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राष्ट्रपति ट्रम्प की बेटी इवांका की हत्या की कोशिश, IRGC ने की थी प्लानिंग

नई दिल्ली. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका की हत्या की खौफनाक साजिश का खुलासा हुआ है। ईरान की सेना ‘‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से ट्रेनिंग पाये एक खतरनाक आतंकवादी ने इवांका ट्रम्प की जान लेने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था।
‘द पोस्ट’ अखबार को मिली जानकारी के अनुसार, यह आतंकी 6 वर्ष पहले अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गये अपने गुरू और ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेना चाहता था।सुरक्षा एजेंसियों ने इवांका ट्रम्प की हत्या का प्लान बना रहे आतंकी को दबोचा है। उसकी पहचान 32 साल के मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी के तौर पर हुई है। वह इराकी नागरिका बताया जा रहा है।
‘हमें इवांका को मारना होगा’
वाशिंगटन में इराकी दूतावास के पूर्व डिप्टी मिलिट्री अटैची एंतिफाध कनबर ने इस आतंकी के इरादों के बारे में एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, ‘कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद, अल-सादी लोगों से कहता फिर रहा था कि हमें इवांका ट्रंप को मारना होगा।  वो कहता था कि हमें ट्रंप के पूरे घर को उसी तरह जलाकर खाक कर देना चाहिए, जिस तरह उसने हमारे घर (कमांडर सुलेमानी) को तबाह किया था। ‘ आरोपी अल-सादी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार, खासकर उनकी बेटी इवांका ट्रंप को जान से मारने की कसम खाई थी।  जांच के दौरान सुरक्षा बलों को अल-सादी के पास से फ्लोरिडा में मौजूद इवांका ट्रंप के आलीशान घर का पूरा ब्लूप्रिंट भी बरामद हुआ है। वो काफी समय से उनके घर की रेकी कर रहा था।

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पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड आतंकी हमजा बुरहान की हत्या

नई दिल्ली. पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड आतंकी हमला बुरहान को पाकिस्तान के अज्ञात युवकों ने गोली मार कर हत्या कर दी है। सूत्रों के अनुसार हमले में इस आतंकी की मौत हो गयी है। आतंकी हमजा बुरहान को पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद में गाली मारी गयी है। हमला बुरहान पिछले साल पुलवामा में हुए आतंकी हमले के मास्टरमाइंड में से एक शख्स था। यह शख्स पाकिस्तान में स्वयं का टीचर बताता था।पुलवामा हमला 14 फरवरी 2019 को हुआ था। जब आतंकियों ने सेना के काफिल का टारगेट किया था। इस आतंकी हमले में 40 से अधिक जवान शहीद हो गये थे।

पुलवामा अटैक में 40 CRPF जवान शहीद हुए थे

ये तस्वीर पुलवामा हमले के कुछ देर बाद मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों की है। तस्वीर में दिख रही गाड़ी पर सवार होकर ही आतंकियों ने इस दर्दनाक हादसे को अंजाम दिया था।
ये तस्वीर पुलवामा हमले के कुछ देर बाद मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों की है। तस्वीर में दिख रही गाड़ी पर सवार होकर ही आतंकियों ने इस दर्दनाक हादसे को अंजाम दिया था।

जानकारी के मुताबिक आतंकी हमजा बुरहान को अज्ञात शख्स ने मुजफ्फराबाद में गोली मारी।  ये घटना तब हुई जब ये आतंकी अपने ऑफिस में बैठा हुआ था।  हमजा बुरहान पुलवामा हमले के साजिशकर्ताओं में शामिल था।  वह खुद को पाकिस्तान में टीचर बताता था।  2019 के बाद से कई आतंकी घटनाओं में शामिल रहा था। वह PoK के इलाके में कई आतंकी संगठनों को ट्रेनिंग दे रहा था।  साथ ही बॉर्डर इलाके में वह आतंकियों को घुसपैठ कराने में मदद करता था।

पुलवामा हमला और भारत का ऑपरेशन बालाकोट
14 फरवरी 2019 को दोपहर करीब 3:15 बजे जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर एक भयानक आतंकी हमला हुआ। पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी और स्थानीय कश्मीरी युवक आदिल अहमद डार ने 300-350 किलो IED से भरी SUV को CRPF के काफिले की एक बस में घुसा दिया।  इसमें 40 CRPF जवान शहीद हो गए और कई घायल हुए।  यह 1989 के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर सबसे घातक हमला था।  जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। हमले के 12 दिन बाद 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ट्रेनिंग कैंप पर सर्जिकल एयर स्ट्राइक किया। इसमें बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए।

