युद्ध के लिये मच्छरों को बना रहा है किलर है अमेरिका, सैनिकों पर सीक्रेट टेस्टिंग

नई दिल्ली. एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक खुलासा किया गया है। पेंटागन के कुछ ऐसे गुप्त दस्तावेज सार्वजनिक हुए हे। जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि कोल्डवॉर के बीच अमेरिका ने संक्रामक बीमारियों से लैस मच्छरों को जैविक हथियार के रूप में उपयोग करने के खतरनाक प्रयोग किये है।
न्यूज डेली मेल द्वारा खोजी गयी 69 पन्नों की एक डिटेल रिपोर्ट जिसे 1़977 में डीक्लासिफाई कर दिया गया था। पेंटागन की आधिकारिक लायब्रेरी डिफेंस टेक्नीकल इंफॉर्मेशन सेंटर की वेबसाइट पर डल दिया गया था। आज पूरे विश्वभर में चर्चा हो रही है। इस रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी सेना ने प्रोजेक्ट बेलवेदर नाम से एक गुप्त कार्यक्रम चलाया था। जिसके तहत भीषण गर्मी और रेगिस्तानी परिस्थितियों में मच्छरों के इंसानों को काटने की क्षमता का परीक्षण किया गया था। सितम्बर और अक्टूबर 1959 के बीच किये गये इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या इन कीड़ों को दुश्मन के सैनिकों याआम आबादी के खिलाफ घातक हथियार के रूप में छोड़ा जा सकता है।
इस रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी सेना ने ‘‘प्रोजेक्ट बेलवेदर’’ नाम से एक गुप्त कार्यक्रम चलाया था। जिसके तहत भीषण गर्मी और रेगिस्तानी परिस्थितियों में मच्छरों के इंसानों को काटने की क्षमता का परीक्षण किया गया था। सितम्बर और अक्टूबर 1959 के बीच किये गये इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या इन कीड़ों को दुश्मन के सैनिकों या आम आबादी के खिलाफ घातक हथियार के रूप में छोड़ा जा सकता है। इस गुप्त और संवेदनशील मिशन के लिये सैन्य शोधकर्ताओं ने विशेष रूप एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छरों का चयन किया था। यह वही प्रजाति है जो इंसानों को अपना शिकार बनाती है और जीका वायरस, डेंगू , चिकनगुनिया और यलो फीवर जैसी जानलेवा बीमारियां फैलाने के लिये जानी जाती है।
इस बेहद अमानवीय परीक्षण का एकमात्र उद्देश्य यह जांचना था कि क्या ये मच्छर आसमान से गिराए जाने के बाद भी जीवित रह सकते है। अपने टारगेट को ढूंढकर काट सकते है। यलो फीवर एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जिसमें तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी और ब्लीडिंग होती है। इलाज न मिलने पर संक्रमित लोगों में से 50% की मौत हो सकती है। डेंगू भी शरीर को तोड़कर देता है। सही समय पर इलाज न मिलने पर यह मरीज को इंटरनल ब्लीडिंग और शॉक के जरिए मार डालता है।
कोल्ड वॉर के उसी दौर में अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन ड्रॉप किक को भी अंजाम दिया, ताकि यह देखा जा सके कि क्या मच्छरों को जैविक हथियारों की डिलीवरी सिस्टम के रूप में पूरी तरह विकसित किया जा सकता है। इस कार्यक्रम के तहत करोड़ों मच्छरों का कृत्रिम रूप से प्रजनन कराया गया. उन्हें खुले मैदानों में छोड़कर शोधकर्ताओं ने उनके सफर करने की दूरी, विपरीत परिस्थितियों में जीवित रहने की अवधि और इंसानों को ढूंढकर काटने की उनकी आदतों का बारीकी से अध्ययन किया है।

