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यूएस-ईरान डील 14 जून को होगी, ट्रम्प का तुरंत खुलेगा होर्मुज ऑफ स्ट्रेट

नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा दावा किया है कि ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित समझौते पर 14 जून को हस्ताक्षर होने वाले है। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक बदलाव करार देते हुए कहा है कि डील के बाद होर्मुज स्ट्रैट को तत्काल प्रभाव से खोल दिया जायेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि प्रस्तावित समझौते का सबसे अहम पहलू ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है। उनके अनुसार यह डील इस बात की गारंटी देगी कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार नहीं बनायेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस समझौते को न्यूक्लीयर हथियार नहीं बनाने की दीवार बताया। उन्होंने कहा हैकि ईरान अब किसी भी माध्यम से परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ने कहा है कि समझौते के तहत ईरान को परमाणु हथियार खरीदने, विकसित करने या किसी अन्य तरीके से हासिल करने की अनुमति नहीं होगी। उनका दावा है कि इस व्यवस्था से इलाके में स्थिरता बढ़ेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के तत्काल बाद महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिये दोबारा खोल दिया जायेगा।

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राममंदिर में की दान चोरी की निष्पक्ष जांच एसआईटी हो -ट्रस्ट

लखनऊ. यूपी के अयोध्या स्थित राममंदिर में जो पैसा भक्तदान करते है। उसकी कथित तौर पर चोरी को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गयाहै। इस मामले में विवाद इतनी तेजी से फैली कि अब स्वयं राम मंदिर का ट्रस्ट मैदान में आ गया है। ट्रस्ट ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से सीधे अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले की जांच एक एसआईटी यानी विशेष जांच दल से करवाई जाये। राममंदिर में श्रद्धालु जो पैसे दान करते है। उन्हें दान पात्रों में डाला जाता है यह दान पात्र यानी वह बक्से या डिब्बे जिनमें भक्त पैसे डालते हैं। इन्हीं दान पात्रों से पैसे चोरी होने की बात कहीं जा रही है। अब इस कथित चोरी को लेकर बाजार में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगी। कोई कुछ कह रहा था तो कोई कुछ, इन अफवाहों ने मामले को और उलझा दिया तो लोगों में भ्रम की स्थिति बन गयी।
एसआईटी जांच की मांग क्यों
ट्रस्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर माना है। राम मंदिर की दान राषि से जुड़ा यह मामला सिर्फ पैसों की चोरी नहीं है। बल्कि यह भक्तों की आस्था और भरोसे का सवाल भी है। करोड़ों लोग इस मंदिर में श्रद्धा से दान करते हैं। ऐसे में अगर उस दान की चोरी होती है। उस पर अफवाहें भी फैलती है तो यह बेहद संवेदनशील मामला बन जाता है। ट्रस्ट चाहता है कि एसआईटी जांच से यह बात एकदम साफ हो जाये कि आखिर हुआ क्या था कितनी चोरी हुई है और कौन जिम्मेदार है। इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिये क्या कदम उठाने चाहिये।
मुख्यमंत्री योगी से अनुरोध क्यों?
उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी का राम मंदिर से गहरा जुड़ाव है। अयोध्या और राम मंदिर उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक रही है. SIT का गठन करना राज्य सरकार के अधिकार में आता है।  इसलिए ट्रस्ट ने सीधे मुख्यमंत्री योगी से यह अनुरोध किया।

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तीसरी आंख-भारत की तीसरी आंख को 25 जून को मिलेगा फायनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस, इससे वायुसेना की बढ़ेगी शक्ति

नई दिल्ली. भारत की स्वदेशी हवाई निगरानी और टोही क्षमताओं के क्षेत्र में 25 जून को एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) आगामी 25 जून को बेंगलुरू स्थित सेंटर फॉर एयबोर्न सिस्टम्स में स्वदेशी हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली नेत्र ‘नेत्र’ (Netra AEW&C) के लिये फायनल ऑपरेशन क्लीयरेंस का ऐलान करने के लिये पूरी तरह तैयार है।
यह ऐलान भारतीय वायु सेना के लिये विकसित किये गये इस स्वदेशी रणनीतिक प्लेटफॉर्म के विकास, परीक्षण और परिचालन साइकिल की सफल समाप्ति का प्रतीक है। एफओसी मिलने का सीधा मतलब यह है कि यह सिस्टम अब युद्ध या किसी भी सैन्य संकट के बीच पूर्ण पैमाने पर मोर्चे पर तैनात होने के लिये पूरी तरह तैयार और प्रमाणित हो चुका है।