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डिप्लोमैसी इतनी चॉकलेटी कैसे बनी, मेलोडी ने बताया

नई दिल्ली. 2 ग्लोबल लीडर्स, एक भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी और दूसरी इटली की फायरब्रांड पीएम जॉर्जिया मेलोनी। बैठक में सीरियस टॉक्स चल रहे हैं। ट्रेड, डिफेंस, टेक्नोलॉजी, एआई। फिर उन्ही बातों को ज्वॉइंट प्रेस कॉफ्रेंस में आकर दोहराया जाये। कुछ डिप्लोमैटिक सर्कल्स में बैठे लोगों और फॉरेन पॉलिसी कवर करने वाले मीडिया की ही उसमें रूचि हो सकती है।
लेकिन इन सब रस्मो-रिवाज को परे रखकर अचानक मोदी 50 रूपये का मेलोडी चॉकलेट पैकेट निकालकर मेलौनी को गिफ्ट कर देते हैं। मेलोनी मुस्कुराते हुए कहती है प्रधानमंत्री मोदी ने हमें गिफ्ट दिया… बहुत अच्छी टॉफी मेलोडी और यह वीडियो पोस्ट सोशल मीडिया पर सनसनी बन जाती है।
मोदी-मेलोनी मास्टरक्लास
आज का टाइम है जहां लीडर्स सिर्फ पॉलिसी नहीं, पर्सनालिटी का भी ट्रांजेक्शन करते है। मोदी जी दशकों से कर रहे है।  चाय पर चर्चा, मन की बात, सोशल मीडिया. मेलोनी भी उसी क्लास में. अगली बार जब कोई कहे कि ‘पॉलिटिक्स बोरिंग है।’, #मेलोडी मोमेंट याद दिला दो. ₹50 का चॉकलेट पैकेट इंटरनेशनल हेडलाइंस बना सकता है. डिप्लोमेसी कभी इतनी स्वीट नहीं थी।
मेलोडी मीम्स में रोमांटिक फिल्टर्स, बॉलीवुड डायलॉग, ‘इंगेजमेंट फार्मिंग’ जोक्स। एक तरफ बोला गया ‘डिप्लोमेसी स्वीट हो गई’, दूसरी तरफ ‘मोदी जी पारले प्रमोट कर रहे’। पारले बिक भी जाता तो मोदी और मेलोनी जैसे इन्फ्लुएंसर को अपने ब्रांड प्रमोशन के लिए हासिल नहीं कर पाता। असली बात ये है कि दोनों समझते हैं कि पर्सनल केमिस्ट्री से दो देशों के बीच ब्रिज बनता है।  फॉर्मल टॉक्स जरूरी हैं, लेकिन ह्यूमन टच रिलेशन को लॉन्ग-लास्टिंग बनाता है। चॉकलेट गिफ्ट सिर्फ मीम के लिए नहीं है, ये सिग्नल भी था। ‘हम फॉर्मल भी हैं, कैजुअल भी, और भारत-इटली की दोस्ती स्वीट है।’.

 

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तेल की कीमत 110 डॉलर के पार, दहशत में दुनिया, नहीं माना ईरान तो होर्मुज में होगी नाटो की एंट्री

होर्मुज को लेकर होने वाली है नाटो की बड़ी बैठक. (Photo: AP)

