जूडा की हड़ताल में 46 सीनियर रेजीडेंट की नियुक्ति निरस्त, सरकार ने हेलीकॉप्ट से जो फूल बरसाये थे डॉक्टरों ने वापिस लौटाये और थाली बजाई
ग्वालियर. शनिवार की दोपहर में जूडा की हड़ताल का पांचवा दिन है और जूडा के समर्थन में सीनियर रेजीडेंट भी उतर आये हैं। जिस वजह से जेएएच में मरीज बेहाल हो रहे है। जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद लगातार शासन व जिला प्रशासन जूडा को काम पर वापिस लौटने का दवाब बना रही है। जिसके बाद शनिवार को सभी 46 सीनियर रेजीडेंट को टर्मिनेट कर नियुक्ति निरस्त कर दी गयी है और अब इनके भविष्य पर खतरा मण्डरा गया है।
इससे जूनियर डॉक्टर काफी नाराज है शनिवार को जूनियर डॉक्टर ने सरकार को वह फूल वापिस लौटाये है जो कोरोना की पहली लहर में उन्हें कोरोना वारियर्स घोषित करते हुए समय हेलीकॉप्टर से बरसाये थे और साथ ही कोरोना वॉरियर्स के सार्टिफिकेट भी लौटाये है। इसके साथ -साथ थालियां बजाकर सरकार को नींद से जगाने का प्रयास किया है। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि सरकार उनके साथ छल कर रही है डॉक्टरों ने जगह-जगह पोस्टर भी चिपकाये हैं और कहा है कि ‘‘मूंगफली में दाना नहीं, तुम हमारे मामा नहीं’’। डॉ. भरत बाथम ने बताया कि शनिवार को 6 सूत्रीय मांगों को लेकर डॉ. दिव्यानी अहिरवार, डॉ. अंकिता, डॉ. प्रशांत, डॉ. आदिति, डॉ. अरूण और डॉ. आशीष ने प्रदर्शन किया।
यह है पूरा मामला
ळत्डब् ;गजराराजा मेडिकल कॉलेजद्ध में हड़ताल पर ग्वालियर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉण् देवेन्द्र शर्मा ने बताया कि स्टायफंड में 24 फीसदी बढोतरी किए जानेए हर साल मिलने वाला 6 प्रतिशत इंक्रीमेंटए बेसिक स्टायफंड करनेए च्ळ करने के बाद एक साल के ग्रामीण बॉन्ड को कोविड ड्यूटी के बदले हटाने के लिए समिति बनाए जाने व कोविड यूनिट में कार्यरत जूनियर डाक्टरों को सरकारी नौकरी में 10 प्रतिशत अतिरिक्त नंबर दिए जाने के फायदे पहुंचाने जैसी मांगों को स्वीकार नहीं किए जाने के बाद ही जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। शनिवार को जूडा की अनिश्चितकालीन हड़ताल का ग्वालियर में पांचवा दिन था। पर इससे पहले के घटनाक्रम में जो हुआ वह भी महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन से जारी आदेश में अन्य मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट सहित ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के 71 छात्रों के नामांकन निरस्त कर दिए गए थे। जिस पर नाराज जूडा के 330 सदस्यों ने इस्तीफा सौंपा था।
शासन के दबाव के बाद लगा कि जूडा कमजोर पड़ जाएगा
शनिवार को जूडा की अनिश्चित कालीन हड़ताल का पांचवा दिन है। शासन के दबाव के बाद लगा था कि जूडा कमजोर पड़ जाएगाए लेकिन जूनियर डॉक्टर पांचवे दिन पहले से भी ज्यादा आक्रामक नजर आए हैं। शुक्रवार को संभागीय आयुक्त ने जूडा से मुलाकात कर कोर्ट के ऑर्डर दिखाकर काम पर लौट आने का अल्टीमेटम दिया था। इसके बाद जूडा ने रणनीति बनाई। शुक्रवार रात से ही सीनियर रेजीडेंट भी उनके समर्थन में उतर आए। इसका व्यापक असर श्र।भ् में स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिला है। मरीज परेशान होते नजर आए। इसके साथ ही शनिवार को जूडा ने विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी की। इतना ही नहीं कोरोना की पहली लहर के बाद प्रदेश सरकार ने डॉक्टर को कोरोना वॉरियर्स घोषित कर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए थे और सार्टिफिकेट भी दिए थे। शनिवार को जूडा ने एकजुट होकर यह सम्मान लौटाया है। जो फूल उन पर बरसाए गए थे उनको लौटाया गया है। साथ ही सार्टिफिकेट भी सांकेतिक रूप से लौटाए गए हैं।

सीनियर रेजीडेंस पर गिरी गाज
.शनिवार को जूडा का समर्थन कर काम छोड़कर हड़ताल में शामिल होने वाले 46 सीनियर रेजीडेंस को शासन ने एस्मा का उल्लघंन करने पर टर्मिनेट कर नियुक्ति निरस्त कर दी गई है। अब हड़ताल सामाप्त भी होती है तो जूडा तो काम पर आ जाएगाए लेकिन सीनयर रेजीडेंस का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।