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क्या बागी गुट ही असली TMC होगा

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हार के बाद पार्टी के अन्दर हुई नाराजगी अब खुले विद्रोह में बदलती नजर आ रही है। लोकसभा में टीएमसी के 19 सांसदों द्वारा अलग गुट बनाने की मांग किये जाने के बाद पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है।
टीएमसी के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपने अलग गुट की मांग को आगे बढ़ायेंगे। यदि बागियों को पर्याप्त संख्या का समर्थन मिलता है। लोकसभा में टीएमसी की मान्यता और नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है। टीएमसी में बगावत की आग एक दिन में नहीं भड़की । इसके पीछे राजनीतिक महत्वकाक्षायें, पद और पॉवर की चाहत की लम्बी कहानी है। इसमें उन सांसदों के नाम है। जिन्होंने आधिकारिक तौर पर टीएमसी से अलग गुट बनाने की प्रक्रिया का अगाज किया था। इस चिट्ठी में कुल 19 सांसदों के हस्ताक्षर है और यह पत्र भी 18 मई को लिखा गया था।
असली टीएमसी क्या बागी गुट ही बन जायेगा
आपको बता दें कि लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद है। 19 ने पहले ही मंसूबे साफ कर दिये है। इसमें सयानी घोष का नाम नहीं था। सयानी घोष ने बाद में पाला बदलने का प्लान बनाया। सबसे आखिरी में बागवत की कल्याणी बनर्जी ने अगर कल्याण बनर्जी और सयानी घोष को भी जोड़ दें। बागियों की संख्या 21 हो जाती है। जो कि टीएमसी के कुल सांसदों की संख्या के दो तिहाई से भी ज्यादा है। ऐसे में लोकसभा स्पीकर बागियों को ही असली टीएमसी घोषित कर दे ंतो हैरानी नहीं होगी। ममता बनर्जी से पार्टी छीनने के लिये बागियों का सिर्फ 19 सांसदों का समर्थन चाहिये।

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RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पत्नी की सर्जरी और बच्चों की देखभाल का आधार पर मांगी जमानत, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

