सिंधिया राजघराने की बंटवारे के लिए समझौते पर मंगलवार को ग्वालियर जिला न्यायालय में सुनवाई होगी
ग्वालियर. सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड रुपये मूल्य की संपत्ति से जुडे बहुचर्चित विवाद में बंटवारे के लिए समझौते पर मंगलवार को ग्वालियर जिला न्यायालय में सुनवाई होगी। बंटवारे का समझौता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ उषा राजे, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे की ओर से प्रस्तुत किया गया है।
प्रतिमा देवी ने कैविएट दायर की
इस बीच अब ज्योतिरादित्य की बडी बुआ स्वर्गीय पद्रमाराजे सिंधिया की पुत्री प्रतिमा देवी ने कैविएट दायर की ननिहाल की संपत्ति पर दावा किया है इसलिए सिंधिया राजघराने के संपत्ति विवाद में ज्येष्ठाधिकार का दावा फिर प्रासंगिक हो गया है। मंगलवार को सुनवाई में प्रस्तावित समझौते के साथ उत्तराधिकार से जुडे पुराने दावों और कानूनी पहलुओं पर भी अदालत की नजर रहेगी।
अब संपत्ति विवाद आगे बढने के आसार
दरअसल वर्ष 1989 में संपत्ति के लिए दायर दावे में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्वयं को राजघराने की संपत्ति के एकमात्र उत्तराधिकारी के रूप में ज्येष्ठाधिकार की उस परंपरा का संदर्भ दिया था जिसमें पारंपरिक राजशाही व्यवस्था के तहत माता-पिता या शासक की मृत्यु के बाद उनकी संपूर्ण निजी व रियासती संपत्ति पर केवल सबसे बडे वैध पुत्र का अधिकार होता है जबकि उनकी तीनों बुआ ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम का संदर्भ देकर संपत्ति में अपने हक पर दावा किया।
दोनों दावों के बीच ज्योतिरादित्य और उनकी तीनों बुआ में बंटवारे पर सहमति बन चुकी है। इस पर ही अदालत की मुहर लगती उससे पहले ही दिवंगत पद्रमाराजे सिंधिया की पुत्री प्रतिमा देवी ने कैविएट दायर कर कहा है कि समझौते पर उनका पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए। ऐसे में अब संपत्ति विवाद आगे बढने के आसार बन गए है।


