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वृंदावन घटना में 10 लोगों की मौत, एक ही परिवार के 7 सदस्यों की मौत, बांके बिहारी के दर्शन करने आये थे

Mathura Boat Accident Video from Just Before the Tragedy

लुधियाना. यूपी के वृंदावन में यमुना नदी में नाव पलटने से एक बड़ी दुर्घटना हो गयी,जिसमें 410 श्रद्धालुओं की मौत हो गयी। मृतकों में एक ही परिवार के 7 सदस्य शामिल बताये गये हैं। सभी श्रद्धालु शुक्रवार की सुबह ही लुधियाना और जगराओं से वृंदावन पहुंचे थे। घटना में जान गंवाने वाले श्रद्धालु लुधियाना और जगराओं के निवासी बताये जा रहे है। हादसे के बाद इलाके में शोक का मातम छाया हुआ है परिजनों में भी शोक पसरा हुआ है।
क्या है घटनाक्रम
छरअसल, गुरूवार 9 अप्रैल को जगराओं के श्री बांकेबिहारी क्लब की तरफ से 2 बसों में लगभग 130 श्रद्धालुओं को वृंदावन यात्रा के लिये ले जाया गया था। इनमें से लगभग 90 श्रद्धालुओं जगराओं के थे। जबकि बाकी अन्य शहरों से शामिल किये गये थे। यह 4 दिवसीय धार्मिक यात्रा पर आये थे। बांके बिहारी के दर्शन करने आये थे। लेकिन वृंदावन में नाव पलटने से एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत हो गयी थी। घटना में एक ही परिवार केक 7 सदस्यों की मौत की खबर सामने आयी है। मृतकों में जगराओं निवासी मधुर बहल, उनकी मां कविता बहल, चाचा चरणजीत, चरणजीत की पत्नी पिंकी बहल, मधुर की बुआ आशारानी, दूसरी बुआ लुधियाना निवासी अंजु गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी के नाम सामने आये है। हालांकि लुधियाना स्थित राकेश गुलाटी के घर मौजूद रिश्तेदारों ने कहा है कि पूरी सूची मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पायेगी।
विधायक ले रहे हैं जानकारी
हादसे की खबर मिलते ही विधायक कुलवंत सिद्धू भी पीडि़त परिवार के पास पहुंचे। उन्होंने कहा है कि घटना की जानकारी ले रहे हैं। घटना के बाद मृतकों के परिजनों में मातम का माहौल है। पूरे में शोक व्याप्त है। आपको बता दें कि वृंदावन के के केशी घाट के पास यमुना नदी में पर्यटकों से भरी नाव पोंटून पुल से टकराकर कर पलट गयी थी ।नाव में 30 से ज्यादा लोग सवार थे। जो नदी में गिर गये। जिनमें से 10 लोगों की मौत हो गयी। जबकि 22 को बचा लिया गया है। वहीं पीएम नरेन्द्र मोदी ने ऐलान किया है कि वृृंदावन घटना में प्रत्येक मृतक के परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रूपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जायेगी। घायलों को 50 हजार रूपये दिये जायेंगे।

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7वें वेतन आयोग -क्यों हो रही महंगाई भत्ते में देरी और कितनी बढ़ेगा वेतन

