अंतरराष्ट्रीय

Newsअंतरराष्ट्रीयमप्र छत्तीसगढ़

US नेवी और ईरान के बीच जंग फिर से शुरू, नेवी ने पकड़ा तेहरान का कार्गो जहाज

नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता शुरू होने के पहले विफल होती दिखाई दे रही है। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ट्रूथ पर बताया है कि यूएस नेवी ने ओमना की खाड़ी में अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने का प्रयास किया तो एक ईरान झंडे वाली कार्गो जहाज का कब्जे में ले लिया है। उधर, ईरान ने वोट ड्रोन से अमेरिकी नेवी पर पलटवार का दावा किया है।
जब तक नाकेबंदी रहेगी, मतभेद रहेगा
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज को कब्जे में लिए जाने की घटना पर पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है । उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक नौसैनिक नाकाबंदी रहेगी, तब तक मतभेद बने रहेंगे।
उन्होंने एक्स पर पोस्ट साझा कर लिखा, ‘आप अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते नहीं रह सकते, नाकाबंदी को और सख्त नहीं कर सकते, ईरान को और युद्ध अपराधों की धमकी नहीं दे सकते, अनुचित मांगों पर अड़े नहीं रह सकते, बयानबाजी से काम नहीं चला सकते और ‘कूटनीति’ का दिखावा नहीं कर सकते। जब तक नौसैनिक नाकाबंदी रहेगी, तब तक मतभेद बने रहेंगे।’

Newsअंतरराष्ट्रीयमप्र छत्तीसगढ़

सैटेलाइट फोन-दो अमेरिकी नागरिकों से श्रीनगर एयरपोर्ट सुरक्षा जांच में मिला सैटेलाइट फोन

श्रीनगर. दो अमेरिकी नागरिकों को श्रीनगर एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान हिरासत में लिया गया है। उनके सामाने की जांच में एक गार्मिन सैटेलाइट फोन मिला है। पहले एयरपोर्ट सुरक्षा ने उनसे पूछताछ की और फिर उन्हें पुलिस को सौंप दिया गया है। जिसके बेग से फोन मिला है। उसका नाम जैफरी स्कॉट है। 2 अमेरिकी के मोंटाना राज्य का निवासी है। एयरपोर्ट पर रूटीन सुरक्षा चैकिंग के दौरान जब इन दोनों अमेरिकी नागरिकों का सामान स्कैन किया गया तो एक बैंग में गार्मिन कम्पनी का सैटेलाइट फोन मिला है। गार्मिन एक जानी-मानी कम्पनी है। जो जीपीएस और सैटेलाईट डिवाइस बनाती है। सुरक्षाकर्मियों ने दोनों को तत्काल रोका और शुरूआती पूछताछ की। जबाव संतोषजनक नहीं होने पर दोनों पुलिस के हवाले कर दिया गया। अभी पुलिस आगे की जांच कर रही है।
कौन है जेफरी स्कॉट
जिस शख्स के बैग से सैटेलाइट फोन बरामद हुआ हैै उसका नाम जेफरी स्कॉर्ट है। वह अमेरिका के मोंटाना राज्य से हैं। मोंटाना अमेरिका का एक पहाड़ी राज्य है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि दोनों अमेरिकी श्रीनगर किस मकसद से आये थे। सैटेलाईट फोन उनके पास क्यों था। यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी भारत के अलग-अलग एयरपोर्ट पर अमेरिकी नागरिकों को सैटेलाइट फोन के साथ पकड़ा जा चुका है। कई बार विदेशी पर्यटक यह जाने बिना भारत आ जाते हैं कि यहां सैटेलाइट फोन प्रतिबंधित है। लेकिन कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में ऐसे मामलों को सुरक्षा एजेंसियां बहुत गंभीरता से लेती है।

 

