 6 दिन फ्लाइट सेवा शुरू होने से यात्रियों को सुविधा मिलेगी और अनय शहरों के लिए कलेक्टिविटी भी आसान होगी।
बिजनेस व डे-ट्रैवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक मानी जा रही
नई फ्लाइट राजमाता विजयाराजे सिंधिया टर्मिनल पर सुबह 10.40 बजे पहुंचेगी और 11.50 बजे दिल्ली के लिए रवाना होगी। यह टाइमिंग खासतौर पर बिजनेस और डे-ट्रैवल करने वाले यात्रियों के लिए काफी सुविधाजनक मानी जा रही है।

 

Newsमप्र छत्तीसगढ़

प्रॉपर्टी व्यापारी से हैवानियत करने वालों पर 10-10 रूपये का इनाम का ऐलान, गैंगस्टर के भाई सहित 4 आरोपी फरार

ग्वालियर. प्रॉपर्टी व्यापारी के साथ बर्बरता करने वाले 4 आरोपियों पर पुलिस ने 10-10 हजार रूपये का इनाम घोषित किया है। घटना के बाद से सभी आरोपी फरार चल रहे है। पुलिस लगातार उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दविश दे रही है। आरोपियों ने व्यापारी को बंधक बनाकर न सिर्फ मारपीट की बल्कि मुंह में रिवाल्वर अड़ाकर दहशत फैलाई और जबरन अश्लील कृत्य भी किया है।

आरोपी गौरव और इंद्रपाल तोमर का फाइल फोटो
इस घटना में शामिल ओमकार उर्फ भूरे सिकरबार, इंद्रपालसिंह तोमर, जितेन्द्र सिकरबार और गौरी यादव के खिलाफ सोमवार को अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इनमें से एक आरोपी गैंगवार में मारे गये कुख्यात गैंगस्टर पंकज सिकरबार का भाई है। एसएसपी ने साफ कहा है कि आरोपियों का जल्द गिरफ्तार किया जायेगा। शहर में इस घटना ने कानून -व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये है। वहीं पुलिस के लिये अब आरोपियों की गिरफ्तारी प्रतिष्ठा का सवाल बन गयी है। घटना 15 अप्रैल की शाम 5.30 -9.30 बजे के बीच हुई थी।
ठेकेदार को लेनदेन की चर्चा करने के लिये बुलाया था
गोला का मंदिर इलाके के निवासी 48 वर्षीय युवक कंस्ट्रक्शन कम्पनी का संचालन करता है। प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त करता है। ऐसा उसने बताया है कि वह 10 साल से ओमकार सिंह उर्फ भूरे सिकरबार को जानता है। ओमकार उसके एक दोस्त पंकज सिकरबार का छोटा भाई है। पंकज गेंगस्टर था और वह 10 जुलाई 2019 को शूटर्स ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। ओमकार सिंह उर्फ भूरे सिकरबार ने 15 अप्रैल को ठेकेदार सोनू राठौर से चल रहे लेन-देन पर चर्चा के लिये बुलाया था। वह ओमकार के पीताम्बरा धर्मकांटा पहुंचा और कुछ ही देर बाद ओमकार सिंह और गौरी यादव आये उसे ऑफिस ले गये।
क्या है मामला
ऑफिस में ओमकार के आधा दर्जन साथी पहले से बैठे थे। अंदर आते ही गुंडों ने गाली-गलौज कर धमकाया कि अब जिंदा नहीं जाएगा। उन्होंने शराब के लिए पैसे मांगे। पैसे नहीं होने पर QR कोड देकर बेटे से 1500 रुपए का पेमेंट कराया।
पीड़ित ठेकेदार का आरोप है कि ओमकार सिकरवार पिस्टल अड़ाकर उसके के साथ गंदा काम कर रहा था और उसका साथी गौरी यादव मोबाइल से वीडियो बना रहा था। इतना ही नहीं आरोपी ने उससे सोनू राठौर के लिए अपशब्द बुलवाए और उसका वीडियो बनाया। इसके बाद दारु पीने ठेकेदार को फोन कर सोनू को बुलवाने का दवाब बनाया था, लेकिन ठेकेदार ने फोन नहीं लगाया था।
ओमकार सिकरवार, इंद्रपाल सिंह तोमर और जितेंद्र सिकरवार ने पिस्टल अड़ाकर चेक बुक मंगाने को कहा था। नहीं मंगाने पर गोली मारने की धमकी दी थी। जिससे डरकर ठेकेदार ने बेटे को कॉल करके चेक बुक मंगवाई थी, चेक बुक आने पर बदमाशों ने उसे 10-10 लाख रुपए के तीन चेक भरवा कर साइन करा लिए थे। इन तीनों चेकों में दो चेक ठेकेदार के अकाउंट के थे और एक चेक उसकी पत्नी के अकाउंट का था।
पीड़ित ठेकेदार ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने बेटे के सामने उसे पीटा, वीडियो बनवाया और बुलवाया कि चेक उसने अपने लेनदेन के पैसे के दिए हैं। करीब तीन घंटे बंधक रखने के बाद रात नौ बजे उसे छोड़ा था। इसके बाद वह थाने पहुंचा था और शिकायत की थी।