नई दिल्ली. केन्द्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स जनवरी 2026 में महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में वृद्धि का बेसब्री से इतजार कर रहे है। अप्रैल माह शुरू हो चुका है अभी तक कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की गयी। जिससे कई लोगों को लग रहा है कि जल्द ही इसका ऐलान होने वाला है।
महंगाई भत्ता (डीए) में वृद्धि से मासिक वेतन और पेंशन में सीधे तौर पर वृद्धि होती है।इसलिये एक छोटा सा बदलाव भी लाखों परिवारों के लिये महत्व रखता है। अभी केन्द्र सरकार ने 8वां वेतन आयोग भी लागू नहीं किया है। जिस वजह से इन कर्मचारियों का 7वें वेतन आयोग के तहत ही डीए और डीआर में वृद्धि का अनुमान है। केन्द्र सरकार साल में 2 बार महंगाई भत्ता में वृद्धि करती है। पहली बढ़ोत्तरी जनवरी से लागू होती है। जिसका ऐलान मार्च या अप्रैल में किया जाता है। जबकि दूसरी वृद्धि जुलाई से लागू होती है। जिसका ऐलान सितम्बर -अक्टूबर में लागू किया जाता है। सरकारी कर्मचारी अभी जनवरी वाले भत्ते का इंतजार कर रहे है।
महंगाई भत्ते के आने में क्यों हो रही देरी
मार्च में डीए की वृद्धि का ऐलान नहीं होने की वजह से चिन्ता पैदा हुई है। लेकिन एक्सपर्टस का कहना है कि यह असामान्य हो सकता है। कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस प्रायवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य विजन अधिकारी प्रतीक वैद्य बताते हैं। कि यह प्रॉसेस एक तय समय समय सीमा का पालन करती है। उन्होंने कहा है कि आमतौर पर जनवरी के लिये एग्रीकल्चर खर्च संबंध ऐलान मार्च के आसपास पूरी हो जाती है। जब महंगाई के आंकड़े जारी होते हैं। इसलिये समय के लिहाज से देखें तो इसमें कोई खास बदलाव नहीं हो रहा है। उन्होंने आगे कहा है कि जिसे कई लोग देरी कह रहे है। वह असल में मंदी से अधिक उम्मीदों से जुड़ी है। वैद्य ने कहा है कि जिस देरी को ‘‘देरी’’ के रूप में देखा जा रहा है। वह वास्तविकता से कहीं अधिक अपेक्षाओं पर आधारित है। यह दिसम्बर तक पूरे वर्ष के एआइ्रसीपीआई आंकड़ों पर निर्भरकरता है। उसके बाद एक प्रॉसेंस है। फाईल की आवाजाही, वित्तीय जांच, कैबिनेट की मंजूरी, फिर डीए में बढ़ोत्तरी का ऐलान हो सकता है।
क्‍यों लग रहा इतना समय?
नियमित अप्रूवल के अलावा, व्यापक आर्थिक स्थिति भी समय तय करने में भूमिका निभा सकती है।  वैद्य ने कहा कि सरकार जल्‍दी से ऐलान करने के बजाय उनमें अंराल रखना पसंद करेगी। इससे पता चलता है कि सरकार अपने फैसलों को जल्‍दबाजी में लेने के बजाय धीरे-धीरे ले ही है, भले ही कैलकुलेशन पहले से ही की जा चुकी हो ।जहां तक संभावित बढ़ोतरी की बात हैं तो शुरुआती अनुमान मामूली वृद्धि की ओर इशारा करते है।   एक्‍सपर्ट का कहना है कि अनुमानित बढ़ोतरी लगभग 3% से 4% के आसपास होगी, जिससे महंगाई भत्ता 50 फीसदी से ऊपर चला जाएगा और 53 से 54 फीसदी हो सकता है।

 

 

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नालंदा के शीतला माता मंदिर में मची भगदड से 9 की मौत, इनमें 8 महिलायें, 25 हजार श्रद्धालुओं की सुरक्षा एक भी पुलिस कर्मी नहीं

नालंदा. बिहार के नालंदा जिले में मंगलवार की सुबह शीतला माता मंदिर में भगदड़ मच गयी। भगदड़ की घटना में 9 लोगों की मौत हो गयी है। 8 महिलाओं की भीड़ में दबने से घटनास्थल पर मौत हो गयी थी। जबकि एक पुरूष ने अस्पताल में दम तोड़ दिया है। चैत्र माह के आखिरी मगलवार का भारी तादाद में श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचे थे। वहां मेला भी लगा था। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि भीड़ का काबू में करने के लिये इंतजाम नहीं थे। दर्शन करने की जल्द में धक्का-मुक्की मच गयी। अफरातफरी के बीच कई लोग भीड़ में दब गये। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। हादसे के बाद मंदिर और मेला को बन्द करवा दिया गया है। आज नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने भी हिस्सा लिया था। उनकी सुरक्षा में 8 जिलों के 2500 जवानों का लगाया गया था। जबकि मंदिर मंे जुटी 25 हजार की भीड़ के लिये एक भी पुलिस वाले की तैनाती नहीं थी।
हादसे के बाद पटना कमिश्नर को बिहार शरीफ भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने मुख्यसचिव का जांच के निर्देश दिये हैं। दीपनगर थाने के एसएचओ राजमणि को निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 6 लाख रूपये मुआवजा देने का ऐलान किया है। वहीं केन्द्र सरकार ने 2 लाख के मुआवजे की घोषणा की है।

हादसे के बाद की 4 तस्वीरें देखिए…

हादसे के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
हादसे के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
ई-रिक्शा से घायल महिला को अस्पताल लाया गया।
ई-रिक्शा से घायल महिला को अस्पताल लाया गया।
हॉस्पिटल में घायल को सीपीआर देते डॉक्टर।
हॉस्पिटल में घायल को सीपीआर देते डॉक्टर।
पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर लोगों की भीड़ है।
पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर लोगों की भीड़ है।

