रिफाइनरी में आग लगना साजिश या हादसा, अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच भारत सहित 5 देशों की रिफाइनरी में कैसे लगी आग
नई दिल्ली. पीएम नरेन्द्र मोदी मंगलवार को राजस्थान के पचपदरा में निर्माणाधीन रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे। लगभग 13 वर्ष पहले देखे गये इस प्रोजेक्ट का सपना अब पूरा होने जा रहा था। लेकिन उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले भीषण आग ने रिफाइनरी के मेने प्रोसिसिंग यूनिट्स को अपनी चपेट में ले लिया। जिससे इसका उद्घाटन टल गया है।
हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की इस रिफाइनरी में लगी भीषण आग की वजहों का पता लगाने के लिये जांच जानरी है। हैरानी की बात यह है कि दुनियाभर में ऑयल एसेट्स खासकर रिफाइनरी में आग लगने की घटनाओं का एक पैटर्न दिखाई दियाहै। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच तेल और गैस जैसे प्राकृतिक संसाधनों को एक हथियार की तरह उपयोग किया जा रहा है। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 से ईरान पर हवाई हमले शुरू किये और पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष की शुरूआत हुई। उसके बाद से भारत समेत 6 देशों की तेल रिफाइनरियों में आग लगने की घटनायें सामने आयी है। यह सभी रिफाइनरियां युद्ध इलाके से बाहर है। इन घटनाओं को लेकर अब यह चर्चा तेज हो गयी है। कि क्या रिफाइनरियों में लग रही आग महज संयोग है या इसके पीछे कोई पैटर्न है।
दुनिया भर में तेल रिफाइनरियों में आग क्यों लग रही है?
एक नॉर्थ अमेरिकन एक्स (X) अकाउंट ने दावा किया कि दुनियाभर के ऑयल एसेट्स में आग लगने की ये घटनाएं सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि तेल आपूर्ति को बाधित करने का पैटर्न हो सकता है। HPCL राजस्थान रिफाइनरी की घटना के बाद एक्स पर लिखते हुए अरविंद ने भी कहा कि अलग-अलग देशों में रिफाइनरियों में लग रही आग की घटनाएं वैश्विक स्तर पर रिफाइंड ऑयल सप्लाई को प्रभावित करने का संकेत हो सकती है। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का हवाला देते हुए कहा, ‘एक पक्ष तेल की कमी पैदा करना चाहता है और इसके लिए पहले से तैयारी कर चुका है, जबकि दूसरा पक्ष तेल की भरपूर आपूर्ति बनाए रखकर दूसरे पर दबाव बनाना चाहता है।’
अमेरिका-ईरान युद्ध में तेल सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है। सैन्य ताकत के लिहाज से अमेरिका और ईरान की तुलना नहीं की जा सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी शुरुआत में लगा था कि यह युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो जाएगा । लेकिन जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित किया- जो फारस की खाड़ी से तेल-गैस एक्सपोर्ट का मुख्य समुद्री मार्ग है, और खाड़ी देशों के तेल ठिकानों पर हमले किए, तो हालात बदल गए है। इससे वैश्विक आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा और तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे दुनिया भर के उद्योग प्रभावित हुए ।.
अगर विभिन्न देशों की रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होती है, तो इसका फायदा युद्ध में शामिल या बड़े भंडार रखने वाले देशों को मिल सकता है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (303.2 अरब बैरल) है, जबकि ईरान तीसरे स्थान पर है। (208.6 अरब बैरल). ऐसे में यदि वैश्विक सप्लाई बाधित होती है और रिफाइनरियां ठप पड़ती हैं, तो बड़े तेल भंडार वाले देशों को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है. दिलचस्प बात यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक चीन अब तक आग की ऐसी घटनाओं से अछूता रहा है। कुल मिलाकर, आधिकारिक तौर पर इन घटनाओं को तकनीकी कारणों या दुर्घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने ‘ग्लोबल पैटर्न’ की आशंका को भी जन्म दे दिया है।

