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रिफाइनरी में आग लगना साजिश या हादसा, अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच भारत सहित 5 देशों की रिफाइनरी में कैसे लगी आग

नई दिल्ली. पीएम नरेन्द्र मोदी मंगलवार को राजस्थान के पचपदरा में निर्माणाधीन रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे। लगभग 13 वर्ष पहले देखे गये इस प्रोजेक्ट का सपना अब पूरा होने जा रहा था। लेकिन उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले भीषण आग ने रिफाइनरी के मेने प्रोसिसिंग यूनिट्स को अपनी चपेट में ले लिया। जिससे इसका उद्घाटन टल गया है।
हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की इस रिफाइनरी में लगी भीषण आग की वजहों का पता लगाने के लिये जांच जानरी है। हैरानी की बात यह है कि दुनियाभर में ऑयल एसेट्स खासकर रिफाइनरी में आग लगने की घटनाओं का एक पैटर्न दिखाई दियाहै। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच तेल और गैस जैसे प्राकृतिक संसाधनों को एक हथियार की तरह उपयोग किया जा रहा है। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 से ईरान पर हवाई हमले शुरू किये और पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष की शुरूआत हुई। उसके बाद से भारत समेत 6 देशों की तेल रिफाइनरियों में आग लगने की घटनायें सामने आयी है। यह सभी रिफाइनरियां युद्ध इलाके से बाहर है। इन घटनाओं को लेकर अब यह चर्चा तेज हो गयी है। कि क्या रिफाइनरियों में लग रही आग महज संयोग है या इसके पीछे कोई पैटर्न है।
दुनिया भर में तेल रिफाइनरियों में आग क्यों लग रही है?
एक नॉर्थ अमेरिकन एक्स (X) अकाउंट ने दावा किया कि दुनियाभर के ऑयल एसेट्स में आग लगने की ये घटनाएं सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि तेल आपूर्ति को बाधित करने का पैटर्न हो सकता है। HPCL राजस्थान रिफाइनरी की घटना के बाद एक्स पर लिखते हुए अरविंद ने भी कहा कि अलग-अलग देशों में रिफाइनरियों में लग रही आग की घटनाएं वैश्विक स्तर पर रिफाइंड ऑयल सप्लाई को प्रभावित करने का संकेत हो सकती है। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का हवाला देते हुए कहा, ‘एक पक्ष तेल की कमी पैदा करना चाहता है और इसके लिए पहले से तैयारी कर चुका है, जबकि दूसरा पक्ष तेल की भरपूर आपूर्ति बनाए रखकर दूसरे पर दबाव बनाना चाहता है।’
अमेरिका-ईरान युद्ध में तेल सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है।  सैन्य ताकत के लिहाज से अमेरिका और ईरान की तुलना नहीं की जा सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी शुरुआत में लगा था कि यह युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो जाएगा । लेकिन जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित किया- जो फारस की खाड़ी से तेल-गैस एक्सपोर्ट का मुख्य समुद्री मार्ग है, और खाड़ी देशों के तेल ठिकानों पर हमले किए, तो हालात बदल गए है। इससे वैश्विक आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा और तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे दुनिया भर के उद्योग प्रभावित हुए ।.
अगर विभिन्न देशों की रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होती है, तो इसका फायदा युद्ध में शामिल या बड़े भंडार रखने वाले देशों को मिल सकता है।  वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (303.2 अरब बैरल) है, जबकि ईरान तीसरे स्थान पर है। (208.6 अरब बैरल). ऐसे में यदि वैश्विक सप्लाई बाधित होती है और रिफाइनरियां ठप पड़ती हैं, तो बड़े तेल भंडार वाले देशों को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है. दिलचस्प बात यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक चीन अब तक आग की ऐसी घटनाओं से अछूता रहा है।  कुल मिलाकर, आधिकारिक तौर पर इन घटनाओं को तकनीकी कारणों या दुर्घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने ‘ग्लोबल पैटर्न’ की आशंका को भी जन्म दे दिया है।

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जापान में आया रिक्टर स्केल 7.4 तीव्रता का भूकंप, रेल सेवा रोकी, प्रान्तों में 3 मीटर ऊंची सुनामी लहरें, जहाजों को सुरक्षित जगह समुद्र में भेजा