हादसे से जुड़ी बड़ी बातें
चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार के चलते पटना, आसपास के इलाकों से भी दर्शन के लिए पहुंचे थे। वजह भीड़ बहुत बढ़ गई। मंदिर परिसर छोटा था। भीड़ को कंट्रोल करने के इंतजाम नहीं थे। लोगों में पहले दर्शन करने की होड़ लग गई। लोग कतार में लगने की जगह आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।  भगदड़ की स्थिति बन गई। कई लोग भीड़ के नीचे दब गए। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसे के बाद पुलिस और एंबुलेंस को पहुंचने में भी देर हुई।

 

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देश की सीमा से ISI का आतंकी गुर्गा गिरफ्तार

नई दिल्ली- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी कार्रवाई में लश्कर ए तैयबा के कमांडर शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार कर लिया है। इसकी गिरफ्तारी बांग्लादेश बॉर्डर के पास से की गई। यह लश्कर के एक मॉड्यूल का संचालन कर रहा था और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI  इसे अपने इशारों पर नचा रही थी। भारत में तबाही मचाने के लिए तैयार कर रही थी। इसके मंसूबों की जैसे ही भारतीय खुफिया एजेंसियों को भनक लगी, खुफिया एजेंसियों ने इसका पीछा करना शुरू कर दिया था।
2 महीने लगे
ऐसा बताया जा रहा है कि खुफिया एजेंसियों का यह ऑपरेशन करीब 2 महीने चला। इस दौरान कैट एंड माउस गेम काफी देखने को मिली। दिल्ली पुलिस के आयुक्त सतीश गोलचा खुद पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे थे।
पीछा कब से
दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम इसके पीछे तभी से लग गई थी जब खबर मिली थी कि शब्बीर अहमद लोन दिल्ली, कोलकाता और तमिलनाडु में आतंकी गतिविधियों के लिए युवाओं की भर्ती कर रहा है। इसके बाद हर पल इस पर नजर रखी जाने लगी।
पाक से कंट्रोल
दिल्ली पुलिस को जांच में पता चला कि शब्बीर अहमद लोन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर आतंकी घटनाओं को अंजाम देता था। इस समय वह सीमा पार से मिल रहे निर्देशों का पालन करते हुए भारत में किसी मिशन को अंजाम देने की फिराक में था।
सिर दर्द बन गया था यह
लश्कर ए तैयबा के कमांडर शब्बीर अहमद लोन को दिल्ली पुलिस ने साल 2007 में भी गिरफ्तार किया था। यह 12 साल तक जेल में रहा और जैसे ही इसे जेल से जमानत मिली 2019 में यह बांग्लादेश भाग गया। इसके बाद यह ढाका में रहते हुए लश्कर और ISI के लिए आतंकी सेल स्थापित की। इसके बाद से ही इसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किल खड़ी करनी शुरू कर दी थी। यह मूलतः श्रीनगर का रहने वाला है और उस आतंकी मॉड्यूल का सरगना था जिसका हाल ही में भंडाफोड़ किया गया था। दिल्ली से दक्षिण भारत तक फैले इस मॉड्यूल ने दिल्ली-कोलकाता और कई स्थानों पर भारत विरोधी पोस्टर चिपकाए थे।

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8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट 18 महीने में आयेगी-केन्द्रीय राज्यंमंत्री