जबलपुर. आरटीओ में तैनात रहे करोड़पति पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की जमानत अर्जी पर बुधवार को सुनवाई की गयी थी। अस्थाई जमानत (टेम्प्रेररी बेल) आवेदन पर सुनबाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरखित रख लिया है। ऐसा माना जा रहा है कि इस पर एक-दो दिन में फैसला आ सकता है। सौरभ शर्मा ने पत्नी की सर्जरी और बच्चों की देखभाल का हवाला देते हुए जमानत अर्जी दायर की है। आपको बता दें कि सौरभ शर्मा प्रदेश के बहुचर्चित आरटीओ भ्रष्टाचार और मनी लॉड्रिंग मामले के मुख्य आरोपी है।
गर्मियों की छुट्टियों के बीच जस्टिल विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले कि जिला अदालत और हाईकोर्ट दोनों ही सौरभ शर्मा की नियमित जमानत यचिकाये खारिज कर चुके हैं। इस बार सौरभ शर्मा ने पत्नी दिव्या तिवारी की सर्जरी और 2 बच्चों की देखभाल का आधार बनाकर 60 दिन की अस्थाई जमानत की मांग की है। इससे पहले जबलपुर हाईकोर्ट में 108 करोड़ रूपये की संपत्ति, 51 किलो सोना और मनी लॉड्रिंग से जुड़े तथ्यों का हवाला देते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। अब हाईकोर्ट में दायर 60 दिन की अस्थाई जमानत याचिका पर फैसला आना बाकी है।
बच्चों की देखभाल और पत्नी की सर्जरी का आधार बनाकर मांगी जमानत
सौरभ शर्मा ने अपनी जमानत याचिका में कहा गया है कि उसकी पत्नी दिव्या तिवारी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है। याचिका के अनुसार,उसे डिविएटे डनेजल सेप्टम क्रॉनिक साइनसिस्टम और नॉक संबंधी जटिल समस्या है। जिसके चलते डॉक्टर ने फंक्शनल एंडोस्कोपी साइनस सर्जरी की सलाह दी है। याचिका में यह भी कहा गया है कि ऑपरेशन के बाद भी देखभाल के लिये पति की मौजूदगी आवश्यक है। जमानत याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि उसके 2 नाबालिग बच्चे अमीर और सुबीर तरह से अपने माता-पिता पर ही निर्वाह है। पत्नी के अस्पताल में भर्ती रहने और सर्जरी के बाद रिकवरी के दौरान बच्चों की देखभाल करने वाला कोई अन्य जिम्मेदार सदस्य नहीं है। इस मानवीय आधार पर उसे 60 दिन की अस्थाई जमानत दी जाये।
ईडी ने परिवार और करीबी लोगों के नाम पर संपत्तियां होने का किया दावा
ईडी के मुताबिक, चेतन सिंह गौर, शरद जायसवाल और रोहित तिवारी जैसी हस्तियां उसकी कंपनियों से जुड़ी है। पत्नी दिव्या तिवारी, मां उमा शर्मा, सास रेखा तिवारी और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर जमीन, कंपनियां, स्कूल, प्रोजेक्ट, पेट्रोल पंप और अन्य संपत्तियां होने का दावा जांच एजेंटीयों ने किया है, ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब कथित तौर पर पूरा आर्थिक साम्राज्य इतने लोगों के सहारे संचालित हो रहा था, तो पत्नी के इलाज और बच्चों की देखभाल के लिए सौरभ शर्मा को आखिर क्यों जमानत अर्जी दायर करनी पड़ रही है।

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8th Pay Commission-8वें वेतन आयोग से पहले मिलने अनुमान DA Hike

नई दिल्ली. केन्द्र सरकार के कर्मचारी-पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन इसके तहत कितनी सैलरी बढ़ेगी और कब तक खातों में आयेगी। इसे लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं हो पायी है। इस दौरान महंगाई के आंकड़ों में ऐसी संभावनायें बढ़ती दिखाई दे रही है। 8वें वेतन पे से पहले केन्द्रीय कर्मचारियों को जुलाई से महंगाई भत्ते में वृद्धि का तोहफा मिल सकता है।
मिलेगी राहत
एक ओर जहां लाखों केन्द्रीय कर्मचारी 8th Pay Commission के तहत वेतन में बड़े संशोधन की सिफारिशों लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं इस इंतजार के बीच उन्हें महंगाई भत्ते में वृद्धि के रूप् में एक छोटी, लेकिन तत्काल राहत मिल सकती है। श्रम ब्यूरो द्वारा जारी नये महंगाई के आंकड़ों ने इस उम्मीद को और मजबूत किया है। 8th Pay Commission के सामने कर्मचारी संघ यह तर्क मजबूती के साथ रख रहे है कि महंगाई के चलते बढ़ती कीमतों ने जीवन यापन की लागत को लगातार बढ़ाने का काम किया है और खर्च करने की शक्ति कमजोर हुई है।
DA Hike 3%  मिल सकता है
केन्द्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 60% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। ताजा कैलकुलेशन के आधार पर देखें तो यह 63% हो सकता है। यानी कि 3प्रतिशत DA Hike  की उम्मीद है हालांकि अंतिम दर मई-जून 2026 के लिये AICPI-IW के आंकड़ों और उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी पर निर्भर करेगी।
8th Pay Commission से कर्मचारियों की डिमांड
कई कर्मचारी संगठनों ने तर्क दिया है कि बढ़ती महंगाई औरे जीवन यापन के बढ़ते खर्चो केलिये वेतन में अहम संशोधन की आवश्यकता है। 8th Pay Commission के सामने रखी गयी है। प्रमुख मांगों में हाई फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन में संशोधन, महंगाई भत्ता का मूल वेतन में विलय और मजबूत पेंशन सुरक्षा शामिल है। कुछ कर्मचारी यूनियनों ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है। गौरतलब है कि वेतन और पेंशन को लेकर चर्चा जारी रहने के बीच, 8वें वेतन आयोग ने ज्ञापन प्रस्तुत करने की अंतिम समय सीमा को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। आयोग ने यह भी कहा है कि ज्ञापन सिर्फ उसकी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही जमा किये जाने चाहिये औरा हार्डकॉपी, भौतिक दस्तावेज, ईमेल या पीडीएफ पर विचार नहीं किया जायेगा।

