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डोनाल्ड ट्रम्प- ईरानी राष्ट्रपति मसूद में डील, कच्चे तेल के दाम क्रैश, भारत के लिये 5 बड़े लाभ

US Iran Peace Deal Done

नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच महिनों से चले आ रहे युद्ध आखिरकार अब समाप्त हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बुधवार को एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिये है। इसके बाद दुनिया कुल तेल जरूरत का 20 प्रतिशत पूरा करने के लिये जरूरी होर्मुज स्ट्रेट भी खुल गया है। अमेरिकी नाकेबंदी हट चुकी है। तेल-गैस क जहाजों का आना-जाना शुरू हो गया है।
यूएस-ईरान शाति समझौता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है। यह 80 डॉलर के नीचे व्यापार करती हुई नजर आ रही है। तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के लिये कई मायनों में लाभदायक है। आम आदमी से लेकर भारतीय अर्थव्यवस्था तक को इससे लाभ होगा।
तेल क्रैश के भारत को ये बड़े फायदे
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों गिरावट खासतौर पर उन देशों के लिए बड़े फायदे की वजह बनती है, जो क्रूड ऑयल के आयात पर ज्यादा निर्भर होते है।  भारत भी इनमें शामिल हैं और देश अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में Crude Oil Price Crash भारत को कई स्तरों पर फायदा पहुंचा सकता है।
पहला फायदा: Petrol-Diesel होगा सस्ता!
मिडिल ईस्ट तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से दुनिया ने तेल-गैस का भारी संकट झेला है।  पाकिस्तान, बांग्लादेश, साउथ कोरिया से लेकर भारत, ब्रिटेन और अमेरिका तक में ईंधन की कीमतों में तगड़ा इजाफा देखने को मिला है। भारत में 10 दिन के भीतर ही Petrol-Diesel Price Hike का सिलसिला जारी रखते हुए तेल कंपनियों ने इनकी कीमतों में 7 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।
दूसरा फायदा: महंगाई पर लगेगी लगाम
Hormuz Strait फिर से ओपन होने से पेट्रोल, डीजल और गैस सस्ती हो रही है और इसकी सप्लाई भी जल्द सुचारू होने की उम्मीद है। कीमतें गिरने से माल ढुलाई की लागत कम होती है और खाद्य पदार्थ, उपभोक्ता वस्तुएं और औद्योगिक उत्पादों की कीमतों पर दबाव घटता है।  RBI भी कहता है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट खुदरा महंगाई को नियंत्रित करने में मदद करती है।
तीसरा फायदा: आयात बिल में आएगी कमी
रिपोर्ट्स की मानें, तो भारत वित्त वर्ष 2025-26 में प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल (5 मिलियन बैरल) तेल आयात कर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल के दाम में 10 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 13-15 अरब डॉलर (1.1-1.3 लाख करोड़ रुपये) तक कम हो सकता है।
चौथा फायदा: चालू खाता घाटा में कमी, रुपया मजबूत
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट इंडियन करेंसी के लिए भी फायदेमंद ही,  दूसरी ओर कच्चे तेल का टूटना भारत के चालू खाता घाटे में कमी की वजह बनता है, जो बेहद राहत भरी बात है। RBI के एक अनुमान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल प्राइस अगर 10 डॉलर प्रति बैरल फिसलता है, तो फिर देश का चालू खाता घाटा यानी CAD लगभग 0.3-0.4 फीसदी GDP तक कम हो सकता है।
पांचवां फायदा: शेयर बाजार को मिलेगा सपोर्ट
कच्चे तेल का घटना महंगाई के जोखिम को कम करने वाला साबित होता है।  इसके अलावा जरूरी चीजों के आयात पर होने वाले खर्च को भी कम करता है।  ये सारे कारक मिलकर शेयर बाजार को सपोर्ट करते हैं. एविएशन, पेंट, टायर, सीमेंट, लॉजिस्टिक्स और केमिकल कंपनियों की लागत घटती है, इनका मुनाफा बढ़ता है, जिसका असर शेयर बाजार में तेजी के रूप में दिखता है।