Newsअंतरराष्ट्रीयमप्र छत्तीसगढ़

34 वर्षो के बाद इजरायल-लेबनान के नेता, दिनों देशों के बीच हो गया सीजफायर

नई दिल्ली. युद्ध से जूझ रहे पश्चिम एशिया से एक और अच्छी खबर आयी है। लेबनान और इजरायल ने 10 दिनों के संघर्षविराम की घोषणा की है। इस सीजफायर का ऐलान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस सीजफायर का ऐलान करते हुए कहा है कि अभी-अभी मेरी लेबनान के अत्यंत सम्मानित राष्ट्रपति जोसेफ ऑन और इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बहुत ही बेहतरीन चर्चा हुई है। इन दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई है कि अपने देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिये औपचारिक रूप से 10 दिनों के युद्धविराम की शुरूआत करेंगे। अमेरिकी समय के अनुसार यह युद्धविराम शाम 5 बजे से लागू होगा।
इजरायली हमले में लेबनान में तबाही
इस दौरान इजरायल की तरफ से लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले की वजह से लेबनान में भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरूवार का बताया कि इजरायली हमलों में मारे गये लेबनानी नागरिकों की कुल संख्या बढ़कर 2,196 हो गयी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि 2 मार्च को इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच ताजा युद्ध शुरू होने के बाद से मारे गये लोगों में 260 महिलायें और 172 बच्चे शामिल है।इसके अलावा 7,185 लोग घायल हुए है। इजरायल की तरफ से ताजा सैन्य कार्यवाही तब शुरू हुई। जब हिज्बुल्लाह ने अपने मुख्य सहयोगी और संरक्षक ईरान के साथ एकजुटता दिखाते हुए उत्तरी इजरायल की ओर रॉकेट दागे। लेबनान और इजरायल ने मंगलवार को सीधी चर्चा शुरू की। जो 1993 के बाद अपनी तरह की पहली चर्चा को उम्मीद है कि इन चर्चा से युद्ध समाप्त हो सकता है।

Newsअंतरराष्ट्रीयमप्र छत्तीसगढ़

ग्वादर में चीन-पार्किस्तान से निपटने के लिये बलोचों ने नेवी बनाकर हमले शुरू किये

नई दिल्ली. पाकिस्तान का ब्लोचिस्थान लम्बे समय से गरीबी और अस्थिरता का शिकार रहा है। लेकिन जब चीन ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के माध्यम से इस इलाके को अपने वैश्विक व्यापार नेटवर्क का हिस्स बनाने की योजना बनाई है।तब इसे पाकिस्तान के लिये गेमचेंजर बताया गया है। अरबों डॉलर के निवेशन, नयी सड़कें, रेल नेटवर्क और बंदरगाह के वादों के बीच एक नयी उम्मीद जरूर बनी है। लेकिन इसी के साथ एक नया संघर्ष भी पनप चुका था। यह संघर्ष सिर्फ विकास बनाम पिछड़ावन का नहीं, बलिक् पहचान, अधिकारी और संसाधनों पर नियंत्रण का बन गया है।
बलोचिस्तान के दक्षिण में स्थित ग्वादर पोर्ट इस पूरे विवाद का केन्द्र है। चीन इसे अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई प्रोजेक्ट) का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। जहां से वह सीधे अरब सागर तक पहुंच बना सकता है। इससे चीन को मध्यपूर्व के तेल और वैश्विक व्यापार तक सीधी पहुंच मिलती है।लेकिन बलोचों की नजर में यह प्रोजेक्ट उनके लिये नहीं है। उनका मानना है कि उनकी जमीन ली जा रही है। उसके संसाधनों का उपयोग बाहरी ताकतें कर रही है। बदले में उन्हें न तो रोजगार मिल रहा है। क्षेत्र का विकास हो रहा है।ग्वादर शहर जो कभी एक शांत तटीय कस्बा था। अबवहां भारी सैन्य मौजूदगी है। जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और बढ़ गयी है।
सीपीईसी में निवेश, कर्ज और बलोचों की नाराजगी
लगभग 60 अरब डीलर डॉलर से अधिक निवेश वाला सीपीईसी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को नयी दिशा देने के लिये लाया गया था। लेकिन समय के साम इसके कई नकारात्मक पहलू भी सामने आये। प्रोजेक्ट्स में अधिकतर काम चीनी कम्पनियों और इंजीनियरों को मिला है। जबकि स्थानीय लोगों को सीमित मौके ही मिले हैं।
समुद्र तक पहुंचा संघर्ष, BLA ने बनाई नौसेना
हालात तब और गंभीर हो गए जब BLA ने अपने नए नौसैनिक विंग हम्माल समुद्री रक्षा बल (HMDF) के गठन का ऐलान किया. यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि रणनीतिक बदलाव है. जिवानी क्षेत्र में गश्ती नौका पर हमले का दावा इस बात का संकेत है कि अब बलोच विद्रोह सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रह गई हैं।  अगर यह रणनीति आगे बढ़ती है, तो ग्वादर पोर्ट और समुद्री व्यापार दोनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता हैं।  यह चीन के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि उसका पूरा निवेश इसी क्षेत्र की स्थिरता पर टिका हुआ हैं।
क्या CPEC पाकिस्तान के लिए बन गया बोझ?
जिस CPEC को पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ कहा जा रहा था, वही अब उसके लिए चुनौती बना हुआ है. कर्ज का बोझ, सुरक्षा खर्च और प्रोजेक्ट्स की धीमी प्रगति ने इस प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  “क्राउन ज्वेल” कहा जाने वाला ग्वादर पोर्ट अब तक अपेक्षित व्यापारिक गतिविधि नहीं ला पाया हैं।  इससे चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए चिंता बढ़ गई हैं।

