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इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान हुई फेल, इसके बाद भी डींग हांक रहा है पाकिस्तान

नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिये पाकिस्तान ने मध्यस्थता का रोल अदा किया। इस्लामाबाद में शांतिवार्ता का आयोजन  किया गया। हालांकि यह बातचीत बेनतीजा साबित हुई। इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी पीठ थपथपाने से पीछे नहीं हट रहा है। विदेश मंत्री इशाक डार ने चर्चा में शामिल होनेे लिये अमेरिका और ईरान के प्रति आभार जताया है।
शांतिवार्ता के बाद इशाक डार ने पत्रकारवार्त की। इस बीच अपने बयान में उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान इन शांतिवार्ताओं में मेजबानी करके सम्मानित महसूस कर रहा है। डार ने कहा है कि हम इस्लामाबाद में शांतिवार्ता आयोजित करने के लिये ईरान और अमेरिका का शुक्रिया अदा करते हैं। यह न सिर्फ मिडल ईस्ट बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरिता के लिये एक अच्छा संकेत है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने इस बीच अनुमान जताया है कि दोनों पक्ष भविष्य में भी सीजफायर पर समझौतों को जारी रखेंगे। उन्होंने शांति केलिये पाकिस्तान की कोशिशें जारी रहने का भरोसा दिलाया है। उन्होने आगे बताया है कि इस पूरी शांतिवार्ता के पीछे पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की महत्वपूर्ण भूमिका रहीं है। उन्होंने कहा है कि आसिम मुनीर ने सीजफायर करने के लिय कई दौर की वार्ताओं में मदद की । आपको बता दें कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटों तक चर्चाओं का दोर चला। इस बीच दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर सहमति भी बनी है। लेकिन परमाणु हथियार और स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बात नहीं पाई।
फेल क्यों हुई शांति वार्ता
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि वह बाचीत की नीयत से वार्ता में शामिल हुए थे। लेकिन ईरान अमेरिका की शर्ते मानने पर राजी नहीं है। ऐसे में वेंस अब अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद से अमेरिका के लिये रवाना हो गये। वहीं, ईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिका अपनी शर्तो में बहुत कुछ मांग रहा था।

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अमेरिका की धरती पर लौट आये अंतरिक्ष यात्री, 5.37 बजे प्रशांत महासागर में टच डाउन किया

नई दिल्ली. नासा का आर्टेमिस, मिशन पूरा हो चुका है ओरियन स्पेसक्राफ्ट 11 अप्रैल की सुबह 5.37 बजे अमेरिका के सैन डिएगो के तट के पास समुद्र में उतर चुका है। चारों अंतरिक्ष यात्री चन्द्रमा के चारों ओर घूमकर अब सुरक्षित घर लौट आये है। यह मिशन 54 वर्षो के बाद इंसानों को चन्द्रमा के के पास ले जाने वाला पहला क्रूड मिशन है। प्रशांत महासागर के सैन डिएगो (कैलीफोर्निया, अमेरिका) के तट के पास समुद्र में उतारा है।
सुरक्षित उतरे सभी अंतरिक्ष यात्री
सभी अंतरिक्ष यात्री प्रशांत महासागर के सैन डिएगो के तट पर सुरक्षित लैंड किये हैं। रिकवरी टीमें ओरियन स्पेसक्राफ्ट की तरफ बढ़े है। एयरबैग्स समुद्र में तैर रहा है। नासा का आर्टेमिस मिशन कम्पलीट हो चुका है। अमेरिका के सैन डिएगो के तट के पास समुद्र उतर चुका है। धरती पर उतरने के दौरान 6 मिनट का कम्युनिकेशन ब्लैक आउट हो गया है। यानी अंतरिक्ष यात्री मिशन कंट्रोल से बात नहीं कर पा रहे हैं।

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पाकिस्तान पहुंचा ईरानी प्रतिनिधिमंडल, शर्ते मानने पर ही होगी आगे चर्चा