नई दिल्ली. अमेरिका -ईरान में कब बात बनेगी। दुनिया इसका इंतजार कर रही है। दूसरी तरफ कच्चे तेल के दाम फिर से दहशत फैलाती नजर आ रही है। ग्लोब टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही है। यह सब है यूएस-ईरान के बीच तेल -गैस आवाजाही के लिये सबसे अहम समुद्री रूट होर्मुज ऑफ स्ट्रेट की वजह से जिसे ईरान ने बन्द कर रखा है तो इसके आसपास अमेरिका की नाकाबंदी चल रही है। इस सबसे बड़े संकट को कम करने के लिये अब होर्मुज में नाटो की एंट्री हो सकती है। इसके कुछ सदस्य देशों का अब मानना है कि अगर नाकाबंदी जारी रही है। ईरान न माना तो ऐसा करना आवश्यक हो सकता है। जिससे इस समुद्री रूट से जहाजों की आवाजाही सुचारू करने में मदद मिलेगी।
नाटो का रूख में अचानक बदला
ब्लूमबर्ग ने अपनी नयी रिपोर्ट में मंगलवार का नाटो गठबधन के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनायिकों का हवाला देते हुए बताया है कि नाटो इस बाद पर चर्चा कर रहा है कि अगर ईरान जुलाई की शुरूआत तक स्ट्रेटिजिक समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोलता है। यहां से जहाजों को गुजरने में मदद कैसे की जाये। ये चर्चाये ईरान से जुड़े अमेरिका -इजरायल संघर्ष में प्रत्यक्ष भागीदारी के प्रति कई यूरोपीय सदस्यों के माह के प्रतिरोध के बाद बड़े बदलाव का संकेत है। क्योंकि ट्रम्प के अनुरोध को पहले कई नाटो देशों ने ठुकरा दिया था।
अप्रैल में, नाटो के सहयोगियों ने सार्वजनिक रूप से क्षेत्र में नाकाबंदी अभियान का समर्थन करने के लिए ट्रम्प की अपील को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट की मानें, तो अब इस प्रस्ताव को कई नाटो देशों का समर्थन मिल चुका है, हालांकि अभी तक सर्वसम्मति से सभी का समर्थन नहीं मिला है।
‘अंकारा’ की बैठक में होगा फैसला
Hormuz Strait से होकर दुनिया की कुल जरूरत का करीब 20 फीसदी तेल और गैस की आवाजाही होती है और इसमें आई रुकावट के चलते तमाम देशों में तेल-गैस का संकट गहराया हुआ है।   कच्चे तेल की कीमतों में इजाफे से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, महंगाई भी कोहराम मचाती नजर आ रही है।

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UAE न्यूक्लियर प्लांट पर ईरानी हमला

नई दिल्ली. ईरान के ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बराकाह न्यूक्लीयर प्लांट को निशाना बनाया है। जिसके बाद से खाड़ी में तनाव और बढ़ गया है। भारत ने भी यूएई के न्यूक्लियर प्लांट को निशाना बनाये जाने पर चिंता जताई है। सोमवार को विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी इलाके में बढ़ते तनाव के बीच यह एक खतरनाक उकसावे की घटना है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि UAE  के बराकाह न्यूक्लियर प्लांट को निशाना बनाकर किये गये हमले को लेकर भारत बेहद चिंतित है। इस तरह की कार्यवाहियां स्वीकार नहीं की जा सकती है। यह तनाव को खतरनाक स्तरत क बढ़ाने वाला कदम है। हम सभी पक्षों को संयम बरतने और बातचीत व कूटनीतिक के रास्ते पर लौटने की अपील करते हैं।
यह प्रतिक्रिया उस ड्रोन हमले के बाद आई है। जिसमें अबू धाबी स्थित बराकाह न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट में आग लग गयी है। अमीराती अधिकारियों के अनुसार हमला प्लांट की अंदरूनी सुरक्षा सीमा के बाहर लगे एक बिजली जनरेटर पर हुआ है। हालांकि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है और न ही किसी तरह का रेडियोएक्टिव रिसाव हुआ है।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर बढ़ी चिंता
यूएई पर ईरान के हमले ने अमेरिका के साथ कायम नाजुक युद्धविराम को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है। दोनों पक्षों के बीच युद्ध खत्म करने के लिए की जा रही कोशिशें दबाव में आ गई है।  यूएई ने हमले को लेकर कहा कि यह ‘बिना उकसावे का आतंकवादी हमला’ है।  उसने कहा कि यूएई की संप्रभुता को किसी भी तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यूएई विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘ये हमले बेहद खतरनाक उकसावा हैं, आक्रामक कार्रवाई हैं जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता. ये देश की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।’
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने बताया कि हमले के बाद प्लांट के पास आग लगने से एक रिएक्टर को आपातकालीन डीजल जनरेटर से बिजली दी जा रही है।   संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी ने परमाणु स्थलों के आसपास ज्यादा से ज्यादा ‘सैन्य संयम’ बरतने की अपील की और कहा कि वह हालात पर करीबी नजर रख रही है।
यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सऊदी अरब की पश्चिमी सीमा से तीन ड्रोन यूएई के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए थे, जिनमें से दो को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही मार गिराया गया है। हालांकि, अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया है।   इससे पहले भी यूएई, ईरान और उसके सहयोगी समूहों पर खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने के आरोप लगाता रहा है।