Newsअंतरराष्ट्रीयमप्र छत्तीसगढ़

ईरान के परमाणु बम का कच्चा किसके हवाले, रूस रखने को तैयार, यूएस छीनने को तैयार, ईरान 5 वर्ष के लिये सस्पेंड

नयी दिल्ली. ईरान-अमेरिका तनाव इस समय चरम पर है। होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसैनिक ब्लॉकेड शुरू हो चुका है। इस दौरान दुनिया का ध्यान ईरान के परमाणु बम बनाने वाले कच्चे माल यानी एनरिच्ड यूरेनियम पर टिका हुआ है। ईरान के नजदीक 450 किमी एनरिच्ड यूरेनियम है जो हफ्तों में हथियार ग्रेड बनाया जा सकता है। 10 से अधिक परमाणु बम बनाने लायक मैटेरियल ईरान के पास पड़ा है। अब प्रश्न यह है कि यह यूरेनियम किसके हवाले हागी? रूस इसे रखने के लिये तैयार है। ईरान 5 साल के लिये अपना न्यूक्लीयर प्रोग्राम सस्पेंड करने के लिये तैयार है। लेकिन अमेरिका इसे छीनने या पूरी तरह हटाने पर अड़ा हुआ है। यह मुद्दा पाकिस्तान में हुई हालियां शांति की बातचीत टूटने और होर्मूज ब्लॉकेड की मुख्य वजह है।
क्या है एनरिच्ड यूरेनियम
ईरान काफी समय से कहता आ रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली और मेडीकल के लिये है। लेकिन अमेरिका और इजरायल इसे परमाणु हथियार बनाने की तैयारी मानते है। ईरान के पास 60 प्रतिशत तक एनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक है। सामान्य बिजली प्लांट के लिये 3-5 प्रतिशत एनरिचमेंट काफी होता है। लेकिन 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंचते ही यह बम बनाने लायक हो जाता है।
रूस क्यों तैयार है यूरेनियम रखने को?
रूस ने सोमवार 13 अप्रैल 2026 को फिर से अपना ऑफर दोहराया है । क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही अमेरिका और क्षेत्रीय देशों से बात कर चुके है।  रूस ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को अपने यहां सुरक्षित रखने को तैयार है।  रूस का कहना है कि यह शांति समझौते का हिस्सा हो सकता है।   रूस दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार रखने वाला देश है और ईरान का पुराना दोस्त भी है।  रूस को लगता है कि अगर वह यह सामग्री रख ले तो ईरान-अमेरिका युद्ध रुक सकता है।  रूस की मध्यस्थ की भूमिका मजबूत हो जाएगी । रूस ने स्पष्ट किया कि ऑफर अब भी टेबल पर है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

Newsअंतरराष्ट्रीयमप्र छत्तीसगढ़

युद्ध के जख्मों को भरने में जुटा ईरान, 60 दिनों में 80% एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक करने का रखा लक्ष्य