नई दिल्ली. अमेरिका के साथ शांति वार्ता के लिये ईरान का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच गया है ईरानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ की अगुआई में यह डेलीगेशन इस्लामाबाद पहुंच गया है। इसे अमेरिका -ईरान के बीच तनाव खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
हालाकि, इस दौरान ईरान ने साफ किया है कि वह बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब वॉशिंगटन, तेहरान की पूर्व शर्तो की स्वीकार करेगा। इस डेलीगेशन में वरिष्ठ राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक अधिकारी शामिल है। जिनमें ईरान के विदेश मंत्री, रक्षा परिषद के सचिव, केन्द्रीय बैंक के गर्वनर और संसद के कई सदस्य भी शामिल है। अस्थाई युद्ध विराम और दोनों पक्षों के बीच बने अविश्वास के माहौल में पाकिस्तान इस उच्च स्तरीय बैठकी की मैजवानी कर रहा है। इस दौरान ईरान ने बार-बार जोर दिया है कि ओपचारिक बातचीत शुरू करने से पहले कुछ शर्तो को पूरा करना जरूरी है।
इनमें क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे शामिल किये गये है। यह दर्शाता है कि चर्चा में शामिल होने के बावजूद ईरान का रूख सख्त बना है। वहीं, अब लेबनाना और इजरायल ने भी सहमति जताई है। वह मंगलवार को को यूएस स्टेट डिपार्टमेंट में पहली बैठक करेंगे। इस बैठक में युद्धविराम की घोषणा और औपचारिक वार्ता पर चर्चा होगी।
शांति वार्ता पर पाक पीएम बोले
पाकिस्तान केक पीएम शहबाज शरीफ ने कहा है कि अमेरिका -ईरान वार्ता की मेजबानी करना सिर्फ पाकिस्तान के लिये गर्व की बात नहीं है, बल्कि पूरे मुस्लिम विश्व के लिये भी गर्व की बात है। इसके साथ ही पाकिस्तान के पीएम ने ईरान और अमेरिका के नेतृत्व का धन्यवाद भी किया है कि उन्होंने पाकिस्तान के आग्रह पर युद्धविराम के लिये सहमति जताई और शांति वार्ता के लिये भी तैयार हुए है। शांति वार्ता से पहले शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती का ऐलान किया है। अब डीजल 520 रूपयचे प्रतिलीटर से घटकर 385 रूपये प्रतिलीटर हो गया है जबकि डीजल की कीमत में भी 12 रूपये प्रतिलीटर की कटौती की गयी है।

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झुक गये डोनाल्ड ट्रम्प, ईरान की शर्तो पर हुआ समझौता, 2 हफ्ते के लिये हुआ सीजफायर

नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिये 2 हफ्तों के सीजफायर के प्रस्ताव पर सहमति बन गयी है। इस 2 तफरा सीजफायर (संघर्ष विराम) की शर्त है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को तत्काल पूरी तरह और सुरक्षित रूप से खोल दें। ईरान ने भी इस प्रस्ताव की स्वीकार कर लिया है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई बड़े मुद्दों पर गहरी खाई बनी हुई है। हालांकि ट्रम्प न पहले ईरान के इस 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को भा्रमक बताया था। लेकिन पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्डछ मार्शल असीम मुनीर के आग्रह के बाद इस शांति प्रस्ताव को काम करने लायक मानते हुए सैन्य अभियान रोकने का फैसला किया है। जिस पर विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प ईरान की शतों पर झुक गया है।
वहीं, इस युद्ध विराम के बाद वैश्विक बजारों में तेज की कीमतें 100 डॉलर प्रतिबैरल से नीचे गिर गया है। सीजफायर का ऐलान करते हुए ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल मीडिया पर लिखा है कि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ऑर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से चचा्र के बाद मैंने ईरान पर हमलों को 52 सप्ताह के लिये रोकने का फैसला किया है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने पर सहमति जताई है। यह 2 तराफा सीजफायर होगा। डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर चुका है। ईरान से मिला 10 सूत्रीय प्रस्ताव स्थाई समझौते के लिये काम करने योग्य आधार है। उन्होंने आगे कहा है कि पिछले विवाद के करीब सभी मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। 2 हफ्ते समय स्थाई समझौते का अंतिम रूप देने के लिये पर्याप्त होगा।
ईरान की शर्तें
वहीं, ईरान ने शांति के लिए जो प्रस्ताव पेश किया है, उसमें कुछ ऐसी मांगें हैं जो अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती रही हैं. ईरान के मुताबिक, इन शर्तों पर अमल ही स्थायी समाधान का रास्ता है।
अमेरिका द्वारा हमला नहीं करने (Non-aggression) की गारंटी।
परमाणु कार्यक्रम में एनरिचमेंट की मंजूरी
होर्मुज पर नियंत्रण: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रहना और जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलना.
ईरान पर लगे सभी प्राथमिक और आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और IAEA के सभी प्रस्तावों को खत्म करना.
युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजा (compensation).
क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी.
लेबनान में इस्लामिक रेसिस्टेंस (हिज्बुल्लाह) के खिलाफ युद्ध खत्म करना.
ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने घोषणा की है कि ईरान की सशस्त्र सेना दो हफ्ते के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगी । ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव पर बातचीत की इच्छा जताई है. अराघची ने स्पष्ट किया कि समन्वय के साथ तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए कमर्शियल जहाजों को रास्ता दिया जाएगा. ईरान तभी शांत रहेगा, जब उस पर कोई हमला नहीं किया जाएगा ।
‘लेबनान में कोई समझौता नहीं’
उधर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने सीजफायर का समर्थन किया, लेकिन स्पष्ट कर दिया कि यह समझौता लेबनान को शामिल नहीं करता।  इजरायल हिजबुल्लाह के खिलाफ दक्षिण लेबनान में अपना अभियान जारी रखेगा. ईरान की मांग थी कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल हो, लेकिन इजरायल ने इसे खारिज कर दिया।
इस्लामाबाद में होगी वार्ता
इस पूरे सीजफायर के पीछे पाकिस्तान की अहम भूमिका बताई जा रही है और इसी वजह से अमेरिका-ईरान की बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को चुना गया है। शुक्रवार 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच आगे की वार्ता होगी।  उधर, युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 13 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड गिरकर 94.74 डॉलर और अमेरिकी क्रूड 96.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. एशियाई और अमेरिकी शेयर बाजारों में भी इस खबर के बाद जबरदस्त उछाल देखा गया है. दुनिया भर के निवेशकों ने युद्ध की आशंका कम होने पर राहत की सांस ली है।

 

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ट्रम्प ने वेपन सिस्टम ऑफिसर को बचाने के लिये 155 फायटर प्लेन उतारे, दुश्मन की धरती पर 48 घंटे लड़ा अमेरिकी सैनिक