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सबसे लंबे समय तक PM रहने का रिकॉर्ड नरेंद्र मोदी के नाम

नेहरू 4398 दिन रहे, मोदी को 4399 हो गए
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी के नाम आज बुधवार को एक और रिकॉर्ड दर्ज हो गया। यह रिकॉर्ड इसलिए काफी अहम है क्योंकि भारत जैसे देश में, जहां जनता चुनाव पर सरकार पलट देती है, ऐसे हालात में देश की जनता ने 3 बार BJP को सरकार चलाने का मौका दिया और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया। देश में अभी तक सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड जवाहरलाल नेहरू के नाम था। नेहरू 4398 दिनों तक प्रधानमंत्री रहे थे, पर मोदी ने प्रधानमंत्री रहते हुए आज 4399 दिन पूरे कर लिए और अभी उनके 3 साल का कार्यकाल शेष है।
अंतर यह है
नेहरू जब पहली बार प्रधानमंत्री बने थे तो उन्हें जनता ने नहीं चुना था। उन्हें अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण के वक्त प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। पर मोदी जब पहली बार प्रधानमंत्री बने तो जनता ने उन्हें गुजरात से सीधे दिल्ली भेजा। प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने से पहले मोदी 3 बार लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे।इतिहास रचने के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जनसेवा ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी है। उन्होंने कहा कि विनम्रता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ निरंतर कार्य करने वाला व्यक्ति ही जनता का विश्वास अर्जित कर सकता है। उन्होंने संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया।
हर मोर्चे पर फतह
मोदी ने अपने बूते पर 3 बार सिर्फ दिल्ली में ही सरकार नहीं बनाई, उन राज्यों में भी भगवा फहराया जहां माना जा रहा था कि BJP जड़ें तक नहीं जमा पाएगी। ताजा उदाहरण पश्चिम बंगाल है, तो इससे पहले 30 साल बाद UP में 2017 में वापसी की थी। दिल्ली भी वापस ली तो ओडिशा में भी लंबे समय बाद BJP की सरकार बनी। पूर्वोत्तर में तो सिर्फ बीजेपी ही नजर आती है। आज देश के 22 राज्यों में बीजेपी/एनडीए की सरकार है।
आगे अग्निपरीक्षा
मोदी ने सबसे लंबे समय तक PM  रहने का रिकॉर्ड तो अपने नाम कर लिया। इससे यह भी तय है कि इस रिकॉर्ड तक पहुंचना अब किसी नेता के लिए ख्वाब से कम नहीं होगा। पर आने वाले समय में मोदी को कड़ी परीक्षा से गुजरना है। भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। भारत की जीडीपी को वहां पहुंचाना है जहां भारत, जर्मनी-अमेरिका को टक्कर दे सके। मोदी विकसित भारत के विजन को लेकर पहले ही आगे बढ़ चुके हैं। यह सब चुनौतियां तब हैं जब खाड़ी युद्ध के चलते दुनिया भर के देशों की आर्थिक हालत प्रभावित हो रही है।
दिल्ली में आज जश्न
मोदी सरकार के आज ही 12 साल पूरे हुए।
इस मौके पर भारत मंडपम में एक बैठक रखी गई है।
इसमें एनडीए शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री के अलावा एनडीए के 35 सहयोगी दलों के 75 वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
इस बैठक में विकसित भारत के सपने पर मंथन होगा।
रोड मैप तैयार किया जाएगा।

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28 वर्ष की उम्र में राजनीति में रखा कदम, शिवलिंग विवाद और अब पाला बदल, सयानी की जुबानी

