डोनाल्ड ट्रम्प- ईरानी राष्ट्रपति मसूद में डील, कच्चे तेल के दाम क्रैश, भारत के लिये 5 बड़े लाभ

नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच महिनों से चले आ रहे युद्ध आखिरकार अब समाप्त हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बुधवार को एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिये है। इसके बाद दुनिया कुल तेल जरूरत का 20 प्रतिशत पूरा करने के लिये जरूरी होर्मुज स्ट्रेट भी खुल गया है। अमेरिकी नाकेबंदी हट चुकी है। तेल-गैस क जहाजों का आना-जाना शुरू हो गया है।
यूएस-ईरान शाति समझौता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है। यह 80 डॉलर के नीचे व्यापार करती हुई नजर आ रही है। तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के लिये कई मायनों में लाभदायक है। आम आदमी से लेकर भारतीय अर्थव्यवस्था तक को इससे लाभ होगा।
तेल क्रैश के भारत को ये बड़े फायदे
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों गिरावट खासतौर पर उन देशों के लिए बड़े फायदे की वजह बनती है, जो क्रूड ऑयल के आयात पर ज्यादा निर्भर होते है। भारत भी इनमें शामिल हैं और देश अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में Crude Oil Price Crash भारत को कई स्तरों पर फायदा पहुंचा सकता है।
पहला फायदा: Petrol-Diesel होगा सस्ता!
मिडिल ईस्ट तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से दुनिया ने तेल-गैस का भारी संकट झेला है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, साउथ कोरिया से लेकर भारत, ब्रिटेन और अमेरिका तक में ईंधन की कीमतों में तगड़ा इजाफा देखने को मिला है। भारत में 10 दिन के भीतर ही Petrol-Diesel Price Hike का सिलसिला जारी रखते हुए तेल कंपनियों ने इनकी कीमतों में 7 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।
दूसरा फायदा: महंगाई पर लगेगी लगाम
Hormuz Strait फिर से ओपन होने से पेट्रोल, डीजल और गैस सस्ती हो रही है और इसकी सप्लाई भी जल्द सुचारू होने की उम्मीद है। कीमतें गिरने से माल ढुलाई की लागत कम होती है और खाद्य पदार्थ, उपभोक्ता वस्तुएं और औद्योगिक उत्पादों की कीमतों पर दबाव घटता है। RBI भी कहता है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट खुदरा महंगाई को नियंत्रित करने में मदद करती है।
तीसरा फायदा: आयात बिल में आएगी कमी
रिपोर्ट्स की मानें, तो भारत वित्त वर्ष 2025-26 में प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल (5 मिलियन बैरल) तेल आयात कर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल के दाम में 10 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 13-15 अरब डॉलर (1.1-1.3 लाख करोड़ रुपये) तक कम हो सकता है।
चौथा फायदा: चालू खाता घाटा में कमी, रुपया मजबूत
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट इंडियन करेंसी के लिए भी फायदेमंद ही, दूसरी ओर कच्चे तेल का टूटना भारत के चालू खाता घाटे में कमी की वजह बनता है, जो बेहद राहत भरी बात है। RBI के एक अनुमान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल प्राइस अगर 10 डॉलर प्रति बैरल फिसलता है, तो फिर देश का चालू खाता घाटा यानी CAD लगभग 0.3-0.4 फीसदी GDP तक कम हो सकता है।
पांचवां फायदा: शेयर बाजार को मिलेगा सपोर्ट
कच्चे तेल का घटना महंगाई के जोखिम को कम करने वाला साबित होता है। इसके अलावा जरूरी चीजों के आयात पर होने वाले खर्च को भी कम करता है। ये सारे कारक मिलकर शेयर बाजार को सपोर्ट करते हैं. एविएशन, पेंट, टायर, सीमेंट, लॉजिस्टिक्स और केमिकल कंपनियों की लागत घटती है, इनका मुनाफा बढ़ता है, जिसका असर शेयर बाजार में तेजी के रूप में दिखता है।

नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह दावा किया है कि ईरान ने होर्मुज में अमेरिकी अपाचे हेलीकाप्टर को मार गिराया है। अमेरिका ने मंगलवा को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्यवाही शुरू कर दी है। दूसरी ओर ईरान का दावा है कि अमेरिका के अपाचे हेलीकाप्टर को उन्होंने नहीं गिराया है और दावा किया गया है कि अमेरिका इस घटना का बहाना बनाकर ईरान पर हमले कर रहा है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। शांति वार्ता की संभावनाओं पर भी सवाल खड़े हो गये है।