Newsमप्र छत्तीसगढ़

29 वर्षो पुराना जेसी मिल को जल्द आने वाला है फैसला, हजारों श्रमिकों की देनदारी पर टिकी नजरें, हाईकोर्ट में होगी निर्णायक सुनवाई

ग्वालियर जेसी मिल का विवाद 1997 से लंबित है। - Dainik Bhaskar

ग्वालियर. जेसी मिल से जुड़े हजारों श्रमिकों के लिये राहत भरी खबर है। लगभग 29 साल से लंबित देनदारी और संपत्ति विवाद अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। हाईकोर्ट में जल्द ही इस प्रकरण पर निर्णायक सुनवाई होने की संभावना है। बुधवार का जस्टिस जीएस अहलूवालिया के अवकाश पर होने की वजह से ससुनवाई नहीं हो पाई है। तारीख आगे बढ़ा दी गयी है। अब जस्टिस अहलूवालिया की बेंच ही अंतिम बहस सुनकर फैसला सुनायेगी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई नियमित बेंच से करने का निर्णय लिया है।
जेसी मिल का 1997 से लंबित है मामला
यह विवाद साल 1987 से लंबित है। इसके चलते न तो मिल की संपत्तियों का पूरी तरह से निपटारा हो पाया है। और न ही श्रमिकों को उनका पूरा भुगतान मिल सका है। बुधवार को मामला जस्टिस मिलिंद रमेश फडके की बैंच में सूचीबद्ध था। लेकिन बैंच ने इसे रेगुलर बेंच के लिये ही निर्धारित रखा है। इस दौरान कई बैंक भी पक्षकर बन चुके है। अपनी देनदारी का दावा कर रहे है।
जमीन और देनदारी का विवाद
जेसी मिल बंद होने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर परिसमापक नियुक्त किया गया था। शासन द्वारा लीज पर दी गई जमीन सरकार को वापस मिल चुकी है, लेकिन मिल की निजी स्वामित्व वाली जमीन अभी भी विवाद में है। सरकार चाहती है कि इस जमीन को नीलाम कर मजदूरों की देनदारी चुकाई जाए। वहीं, मजदूर परिवार वर्षों से अपने हक का इंतजार कर रहे हैं। हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अब इस मामले में अनावश्यक तारीखें नहीं दी जाएंगी। रेगुलर बेंच में सुनवाई शुरू होते ही अंतिम बहस होगी और जल्द फैसला आने की उम्मीद है। मजदूरों को उम्मीद है कि इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत होगा और उनके भुगतान का रास्ता साफ हो सकेगा।