नई दिल्ली. 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकार ने एक बड़ा अपडेट जारी किया है। इससे लाखों कर्मचारियेां और पेंशनर्स के लिये सरकार ने 8वें वेतन आयोग का लेकर कुछ स्पष्टता के संकेत दिये है। लेकिन अभी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। संसद में केन्द्र सरकार ने बताया है कि कब तक 8वॉ वेतन आयोग लागू किया जा सकता है। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा है कि सरकार 3 नवंबर 2025 को औपचारिक रूप से 8वें केन्द्रीय वेतन आयोग की स्थापना की थी।
उन्होंने आगे कहा है कि आयोग को केन्द्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते ओर पेंशन पर अपनी सिफारिशें रिपोर्ट पेश करने के लिये 18 माह का वक्त दियागया है। उन्होंने 8वें वेतन आयोग कब लागू होगा, इस सवाल का उत्तर देते हुए कहा है कि यह तभी पता चल पायेगा। जब रिपोर्ट पेश की जायेगी। उसे एक्सेप्ट किया जायेगा और इसके बाद तय हो सकेगा कि इस आयोग को कब से लागू किया जाये, खैर अभी आयोग इस पर रिपोर्ट तैयार करने में जुटा हुआ है। 8वेंतन आयोग को लेकर आयोग एक तरह से काम नहीं कर रहा है। यह अलग-अलग कैटेगरी से एक्टिव तरीके सुझाव पाने का प्रयास कर रहा है। माईगांव पोर्टल पर 18 तरह के सवाल अपलोड किये गये है। मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, कर्मचारी संगठनों, शिक्षाविद्ों और यहां तक कि लोगों में भी फीडबैक मांगा गया है। फीडवैक देने की अंतिम तारीख 31 मार्च है। सिर्फ ऑनलाइन तरीके से ही फीडबैक लिया जायेगा। वेतन का लेकर कहा गया है।
संशोधित वेतन का भुगतान भले ही बाद किया जायेगा। लेकिन इसका कैलकुलेशन 1 जनवरी 2026 से की जायेगी। इसी दिन से 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्त हो गया है।
जिसमें पूर्व आयोग का कार्य और आज की अर्थव्‍यवस्‍था शामिल है।  6वें वेतन आयोग के तहत करीब 40 फीसदी सैलरी बढ़ी थी, जबकि 7वें वेतन आयोग के तहत 23 से 25 फीसदी के आपास बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसमें 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर है। इसी बात पर 8वां वेतन आयोग के तहत भी सैलरी निर्भर करती है।  एक्‍सपर्ट ने कहा कि यह सिर्फ अनुमान है, अंतिम फैसला कई आंकड़ों पर निर्भर करता है। उन्‍होंने समझाया कि 8वें आयोग के लिए ज्‍यादातर अनुमानां में 20 से 35 फीसदी की बढ़ोतरी की बात कही गई है, जिसमें फिटमेंट फैक्‍टर 2.4 से 3 के बीच और बेसिक सैलरी शामिल है।  लेकिन अंतिम आंकड़ा अगले 12 से 18 महीनों में महंगाई, टैक्‍स की उपलब्‍धता और राजनीतिक इच्‍छा पर निर्भर करता है।

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1 अप्रैल से नया कानून होगा लागू-नये इनकम टैक्स में बदलाव एचआरए, वेतन और टैक्स में होगा बदलाव

ग्वालियर. नये फायनेंशिल ईयर शुरू होने के साथ ही 1 अप्रैल से नया आयकर अधिनियम (न्यू टैक्स लॉ 2025) लागू होने जा रहा है। सैलरी टेक्सपेयर्स के लिये एक बड़ा बदलाव है। जिसमें एचआरए, सैलरी स्ट्रक्चर और टैक्स डिडक्शन सहित कई बदलाव हो रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सरकार का उद्देश्य दशकों से अधिक जटिल हो चुके टैक्स सिस्टम को सरल बनाना है।
सैलरी और एचआरए में बदलाव
वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिये मकान किराया भत्त (एचआरए) टैक्स बचाने के लिये सबसे खास साधनों में से एक माना जाता है। लेकिन नयी व्यवस्था के तहत इसमें एक खास तरह का बदलाव किया गया है। बेंगलुरू, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों का ेअब 50प्रतिशत एचआरए छूट का लाभ मिलेगा। जिससे वह महानगरों के समान फायदा ले सकते है। लेकिन वहीं, दिल्ली एनसीआर में निवासरत लोगों को 40 प्रतिशत तक ही एचआरए के तहत टैक्स डिडक्शन का फायदा दिया जायेगा। यह बदलाव अर्बन सैलरी कर्मचारी के लिये खास हैं क्योंकि इसमें तेजी से डवलप हो रहे शहरों में सैलरी स्ट्रक्चर्स की टैक्सण् क्षमता में बढ़ोत्तरी की गयी है। कम्पनी एचआरए के नये नियम को लागू करने के लिये वेतन फिर से तय कर सकते है। जिससे नयी व्यवस्था के तहत सैलरी स्ट्रक्चर अधिक किफायती हो सकता है नियिोक्ता द्वारा दिया जाने वाला मेडीकल ऋण पर छूट की सीमा को 20 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रूपये का प्रस्ताव हैं जिससे स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय नियोजन में अतिरिक्त राहत मिलेगी।
टैक्स सिस्टम को सुगम बनाना है लक्ष्य
सबसे खास बदलाव में से एक बच्चों से संबधित खर्चो के लिये दी जाने वाली छुूट में वृद्धि की गयी है। बच्चों की एज्यूकेशन अलाउंस अमांउट बढ़ाकर 3 हजार रूपये प्रतिमाह प्रति बच्चा कर दिया गया है। जबकि पहले यह मात्रा 300 रूपये थी। यह खास बदलाव का संकेत है। खासकरि मिडिल क्लास के सैलरी परिवारों के लिये जहां शिक्षा खर्च घरेलू बजट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इस कदम से वह डिडक्शन जो पहले नहीं थे। अब टैक्स बचत में शामिल हो चुके है। नये कानून के तहत किये गये संरचानात्मक बदलावों में फायनेंशियत ईयर औरे असेसमेंट ईयर का एक ही टैक्स ईयर में बदल दिया गया है। जिसे अप्रैल से मार्च तक की 12 माह की अवधि के बीच माना जायेगा। इस बदलाव से टैक्स फाइल करना आसान हो गया है। खासकर पहली बार टैक्स रिर्टर्न फायल करने वालों के लिये यह कफ्यूजन दूर हो चुका है। इ सके अलावा सरकार ने उपयोग में सुधार लाने और परेशानियों को कम करने के उद्देश्य से आयकर रिटर्न (आईटीआर) डॉक्यूमेंट्स को नये सिरे से डिजाइन करके जारी करने की योजना बनाई है।
टैक्स स्लैब में नहीं कोई बदलाव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट 2026 स्‍पीच में ऐलान किया कि आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा, लेकिन टैक्‍स स्लैब अनचेंज रहेंगे. नए कानून के तहत 2025-2026 के टैक्‍स स्लैब फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में कमाए इनकम पर लागू होंगे.
नए नियमों से कुछ अनुपालन आवश्यकताओं में भी ढील दी गई है. वाहन खरीद और कैश जमा जैसे लेन-देन में अनिवार्य पैन नंबर बताने की सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे छोटे लेन-देनों का बोझ कम हो गया है. साथ ही कैपिटल मार्केट में नियामक निगरानी को मजबूत किया गया है. स्‍टॉक एक्‍सचेंजों को अब ये काम करने होंगे…
• 7 सालों तक ऑडिट ट्रेल बनाए रखें.
• लेन-देन के रिकॉर्ड को हटाने से रोकें.
• संशोधित लेन-देन पर मंथली रिपोर्ट जमा करें.
इससे ट्रांसपैरेंसी में सुधार होगा और निवेशकों के हितों की रक्षा होगी.

