जंग के द्वार पर खड़ा है एशिया, ताइवान के सामने शक्तिप्रदर्शन कर रहा है चीन

चीन का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास (Photo: Reuters)देश-दुनिया. China-Taiwan Tension एशिया इस समय जंग का मैदान बना हुआ है। जहां एक ओर रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध चल रहा है। वहीं दूसरी ओर चीन और ताइवान के बीच भी विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों ही देशों के बीच अभी तनाव का माहौल बना हुआ है। अब अजरबैजान औरे अर्मीनिया के बीच युद्ध की शुरूआत होते दिखाई दे रही है। अज़रबैजान ने नागार्नो स-काराबााख के इलाके में हमला किया है। हमले में 3 सैनिकों की मौत हो गयी है। अब देखना यह है एशिया में भविष्य में और क्या होता है।

ताइवान को घेरने का प्रयास (Photo: Reuters)

सोच समझकर जंग के मैदान में कूदेगा चीन

जानकारों की मानें तो चीन बहुत सोच समझकर जंग के मैदान में कूदेगा । क्योंकि, ये जंग सिर्फ ताइवान के लिए ही नहीं बल्कि उसके लिए भी घातक साबित होगी । ऐसा इसलिए क्योंकि, चीन की ताकत उसका पैसा है । वो पैसा जो वो अमेरिका समेत यूरोपीय देशों से इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के जरिए कमाता है।  ऐसे में अगर चीन ने ताइवान पर हमला बोला तो सुपरपावर अमेरिका उसकी इस कमजोर नस को दबा सकता है।

चीन के 27 लड़ाकू विमान ताइवान की हवाई सीमा में घुसे

नैंसी पेलोसी के ताइवान से रवाना होने के पहले ही चीन की नौसेना और वायुसेना ने दक्षिण चीन सागर में 6 जगह युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है।  चीन की नौसेना ताइवान के उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम में जिस जगह लाइव फायर ड्रिल कर रही है।  वहां से ताइवान की दूसरी 15 मील से भी कम बताई जा रही है।  पेलोसी के दौरे से बौखलाए चीन ने ताइवान में कई जगहों पर अपने फाइटर जेट और युद्धपोतों की भी तैनाती कर दी है।  चीन के 27 लड़ाकू विमान ताइवान की हवाई सीमा में घुस चुके है।  चीन का ये युद्धाभ्यास 1996 के ताइवान संकट से भी ज्यादा बड़ा है। चीन की सरकारी मीडिया ने तो यहां तक धमकी दे दी है कि 7 अगस्त तक चलने वाला युद्धाभ्यास आगे भी बढ़ सकता है और ये भी हो सकता है कि चीन की सेना ताइवान के सैन्य ठिकानों पर हमला भी कर दे ।

कई देश कर चुके चीन की आलोचना

चीन की इस हरकत पर अमेरिका व अन्य पश्चिमी देशों ने कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।  7 विकसित देशों के समूह G7 के विदेश मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी कर चीन के कदम की निंदा की है। वहीं आसियान देशों के विदेश मंत्रियों ने भी चीन के युद्धाभ्यास पर चिंता व्यक्त की है। चीन ने अमेरिका के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर भी कठोर कदम उठाने की चेतावनी दी है। इन सब घटनाक्रमों से इस बात का अंदेशा हो रहा है कि कहीं फिर से ट्रंप के दौर वाला ट्रेड वार लौट न जाए ।  ट्रंप के कार्यकाल के दौरान चीन और अमेरिका के बीच चले ट्रेड वार से दुनिया की दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान उठाना पड़ा था । उस दौरान चीन के ऊपर लगी कई पाबंदियां अभी तक हटी भी नहीं हैं और उससे पहले ही नया संकट सामने आ गया है।

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