नई दिल्ली. जापान के उत्तरी भाग में सोमवार को जोदार भूकम्प के झटके महसूस किये गये है। जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.4 रही है। भूकम्प के बाद जापान के मौसम विभाग ने सुनामी की आशंका जताते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से तत्काल इलाका खाली करने की अपील की है। जापान की पीएम ने आपात स्थिति से निपटने के लिये एक आपातकालीन टास्क फोर्स का गठन किया गया है। लोगों से तटीय इलाकों का छोड़कर सुरक्षित ऊंचाईयों पर जाने की अपील की है। भूकंप की वजह से टोक्यों और औमोरी के बीच बुलेट ट्रेन की सेवाये रोक दी गयी है। बिजली कम्पनियां परमाणु संयंत्रों सहित अपनी सुविधाओं की जांच कर रही है।
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक, भूकंप प्रशांत महासागर में 10 किमी की गहराई पर आया था। भूकंप के तत्काल बाद अधिकारियों ने तटीय इलाकों विशेष रूप से इवाते, ओमोरी और होक्काइडों प्रान्तों में 3 मीटर तक ऊंची सुनामी लहरें आने की आशंका जताई है। लोगों से तटीय इलाकों से दूर रहने की अपील की गयी है। भूकंप के तत्काल बाद जापान के सार्वजनिक प्रसारक एनएचके के तटीय इलाकों में आपातकालीन अलर्ट जारी किया है। हचिनोहे बन्दरगाह से जहाजों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित समुद्र में भेज दिया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि सुनामी की लहरें जल्द ही तट से टकरा सकती है। इसलिये लोग समुद्र के पास बिलकुल नहीं जाये। इवाते और आसपास के इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने काकाम युद्धस्तर पर चल रहा है।
ट्रेन सर्विस प्रभावित
क्योडो न्यूज एजेंसी अनुसार टोक्यों से ओमोरी तक चलने वाली बुलेट ट्रेनें तत्काल रोक दी गयी है। कई जगहों पर इमारतों और सड़कों को नुकसान पहुंचने की भी खबरें है। रेलवे स्टाफ ने पटरियों और स्टेशनों की जांच में जुटा है। ताकि सेवाओं को सुरक्षित तरीके से बहाल किया जा सके। भले ही होक्काइडो और तोहोकू इलाके में कोई परमाणु संयंत्र वर्तमान में संचालित नहीं है। लेकिन सावधानी के तौर पर इनकी जांच शुरू कर दी गयी है। तोहोकू इलेक्ट्रिक पॉवर वर्तमान में बन्द पड़े है। ओनागवा परमाणु संयंत्र का निरीक्षण कर रही है। ताकि भूकमप या सुनामी से हुए किसी भी संभावित नुकसान का पता लगाया जा सके। टोक्यों इलेक्ट्रिक पॉवर कम्पनी भी अपनी बिजली लाइनों और अन्य सुविधाओं का आकलन कर रही है।

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US नेवी और ईरान के बीच जंग फिर से शुरू, नेवी ने पकड़ा तेहरान का कार्गो जहाज

नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता शुरू होने के पहले विफल होती दिखाई दे रही है। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ट्रूथ पर बताया है कि यूएस नेवी ने ओमना की खाड़ी में अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने का प्रयास किया तो एक ईरान झंडे वाली कार्गो जहाज का कब्जे में ले लिया है। उधर, ईरान ने वोट ड्रोन से अमेरिकी नेवी पर पलटवार का दावा किया है।
जब तक नाकेबंदी रहेगी, मतभेद रहेगा
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज को कब्जे में लिए जाने की घटना पर पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है । उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक नौसैनिक नाकाबंदी रहेगी, तब तक मतभेद बने रहेंगे।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट साझा कर लिखा, ‘आप अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते नहीं रह सकते, नाकाबंदी को और सख्त नहीं कर सकते, ईरान को और युद्ध अपराधों की धमकी नहीं दे सकते, अनुचित मांगों पर अड़े नहीं रह सकते, बयानबाजी से काम नहीं चला सकते और ‘कूटनीति’ का दिखावा नहीं कर सकते। जब तक नौसैनिक नाकाबंदी रहेगी, तब तक मतभेद बने रहेंगे।’

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सैटेलाइट फोन-दो अमेरिकी नागरिकों से श्रीनगर एयरपोर्ट सुरक्षा जांच में मिला सैटेलाइट फोन