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2 एफ-18 फायटर जेट्स विमान क्रैश, प्लेन बने आग का गोला

नई दिल्ली. अमेरिका के माउंटेन होम एयरफोर्स बेस में आयोजित एयर शो के दौरान बड़ा हादसा हो गया। जब 2 अमेरिकी ईए-18जी ग्राउलर लड़ाकू विमान हवा में आपस में टकरा गये। हादसे के बाद एयरबेस को तत्काल लॉकडाउन कर दिया और इससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गयी। एयर शो के दौरान आसमान में हुई इस भीषण टक्कर के बाद विमानों के परखच्चे उड़ गये। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह घटना रविवार की दोपहर लगीाग 12.30 बजे (स्थानीय समय) की है। जिसके तत्काल बाद घटनास्थल से काले धुएं का गुबार उठता देखा गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार इस हादसे का शिकार हुए विमान अमेरिकी नौसेना/वायुसेना द्वारा उपयोग किये जाने वाले दो ईए-18जी ग्राउलर फायटर जेट्स थे। जो एफ-18 हॉरनेट का ही एक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर वेरिएंिट है। अधिकारियों ने बताया कि दोनों जेट एयरबेस से लगभग 2 मील दूर जा गिरे। फिलहाल आपातकालीन दल घटनास्थल पर मौजूद है। हादसे की जांच शुरू कर दी गयी है।

हादसे से जुड़ी 3 तस्वीरें…

दोनों विमान एयर बेस से करीब 2 मील दूर क्लोज-फॉर्मेशन मैनूवर्स के दौरान टकराए।
विमान के जमीन पर गिरने के बाद आग की लपटें और काला धुआं उठता नजर आया।
विमान के जमीन पर गिरने के बाद आग की लपटें और काला धुआं उठता नजर आया।
विमान गिरने के कुछ सेकेंड बाद चार पैराशूट भी जमीन पर उतरे।

EA-18G की कीमत 550-600 करोड़ रुपए
अमेरिकी रक्षा कंपनी बोइंग के मुताबिक, EA-18G ग्रोलर अमेरिकी नौसेना का एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट है, जो F/A-18 सुपर हॉर्नेट के आधार पर बना है। अलग-अलग कॉन्फिगरेशन के हिसाब से इसकी कीमत करीब 65-70 मिलियन डॉलर (करीब 550-600 करोड़ रुपए) मानी जाती है। इसमें 2 पायलट होते हैं। एक विमान उड़ाता है और दूसरा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम संभालता है। इसका इस्तेमाल दुश्मन के रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और एयर डिफेंस को जाम करने के लिए किया जाता है। युद्ध के दौरान यह दूसरे फाइटर जेट्स को सुरक्षा देता है, ताकि वे दुश्मन के इलाके में आसानी से हमला कर सकें। इसकी अधिकतम स्पीड 1.8 मैक यानी ध्वनि की गति से 1.8 गुना ज्यादा है। इसकी रेंज 2300 किमी है। ऑस्ट्रेलिया ने भी अमेरिका से ये फाइटर जेट खरीदे हैं।
गनफाइटर स्काइज एयर शो 8 साल बाद हो रहा था। सैन्य विमानों के प्रदर्शन और एरियल डेमोंस्ट्रेशन देखने के लिए हजारों लोग पहुंचे थे। इसकी तैयारी करीब 2 साल से चल रही थी।इस हादसे ने माउंटेन होम एयर शो के पुराने हादसों की याद भी ताजा कर दी। 2018 में यहां एक हैंग ग्लाइडर पायलट रनवे पर क्रैश में मारा गया था। 2003 में भी एयर शो के दौरान थंडरबर्ड्स का एक जेट क्रैश हुआ था, हालांकि पायलट बच गया था।

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मिडिल ईस्ट अब फिर से युद्ध की आग में झुलसेगा, ईरान पर हमला कर सकते हैं ट्रम्प