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पीस डील पर अमेरिका से डील पर ईरानी सेना का दावा दुश्मन ने मानी हार और किया सरेंडर, 14 शर्तो के साथ MoU तैयार

नई दिल्ली. अमेरिका -ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बीच ईरान की सेना का एक बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने दावा किया है कि देश की जनता और सशस्त्र बलों ने यह साबित कर दिया है कि दुश्मन के पास सरेंडर करने के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। ईरान की सेना इस ऐतिहासिक डील को अपनी एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक जीत के रूप में देख रही है।
आईडीएफ का दावा है कि दक्षिणी लेबनान में हुए एक हवाई हमले में हिजबुल्लाह का टॉप कमांडर अली मूसा दकदुद की मौत हो गयी है। सेना के अनुसार दकदुक को लिटानी नदी के दक्षिणी इलाके में निशाना बनाया गया है। वह हिजबुल्लाह के पूर्व चीफ हसन नसरल्लाह की सुरक्षा यूनिट के हेट और एलीट राडवान फोर्स के कमांडर की जिम्मेदारी संभाल रहे है।
आपको बता दें कि अमेरिका ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गयी है। आगामी शुक्रवार का स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने का अनुमान है। ऐसा बताया जा रहा है कि इसके बाद तेहरान परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक विस्तृत चर्चा का दौर चलेगा। शांति समझौते का ऐलान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि इस यूएस-ईरान के बीच पीस डील पूरी हो चुकी है। ऐसे में अब मैं होर्मुज को टोलफ्री खोलने और नौसैनिक ब्लॉहेड हटाने की मंजूरी देता हूं। हालांकि ईरान की तरफ से लीडर का लेकर अभी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अमेरिका-ईरान के बीच हुए इस समझौते पर दुनियाभर के देश खुशी जता रहे है। क्योंकि कई देश इस युद्ध के खत्म होने का इंतजार कर रहे थे।
ईरान ने अमेरिका के साथ 14 सूत्री ड्राफ्ट MoU जारी किया
ईरानी मीडिया आउटलेट मेहर ने अमेरिका के साथ ईरान के प्रस्तावित 14 सूत्री ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) जारी किया है. ईरान इसे दोनों देशों के बीच हो रहे शांति समझौते का प्रारूप बता रहा है. ईरानी मीडिया के अनुसार, ये ड्राफ्ट दोनों पक्षों के बीच चल रही गहन कूटनीतिक वार्ताओं का नतीजा है. मेहर ने इसे पूर्ण 14-पॉइंट ड्राफ्ट बताते हुए दावा किया है कि इसमें ईरान की अधिकांश प्रमुख मांगों को शामिल किया गया है।
24 अरब डॉलर के फ्रोजन एसेट्स का आधा हिस्सा गंभीर वार्ता शुरू होने से पहले ही रिलीज किया जाएगा.
अमेरिकी नौसेना ब्लॉकेड 30 दिनों के अंदर पूरी तरह हटा लिया जाएगा.
ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल्स पर लगी पाबंदियां जल्द ही सस्पेंड कर दी जाएंगी.
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का फंड उपलब्ध कराना होगा.
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ईरानी सुरक्षा नियंत्रण में फिर से खोल दिया जाएगा.
ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रॉक्सी (प्रतिनिधि) गुटों को समर्थन देने के मुद्दे को पूरी तरह वार्ता एजेंडे से हटा दिया गया है।
पूरे समझौते को अंतिम रूप देने के लिए केवल 60 दिन का समय तय किया गया है, जिसमें व्यापक प्रतिबंधों में राहत और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी शामिल होगी ।

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3 दिन में 3 जहाजों पर किये गये अटैक में 3 भारतीयों की मौत