तेहरान. अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान पहुंचा है। ईरान अब तेजी के साथ इस नुकसान से उबरने के लिये कदम उठा रहा है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज एजेंसी कको बताया कि देश आने-वाले एक से 2 माह में अपनी क्षतिग्रस्त रिफाइनिंग और डिस्ट्रीब्यूशन क्षमता को 70-80 प्रतिशत तक बहाल करने का अनुमान लगा रहा है। ईरान के डिप्टी ऑयल मिनिस्टर मोहम्मद सादिक अजीमीफर ने बताया है कि क्षतिग्रस्त उर्जा ढाचों पर मरम्मत कार्य शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा है कि टेक्नीकल टीमें लगतार काम कर रही है। चरणबद्ध तरीके से उत्पादन को स्थिर करने और सिस्टम को दोबारा चालू करने की प्रयास जारी है। अजीमीफर के अनुसार, लवन रिफायनरी का एक हिस्सा लगभग 10 दिनों के अन्दर फिर से चालू होने की संभावना है। इसके बाद अन्य यूनिट्स और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भी धीरे-धीरे बहार किये जायेंगे।
मोहम्मद सादिक अजीमीफर ने बताया है कि ईरान का लक्ष्य अगामाी 2 माह के अन्दर अपवने रिफायनिंग और सप्लाई सिस्टम को युद्ध से पूर्व के स्तर के नजदीक लाना है। हालांकि पूरी तरह से सामान्य स्थिति बहाल होने में रिपेयरिंग की रफ्तार और टेक्नीकल टीमों द्वारा ऊर्जा ढांचों का हुए नुकसान का आकलन अहम भूमिका निभायेगी। अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों के चलते ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा था। जिससे ऑयल और गैस प्रॉडक्शन और सप्लाई पर प्रभाव पड़ा है।
अब सरकार और तकनीकी टीमें मिलकर इस नुकसान की भरपाई करने और ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य करने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं. अजीमीफर का मानना है कि अगर मरम्मत कार्य तय समय पर पूरा होता है, तो ईरान जल्द ही अपनी ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने में सफल हो सकता है, जिससे वैश्विक तेल बाजार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने हाल के युद्ध में ईरान की कई तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया है. इससे पेट्रोलियम उत्पादों के प्रोडक्शन पर असर पड़ा है. हमलों में ईरान के ऑयल डिपो और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क (पाइपलाइन, टर्मिनल) को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. कुछ गैस प्रोसेसिंग और ट्रांसमिशन फैसिलिटी पर भी हमले हुए हैं, जिससे गैस सप्लाई बाधित हुई है।
ऑयल एक्सपोर्ट से जुड़े ईरान के समुद्री टर्मिनल और पोर्ट को भी अमेरिका और इजरायल ने निशाना बनाया है। इन हमलों का मकसद ईरान की तेल-गैस उत्पादन क्षमता और निर्यात क्षमता को कमजोर करना था।  जिससे तंगी के दौर से गुजर रही उसकी अर्थव्यवस्था और प्रभावित हो।

Newsअंतरराष्ट्रीयमप्र छत्तीसगढ़

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान हुई फेल, इसके बाद भी डींग हांक रहा है पाकिस्तान

नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिये पाकिस्तान ने मध्यस्थता का रोल अदा किया। इस्लामाबाद में शांतिवार्ता का आयोजन  किया गया। हालांकि यह बातचीत बेनतीजा साबित हुई। इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी पीठ थपथपाने से पीछे नहीं हट रहा है। विदेश मंत्री इशाक डार ने चर्चा में शामिल होनेे लिये अमेरिका और ईरान के प्रति आभार जताया है।
शांतिवार्ता के बाद इशाक डार ने पत्रकारवार्त की। इस बीच अपने बयान में उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान इन शांतिवार्ताओं में मेजबानी करके सम्मानित महसूस कर रहा है। डार ने कहा है कि हम इस्लामाबाद में शांतिवार्ता आयोजित करने के लिये ईरान और अमेरिका का शुक्रिया अदा करते हैं। यह न सिर्फ मिडल ईस्ट बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरिता के लिये एक अच्छा संकेत है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने इस बीच अनुमान जताया है कि दोनों पक्ष भविष्य में भी सीजफायर पर समझौतों को जारी रखेंगे। उन्होंने शांति केलिये पाकिस्तान की कोशिशें जारी रहने का भरोसा दिलाया है। उन्होने आगे बताया है कि इस पूरी शांतिवार्ता के पीछे पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की महत्वपूर्ण भूमिका रहीं है। उन्होंने कहा है कि आसिम मुनीर ने सीजफायर करने के लिय कई दौर की वार्ताओं में मदद की । आपको बता दें कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटों तक चर्चाओं का दोर चला। इस बीच दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर सहमति भी बनी है। लेकिन परमाणु हथियार और स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बात नहीं पाई।
फेल क्यों हुई शांति वार्ता
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि वह बाचीत की नीयत से वार्ता में शामिल हुए थे। लेकिन ईरान अमेरिका की शर्ते मानने पर राजी नहीं है। ऐसे में वेंस अब अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद से अमेरिका के लिये रवाना हो गये। वहीं, ईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिका अपनी शर्तो में बहुत कुछ मांग रहा था।