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल की सियासत की सबसे चर्चित चेहरों में से एक सयोनी घोष का ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की नजदीकी माना जाता रहा है। लेकिन सत्ता बदलते ही पाला बदल लिया है। सयानी भी टीएमसी के उन बागी सांसदों की फेहरिश्त में शामिल हो गयी है। जिन्होंने लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला कमो पत्र लिखकर सदन में अलग बैठने और एनडीए को समर्थन करने का फैसला किया है।
हीरोइन से राजनेता बनी सयानी घोष ने अपने करियर की शुरूआत बहुत कम उम्र में की थी। 2010 में उन्होंने महज 17 वर्षीय बांग्ली फिलम में कदम रखा और समूचे बंगाल में उन्हें पहचान मिली। राजनीति में आने से पहले ही सयानी घोष सांस्कृतिक जगत का एक चर्चित चेहरा बन चुकी थी। जिसके बाद 28 साल की आयु में सियासत में कदम रखा औरे बहुत ही तेजी से ममता बनर्जी के भरोसेमंदर बन गयी है। सयानी घोष बंगाल की राजनीति में एक प्रमुख युवा चेहरा है। ममता बनर्जी के नजदीकी नेता बनने से लेकर सयानी घोष के सियासी पाला बदलने की कहानी काफी रोचक है।
अभिनेत्री से कैसी सयानी बनी नेता
सयानी घोष बंगाली सीरियल से अपनी अभिनय क्षमता साबित करने के बाद बांग्ला सिनेमा (टॉलीवुड) का रुख किया. 2011 में उन्होंने फिल्म ‘शत्रु’ में एक छोटी भूमिका निभाई, जिसने उन्हें काफी बड़ा बना दिया. ये उनके करियर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई और उन्हें बंगाली सिनेमा में एक पहचान मिली है।   यही नहीं सयानी केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने थियेटर (रंगमंच) में भी काम किया, जिसके चलते बंगाल के सामाजिक आंदोलन के जुड़े हुए लोगों की बीच अपनी जगह बनाई है।
अब बदल रही सियासी पाला
सयानी घोष अपने पांच साल के सियासी सफर में ख़ुद को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की करीबी की तरह पेश करती हैं और अपने भाषणों में बार-बार ममता बनर्जी का ज़िक्र करती है।  सयानी ममता बनर्जी की तरह ही साड़ी पहनती हैं और कई बार उन्हीं की तरह चप्पल पहनकर सभाएं करती है।   इतना ही नहीं ममता कई बार कह चुकी हैं कि वो ममता बनर्जी को फ़ॉलो करती हूं। ममता बनर्जी को अपना राजनीतिक आदर्श और अभिषेक बनर्जी को नेता बताने वाली सयानी घोष बंगाल की सत्ता बदलते ही सियासी मिजाज भी बदल रहा. सयानी भी टीएमसी की उन बागी नेताओं की फेहरिश्त में शामिल हो गई है।  जो अभिषेक बनर्जी को लोकसभा संसदीय दल के TMC  के नेता पद से हटाना चाहती हैं और काकोली घोष को बनाना चाहते हैं. इतना ही नहीं संसद में अलग बैठने और एनडीए को समर्थन करना चाहता है.

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Meta का पहला AI सेंटर भारत के जामनगर में खुलेगा