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया के जलक्षेत्र खासकर होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी पिछले 3 दिनों में भारतीय नाविकों के लिये काफी खतरनाक हो गये है। अमेरिका ने यहां दादागिरी करते हुए 72 घंटे में 3 ऐसे जहाजों पर हमला किया है। जिस पर भारतीय नाविक सवार थे। 10 जून को हुए एक अटैक मे ंतो 3 भारतीय नागरिकों की जान चली गयी है।
अभी भी सैकड़ों भारतीय सैलर्स इस समय इस खतरनाक पानी में फंसे हुए है। जहां हर गुजरता जहाज मिसाइल या ड्रोन का निशाना बन सकता है। पिछले कुछ हफ्तों से ईरान ने होर्मुज को सख्त नियंत्रण में ले लिया है। जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक ब्लॉकेड लगा दिया है। इसके तहत अमेरिका यहां से गुजरने वाले जहाजों पर मनमानी हमले अटैक कर रहा है।
72 घंटे के अंदर 3 अटैक
पहला हमला 8 जून को ओमान के दक्षिण -पूर्वी तट पर हुआ। यहां अमेरिकी नेवी ने अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित टैंकर मैरीवैकस पर मिसाइल से अटैक किया है। इस जहाज के क्रू मेम्बर में 24 भारतीय थे। यह गनीमत रही इस अटैक में किसी भारतीय की जान नहीं गयी। यूएस सैंटकॉम के अनुसार जहाज ईरानी बंदरगाह की ओर जा रहा था। चेतावनी के बावजूद रूकने से मना कर दिया। हमले में जहाज की इंजीनियरिंग और स्टीयरिंग सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गये और इसमें आग लग गयी।
9-10 जून का अमेरिकी नेवी ने फिर से मनमानी की तो अमेरिका ने ओमान तट के पास एमटी स्टैबबिल्लो नाम के ऑयल टैंकर पर हमला किया।इस जहाज पर 24 इंडियन क्रू के सदस्य मौजूद थे। इनमें से 21 को बचा लिया गया है। लेकिन 3 भारतीय नाविक लापता हो गये और बाद में भारत ने इन तीनों नाविकों के मौत की पुष्टि की है।

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होर्मुज में जबरदस्त जंग, अमेरिका ने ईरान के एयर डिफेंस, रडार साइट्स और ग्राउंड कंट्रोल पर बरसाये बम

ईरान पर हमले का फाइल फुटेज। - Dainik Bhaskarनई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह दावा किया है कि ईरान ने होर्मुज में अमेरिकी अपाचे हेलीकाप्टर को मार गिराया है। अमेरिका ने मंगलवा को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्यवाही शुरू कर दी है। दूसरी ओर ईरान का दावा है कि अमेरिका के अपाचे हेलीकाप्टर को उन्होंने नहीं गिराया है और दावा किया गया है कि अमेरिका इस घटना का बहाना बनाकर ईरान पर हमले कर रहा है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। शांति वार्ता की संभावनाओं पर भी सवाल खड़े हो गये है।
पूरी तरह से अमेरिका सतर्क-CENTCOM
अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्यवाही पूरी कर ली है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM)ने बताया है कि यह अभियान सेल्फ डिफेंस में की गयी सैन्य कार्यवाही थी। जिसे 9 जून को राष्ट्रपति के आदेश से अंजाम दिया गया था। एक दिन पहले अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया गया था। सीईएनटीसीओएम (सेंटकॉम) के अनुसार अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के फायटर विमानों ने प्रिसिजन म्यूनिशन का उपयोग करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों और सर्विलांस रडार साइट्स को टारगेट किया है।
अमेरिका ने बताया है कि यह हमला उसके सैनिकों और इलाके से गुजर रहे इंटरनेशनल कॉमर्शियल शिप्स पर हुए हालिया हमलों के जवाब में किया गया। सेंटकॉम ने कहा है कि अमेरिकी सेना पूरी तरह से सतर्क है। किसी भी ईरान हमले का जवाब देने के लिये तैयार है।

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पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के 22 रूपये दाम घटाये

