सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानी तो हम सामूहिक इस्तीफा देंगे-डॉ. भरत बाथम
ग्वालियर. मप्र के 6 मेडीकल कॉलेज के 3 हजार जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का गुरूवार को चौथा दिन है। अब मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है कोट दोनों पक्षों को सुनने के बाद कार्यवाही करेगा। इधर, चिकित्सा शिक्षा विभाग नेअपनी बात रखते हुए जूडा को कानून के अनुसार कार्यवाही करने की चेतावनी भी दे दी है। जयारोग्य चिकित्सालय परिसर में जूडॉ के धरना में जूडॉ के सचिव डॉ. भरत बाथम, डॉ. निहारिका पांडे, डॉ. केके दास, डॉ. ऋषा परिहार, डॉ. राकेश सिंह और डॉ. देविका आर आदि लोग उपस्थित रहें।
जूडॉ के सचिव डॉ. भारत बाथम ने कहा है कि सरकार बराबर कह रही है कि हमने आपकी 4 मांगें मान ली है लेकिन 4 मांगों को मानने की आदेश की प्रति आज तक उपलब्ध नहीं करवाई है। अगर मांगें मानली तो सरकार उन पर अमल करते हुए कार्यवाही करें नही तो आज या कल तक हम प्रदेश सरकार को सामूहिक इस्तीफा सौंप देंगे।
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मप्र में जूडॉ का धरना जारी है
जूडो की 6 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्वालियर, जबलपुर, इन्दौर, रीवा, भोपाल और सागर में जूडॉ के 3 हजार छात्र धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। अभी तक तो हमनें ओपीडी बंद है लेकिन इमरजेंसी सेवायें चालू रखी हैं।
सरकार पर वादे से मुकरने का आरोप
प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर 6 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से हड़ताल पर हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने 6 मई को उनकी मांगों को मानने का आश्वासन दिया था, लेकिन सरकार बाद में मुकर गई।
ये हैं मांगें
जूनियर डॉक्टरों की स्टाइपेंड में 24 प्रतिशत करके 55000 से बढ़ाकर 68,200 एवं 57,000 से बढ़ाकर 70680 व 59,000 से बढ़ाकर 73,160 किया जाए।
हर साल वार्षिक 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी बेसिक स्टाइपेंड पर दी जाए।
पीजी करने के बाद 1 साल के ग्रामीण बांड को कोविड की ड्यूटी के बदले हटाने के लिए एक कमेटी बनाई जाएं, जिसमें जूडा के प्रतिनिधि भी शामिल हों।
कोविड ड्यूटी में कार्यरत जूनियर डॉक्टर को 10 नंबर का एक सर्टिफिकेट दिया जाए, उसे सरकारी नौकरी में प्राथमिकता दें।
कोविड में काम करने वाले जूनियर डॉक्टर और उनके परिवार के लिए अस्पताल में एक एरिया और बेड रिजर्व किया जाए। साथ ही नि:शुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाए।