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आग धधक रही है। इस युद्ध के बीच अमेरिकी एफ-15 फायटर जेट ईरान की जमीन पर गिर गया था। लेकिन जो हुआ उसके बाद वह किसी फिल्म की स्टोरी से कम भी नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वयं सामने आकर बताया कि उनकी सेना ने कैसे दुश्मन के इलाके में घुसकर अपने घायल सैनिक को वापिस लाये। पिछले गुरूवार की रात अमेरिकी एयरफोर्स का एक एफ-15 फायटर जेट ईरान के अन्दर गिर गया। यह विमान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत मिशन पर था। विमान में 2 लोग सवार थे। जिनमें एक पायलट और दूसरा वेपन सिस्टम ऑफिसर (डब्ल्यूएसओ) जब विमान गिरा तो दोनों ने इजेक्ट कर लिया। यानी विमान से बाहर निकले ओर दोनों अलग -अलग जगहों पर जा गिरे। विमान की रफ्तार इतनी अधिक कि कुछ सेकेण्ड के फर्क से दोनों के बीच कई किलोमीटर की दूरी बन गयी।
पायलट को पहले बचाया
पहली रेस्क्यू टीम ने पायलट को ढूंढ कर उसे एचएच-60 जॉली ग्रीन हेलीकॉप्टर की सहायता से सुरक्षित बाहर निकल लिया और डब्ल्यूएसओ अभी भी दुश्मन के इलाके में फंसाथा और हालात बेहद खतरनाक थे।
155 विमान उतार दिए एक जान बचाने के लिए
जब दूसरे रेस्क्यू ऑपरेशन की बारी आई तो अमेरिका ने पूरी ताकत झोंक दी. इस मिशन में कुल 155 विमान शामिल थे, जिनमें 4 बॉम्बर, 64 फाइटर जेट, 48 रिफ्यूलिंग टैंकर और 13 रेस्क्यू विमान थे।  दुश्मन को उलझाने के लिए अलग-अलग जगहों पर टीमें एक्टिव दिखाई गईं ताकि असली जगह का पता न चले. भारी गोलीबारी के बीच सेना ने उस अधिकारी को सुरक्षित निकाल लिया और बिना किसी बड़े नुकसान के वापस आ गई।  WSO यानी दूसरा अधिकारी बुरी तरह घायल था. उसके आसपास ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और स्थानीय आतंकी संगठन मौजूद थे. ऐसे में उसने अपनी ट्रेनिंग याद की और खुद को बचाने की कोशिश शुरू की.वो घायल होने के बावजूद पहाड़ी इलाके में ऊपर की तरफ चढ़ता रहा ताकि दुश्मन उस तक न पहुंच सके.खून बह रहा था, फिर भी चट्टानें चढ़ता रहा. खुद अपने जख्मों पर पट्टी बांधी और अपने पास मौजूद एक खास लोकेशन ट्रांसमीटर डिवाइस की मदद से अमेरिकी सेना को अपनी जगह की जानकारी देता रहा. करीब 48 घंटे तक वो दुश्मन की धरती पर छिपकर बचता रहा ।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना का एक ही सिद्धांत है, हम अपने किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ते. उन्होंने बताया कि पिछले 37 दिनों में अमेरिका ने ईरान के ऊपर 10,000 से ज्यादा उड़ानें भरी हैं और 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं।  इतने बड़े ऑपरेशन में यह पहली बार था जब कोई अमेरिकी विमान गिरा, लेकिन दोनों सैनिकों को सुरक्षित वापस लाया गया.ट्रंप ने इस ऑपरेशन को सैन्य इतिहास के सबसे बड़े और जोखिम भरे रेस्क्यू मिशनों में से एक बताया और कहा कि यह हमेशा याद रखा जाएगा ।

 

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ईरान ने मार गिया या अमेरिका स्वयं क्रैश किया सी-130 फिर भी हेलीकॉप्टर की तबाही पर सस्पेंस बरकरार

नयी दिल्ली. मिडिल ईस्ट में जारी जंग के दौरान अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आखिर सी-130 हरकुलस और ब्लैक हॉक्स हेलीकॉप्टरर्स को कितने ध्वस्त किया है। ईरान और अमेरिका दोनों के अलग-अलग दावों ने इस घटना को रहस्य बना दिया है। ईरान का दावा है कि उसने इस्फहान इलाके में अमेरिकी सैन्य मिशन के दौरान 2 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक सी-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को मार गिराया है। ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के अनुसार यह सभी विमान एक रेस्क्यू ऑपरेशन का भाग थे। इसी ऑपरेशन के तहत अमेरिका का दावा है कि उसने अपने पायलट को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है। ईरान के सरकारी मीडियाने इस घटना के कुछ वीडियो और तस्वीरें भी जारी की है। जिनमें जले हुए मलबे और रेगिस्तान में उठता धुआं दिखाई दे रहा है। आइआरजीसी का कहना है कि ज्वॉइंट ऑपरेशन के दौरान दुश्मन के कई उड़ने वाले ऑबजेक्शन को नष्ट कर दिखा गया है।
क्रू मेम्बर का रेस्क्यू ट्रम्प ने किया कंफर्म
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस रेस्क्यू मिशन को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा है -हमने उसे ढूंढ निकाला। पिछले ही कुछ घंटों में अमेरिमकी सेना ने इतिहास के सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन में से एक को अंजाम दिया है। वह अब पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि अमेरिका के सेंट्रल कमांड कीओर से अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है। विमान कैक्से तबाह हुए है। यही कारण है कि इस पूरे मामले पर सस्पेंस बना हुआ है। एक ओर ईरान इसे अपनी बड़ी सैनय कामयाबी बता रही है। दूसरी ओर अमेरिकी पक्ष इसे रणनीतिक फैसला मान रहा है।
अमेरिका का दावा- विमानों को किया गया ध्वस्त
दूसरी तरफ, अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट इस कहानी को पूरी तरह पलट देती है।  ये विमान ईरान की गोलीबारी से नहीं गिरे, बल्कि अमेरिका ने खुद इन्हें नष्ट किया. बताया जा रहा है कि जब अमेरिकी कमांडो टीम अपने लापता पायलट को बचाने के लिए ऑपरेशन चला रही थी, तब 2  ट्रांसपोर्ट विमान एक दूरदराज के बेस पर फंस गए।  ऐसे में कमांडरों ने फैसला लिया कि इन्हें दुश्मन के हाथ लगने देने से बेहतर है कि खुद ही उड़ा दिया जाए । इसके बाद 3 नए विमान भेजे गए और सभी अमेरिकी सैनिकों और पायलट को सुरक्षित निकाल लिया गया । यानी, यह पूरी कार्रवाई एक रणनीतिक कदम हो सकती है, ताकि संवेदनशील सैन्य तकनीक ईरान के हाथ न लगे।  यह घटना तब हुई जब हाल ही में ईरान ने F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया था।  इसी विमान के एक क्रू मेंबर को बचाने के लिए यह हाई-रिस्क ऑपरेशन चलाया गया था।