नई दिल्ली. पाकिस्तान सरकार ने एक बार फिर से पेट्रोल-डीजल के दामों में कटौती की है। इससे पहले पिछले हफ्ते ही 6-7 रूपये पेट्रोल-डीजल के दाम कम किये थे। अब एक बार फिर ईधन की कीमतों में कटौती की है। पेट्रोल-डीजल के दाम को 22 रूपये प्रतिलीटर तक कम किया गया है।
पेट्रोल पर 22 रूपये और हाईस्पीड डीजल (एचएसडी) पर 22 रूपये प्रतिलीटर कटौती की गयी है। अब पेट्रोल की कीमत 380 रूपये प्रतिलीटर हो चुका है। डीजल के दाम 381 रूपये प्रतिलीटर हो चुका है। यह कटौती ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल के दाम में गिरावट के बाद आयी है।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में एक सप्ताह के दौरान 11 प्रतिशत की गिरावट आयी है। क्योंकि ईरान-अमेरिका के बीच शांति समझौता होने की चर्चा हो रही है। प्रस्ताव पर अमेरिका विचार कर रहा है। हालांकि कुछ तीखे बयान भी आये है।जिससे तनाव बना हुआ है। खासकर होर्मुज को लेकर अभी सहमति बनती हुई नहीं दिख रही है।

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ईरान की तरह चीन भी मिसाइलों को रखने तैयार कर रहा है पाताल लोक

नई दिल्ली. चीन के दूर-दराज के रेगिस्तानी इलाके में एक विशाल सैन्य परिसर तेजी से विकसित किया जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिसर ऐसा बनाया जा रहा है कि अगर अमेरिका ने चीन के परमाणु हथियारों पर पहला हमला भी कर दिया तो भी चीन के पास जवाबी हमला करने की पूरी ताकत बनी रहें।
सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि चीन अपने सबसे लम्बी दूरी की मिसाइलों वाले साइलो इलाके के पास सैकड़ों लांच पैड, बंकर और कम्युनिकेशन नेटवर्क बना रहा है। यह निर्माण चीन की परमाणु शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा गदम है। चीन से पहले से ही ऐसा मिसाइलों बना चुका है जो अमेरिका के किसी भी शहर तक पहुंच सकती है। अभी वह इन मिसाइलों को और सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिये बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है।

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होर्मुज पर तनाव-अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर फिर से किये हमले, 3 धमाकों से हिल गया बंदर अब्बास

नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तानी मध्यस्थता से हुआ अस्थाई सीजफायर टूटने की दहलीज पर पहुंच गया गया है। वजह, अमेरिकी सेना ने एक बार फिर ईरान पर एयरस्ट्राइ की है। बुधवार-गुरूवार की रात ईरान के अन्दर एक और बड़े हवाई हमले को अंजाम दिया है। ऐसा बताया जा रहा है कि करीब रात 1.30 बजे स्थानीय समयानुसार बंदर अब्बास शहर के पूर्वी हिस्से से 3 धमाकों की आवाजें सुनाई दी। धमाकों का सटीक जगह और स्त्रोत अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया है कि अमेरिकी सेना ने रातभर ईरान में नये हमले किये। जिसमें एक ऐसे सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया है। जिसके बारे में अधिकारियों का मानना था कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेना और कमर्शियल समु्रदी आवाजाही के लिये खतरा पैदा कर रहा था। यह कार्यवाही आत्मरक्षा में की गयी है। इस नये हमले के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान द्वारा लांच किये गये कई घातक ड्रोन को भी बीच हवा में ही मार गिराया है।
ईरान समझौते पर ट्रंप के सख्त तेवर
गौरतलब है कि यह पूरी सैन्य कार्रवाई उस वक्त हो रही है जब दोनों देशों के बीच युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए ओमान और कतर की मध्यस्थता से बैक-चैनल कूटनीतिक बातचीत चल रही है।  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर एक कड़ा और दीर्घकालिक समझौता करने के लिए लगातार दबाव बना रहे है।
कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप के तेवर काफी सख्त नजर आए है। उन्होंने शांति वार्ता पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा, ‘मैं इस (प्रस्तावित समझौते) से अभी संतुष्ट नहीं हूं।  ईरान भले ही समझौता करना चाहता हो, लेकिन या तो हमें अपनी शर्तों पर इसे अंतिम रूप देना होगा, अन्यथा हमें वापस जाकर इस काम को पूरी तरह (सैन्य बल से) खत्म करना होगा ।’
साथ ही ट्रंप ने उन ईरानी दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि भविष्य के समझौते के तहत ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज के शिपिंग रूट को नियंत्रित करेंगे. ट्रंप ने साफ किया कि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग हर हाल में पूरी दुनिया के व्यापार के लिए खुला रहेगा।

