ट्रम्प का कहर अब ईरान टूटेगा, 50 फायटर जेट भेजे मिडिल ईस्ट
नई दिल्ली. ईरान के साथ चल रहे युद्ध के संघर्ष में अमेरिका ने अपनी हवाई ताकत तेजी से बढ़ा दी गयी है। सेंटकॉम क्षेत्र यानी मिडिल ईस्ट में 50 से अधिक अतिरिक्त फायटर जेट भेजे गये है। यह कदम ईरान पर हमलों को और तेज करने और युद्ध के इलाके में तनाव बढ़ने की तैयारी का संकेत देता है। अमेरिका अब ईरान की मिसाइल और ड्रोन की क्षमता का और कमजोर करने के लिये बड़े पैमाने पर हवाई अभियान चला सकता है।
कौन से जेट कहां से भेजे गये
आरएफ लेकेनहैथ से 15एफ-35ए और 12 एफ-15
एवयानो एयरबेस से 12 एफ-16
स्पैंगडाहलेम एयरबेस से 12 एफ-16
न्यूयॉक टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि जर्मनी से एफ -16 और ब्रिटेन से एफ-35 भी भेजे जा रहे है। एरियल रिफ्यिूलिंग एयरक्राफ्ट भी भेजे गये है जो लम्बी दूरी के हमलों के लिये जरूरी है।
आगे क्या होने वाला है?
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह तैनाती सिर्फ बचाव नहीं, बल्कि आक्रामक रुख है. F-35 और F-15 जैसे एडवांस जेट्स ईरान की एयर डिफेंस को भेद सकती हैं. इससे ईरान पर दबाव बढ़ेगा और वह होर्मुज में अपनी रणनीति बदल सकता है. दूसरी तरफ, ईरान ड्रोन-मिसाइल पर भरोसा कर रहा है. जॉर्डन हमला इसका उदाहरण है. लेकिन अमेरिका की बढ़ती हवाई ताकत के सामने ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. यह तैनाती क्षेत्रीय सहयोगी देशों – जॉर्डन, सऊदी अरब, यूएई को सुरक्षा देती है. लेकिन पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से युद्ध फैलने का खतरा है.