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लगातार हो रही तत्काल टिकटों की चोरी, 5वीं फेल गिरोह की करतूत, सरगना है जमानत पर, आईआईटी अधिकारियों के पास भी नहीं इसकी रोकथाम नहीं

नई दिल्ली. अवैध सॉफ्टवेयर से ट्रेनों के तत्काल टिकट बुक हो रहे है। एक आम यात्री जितनी देर में आरआईसीटीसी ऐप पर डिटेल भर पाता है उससे भी कम समय में यह साफ्टवेयर टिकट बुक कर देते है। 25-30 सेकेण्ड्स में एक टिकट बुक हो जाती है। फिर इन टिकट्स को 300-500 रूपये तक का कमीशन लेकर बेच दिया जाता है। फेस्टिवल टाइम में कमीशन 4 गुना तक हो जाता है। इस नेक्सस को चलाने वाले 5वीं फेल है। वही जिन अधिकारियों पर धांधली रोकने का दायित्व है वह आईआईटी-आईआईएम जैसे संस्थानों से पढ़ाई की है। लेकिन गड़बड़ी को बन्द नहीं में सफल नहीं हो पा रहे है।
2-3 माह में नई पहचान, ऐसे बदलते है सॉफट्वेयर, वेबसाइट और बैंक अकाउंट
कभी नेक्सस में शामिल रहे एजेंट ने बताया है कि गैंग का सरगना हर 2-3 माह में साफ्टवेयर के नाम, वेबसाइट और बैंक अकाउंट और मोबाइल नम्बर तक बदल देता है। ताकि किसी भी तरह की ट्रैकिंग से बचा जा सकता है। उपयोग किये जाने वाले नम्बर पूरी तरह से फर्जी होते हैं। जबकि पैसों के लेन-देन के लिये म्यूल अकाउंट्स यानी लालच देकर या फर्जी तरीके से बनाये गये खातों का उपयोग किया जाता है। फिलहाल टेस्ला, गदर, स्टारलिंक, स्पेसएक्स, सुपरमैन, बीएमडब्ल्यू, और थंडर जैसे नामों से साफ्टवेयर बेचे जा रहे है। जिन्हें सुपर मास्टर से लेकर यूजर तक अलग-अलग स्तर के एजेंट्स को दिया जाता है। जो टिकट बुकिंग काम संभालते है। पूरा नेटवर्क वाट्सऐप और टेलीकॉम ग्रुप्स क माध्यम से संचालित होता है। जहां सॉफ्टवेयर से जुडी जानकारी और अपडेट मैसेज के माध्यम से शेयर किय जाते हैं।
अवैध टिकट खेल के 5 कर्ताधर्ता-ऑपरेटर से लेकर सीबीआई तक ऐसे काम करता है नेटवर्क
ऑपरेटर -यही अवैध सॉफटवेयर चलाते है, डवलपर और ट्रैवल एजेंट्स के बीच की कड़ी है। एजेंटों को अवैध सॉफ्टवेयर का लॉग इन आईडी और पासवर्ड देते है। इससे एजेंट ‘‘तत्काल’’ टिकट खोलते ही तेजी से बुक कर पाते है।
टिकट ऐजेंट -अवैध सॉफ्टवेयर का उपयोग करके टिकट बुक करते है। इसके माध्यम से आईआरसीटीसी वेबसाइट को ऑटोमेटिक एक्सेस करना, कैचपा बाइपास करना और तत्काल टिकट सेकेण्ड्स में बुक कर और कमीशन वसूलते हैं।
सीआरआईएस अवैध सॉफ्टवेयर से बुकिंग रोकने में सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम यानी सीआरआईएस की तकनीकी भूमिका है। रेलवे के आईटी सिस्टम को डवलप करने, सर्वर लॉग और ट्रैफिक पैटर्न की निगरानी कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, आईपी ऐड्रेस और यूजर अकाउंट को ब्लॉक करना, केपचा और ओटीपी जैसे सिक्योरिटी पुख्ता करने का जिम्मा है।
आरपीएफ रेलवे प्रॉक्टशन फोर्स यानी कि आरपीएफ पर टिकट दलालों, एजेंट नेटवर्क और अवैध बुकिंग गतिविधियों की पहचान कर कार्यवाही करना, छापे मारना और जांच करने का जिम्मा है।
सीबीआई- इस धांधली से जुडे 3 केस की जांच कर चुकी है। लेकिन अभी तक अपराध को बन्द नहीं करवा सकी। गैग के सरगनाओं को पकड़कर सलाखों के पीछे डालने की जिम्मेदारी है।
सीबीआई ने सलमान-शमशेर के नेक्सस का सरगना बताया
सीबीआई पिछले 14 वर्षो से इसकी जांच कर रही है। 2012 में पहली एफआईआर दर्ज की थी ।तब चौथी पास सलमान, अहमदाबाद के आईटी प्रोफेशनल कुलवीर सिंह, सतीश तिवारी और सीताराम निषाद को गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने चार्जशीट में यूपी के सलमान अहमद खान और शमशेर आलम को अवैध सॉफ्टवेयर से टिकट बुकिंग का किंगपिन बताया था ।सलमान को 2018 और शमशेर को 2023 में भी पकड़ा गया।इससे साबित होता है कि दोनों अभी भी नेक्सस चला रहे है। अलग-अलग मामलों में सीबीआई अभी तक 4 बार केस दर्ज कर चुकी है। लेकिन न नेक्सस बन्द हुआ और न कोई केस अंजाम तक पहूंचा है।
पैसा कैसे कमाते है
टिकट बुकिंग का नेक्सस

