MP में 27% OBC आरक्षण पर दिल्ली में मंथन, CM मोहन यादव ने मांगी कानूनी सलाह
नई दिल्ली. हाईकोर्ट से रद्द हो चुके 27 फीसद आरक्षण पर मप्र सरकार ने कानूनी सलाह लेने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से चर्चा की। बैठक में कानून मामलों के अन्य जानकार भी थे।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर कानूनी सलाह के लिए सोमवार शाम को दिल्ली गए थे, देर रात तक बैठक चली। बता दें, कि 27 फीसद ओबीसी आरक्षण कानून हाईकोर्ट ने गत 9 अक्टूबर को रद्द कर दिया है। यह कानून कांग्रेस की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने साल 2019 में लाया था। इसके तहत 2022 तक ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को भर्तियों में लाभ भी दिया, बाद में खटाई में पड़ गया और इस तरह 27 में से 13 फीसद आरक्षण पर होल्ड लग गया था।
मुख्यमंत्री ने पूछे कानूनी विकल्प
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि रद्द हो चुके कानून पर यदि सरकार आगे बढ़ना चाहे तो कितने विकल्प है और सबसे प्रभावी विकल्प क्या होगा। उन्होंने उक्त मामले में एक से अधिक योजना पर भी बात की। मुख्यमंत्री के सामने सॉलिसिटर जनरल ने कानूनी विकल्पों का ब्योरा रखा।
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में सरकार
सूत्रों की माने तो एमपी सरकार 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। सरकार जल्द ही सर्वदलीय बैठक बुला सकती है, जिसमें सभी बिंदुओं पर चर्चा की जानी है। कानूनी मामलों के जानकारों के मुताबिक सरकार दो तरीके से आगे बढ़ सकती है। पहला, फिर से सुप्रीम कोर्ट जाए। दूसरा, जातिगत जनगणना के नतीजों का इंतजार। एक कैबिनेट मंत्री का कहना है कि मप्र में ओबीसी आरक्षण बड़ा मुद्दा रहा है, आने वाले समय भी रहेगा।
राजनीतिक समीकरण भी सक्रिय
राजनीतिक समीकरण के आधार पर भी यह बड़ा विषय है, चूंकि प्रदेश में ओबीसी एक बड़ा वर्ग है और अन्य राज्यों की तुलना में आरक्षण मामलों में पिछड़े है। आने वाले चुनावों में विपक्ष द्वारा ओबीसी आरक्षण को मुद्दा बनाया जाना तय है तो ओबीसी वर्ग के संगठनों में भी अंदरूनी स्तर पर कई दौर की चर्चा जारी है।