 

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हमने खोज निकाला ईरान से रेस्क्यू कर ले दूसरा पायलट

नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने एक बेहद खतरनाक और मुश्किल भरे सैन्य अभियान का अंजाम देते हुए अपने वायु सैनिक का ईरान की जमीन से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वयं इसकी पुष्टि करते हुए अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी रेस्क्यू मिशनों में से एक बताया है।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब अमेरिकी एयरफोर्स का एफ-15ई स्ट्राइक ईगल शुक्रवार को ईरान के दक्षिणी इलाके में मार गिराया गया। विमान में 2 क्रू मेम्बर थे। एक पायलट और दूसरा वेपन सिस्टम अधिकारी दोनों ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और जमीन पर उतरने के बाद एक-दूसरे से संपर्क भी बनाये रखा । पायलट को तो कुछ घंटों में रेस्क्य ूकर लिया। लेकिन दूसरे क्रू मेम्बर को ढूंढना बेहद मुश्किल भरा हो गया था। वह पहाड़ी इलाके में छिपकर ईरानी सुरक्षाबलों से बचता रहा। लगभग एक दिन से अधिक समय तक वह दुश्मन के इलाके में अकेला रहा। जहां पर पल पकड़े जाने का खतरा था।
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इस मिशन की जानकारी देते हुए लिखा कि हमने उसे ढूंढ निकाला है। उन्होंने आगे कहा कि हमारे इतिहास के सबसे साहसी सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक है। यह बहादुर सैनिक दुश्मन के इलाके में ईरान के खतरनाक पहाड़ों में छिपा हुआ था। दुश्मन उसे लगातार ढूढ रहे थे। ट्रम्प ने पायलट की हालत के बारे में बताते हुए कहा है कि उसे कुछ चोटें आयी है लेकिन वह बिलकुल ठीक हो जायेगा।
अमेरिका ने पायलट को कैसे किया रेस्क्यू?
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस मिशन को अंजाम देने के लिए स्पेशल फोर्सेज की एक विशेष कमांडो यूनिट को भेजा गया. इस दौरान आसमान से भारी फायर कवर दिया गया और जरूरत पड़ने पर ईरानी बलों को रोकने के लिए एयरस्ट्राइक भी किए गए  ।  बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी बलों ने भारी गोलाबारी की, ताकि रेस्क्यू टीम सुरक्षित तरीके से सैनिक तक पहुंच सके  । इस पूरे ऑपरेशन में अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) की भी अहम भूमिका रही।  अधिकारियों के मुताबिक, CIA ने पहले एक “भ्रम फैलाने वाली रणनीति” अपनाई, जिसमें यह खबर फैलाई गई कि सैनिक को पहले ही ढूंढ लिया गया है। इसके साथ ही अपनी खास तकनीकी क्षमताओं के जरिए उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाया गया और सेना को जानकारी दी गई।