Newsअंतरराष्ट्रीयमप्र छत्तीसगढ़

अमेरिका की धरती पर लौट आये अंतरिक्ष यात्री, 5.37 बजे प्रशांत महासागर में टच डाउन किया

नई दिल्ली. नासा का आर्टेमिस, मिशन पूरा हो चुका है ओरियन स्पेसक्राफ्ट 11 अप्रैल की सुबह 5.37 बजे अमेरिका के सैन डिएगो के तट के पास समुद्र में उतर चुका है। चारों अंतरिक्ष यात्री चन्द्रमा के चारों ओर घूमकर अब सुरक्षित घर लौट आये है। यह मिशन 54 वर्षो के बाद इंसानों को चन्द्रमा के के पास ले जाने वाला पहला क्रूड मिशन है। प्रशांत महासागर के सैन डिएगो (कैलीफोर्निया, अमेरिका) के तट के पास समुद्र में उतारा है।
सुरक्षित उतरे सभी अंतरिक्ष यात्री
सभी अंतरिक्ष यात्री प्रशांत महासागर के सैन डिएगो के तट पर सुरक्षित लैंड किये हैं। रिकवरी टीमें ओरियन स्पेसक्राफ्ट की तरफ बढ़े है। एयरबैग्स समुद्र में तैर रहा है। नासा का आर्टेमिस मिशन कम्पलीट हो चुका है। अमेरिका के सैन डिएगो के तट के पास समुद्र उतर चुका है। धरती पर उतरने के दौरान 6 मिनट का कम्युनिकेशन ब्लैक आउट हो गया है। यानी अंतरिक्ष यात्री मिशन कंट्रोल से बात नहीं कर पा रहे हैं।

Newsअंतरराष्ट्रीयमप्र छत्तीसगढ़

पाकिस्तान पहुंचा ईरानी प्रतिनिधिमंडल, शर्ते मानने पर ही होगी आगे चर्चा

नई दिल्ली. अमेरिका के साथ शांति वार्ता के लिये ईरान का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच गया है ईरानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ की अगुआई में यह डेलीगेशन इस्लामाबाद पहुंच गया है। इसे अमेरिका -ईरान के बीच तनाव खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
हालाकि, इस दौरान ईरान ने साफ किया है कि वह बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब वॉशिंगटन, तेहरान की पूर्व शर्तो की स्वीकार करेगा। इस डेलीगेशन में वरिष्ठ राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक अधिकारी शामिल है। जिनमें ईरान के विदेश मंत्री, रक्षा परिषद के सचिव, केन्द्रीय बैंक के गर्वनर और संसद के कई सदस्य भी शामिल है। अस्थाई युद्ध विराम और दोनों पक्षों के बीच बने अविश्वास के माहौल में पाकिस्तान इस उच्च स्तरीय बैठकी की मैजवानी कर रहा है। इस दौरान ईरान ने बार-बार जोर दिया है कि ओपचारिक बातचीत शुरू करने से पहले कुछ शर्तो को पूरा करना जरूरी है।
इनमें क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे शामिल किये गये है। यह दर्शाता है कि चर्चा में शामिल होने के बावजूद ईरान का रूख सख्त बना है। वहीं, अब लेबनाना और इजरायल ने भी सहमति जताई है। वह मंगलवार को को यूएस स्टेट डिपार्टमेंट में पहली बैठक करेंगे। इस बैठक में युद्धविराम की घोषणा और औपचारिक वार्ता पर चर्चा होगी।
शांति वार्ता पर पाक पीएम बोले
पाकिस्तान केक पीएम शहबाज शरीफ ने कहा है कि अमेरिका -ईरान वार्ता की मेजबानी करना सिर्फ पाकिस्तान के लिये गर्व की बात नहीं है, बल्कि पूरे मुस्लिम विश्व के लिये भी गर्व की बात है। इसके साथ ही पाकिस्तान के पीएम ने ईरान और अमेरिका के नेतृत्व का धन्यवाद भी किया है कि उन्होंने पाकिस्तान के आग्रह पर युद्धविराम के लिये सहमति जताई और शांति वार्ता के लिये भी तैयार हुए है। शांति वार्ता से पहले शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती का ऐलान किया है। अब डीजल 520 रूपयचे प्रतिलीटर से घटकर 385 रूपये प्रतिलीटर हो गया है जबकि डीजल की कीमत में भी 12 रूपये प्रतिलीटर की कटौती की गयी है।