श्रीनगर. दो अमेरिकी नागरिकों को श्रीनगर एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान हिरासत में लिया गया है। उनके सामाने की जांच में एक गार्मिन सैटेलाइट फोन मिला है। पहले एयरपोर्ट सुरक्षा ने उनसे पूछताछ की और फिर उन्हें पुलिस को सौंप दिया गया है। जिसके बेग से फोन मिला है। उसका नाम जैफरी स्कॉट है। 2 अमेरिकी के मोंटाना राज्य का निवासी है। एयरपोर्ट पर रूटीन सुरक्षा चैकिंग के दौरान जब इन दोनों अमेरिकी नागरिकों का सामान स्कैन किया गया तो एक बैंग में गार्मिन कम्पनी का सैटेलाइट फोन मिला है। गार्मिन एक जानी-मानी कम्पनी है। जो जीपीएस और सैटेलाईट डिवाइस बनाती है। सुरक्षाकर्मियों ने दोनों को तत्काल रोका और शुरूआती पूछताछ की। जबाव संतोषजनक नहीं होने पर दोनों पुलिस के हवाले कर दिया गया। अभी पुलिस आगे की जांच कर रही है।
कौन है जेफरी स्कॉट
जिस शख्स के बैग से सैटेलाइट फोन बरामद हुआ हैै उसका नाम जेफरी स्कॉर्ट है। वह अमेरिका के मोंटाना राज्य से हैं। मोंटाना अमेरिका का एक पहाड़ी राज्य है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि दोनों अमेरिकी श्रीनगर किस मकसद से आये थे। सैटेलाईट फोन उनके पास क्यों था। यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी भारत के अलग-अलग एयरपोर्ट पर अमेरिकी नागरिकों को सैटेलाइट फोन के साथ पकड़ा जा चुका है। कई बार विदेशी पर्यटक यह जाने बिना भारत आ जाते हैं कि यहां सैटेलाइट फोन प्रतिबंधित है। लेकिन कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में ऐसे मामलों को सुरक्षा एजेंसियां बहुत गंभीरता से लेती है।

 

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34 वर्षो के बाद इजरायल-लेबनान के नेता, दिनों देशों के बीच हो गया सीजफायर

नई दिल्ली. युद्ध से जूझ रहे पश्चिम एशिया से एक और अच्छी खबर आयी है। लेबनान और इजरायल ने 10 दिनों के संघर्षविराम की घोषणा की है। इस सीजफायर का ऐलान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस सीजफायर का ऐलान करते हुए कहा है कि अभी-अभी मेरी लेबनान के अत्यंत सम्मानित राष्ट्रपति जोसेफ ऑन और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बहुत ही बेहतरीन चर्चा हुई है। इन दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई है कि अपने देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिये औपचारिक रूप से 10 दिनों के युद्धविराम की शुरूआत करेंगे। अमेरिकी समय के अनुसार यह युद्धविराम शाम 5 बजे से लागू होगा।
इजरायली हमले में लेबनान में तबाही
इस दौरान इजरायल की तरफ से लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले की वजह से लेबनान में भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरूवार का बताया कि इजरायली हमलों में मारे गये लेबनानी नागरिकों की कुल संख्या बढ़कर 2,196 हो गयी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि 2 मार्च को इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच ताजा युद्ध शुरू होने के बाद से मारे गये लोगों में 260 महिलायें और 172 बच्चे शामिल है।इसके अलावा 7,185 लोग घायल हुए है। इजरायल की तरफ से ताजा सैन्य कार्यवाही तब शुरू हुई। जब हिज्बुल्लाह ने अपने मुख्य सहयोगी और संरक्षक ईरान के साथ एकजुटता दिखाते हुए उत्तरी इजरायल की ओर रॉकेट दागे। लेबनान और इजरायल ने मंगलवार को सीधी चर्चा शुरू की। जो 1993 के बाद अपनी तरह की पहली चर्चा को उम्मीद है कि इन चर्चा से युद्ध समाप्त हो सकता है।

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ग्वादर में चीन-पार्किस्तान से निपटने के लिये बलोचों ने नेवी बनाकर हमले शुरू किये