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मिडिल ईस्ट में 3500 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात, ऑपरेशन जोन में पहुंचा यूएसएस त्रिपोली

नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को बड़े स्तर पर बढ़ा दिया है। अमेरिका ने क्षेत्र में 3500 से अधिक सैनिक तैनात किये है। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि आधुनिक युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली अपने निर्धारित ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुका है। जिसमें करीब 2500 मशीन सैनिक सवार है।
आपको बता दें कि युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली एफ-35 स्टील्थ फायटर जेट और ओस्प्रे जैसे एडवांस एयरक्राफ्ट ऑपरेट करने में सक्षम है। इसको पहले जापान में तैनात किया गया था। लेकिन लगभग 2 हफ्ते पहले इसे मिडिल ईस्ट भेजा गया। इसके अलावा यूएसएस बॉक्सर और सैन डिएगो से अन्य नौसैनिक यूनिट्स का भी क्षेत्र मेे भेजा जा रहा है।

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अब 11 मिनट में कार होगी कार फुल चार्ज, चीन ने विकसित की तकनीकी, दूर होगी चार्ज करने की परेशानी

नई दिल्ली. इलेक्ट्रिक कारों को दुनिया भर में बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि अभी भी भारी तादाद में इन्हें ग्राहक नहीं मिल रहे है। इसकी सबसे बड़ी वजह है बैटरी को चार्ज होने में लगने वाला समय और ईवी की रेंज है। जहां पेट्रोल या डीजल कार में कहीं भी फ्यूल डलवाया जा सकता है। वहीं ईवी के चार्जिंग स्टेशन भी कम है।
इसके अलावा ईवी को चार्ज करने में लगने वाला समय अधिक है। इसका समाधान चीनी ऑटोमोबाइल कम्पनी बीजिंग ऑटोमोटिव ग्रुप कम्पनी लिमिटेड (बीएआईसी) ने तलाश लिया है। बीएआईसी ने सोडियम-आयन बैटरी टेक्नोलॉजी के डवलपमेंट में एक अहम कामयाबी का ऐलान किया है। बीएआईसी चीन का एक प्रमुख कार निर्माता है। कम्पनी इलेक्ट्रिक और आईसीई दोनों तरह की कार्स बनाती है। कम्पनी के रीसर्च डिवीजन केअनुसार एक प्रोटोटाइप सोडियम -आयन बैटरी विकसित की गयी है। जिसकी एनर्जी डेंसिटी 170 व्हाटप्रति किलोग्राम है। यह बैटरी 4सी फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है। इसे फुल चार्ज होने में महज 11 मिनट का समय लगेगा। यह चार्जिंग टाईम टेस्टिग कंडीशन का है। रीयल वर्ल्ड में चार्जिंग का समय ज्यादा हो सकता है। इस सिस्टम को अलग-अलग तापमान पर काम करने के लिये डिजाइन किया गया है।
कई कंपनियां कर रही हैं काम
बीएआईसी (BAIC) ने इस प्रोग्राम से जुड़े लगभग 20 पेटेंट फाइल किए है।  ये पेटेंट्स मटेरियल, सेल डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग प्रॉसेस और टेस्टिंग से जुड़े है।  कंपनी चार्जिंग स्ट्रैटेजी, इलेक्ट्रोकेमिकल मॉडलिंग और बैटरी डिग्रेडेशन पर भी काम कर रही है। दूसरी चीनी कंपनियां भी इस टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रही है। फरवरी 2026 में चांगान ऑटोमोबाइल और सीएटीएल ने पहली मास-प्रोड्यूस्ड सोडियम-आयन इलेक्ट्रिक कार पेश की है। इसमें 45 kWh की बैटरी और 400 किमी से ज्यादा की रेंज का दावा किया गया है।  ये कार 2026 मिड तक बाजार में लॉन्च हो सकती है.BAIC (बीजिंग ऑटोमोटिव ग्रुप कंपनी लिमिटेड) की बात करें, तो कंपनी ने अभी तक अपनी सोडियम-आयन बैटरी के कमर्शियल लॉन्च की जानकारी नहीं दी है।  फिलहाल ये टेक्नोलॉजी प्री-कमर्शियल स्टेज में  है।
लो टेम्परेचर में भी करेगी काम
इसे -40 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी का दावा है कि -20 डिग्री सेल्सियस पर भी बैटरी रिटेंशन लगभग 92 परसेंट है।  ये दिखाता है कि कम तापमान में भी इसे इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी ने बताया है कि बैटरी ने इंटरनल वैलिडेशन टेस्टिंग को पास कर लिया है। थर्मल टेस्टिंग में 200 डिग्री सेल्सियस तक के टेम्परेचर पर भी बैटरी स्टेबल थी. ये सोडियम-आयन बैटरी कंपनी की अरोरा बैटरी प्रोग्राम का हिस्सा है।  इसमें लिथियम आयन बैटरी, सॉलिड स्टेट और सोडियम आयन बैटरी शामिल है।  कंपनी ने प्रिजमैटिक सोडियम-आयन सेल्स के लिए मास प्रोडक्शन प्रॉसेस वैलिडेशन भी पूरा कर लिया है।
पूरे चीन में सोडियम आयन बैटरियों को एडिशनल सॉल्यूशन के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर कम लागत और ठंडे मौसम वाले यूजेज के लिए. लिथियम-आयन फॉस्फेट बैटरियों की तुलना में, सोडियम-आयन बैटरियों में रॉ मैटेरियल आसानी से मिल जाता  है।साथ ही इनकी कोल्ड-वेदर परफॉर्मेंस बेहतर होती है।हालांकि एनर्जी डेंसिटी के मामले में ये अभी पीछे है।