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होर्मुज खोलने के लिये तैयार हुआ ईरान, 30 दिन में सामान्य होगा जहाजों का यातायात

नई दिल्ली. ईरान ने एक बड़ा ऐलान किया है कि उसने कहा है कि अगले 30 दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की तादाद फिर से पहले जैसी हो सकती है। यानी जंग से पहले जितने जहाज इस रास्ते से गुजरते थे। उतने फिर से गुजरने लगेंगे। इसबयान को दुनियाभर के देश राहत की खबर के तौर पर देख रहे हैं। होर्मुज का रास्ता दुनिया के लाइफलाइन है। युद्ध होने के बाद दुनियाभर के कई मुल्कों में ईधन का संकट खड़ा हो गया है। इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ रहा है। अब होर्मुज को 30 दिनों में पहले जैसे करने की बात कहीं जा रही है। यानी युद्ध से पहले जो स्थिति थी वह बहाल की जायेगी। यह तसनीम समाचार एजेंसी की तरफ से जानकारी सामने आई है।
पिछले कुछ माह में मिडिल ईस्ट में तनाव बहुत बढ़ गया था। ईरान और दूसरे देशों के बीच तनातनी की वजह से इस रास्ते से गुजरने वाले जहाज कम हो गये। जहाज मालिक और तेल कम्पनियां डरी हुई है। कहीं उनके जहाज को नुकसान न हो। इस कारण से तेल की सप्ताई धीमी पड़ गयी। दुनियाभर में तेल के दाम और बाजार की हालत पर असर पड़ा रहा है। इन सब के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि अमेरिका, ईरान और उस इलाके के कुछ और देशों के बीच एक समझौता लगभग तय हो गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा है कि इस डील में होर्मुज को फिर से खोलना शामिल है। इसका ऐलान जल्द किया जायेगा।
होर्मुज के खोलने भारत क्या लाभ
होर्मुज का रास्ता अगर पहले की तरह सुचारू हो जाता है तो यह भारत के लिये भी राहत भरी खबर होगी। क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। जिसका एक बड़ा भाग इसी रास्ते से आता है। युद्ध के डर से जहाज होर्मुज का रास्ता नहीं ले रहे हैं। लम्बे रूट से आना पड़ रहा है। इससे बीमा का भी खर्च बढ़ रहा है। रास्ता अगर सेफ होता है तो माल ढुलाई का खर्च घटेगा। इससे सीधेतौर से भारत का निर्यात -आयात में लाभ होगा।

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ट्रेन में सुसाइड अटैक के जोरदार धमाके में 23 लोगों की मौत

इस्लामाबाद. ब्लूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के मजीद ब्रिगेड के एक आत्मघाती हमलावर ने रविवार की सुबह पाकिस्तान के क्वेटा में चमन फाटक के पास क्वेटा कैंट से सैन्य कर्मियों को ले जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को टारगेट एक भीषण फिदायनी हमला किया है। रेलवे ट्रैक के नजदीक हुए इस शक्तिशाली विस्फोट में कम से कम 23 लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी। 53 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गये।

धमाके से जुड़ी 3 तस्वीरें…

धमाके के बाद रेलवे ट्रैक से उठता धुएं का गुबार।
धमाके के बाद रेलवे ट्रैक से उठता धुएं का गुबार।
धमाके के बाद रेलवे ट्रैक पर आग लग गई और ट्रेन के कई डिब्बे पलट गए।
धमाके के बाद रेलवे ट्रैक पर आग लग गई और ट्रेन के कई डिब्बे पलट गए।
धमाके वाली जगह पर मौजूद पुलिस और बचाव कर्मी।
धमाके वाली जगह पर मौजूद पुलिस और बचाव कर्मी।

