TMC में फूट और DMK रूठी, BJP परिसीमन बिल को पास कराने की बना रही रणनीति
नई दिल्ली. देश की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर आकर खड़ी हो गयी हे। एक ओर जहां विपक्षी एक जुटता ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा तो दूसरी ओर केन्द्र की सत्ताधारी भाजपा अपने सबसे महत्वाकांक्षी मिशन -परिमीशन विधेयक 2026 को पास कराने के चक्रव्यूह को भेदने के बेहद करीब पहुंचती नजर आ रही है।
पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अंदर अंदरूनी कलह और बगावत की चिंगारी सुलग रही है। वहीं, दक्षिण भारत में विपक्ष का सबसे मजबूत स्तंभ मानी जाने वाली ‘‘द्रमुक’’ (डीएमके) ने कांग्रेस से धोखे का आरोप लगाते हुए इंडिया गठबंधन सेा किनारा कर लिया है। आम आदमी पार्टी में पहले ही बगावत हो चुकी है। विपक्ष के बिखरते कुनबे के बीच भाजपा अलग की रणनीति पर काम कर रही है। भाजपा क्या अपने सियासी मंसूबे में कामयाब हो पायेगी?
डीएमके इंडिया ब्लॉक से रूठ गयी
तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद दक्षिण की राजनीति में आये भूचाल ने इंडिया ब्लॉक की चूलें हिला दी है। राज्य की सत्ता की डीमके बाहर होते ही और थलपति विजय के राजनीति उदय से केन्द्र की राजनीति पूरी तरह बदल गयी है। कांग्रेस ने तमिलनाडु में डीएमके का साथ छोड़कर अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिझगा वेत्री कड़गम’ (टीवीके) के साथ गठबंधन सरकार में शामिल हो गयी। जिसने डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन को पसंद नहीं आया।
राज्यसभा में जाने के लिये एनडीए को दो तिहाई बहुमत
राज्यसभा में एनडीए के लिये दो-तिहाई बहुमत जुटाने का रास्ता आसान होती दिखाई दे रही हैं हाल ही में आम आदमी पार्टी ‘‘आप’’ के सांसदरों के पाला बदलकर भाजपा का दामन था मिलया है। आम आदमी के 7 सांसदों के बीजेपी में विलय को राज्यसभा अध्यक्ष द्वारा मंजूरी मिल गयी है। इसके बाद उच्च सदन में भाजपा की व्यक्तिगत संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गयी है एनडीए की ताकत 145 तक पहुंच गयी है।
परिसीमन बिल को पास कराने की भाजपा की रणनीति
केन्द्र सरकार 2029 से पहले हरहाल में परिसीमन बिल पास कराना चाहती है। लेकिन दो-तिहाई बहुमत नहीं होने से कामयाब नहीं हो पा रही है। परिसीमन बिल के देश के राजनीतिक भूगोल को बदलने वाला है।इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 (816 राज्यों के लिये) करने का प्रस्ताव है। दरअसल, यह एक संविधान संशोधन बिल है। इसलिये इसे संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई (2/3) विशेष बहुमत से पास कराना अनिवार्य है। सरकार के पहले प्रयास में विपक्ष की एकजुटता के चलते पास नहीं हो सका। लेकिन बदले हुए सियासी हालात में भाजपा ने नया गुणा-गणित तैयार कर लिया है। विपक्ष में बिखराब का लाभ उठाकर भाजपा दो -तिहाई बहुमत का नम्बर जुटाने में लग गयी है।
सांसद में दो-तिहाई बहुमत क्यों हैं जरूरी
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी बड़े संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिये संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई (विशेष) बहुंमत की आवश्यकता होती है। हाल ही में (अ्रप्रैल 2026में) लोकसभा में दो-तिहाई बहुंमत नहीं होने की वजह से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने से जुड़ा 131वां संविधान विधेयक गिर गया था। मोदी सरकार के आगामी बड़े एजेंडे जैसे एक देश एक चुनाव और देशव्यापी परिसीमन बिल को बिना दो-तिहाई बहुमत के नम्बर जुटाये उसको पारित कराना असंभव है। यही वजह है कि भाजपा विभिन्न क्षेत्रीय दलों और असंतुष्ट सांसदरों को जोड़कर इस आंकड़े को सुरक्षित करने की कोशिशों में तेजी से जुटी है। अब देखना है कि भाजपा कितनी कामयाब होती है।