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में शांति की जो थोड़ी-बहुत उम्मीद दिख रही थी। अब उस पर फिर से खतरे के बाद मंडराने लगे है। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू होने के बाद लोगों का लगा था। शायद अब हालात संभल जायेंगे। लेकिन अब ऐसी खबरें सामने आ रही है। जिसने एक बार फिर दुनिया में तनाव बढ़ा दी है। अमेरिकी मीडिया का दावा है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फेल हुई। आने वाले दिनों में हालात फिर विस्फोटक हो सकते है। यानी जिस जंग पर फिलहाल ब्रेक लगा दिखाई दे रहा है। वह फिर से भड़क सकती है। दरअसल, दोनों देशों के बीच पेंच ईरान की उन 5 शर्तो पर आकर फंसा है। जिसे मानने में अमेरिका कतरा रहा है।
ईरान की इन 5 शर्तों की वजह से नहीं बन रही बात
ईरान की पहली मांग है कि लेबनान समेत तमाम मोर्चों पर जारी सैन्य संघर्ष और लड़ाई को तुरंत पूरी तरह से रोका जाए।
ईरान चाहता है कि बातचीत आगे बढ़ाने से पहले अमेरिका उस पर लगाए गए सभी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाए।
ईरान ने मांग रखी है कि विदेशों में रोकी गई उसकी सारी संपत्ति और जमे हुए फंड को बिना किसी देरी के तुरंत जारी किया जाए।
ईरान का कहना है कि इस पूरी जंग में उसे जो भी भारी माली और सैन्य नुकसान हुआ है, अमेरिका को उसकी पूरी भरपाई करनी होगी।
तेल सप्लाई के लिए दुनिया के सबसे अहम रास्ते यानी ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर ईरान अपनी संप्रभुता चाहता है और अमेरिका को इसे मान्यता देनी होगी।

 

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संबंध सुधारों तभी गंगा का जल मिलेगा, 30 साल पुरान फरक्का संधि के रीन्यूअल पर अड़ा बांग्लादेश

नई दिल्ली. बांग्लादेश और भारत के बीच संबंधों के बीच एक बार फिर पानी बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। ढाका में आयोजित एक कार्यक्रम में बांग्लादेश की सत्तारूढ़ पार्टी बीएनपी क महासचिव और ग्रामीण विकास मंत्री मिर्जा फखरूल इस्लाम आलमगीर ने साफ कहा है कि भारत के अच्छे रिश्तों का भविष्य अब गंगा जल बटवारा समझौते पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा है कि दिसम्बर 2026 में खत्म हो रही गंगा वाटर शेयरिंग ट्रीटी को नये सिरे से बाग्लादेश की उम्मीदों और जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाना चाहिये।
आलमगीर ने कहा है कि ढाका-भारत को एक स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि नयी संधि पर जल्द बातचीत शुरू होनी चाहिये। उनका कहना था कि जब तक नया समझौता नहीं हो जाता है तब तक पुरानी संधि का जारी रखा जाये। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में जल बटवारे के समझौते किसी तय समय सीमा तक सीमित नहीं होने चाहिये।
हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने पद्मा नदी पर एक बड़े बैराज प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। यह प्रोजेक्ट 2033 तक पूरा होने की उम्मीद है. ढाका का कहना है कि इसका मकसद फरक्का बैराज के “नकारात्मक प्रभाव” को कम करना है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे नदी में गाद जमा होने और जलस्तर बढ़ने की समस्या और गंभीर हो सकती है।
इससे पहले BNP नेताओं ने तीस्ता जल समझौते को लेकर भी पश्चिम बंगाल की राजनीति पर निशाना साधा था. BNP के नेताओं ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी की सरकार की वजह से भारत-बांग्लादेश के बीच तीस्ता समझौता अटका हुआ है।  साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई थी कि इससे तीस्ता वार्ता आगे बढ़ सकती है।
भारत की तरफ से फिलहाल यही कहा गया है कि दोनों देशों के बीच जल विवादों को सुलझाने के लिए पहले से कई द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और बांग्लादेश 54 साझा नदियों से जुड़े मुद्दों पर नियमित बातचीत करते रहते हैं. लेकिन जिस तरह से BNP सरकार ने अब गंगा समझौते को सीधे रिश्तों से जोड़ दिया है, उससे आने वाले महीनों में पानी की राजनीति दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा मुद्दा बन सकती है।

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अमेरिकी F-15ई स्ट्राइक ईगल जेट्स हमला करने के लिए तैयार