 

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दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कैमरे का एक्सेस पाकिस्तान में था, जासूसी कांड में चौकाने वाला खुलासा, 22 आरोपियों की गिरफ्तारी

गाजियाबाद . पाकिस्तान के लिये जासूसी करने वाले नेटवर्क पर कार्यवाही करते हुए गाजियाबाद पुलिस ने फरीदाबाद से नौशाद अली उर्फ लालू को हिरासत में लिया है। नौशाद गांव नचौली में एक पेट्रोल पम्प पर पिछले 3 माह से पंचर बनाने की दुकान चला रहा था। पुलिस के अनुसार वह इसी दुकानकी आड़ में जासूसी गतिविधियों का अंजाम दे रहा था। इस मामले में गैंग के सरगना सुहेल सहित अभी तक 22 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने नौशाद क अलावा मथुरा निवासी एक महिला और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया है। आरोपियों ने पूछताछ में बताया है कि सुहेल ने ही इस नेटवर्क से जोड़ा था। जांच में सामने आया है कि यह गैंग रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों के ठिकानों की फोटो और वीडियो बनाकर व्हाट्सऐप गु्रुप के माध्यम से पाकिस्तान भेजता था। इसके बदले में उसे हर फोटो के लिये 4-6 हजार रूपये तक मिलते थे। सबसे चौंकाने वालीबात यह सामने आयी है कि इस गैंग ने दिल्ली और हरियाणा के कई रेलवे स्टेशनों पर कैमरे लगा रहे थे। इन कैमरों की लाइव स्ट्रीमिंग का एक्सेस पाकिस्तान में मौजूद लोगों के पास था, जो कि सीधे इन संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर रहे थे।
प्लानिंग थी 50 सोलर कैमरे लगाने की
पुलिस के मुताबिक गैंग देश में लगभग 50 सोलर कैमरे लगाने की प्लानिंग पर काम कर रहा था। कुछ जगहों पर कैमरे लगाये भी जा चुके थे। दिल्ली और सोनीपत में लगे कैमरों को बरामद कर लिया गया है उन्हें फोरेंसिक जांच के लिये भेजा जा रहा है। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि नौशाद मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर का निवासी है। उसे कोलकाता से बुलाकर फरीदाबादमें यह दुकान खुलवाई गयी थी। फिलहाल गाजियाबाद पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस जासूसी रैकेट के तार और किन-किन जगहों से जुड़े हैं।