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डोनाल्ड ट्रम्प से पहले दोस्ती की बात फिर दी चेतावनी, ताइवान के मुद्दे पर जिनपिंग सख्त

नई दिल्ली. बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में अमेरिका और चीन के बीच महत्वपूर्ण बैठक में दोस्ती और तनाव दोनों की झलक देखने को मिली है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ बातचीत की शुरूआत सहयोग और साझेदारी की बातों से की। लेकिन ताइवान का मुद्दा आते ही उनका रूख बेहद सख्त हो गया। चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ के अनुसार जिनपिंग ने ट्रम्प से कहा है कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका रिश्तों का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील सवाल है। उन्होंने साफ चेतावनी भरी शब्दों में कहा है कि अगर इस मुद्दे का सही तरीके से संभाला गया ता दोनों देशों के रिश्ते स्थिर रहेंगे। लेकिन अगर इसे गलत तरीके से हैण्डल किया तो दोनों देशों के बीच टकराव या संघर्ष भी हो सकता है।
हालांकि सख्त चेतावनी देने से पूर्व जिनपिंग ने दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की भी बात की। उन्होंने ने कहा है कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि साझेदार, बनना चाहिये और दुनिया में स्थिरता लाने के लिये मिलकर काम करना चाहिये। बैठक के बीच में ट्रेड और टैरिफ का मुद्दा भी प्रमुख रहा है। जिनपिंग ने कहा है कि चीन और अमेरिका के आर्थिक रिश्ते विन-विन यानी दोनों लाभ वाले हैं। उन्होंने दोहराया है कि ट्रेड वॉर में कभी की जीत नहीं होती है।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षो से चीन और अमेरिका के बीच रिश्ते काफी तनाव पूर्ण रहे हैं। ट्रेडवॉर, चिप टेक्नोलॉजी, दक्षिण चीन सागर ओर ताइवान जैसे मुद्दों ने दोनों देशों को कई बार आमने-सामने ला खड़ा किया है। फिलहाल दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर अस्थाई राहत जरूर है। लेकिन ताइवान अब भी सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट बना हुआ है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बताया है कि एक दिन पहले दोनों देशों की ट्रेड टीमों के बीच हुई बातचीत सकारात्मक रही है। इससे दुनिया को अच्छा संदेश गया है। उन्होंने कहा है कि मतभेद और तनाव को बराबरी के आधार पर बातचीत से ही सुलझाया जा सकता है।

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