नई दिल्ली. फेसबुक की पैरेंट कम्पनी मेटा अब भारत में अपना पहला आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस (एआई) डेटा सेंटर ओपन करने जा रही है। मेटा ने इसके लिये रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ पार्टनरशिप की है। यह डेटा सेंटर गुजरात राज्य के जामनगर में शुरू किया जायेगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज जामनगर में सेंटर तैयार करेगी। जिसके बाद मेटा इसमें अपना ऑपरेशन शुरू करेगा। मेटा का यह एआई डेटा सेंटार के एआई मिशन को पॉवर देने का काम करेगा।
मेटा और रिलायंस पार्टनरशिप के तहत तैयार होने वाले एआई डेटा सेंटर 168 मेगावॉट कैपिसिटी के साथ शुरू किया जायेगा और बाद में इसका एक्सटेंशन किया जायेगा। यह सेंटर आने वाले 2 वर्षो में शुरू होगा।
रिलायंस निर्माण कर रही मेटा एआई डेटा सेंटर
रिलायंस इस फैक्ट्री का निर्माण करेगी। जबकि मेटा अपने एआई सिस्टम को सपोर्ट देने के लिये इसका उपयोग करेगी। यह सपोर्ट फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्रॉडक्ट में काम करता है। यह प्रोजेक्ट मार्क जकरबर्ग की उस बड़ी प्लानिंग को आगे बढायेगा। जिसको वह पर्सनल सुपर इंटेलीजेंस भी कहते हैं।
डेटा सेंटर को सर्विस देगी रिलायंस इंडस्ट्रीज
पार्टनरशिप के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज डेटा सेंटर के पूरे लाइफसाइकल के दौरान एंड-टू-एंड सर्विस देगी। इसमें डेटा सेंटर का डिजायन, डवलपमेंट, यूटिलिटी मैनेजमेंट, नवनीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति, नेटवर्क कनेक्टिविटी और पूरी तरह से फुलीमैनेज्ड ऑपरेशन सर्विसेज को शामिल किया गया है।
रिलायंस अपनी स्थिति को मजूबत करेगी
पार्टनरशिप के तहत रिलायंस भारत में हाइपरस्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सिंगल-विंडो सॉल्यूशंस प्रोवाइडर के रूप में अपनी स्थिति को मजूबत करेगी. ग्राहकों को एक ही कंपनी के जरिए डेटा सेंटर से जुड़ी सभी प्रमुख सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

 

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12 परमाणु हथियार के साथ भारत वार के लिये तैयार

नई दिल्ली. स्वीडन के थिंक टैंक स्टॉक होम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) की नयी रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 12 परमाणु हथियार तैनात किये है। रिपोर्ट के अनुसार शांतिकाल में इतने बड़े पैमाने पर परमाणु हथियारों की तैनाती पहली बार दर्ज की गयी है। वहीं, चीन ने भी अपने परमाणु हथियारों की तैेनाती की संख्या 2025 के 24 से बढ़ाकर 2026 में 34 कर दी है।
सीपरी ने सोमवार का अपनी एसआईपीआर एयरबुक 2026 जारी करते हुए कहा है कि दुनिया के देश अब राष्ट्रीय शकित के साधन के रूप् में परमाणु हथियारों पर पहले से ज्यादा निर्भर होते जा रहे है। दुनियाभर में करीब 4,012 परमाणु वॉरहेड ऐसे है जो मिसाइलें और विमानों के साथ तैनात स्थिति में है। SIPRI ने सोमवार को अपनी SIPRI Yearbook 2026 जारी करते हुए कहा कि दुनिया के देश अब राष्ट्रीय शक्ति के साधन के रूप में परमाणु हथियारों पर पहले से अधिक निर्भर होते जा रहे हैं.
 दुनिया के किन 9 देशों के पास हैं परमाणु बम?
रिपोर्ट में नौ परमाणु हथियार संपन्न देशों का उल्लेख किया गया है. ये हैं: अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल.
वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2,100 से 2,200 तैनात वॉरहेड बैलिस्टिक मिसाइलों पर हाई परेशनल अलर्ट की स्थिति में रखे गए हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से लगभग सभी वॉरहेड रूस और अमेरिका के हैं, जबकि कुछ संख्या फ्रांस और ब्रिटेन की है. हालांकि, SIPRI का आकलन है कि चीन और भारत भी अब शांतिकाल के दौरान कभी-कभी मिसाइलों पर कम संख्या में परमाणु वॉरहेड तैनात कर सकते हैं.
जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार: भारत के पास 12 तैनात परमाणु वॉरहेड हैं. चीन के पास 34 तैनात परमाणु वॉरहेड हैं, जो 2025 के 24 से 10 ज्यादा हैं. तैनात परमाणु वॉरहेड की संख्या के मामले में रूस सबसे आगे है. अमेरिका के पास 1,770, रूस के पास 1,796, फ्रांस के पास 280 और ब्रिटेन के पास 120 तैनात परमाणु वॉरहेड हैं.

 

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