1. तरीका
फेक नंबर, बार-बार नाम/वेबसाइट/अकाउंट
बदलकर सिस्टम से बचते हैं2. पैसा
मूल अकाउंट्स यानी (फर्जी/दूसरों के नाम वाले
अकाउंट) में पेमेंट3. टूल
टेस्ला | गदर | स्टारलिंक | स्पेसएक्स | सुपरमैन |
BMW | थंडर4. नेटवर्क
सुपर मास्टर मास्टर एडमिन सेलर यूजर
(हर लेवल पर एजेंट टिकट बुक करता है)5. ऑपरेशन
वॉट्सएप, टेलीग्राम ग्रुप्स
यहाँ डील, बातचीत और डेटा शेयर
किसका, क्या रोलऑपरेटर
सॉफ्टवेयर + लॉगिनएजेंट
तेज बुकिंग + कमीशनCRIS
निगरानी + ब्लॉकRPF
छापा + कार्रवाईCBI
जांच + गिरफ्तारी
1. तत्काल बुकिंग की नई नीति• केवल आधार सत्यापित यूजर ही तत्काल ई-टिकट बुक कर सकेंगे
• ARP बुकिंग का समय: सुबह 8 से 10 बजे (12 अक्टूबर 2025 से)रोजाना टिकट बुकिंग का आंकड़ा
• IRCTC द्वारा औसतन 14.69 लाख ई-टिकट रोजाना बुक किए जाते हैं (सितंबर–नवंबर 2025)
• इनमें से 16.95% यानी लगभग 2.49 लाख टिकट तत्काल कोटे के होते हैं2. पेमेंट सिस्टम क्या हैफाइल के अनुसार पेमेंट लिए जाते हैं:
• UPI
• QR कोड
• Merchant scanner