विस्फोट की वजह से यात्री ट्रेन की एक बोगी पूरी तरह से जलकर राख हो गयी। जबकि ट्रैक के आसपास स्थित कई घरों और वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंची है। घटना की खबर मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस ऑफिसर तत्काल घटनास्थल पर एकत्र हो गये। राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। सुरक्षाबलों ने पूरे प्रभावित इलाके की घेराबंदी कर दी है। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल भर्ती कराया गया है। जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। ब्लूच लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता ने मीडिया को बयान जारी कर इस फिदायीन हमले की जिम्मेदारी ली है।
ब्लूच लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता जीयंद ब्लूच के अनुसार संगठन की सुसाइड अटैक यूनिट मजीद ब्रिगेड ने इस हमले का अंजाम दिया है। यह ट्रेन क्वेटा कैंट से पाकिस्तानी सेना के जवानों को लेकर जा रही थी। जिसे निशाना यह धमाका किया गया था। इस ऑपरेशन से संबंधित विस्तृत जानकारी, साथ ही हमले के परिणामस्वरूप दुश्मन को हुए नुकसानों केबारे में जल्द ही मीडिया को एक आधिकारिक बयान में जानकारी दी जायेगी।
‘एक बोगी जलकर राख’
क्वेटा पुलिस के मुताबिक, चमन फाटक के पास हुआ ये धमाका इतना भीषण था कि जाफर एक्सप्रेस की एक पूरी बोगी आग की लपटों में घिरकर पूरी तरह राख हो गई है। रेलवे ट्रैक के आसपास बने कई रिहायशी मकानों की दीवारें ढह गईं और वहां खड़े वाहन भी इस ब्लास्ट की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए है।
धमाके के तुरंत बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. पुलिस के आला अधिकारी और स्थानीय निवासी तुरंत मौके पर पहुंचे और मलबे व जलती हुई बोगी से पीड़ितों को बाहर निकाला रहे है।  पुलिस ने बताया कि इस हादसे में घायल हुए 53 लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कई की हालत बेहद नाजुक है।

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व्हाइट हाउस के पास हुई फायरिंग में 25 राउंड चले, फायरिंग के वक्त परिसर में मौजूद थे राष्ट्रपति ट्रंप, हमलावर मारा गया

वॉशिंगटनत्र अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में प्रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स ‘‘व्हाइट हाउस’’ के पास रविवार को गोलीबारी की घटना सामने आई है। घटना के वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में ही मौजूद थे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार व्हाइट हाउस के पास फायरिंग करने वाला संदिग्ध हमलावर यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस के जवानों की जवाबी कार्यवाही में घायल हो गया है। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गयी। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार एक और व्यक्ति के घायल होने की खबर है।
घटनास्थल पर मौजूद एक रिपोर्टर के अनुसार व्हाइट हाउस परिसर के बाहर लगभग 25 गोलियां चलने की आवाज सुनी गयी है। अधिकारियों ने बताया है कि स्थिति काबू में है। फायरिंग की घटना से किसी भी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की खबर नहीं है। फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन (FBI) के डायरेक्टर काश पटेल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट मेे घटना की पुष्टि की। उन्होंने कहा है कि एफबीआई की टीम घटनास्थल पर मौजूद है। सीक्रेट सर्विस की हेल्प कर रही है। काश पटेल ने कहा है कि जांच जारी है। जैसे-जैसे जानकारी मिलेगी तो जनता को अपडेट दिया जायेगा।
हमलावर की मिली जानकारी
व्हाइट हाउस पर हमला करने वाले व्यक्ति की पहचान नेसिर बेस्ट के रूप में हुई है। न्यू यॉर्क पोस्ट के मुताबिक, खुद को यीशु मसीह समझने वाले इस व्यक्ति ने व्हाइट हाउस के चेकपॉइंट पर गोलीबारी की, जिसे सीक्रेट सर्विस ने नाकाम कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, नेसिर बेस्ट की उम्र 21 साल है। उसने रिवॉल्वर से कुछ राउंड फायर किए, लेकिन तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए उसे मार गिराया गया।

 

 

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