US Israel Iran strike नई दिल्ली. अमेरिका और इजरायल के सैन्य अधिकारी ईरान पर संभावित हमलों के लिये टारगेट की सूची बना रहे है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार दोनों देशों के बीच जल्द ही ईरान पर फिर से सैन्य कार्यवाही शुरू करने की प्लानिंग चल रही है। इजरायली सेना और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (केंटोम) ने इमरजेंसी मीटिंग की है। संयुक्त रूप से ईरान के जरूरी ठिकानों की सूची तैयार की जा रही है। यह तैयारी अगले हफ्ते तक हमला शुरू करने जितनी तेजी से चल रही है।
वर्तमान में 8 अप्रैल को लगा युद्धविराम पूरी तरह लाइफ सपोर्ट पर चल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वयं कहा है कि ईरान के साथ शांति की कोशिशें लगभग समाप्त हो चुकी है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही चर्चा भी पूरी तरह फेल हो गयी है। ईरान मेें बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूरा संप्रभु अधिकार और नयी प्रबंधन व्यवस्था की मांग की थी। जिसे ट्रम्प ने सिरे खारिज कर दिया है।
ईरान पर हमले के संभावित लक्ष्य
अमेरिकी और इजरायली अधिकारी मिलकर ईरान के अंदर जरूरी टारगेट्स की एक संयुक्त सूची तैयार कर रहे है।  इनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्लांट, मिसाइल फैक्टरियां, सैन्य अड्डे और कमांड सेंटर शामिल हो सकते है।  दोनों देशों का मानना है कि अगर अभी कार्रवाई नहीं की गई तो ईरान फिर से मजबूत हो जाएगा और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाएगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है।  यहां से दुनिया का बहुत बड़ा तेल निर्यात होता है. ईरान ने इस पर अपना पूरा नियंत्रण मांगा था, जिसे अमेरिका और इजरायल दोनों ने मना कर दिया । अगर युद्ध शुरू हुआ तो इस खाड़ी में तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका असर पूरी दुनिया की पर पड़ेगा ।
फिलहाल दोनों तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।  लेकिन सैन्य स्तर पर तैयारी तेज हो गई है। इजरायल का मानना है कि ईरान की परमाणु क्षमता को हमेशा के लिए खत्म करने का यह आखिरी मौका हो सकता है। अमेरिका भी ईरान को मजबूत होने से रोकना चाहता है।

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डोनाल्ड ट्रम्प से पहले दोस्ती की बात फिर दी चेतावनी, ताइवान के मुद्दे पर जिनपिंग सख्त

नई दिल्ली. बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में अमेरिका और चीन के बीच महत्वपूर्ण बैठक में दोस्ती और तनाव दोनों की झलक देखने को मिली है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ बातचीत की शुरूआत सहयोग और साझेदारी की बातों से की। लेकिन ताइवान का मुद्दा आते ही उनका रूख बेहद सख्त हो गया। चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ के अनुसार जिनपिंग ने ट्रम्प से कहा है कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका रिश्तों का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील सवाल है। उन्होंने साफ चेतावनी भरी शब्दों में कहा है कि अगर इस मुद्दे का सही तरीके से संभाला गया ता दोनों देशों के रिश्ते स्थिर रहेंगे। लेकिन अगर इसे गलत तरीके से हैण्डल किया तो दोनों देशों के बीच टकराव या संघर्ष भी हो सकता है।
हालांकि सख्त चेतावनी देने से पूर्व जिनपिंग ने दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की भी बात की। उन्होंने ने कहा है कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि साझेदार, बनना चाहिये और दुनिया में स्थिरता लाने के लिये मिलकर काम करना चाहिये। बैठक के बीच में ट्रेड और टैरिफ का मुद्दा भी प्रमुख रहा है। जिनपिंग ने कहा है कि चीन और अमेरिका के आर्थिक रिश्ते विन-विन यानी दोनों लाभ वाले हैं। उन्होंने दोहराया है कि ट्रेड वॉर में कभी की जीत नहीं होती है।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षो से चीन और अमेरिका के बीच रिश्ते काफी तनाव पूर्ण रहे हैं। ट्रेडवॉर, चिप टेक्नोलॉजी, दक्षिण चीन सागर ओर ताइवान जैसे मुद्दों ने दोनों देशों को कई बार आमने-सामने ला खड़ा किया है। फिलहाल दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर अस्थाई राहत जरूर है। लेकिन ताइवान अब भी सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट बना हुआ है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बताया है कि एक दिन पहले दोनों देशों की ट्रेड टीमों के बीच हुई बातचीत सकारात्मक रही है। इससे दुनिया को अच्छा संदेश गया है। उन्होंने कहा है कि मतभेद और तनाव को बराबरी के आधार पर बातचीत से ही सुलझाया जा सकता है।

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