उदाहरण UPI ID:
classic100@ybl3. रेलवे का सिस्टम क्या है
चेक और वेलिडेशनएजेंट बुकिंग पर रोक
• ARP यानी एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (जनरल कोटा) के लिए सुबह 8 से 8 बजे 10 मिनट
• तत्काल (AC/Non-AC) के लिए सुबह 10 से 10 बजे 30 मिनट और 11 से 11 बजे 30 मिनट (डिफेंस को छोड़कर)
• एक यूजर आईडी से जनरल कोटा में 2 टिकट (08:00-10:00 बजे)
• एक यूजर आईडी से तत्काल में 2 टिकट (10:00-12:00 बजे)
• ARP और तत्काल समय में विदेशी IP एड्रेस ब्लॉक
• 08:00 से 12:00 बजे के बीच एक लॉग-इन में सिर्फ एक बुकिंग (रिटर्न/ऑनवर्ड को छोड़कर)
• एजेंट को एक दिन, एक ट्रेन में केवल एक तत्काल टिकट4. किसका, क्या रोलऑपरेटर
सॉफ्टवेयर + लॉगिन एजेंट
तेज बुकिंग + कमीशन CRIS
निगरानी + ब्लॉक RPF
छापा + कार्रवाई CBI
जांच + गिरफ्तारी5. टिकट बुकिंग कैसे होती हैएजेंट सॉफ्टवेयर लॉगिन करता है। सॉफ्टवेयर पहले से:
• ट्रेन • यात्री • भुगतान ऑटो-फिल कर देता हैतत्काल खुलते ही:
सॉफ्टवेयर Captcha bypass करता है मिली सेकंड में टिकट बुक

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रेलवे के नियमों में बड़ा बदलाव, रिफंड, कैंसिलेशन और बुकिंग में सब कुछ हुआ बदला

नई दिल्ली. यात्री टिकटों की कालाबाजारी को लेकर रेलवे ने यात्रियों की सुविधा, पारदर्शिता और सिस्टम की मजबूती को ध्यान में रखते हुए बड़े सुधार 1-15 अप्रैल के बीच लागू करने जा रहा हैं रेल मंत्रालय की 52 हफ्ते, 52 रिफॉर्म्स पहल के तहत इसबार कई महत्वपूर्ण फैसले लिये गये है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारवाता्र में इन बदलावों की जानकारी दी गयी। जिनका सीधा असर टिकट बुकिंग, कैसिलेशन और प्रोजेक्टस की कार्यप्रणाली पर पडेगा।
फर्जी एकाउंट पर सख्ती और होगी डिजीटल सुरक्षा मजबूत
रेलवे की टिकटिंग व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिये आईआरसीटीसी ने अहम कदम उठाया है। लगभग 3 करोड़ फर्जी एकाउंट्स को ब्लॉक किया गया है। ताकि फर्जी तरीके से टिकट बुकिंग को रोका जा सके। अब तत्काल टिकट बुकिंग के आधार आधारित ओटीपी सिस्टम लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही एंटी-बॉट तकनीकी भी लगाई गयी है।जिससे ऑटोमेटेड और फर्जी बुकिंग पर रोक लगेगी। पहले 30 मिनट तक बुकिंग पर कुछ प्रतिबंध रहेगा ताकि सिस्टम पर दबाव कम हो सके।
टिकट कैंसिलेशन के नये नियम
रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। जिससे रिफंड प्रक्रिया अब अधिक स्पष्ट और समयानुसार हो गयी है।
ट्रेन छूटने से 8 घंटे से कम समय में कैंसिल करने पर कोई रिफंड नही मिलेगा।
8-24 घंटे के बीच कैंसिलेशन पर करीब 50 प्रतिशत रिफंड।
24-72 घंटे के बीच कैंसिल करने पर लगभग 75 प्रतिशत रिफंड।
72 घंटे से पहले कैंसिल करने पर करीब पूरा पैसा वापिस मिलेगा। केवल मामूली शुल्क कटेगा।
यह नये नियम यात्रियों को समय पर निर्णय लेने के लिये प्रेरित करेंगे और सिस्टम को ज्यादा व्यवस्थित बनायेंगे।
पहले से नियम सरल -बोर्डिंग और मैनेजमेंट में होगी सुविधा
रेलवे यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिये कई सुविधाओं को जोड़ा गया है।
अब यात्री चार्ट बनने से 30 मिनट पहले तक अपने टिकट का बोर्डिंग प्वॉइंट बदल सकते हैं।
बोर्डिंंग प्वॉइंट बदलने की सुविधा पूरी तरह से निःशुल्क होगी।
पीआरएस काउंटर टिकट अब किसी भी स्टेशन से कैंसिल कर सकते हैं।
ई-टिकट केलिये अब टीडीआर (टिकट डिपॉजिट रीसिप्ट) भरने की जरूरत नहीं होगी। रिफंड अपने मिल जायेगा।
यह बदलाव यात्रियों के समय और मेहनत दोनों को बचायेगा और प्रक्रिया को सरल बनायेगा।
ठेकेदारों के नये और सख्त नियम
रेलवे प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और समय पर पूरा होने को सुनिश्चित करने के लिये ठेकेदारों से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है।
अब रेलवे प्रोजेक्ट में बोली लगाने वाले ठेकेदार के पास कम से कम 20 प्रतिशत अनुभव होना जरूरी होगा।
10 करोड़ रूपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स केलिये 2 बिड सिक्योरिटी अनिवार्य होगी।
हर ठेकेदार को प्रोजेक्ट के साथ एक डिटेल वर्क प्लान देना होगा।
पहले ठेकेदार को सब कॉन्ट्रैक्टिंग 70 प्रतिशत तक हो सकती थी। अब इसे घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गयाहै।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मुख्य ठेकेदार ज्यादा जिम्मेदारी लें और काम की गुणवता पर सीधा नियंत्रण रखें।