नई दिल्ली. पाकिस्तान का ब्लोचिस्थान लम्बे समय से गरीबी और अस्थिरता का शिकार रहा है। लेकिन जब चीन ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के माध्यम से इस इलाके को अपने वैश्विक व्यापार नेटवर्क का हिस्स बनाने की योजना बनाई है।तब इसे पाकिस्तान के लिये गेमचेंजर बताया गया है। अरबों डॉलर के निवेशन, नयी सड़कें, रेल नेटवर्क और बंदरगाह के वादों के बीच एक नयी उम्मीद जरूर बनी है। लेकिन इसी के साथ एक नया संघर्ष भी पनप चुका था। यह संघर्ष सिर्फ विकास बनाम पिछड़ावन का नहीं, बलिक् पहचान, अधिकारी और संसाधनों पर नियंत्रण का बन गया है।
बलोचिस्तान के दक्षिण में स्थित ग्वादर पोर्ट इस पूरे विवाद का केन्द्र है। चीन इसे अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई प्रोजेक्ट) का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। जहां से वह सीधे अरब सागर तक पहुंच बना सकता है। इससे चीन को मध्यपूर्व के तेल और वैश्विक व्यापार तक सीधी पहुंच मिलती है।लेकिन बलोचों की नजर में यह प्रोजेक्ट उनके लिये नहीं है। उनका मानना है कि उनकी जमीन ली जा रही है। उसके संसाधनों का उपयोग बाहरी ताकतें कर रही है। बदले में उन्हें न तो रोजगार मिल रहा है। क्षेत्र का विकास हो रहा है।ग्वादर शहर जो कभी एक शांत तटीय कस्बा था। अबवहां भारी सैन्य मौजूदगी है। जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और बढ़ गयी है।
सीपीईसी में निवेश, कर्ज और बलोचों की नाराजगी
लगभग 60 अरब डीलर डॉलर से अधिक निवेश वाला सीपीईसी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को नयी दिशा देने के लिये लाया गया था। लेकिन समय के साम इसके कई नकारात्मक पहलू भी सामने आये। प्रोजेक्ट्स में अधिकतर काम चीनी कम्पनियों और इंजीनियरों को मिला है। जबकि स्थानीय लोगों को सीमित मौके ही मिले हैं।
समुद्र तक पहुंचा संघर्ष, BLA ने बनाई नौसेना
हालात तब और गंभीर हो गए जब BLA ने अपने नए नौसैनिक विंग हम्माल समुद्री रक्षा बल (HMDF) के गठन का ऐलान किया. यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि रणनीतिक बदलाव है. जिवानी क्षेत्र में गश्ती नौका पर हमले का दावा इस बात का संकेत है कि अब बलोच विद्रोह सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रह गई हैं।  अगर यह रणनीति आगे बढ़ती है, तो ग्वादर पोर्ट और समुद्री व्यापार दोनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता हैं।  यह चीन के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि उसका पूरा निवेश इसी क्षेत्र की स्थिरता पर टिका हुआ हैं।
क्या CPEC पाकिस्तान के लिए बन गया बोझ?
जिस CPEC को पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ कहा जा रहा था, वही अब उसके लिए चुनौती बना हुआ है. कर्ज का बोझ, सुरक्षा खर्च और प्रोजेक्ट्स की धीमी प्रगति ने इस प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  “क्राउन ज्वेल” कहा जाने वाला ग्वादर पोर्ट अब तक अपेक्षित व्यापारिक गतिविधि नहीं ला पाया हैं।  इससे चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए चिंता बढ़ गई हैं।

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ईरान के परमाणु बम का कच्चा किसके हवाले, रूस रखने को तैयार, यूएस छीनने को तैयार, ईरान 5 वर्ष के लिये सस्पेंड