Newsमप्र छत्तीसगढ़

11 करोड़ रूपये खर्च के बाद स्मार्ट सिटी बस सेवा फेल, सुनसान इलाके में खड़ी बसें बनी कबाड़

सुनसान इलाके में रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे खड़ी कबाड़ा हो रही स्मार्ट सिटी की बसें।

ग्वालियर. स्मार्ट सिटी का सपना अब सवालों में घिरता दिखाई दे रहा है। शहरवासियों को सस्ती और बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा देने के लिये शुरू की गयी स्मार्ट सिटी बस सेवा आज तरह से ठप्प हा गयी है।
ळालात यह है कि जिन बसों को शहर की लाइफलाइन बनना था वह अब सुनसान इलाकों में कबाड़ बनकर खड़ी-खड़ी जंग खा रही है। वर्ष 2023में ग्वालियर स्मार्ट सिटी डवलपमेंट कॉर्पोशन ने इंट्रा सिटी बस सेवा की शुरूआत की थी। आधुनिक सुविधाओं से लैस इन बसों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम भी लगाया गया था। ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम सफर का लाभ मिल सके। लेकिन शुरूआत के महिनों के बाद ही यह योजना पटरी से उतर गयी। इस योजना के लिए करीब 11 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। एक निजी कंपनी को 16 इंट्रा सिटी और कुल 32 बसें (इंटरसिटी सहित) चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर संचालन लगभग न के बराबर रहा।
सूत्रों के मुताबिक, शहर में पहले से चल रहे ऑटो और विक्रम का दबदबा इतना अधिक है कि निजी कंपनी ने बस संचालन में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। धीरे-धीरे बसें सड़कों से गायब हो गईं और अब रेस कोर्स रोड, गार्डर वाली पुलिया व रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे खड़ी नजर आ रही हैं। बसों में लगाए गए जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम का मकसद हर मूवमेंट पर नजर रखना था, लेकिन जब बसें ही नहीं चलीं, तो यह हाईटेक सिस्टम भी बेकार साबित हुआ। हजीरा निवासी मूलचंद का कहना है कि शहर में सरकारी बस सेवा पूरी तरह गायब है, जबकि करोड़ों की बसें कबाड़ में खड़ी हैं। उनका आरोप है कि यह जनता का पैसा है, जिसे सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर हो रहे विकास कार्य सिर्फ दिखावा हैं।
सवालों के घेरे में स्मार्ट सिटी प्लान
करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी योजना टिकाऊ क्यों नहीं रही?
क्या बिना ग्राउंड सर्वे के प्रोजेक्ट शुरू किया गया?
जिम्मेदारों की जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई?
जनता का आरोप: “विकास के नाम पर पैसा बर्बा

Newsमप्र छत्तीसगढ़

कार में भड़की आग से डॉक्टर सहित 3 लोगों ने कूंदकर बचाई जान, एक वर्ष पूर्व खरीदी की थाी कार

ग्वालियर. पुरानी छावनी में बुधवार की दोपहर बड़ा हादसा टल गया और निरावली पर चलते-चलते (EV) बैटरी कार में अचानक विस्फोट हो गया है। कार में आग लग गयी ।कार में सवार डॉक्टर, उनकी रिश्तेदार युवती और ड्राइवर ने कूंदकर अपनी जान बचाई है।
मोतीझील निवासी आकांक्षा राठौर मुरैना के संजीवनी क्लीनिक में मेडीकल ऑफिसर है। वह प्रतिदिन ग्वालियर -मुरैना अपडाउन करती है। बुधवर को भी वह प्रतिदिन की तरह ग्वालियर लौट रही थी। इस बीच शॉर्टसर्किट होने से आग लग गयी। सूचना मिलते ही पुलिस और फायरब्रिगेड घटनास्थल पर पहुंची। आग पर तो काबू पा लिया गया। लेकिन तब तक कार पूरी तरह से जलकर खाक हो चुकी थी।