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ग्वालियर में बन रहा MP का पहला एलिवेटेड रोड, अतिक्रमण हटाने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जारी

ग्वालियर. शहर की ट्रैफिक समस्या को कम करने के लिए र्स्वारेखा नदी पर एलिवेटेड रोड तेजी से आकार ले रहा है। 1373.21 करोड रुपए की लागत से बनने वाला 14.2 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट 2  चरणों में तैयार किया जा रहा है। दिल्ली की रिंग रोड की तर्ज पर बन रहा यह एलिवेटेड कॉरिडोर 293 पिलरों पर खडा होगा और इसमें 14 एंट्री-एग्जिट लूप बनाए जा रहे है जिससे शहर के प्रमुख इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा। परियोजना का पहला चरण ट्रिपल ITM से लक्ष्मीबाई समाधि तक 6.5 किमी लंबा है जिसका करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वहीं दूसरा चरण गिरवाई पुलिस चौकी से लक्ष्मीबाई समाधि तक 7.42 किमी लंबा है जिसमें अब तक लगभग 40 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। अब तक इस परियोजना पर करीब 380 करोड खर्च किए जा चुके है।
अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जारी
प्रोतेक्ट के लिए अतिक्रमण हटाने और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जारी है। पहले चरण में 34 करोड रुपए का मुआवजा वितरित किया जा चुका है और रानीपुरा, मानपुर, रमटापुरा व पडाव क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाया गया है। दूसरे चरण में गिरवाई, जीवाजीगंज, छप्परवाला पुल और शिंदे की छावनी क्षेत्रों में सर्वे और कार्रवाई चल रही है।
10 लाख लोगों को मिलेगा फायदा
एलिवेटेड रोड बनने के बाद ट्रिपल आइटीएम, आइएसबीटी, डीडी नगर, फूलबाग, महाराज बाड़ा. नई सड़क, माधवगंज और गोलपहाड़िया समेत कई इलाकों के करीब 10 लाख लोगों को जाम से राहत मिलेगी। इससे शहर में यात्रा का समय कम होगा और यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। परियोजना के वर्ष 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।

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ग्वालियर में प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर रुचिका चौहान ने दावा किया स्टॉक की कोई कमी नहीं

ग्वालियर. जहां एक तरफ मारामारी है वहीं कुछ जिलों में प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाई है। ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान ने दावा किया है कि जिले में स्टॉक की कोई कमी नहीं है। खाद्य विभाग की टीमें लगातार चेकिंग कर रही है। अफवाहों को रोकने के लिए प्रशासन ने कंट्रोल रूम भी बनाया है।

यहां हालात सामान्य होने लगे हैं। रविवार को होटल खुले रहे।
खाद्य विभाग की टीम निरंतर गैस एजेंसियों का निरीक्षण कर रही
ग्वालियर जिले में हालात सामान्य है, घरेलू गैस सिलेंड की आपूर्ति को लेकर फैली आशंकाओं के बीच कलेक्टर रूचिका चौहान ने स्पष्ट किया है कि ग्वालियर में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खाद्य विभाग की टीम निरंतर गैस एजेंसियों का निरीक्षण कर रही है। सभी संचालकों को निर्देश दिए गए है कि वे उपभोक्ताओं को सही जानकारी दें। स्टॉक व डिलीवी में पारदर्शिता बरतें। कलेक्टर ने साफ किया है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है इसलिए नागकि घबराएं नहीं।
ग्वालियर में इंडक्शन-कोयले की मांग बढी
ग्वालियर में शादी में डीजल भटिठयों, लकडी और कोयले के दम पर खाना पक रहा है। बाजार में इंडक्शन और कोयले की मांग 20 प्रतिशत तक बढ गई है।