नयी दिल्ली. ईरान-अमेरिका तनाव इस समय चरम पर है। होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसैनिक ब्लॉकेड शुरू हो चुका है। इस दौरान दुनिया का ध्यान ईरान के परमाणु बम बनाने वाले कच्चे माल यानी एनरिच्ड यूरेनियम पर टिका हुआ है। ईरान के नजदीक 450 किमी एनरिच्ड यूरेनियम है जो हफ्तों में हथियार ग्रेड बनाया जा सकता है। 10 से अधिक परमाणु बम बनाने लायक मैटेरियल ईरान के पास पड़ा है। अब प्रश्न यह है कि यह यूरेनियम किसके हवाले हागी? रूस इसे रखने के लिये तैयार है। ईरान 5 साल के लिये अपना न्यूक्लीयर प्रोग्राम सस्पेंड करने के लिये तैयार है। लेकिन अमेरिका इसे छीनने या पूरी तरह हटाने पर अड़ा हुआ है। यह मुद्दा पाकिस्तान में हुई हालियां शांति की बातचीत टूटने और होर्मूज ब्लॉकेड की मुख्य वजह है।
क्या है एनरिच्ड यूरेनियम
ईरान काफी समय से कहता आ रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली और मेडीकल के लिये है। लेकिन अमेरिका और इजरायल इसे परमाणु हथियार बनाने की तैयारी मानते है। ईरान के पास 60 प्रतिशत तक एनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक है। सामान्य बिजली प्लांट के लिये 3-5 प्रतिशत एनरिचमेंट काफी होता है। लेकिन 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंचते ही यह बम बनाने लायक हो जाता है।
रूस क्यों तैयार है यूरेनियम रखने को?
रूस ने सोमवार 13 अप्रैल 2026 को फिर से अपना ऑफर दोहराया है । क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही अमेरिका और क्षेत्रीय देशों से बात कर चुके है।  रूस ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को अपने यहां सुरक्षित रखने को तैयार है।  रूस का कहना है कि यह शांति समझौते का हिस्सा हो सकता है।   रूस दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार रखने वाला देश है और ईरान का पुराना दोस्त भी है।  रूस को लगता है कि अगर वह यह सामग्री रख ले तो ईरान-अमेरिका युद्ध रुक सकता है।  रूस की मध्यस्थ की भूमिका मजबूत हो जाएगी । रूस ने स्पष्ट किया कि ऑफर अब भी टेबल पर है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

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युद्ध के जख्मों को भरने में जुटा ईरान, 60 दिनों में 80% एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक करने का रखा लक्ष्य

तेहरान. अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान पहुंचा है। ईरान अब तेजी के साथ इस नुकसान से उबरने के लिये कदम उठा रहा है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज एजेंसी कको बताया कि देश आने-वाले एक से 2 माह में अपनी क्षतिग्रस्त रिफाइनिंग और डिस्ट्रीब्यूशन क्षमता को 70-80 प्रतिशत तक बहाल करने का अनुमान लगा रहा है। ईरान के डिप्टी ऑयल मिनिस्टर मोहम्मद सादिक अजीमीफर ने बताया है कि क्षतिग्रस्त उर्जा ढाचों पर मरम्मत कार्य शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा है कि टेक्नीकल टीमें लगतार काम कर रही है। चरणबद्ध तरीके से उत्पादन को स्थिर करने और सिस्टम को दोबारा चालू करने की प्रयास जारी है। अजीमीफर के अनुसार, लवन रिफायनरी का एक हिस्सा लगभग 10 दिनों के अन्दर फिर से चालू होने की संभावना है। इसके बाद अन्य यूनिट्स और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भी धीरे-धीरे बहार किये जायेंगे।
मोहम्मद सादिक अजीमीफर ने बताया है कि ईरान का लक्ष्य अगामाी 2 माह के अन्दर अपवने रिफायनिंग और सप्लाई सिस्टम को युद्ध से पूर्व के स्तर के नजदीक लाना है। हालांकि पूरी तरह से सामान्य स्थिति बहाल होने में रिपेयरिंग की रफ्तार और टेक्नीकल टीमों द्वारा ऊर्जा ढांचों का हुए नुकसान का आकलन अहम भूमिका निभायेगी। अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों के चलते ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा था। जिससे ऑयल और गैस प्रॉडक्शन और सप्लाई पर प्रभाव पड़ा है।
अब सरकार और तकनीकी टीमें मिलकर इस नुकसान की भरपाई करने और ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य करने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं. अजीमीफर का मानना है कि अगर मरम्मत कार्य तय समय पर पूरा होता है, तो ईरान जल्द ही अपनी ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने में सफल हो सकता है, जिससे वैश्विक तेल बाजार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने हाल के युद्ध में ईरान की कई तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया है. इससे पेट्रोलियम उत्पादों के प्रोडक्शन पर असर पड़ा है. हमलों में ईरान के ऑयल डिपो और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क (पाइपलाइन, टर्मिनल) को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. कुछ गैस प्रोसेसिंग और ट्रांसमिशन फैसिलिटी पर भी हमले हुए हैं, जिससे गैस सप्लाई बाधित हुई है।
ऑयल एक्सपोर्ट से जुड़े ईरान के समुद्री टर्मिनल और पोर्ट को भी अमेरिका और इजरायल ने निशाना बनाया है। इन हमलों का मकसद ईरान की तेल-गैस उत्पादन क्षमता और निर्यात क्षमता को कमजोर करना था।  जिससे तंगी के दौर से गुजर रही उसकी अर्थव्यवस्था और प्रभावित हो।