Newsअंतरराष्ट्रीयमप्र छत्तीसगढ़

झुक गये डोनाल्ड ट्रम्प, ईरान की शर्तो पर हुआ समझौता, 2 हफ्ते के लिये हुआ सीजफायर

नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिये 2 हफ्तों के सीजफायर के प्रस्ताव पर सहमति बन गयी है। इस 2 तफरा सीजफायर (संघर्ष विराम) की शर्त है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को तत्काल पूरी तरह और सुरक्षित रूप से खोल दें। ईरान ने भी इस प्रस्ताव की स्वीकार कर लिया है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई बड़े मुद्दों पर गहरी खाई बनी हुई है। हालांकि ट्रम्प न पहले ईरान के इस 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को भा्रमक बताया था। लेकिन पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्डछ मार्शल असीम मुनीर के आग्रह के बाद इस शांति प्रस्ताव को काम करने लायक मानते हुए सैन्य अभियान रोकने का फैसला किया है। जिस पर विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प ईरान की शतों पर झुक गया है।
वहीं, इस युद्ध विराम के बाद वैश्विक बजारों में तेज की कीमतें 100 डॉलर प्रतिबैरल से नीचे गिर गया है। सीजफायर का ऐलान करते हुए ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल मीडिया पर लिखा है कि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ऑर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से चचा्र के बाद मैंने ईरान पर हमलों को 52 सप्ताह के लिये रोकने का फैसला किया है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने पर सहमति जताई है। यह 2 तराफा सीजफायर होगा। डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर चुका है। ईरान से मिला 10 सूत्रीय प्रस्ताव स्थाई समझौते के लिये काम करने योग्य आधार है। उन्होंने आगे कहा है कि पिछले विवाद के करीब सभी मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। 2 हफ्ते समय स्थाई समझौते का अंतिम रूप देने के लिये पर्याप्त होगा।
ईरान की शर्तें
वहीं, ईरान ने शांति के लिए जो प्रस्ताव पेश किया है, उसमें कुछ ऐसी मांगें हैं जो अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती रही हैं. ईरान के मुताबिक, इन शर्तों पर अमल ही स्थायी समाधान का रास्ता है।
अमेरिका द्वारा हमला नहीं करने (Non-aggression) की गारंटी।
परमाणु कार्यक्रम में एनरिचमेंट की मंजूरी
होर्मुज पर नियंत्रण: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रहना और जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलना.
ईरान पर लगे सभी प्राथमिक और आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और IAEA के सभी प्रस्तावों को खत्म करना.
युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजा (compensation).
क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी.
लेबनान में इस्लामिक रेसिस्टेंस (हिज्बुल्लाह) के खिलाफ युद्ध खत्म करना.
ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने घोषणा की है कि ईरान की सशस्त्र सेना दो हफ्ते के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगी । ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव पर बातचीत की इच्छा जताई है. अराघची ने स्पष्ट किया कि समन्वय के साथ तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए कमर्शियल जहाजों को रास्ता दिया जाएगा. ईरान तभी शांत रहेगा, जब उस पर कोई हमला नहीं किया जाएगा ।
‘लेबनान में कोई समझौता नहीं’
उधर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने सीजफायर का समर्थन किया, लेकिन स्पष्ट कर दिया कि यह समझौता लेबनान को शामिल नहीं करता।  इजरायल हिजबुल्लाह के खिलाफ दक्षिण लेबनान में अपना अभियान जारी रखेगा. ईरान की मांग थी कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल हो, लेकिन इजरायल ने इसे खारिज कर दिया।
इस्लामाबाद में होगी वार्ता
इस पूरे सीजफायर के पीछे पाकिस्तान की अहम भूमिका बताई जा रही है और इसी वजह से अमेरिका-ईरान की बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को चुना गया है। शुक्रवार 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच आगे की वार्ता होगी।  उधर, युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 13 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड गिरकर 94.74 डॉलर और अमेरिकी क्रूड 96.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. एशियाई और अमेरिकी शेयर बाजारों में भी इस खबर के बाद जबरदस्त उछाल देखा गया है. दुनिया भर के निवेशकों ने युद्ध की आशंका कम होने पर राहत की सांस ली है।