यूएस के 3 हमलों में धाराशाई हुआ चाबहार का आइकॉनिक टॉवर, भारत को हुआ अरबों रूपये का नुकसान
नई दिल्ली. ईरान के चाबहार पोर्ट पर भीषण अमेरिकी हमले में आखिरकार इस पोर्ट का आइकॉनिक मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर ध्वस्त हो गया। इस टॉवर को गिराने के लिये अमेरिकी ने एक नहीं 3-3 बार बार हमले किये। पहला हमला 8 जुलाई को हुआ, 15 जुलाई को अमेरिका ने इस पर फिर मिसाइल दागे। लेकिन 16 जुलाई का रात को भीषण हमले के बाद आखिकार ये टॉवर ध्वस्त हो गया। चाबहार तेहरान का मुख्य समुद्री गेटवे है जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर नहीं गुजरता है। चाबहार का ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर तबाह होने से शिपिंग में रूकावट आ सकती है। लागत बढ़ सकती है और खाड़ी के बाहर ईरान की बची हुई कुछ आर्थिक जीवन रेखाओं में से एक पर और दबाव पड़ सकता है।
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक चाबहार फ्री जोन ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख मोहम्मद सईद अरबाबी ने पुष्टि की है कि जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाला टॉवर नष्ट हो गया है। ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया है कि हमलों में बंदरगाह पर 2 समुद्री पियर्स (घाट) को भी नुकसान पहुंचा है। जिनमें शहीद बेहेश्ती डॉक भी शामिल है। यह समुद्र के किनारे विकसित एक समुद्री परिवहन सुविधा है। इसे भारत की भागीदारी से विकसित किया गया था।
क्या भारत का निवेश डूब गया?
भारत का निवेश डूब गया, ऐसा कहना ठीक नहीं होगा। अमेरिकी प्रतिबंध के बीच भारत चाबहार में अपने निवेश पर धीरे धीरे काम कर रहा है। लेकिन अमेरिकी हमले निश्चित रूप से भारत के लिए झटका है। भारत अपने स्तर पर लगातार अमेरिकी प्रशासन से संपर्क में है। गौरतलब है कि चाबहार से न सिर्फ ईरान का फायदा है बल्कि अफगानिस्तान के लिए भी व्यापारिक गतिविधियों में उतरने का मौका है।
भारत के लिए असली चिंता प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान से ज्यादा रणनीतिक नुकसान है। चाबहार भारत की उस योजना का केंद्र है, जिसके जरिए वह पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक पहुंच बनाना चाहता है। यदि हमलों के कारण बंदरगाह का संचालन लंबे समय तक बाधित रहता है, तो व्यापार, शिपिंग, बीमा लागत और INSTC कॉरिडोर की योजनाएं प्रभावित हो सकती है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस निवेश से अपेक्षित आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिलने की गति काफी धीमी हो गई है, और हर नए प्रतिबंध या सैन्य तनाव के साथ परियोजना पर अनिश्चितता बढ़ जाती है।