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इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान हुई फेल, इसके बाद भी डींग हांक रहा है पाकिस्तान

नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिये पाकिस्तान ने मध्यस्थता का रोल अदा किया। इस्लामाबाद में शांतिवार्ता का आयोजन  किया गया। हालांकि यह बातचीत बेनतीजा साबित हुई। इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी पीठ थपथपाने से पीछे नहीं हट रहा है। विदेश मंत्री इशाक डार ने चर्चा में शामिल होनेे लिये अमेरिका और ईरान के प्रति आभार जताया है।
शांतिवार्ता के बाद इशाक डार ने पत्रकारवार्त की। इस बीच अपने बयान में उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान इन शांतिवार्ताओं में मेजबानी करके सम्मानित महसूस कर रहा है। डार ने कहा है कि हम इस्लामाबाद में शांतिवार्ता आयोजित करने के लिये ईरान और अमेरिका का शुक्रिया अदा करते हैं। यह न सिर्फ मिडल ईस्ट बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरिता के लिये एक अच्छा संकेत है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने इस बीच अनुमान जताया है कि दोनों पक्ष भविष्य में भी सीजफायर पर समझौतों को जारी रखेंगे। उन्होंने शांति केलिये पाकिस्तान की कोशिशें जारी रहने का भरोसा दिलाया है। उन्होने आगे बताया है कि इस पूरी शांतिवार्ता के पीछे पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की महत्वपूर्ण भूमिका रहीं है। उन्होंने कहा है कि आसिम मुनीर ने सीजफायर करने के लिय कई दौर की वार्ताओं में मदद की । आपको बता दें कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटों तक चर्चाओं का दोर चला। इस बीच दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर सहमति भी बनी है। लेकिन परमाणु हथियार और स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बात नहीं पाई।
फेल क्यों हुई शांति वार्ता
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि वह बाचीत की नीयत से वार्ता में शामिल हुए थे। लेकिन ईरान अमेरिका की शर्ते मानने पर राजी नहीं है। ऐसे में वेंस अब अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद से अमेरिका के लिये रवाना हो गये। वहीं, ईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिका अपनी शर्तो में बहुत कुछ मांग रहा था।

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अमेरिका की धरती पर लौट आये अंतरिक्ष यात्री, 5.37 बजे प्रशांत महासागर में टच डाउन किया

नई दिल्ली. नासा का आर्टेमिस, मिशन पूरा हो चुका है ओरियन स्पेसक्राफ्ट 11 अप्रैल की सुबह 5.37 बजे अमेरिका के सैन डिएगो के तट के पास समुद्र में उतर चुका है। चारों अंतरिक्ष यात्री चन्द्रमा के चारों ओर घूमकर अब सुरक्षित घर लौट आये है। यह मिशन 54 वर्षो के बाद इंसानों को चन्द्रमा के के पास ले जाने वाला पहला क्रूड मिशन है। प्रशांत महासागर के सैन डिएगो (कैलीफोर्निया, अमेरिका) के तट के पास समुद्र में उतारा है।
सुरक्षित उतरे सभी अंतरिक्ष यात्री
सभी अंतरिक्ष यात्री प्रशांत महासागर के सैन डिएगो के तट पर सुरक्षित लैंड किये हैं। रिकवरी टीमें ओरियन स्पेसक्राफ्ट की तरफ बढ़े है। एयरबैग्स समुद्र में तैर रहा है। नासा का आर्टेमिस मिशन कम्पलीट हो चुका है। अमेरिका के सैन डिएगो के तट के पास समुद्र उतर चुका है। धरती पर उतरने के दौरान 6 मिनट का कम्युनिकेशन ब्लैक आउट हो गया है। यानी अंतरिक्ष यात्री मिशन कंट्रोल से बात नहीं कर पा रहे हैं।