जब चीनी सेना ने हमार एजेंट को पकड़ लिया था, बताया कैसे गलत नक्शे ने बिगाड था पूरा प्लान
नई दिल्ली. आईआईटी रूड़की के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल नेअपने कैरियर का एक मुश्किल किस्सा सुनाया। सिक्किम में तैनाती के बीच उनकी भेजी गयी टीम चीन की हिरासत में फंस गयी थी। उन्हें अपना कैरियर खत्म लगने लगा था। जांच मंें वह बेकसूर निकले। क्योंकि नक्शों में गलतियां थी। उसी दौर में एक शेरपा साथी ने उन्हें जिन्दगी का बड़ा सबक दिया था।
अजीत डोभाल ने बताया कि वह 20 के दशक में युवा आईपीएस अधिकारी और खुफिया काम में नये थे। उन्हें सिक्किम में खुफिया प्रभारी बनाये गये थे। जो तब भारत का हिस्सा नहीं था। भारत में मिल रहा था। अजीत डोभाल इस प्रकिया का हिस्सा थे। सीमा के इलाकों की देखभाल और चीनी सेना पीएलए की गतिविधियों की जानकारी जुटाना भी उनकी जिम्मेदारी थी।
एक बार सीमा के इलाके में भेजे गये खुफिया मिशन को लगभग 8 दिन में लौटना था। 5, 10, और शायद 15 दिन निकल गये । तब डोभाल के लिये यह पेशे और इंसानियत, दोनों लिहाज से गहरी चिंता थी। लोग जिन्दा हैं या नहीं, पता नहीं था। एवलांच की कोई खबर नहीं थी। फिर मुख्यालय से बॉस ने फोन कर पूछा कि क्या आपने कुछ लोगों को सीमा पार भेजा है। अजीत डोभाल ने कहा है कि पता नहीं, टीम को 5-6 दिन में आना था। अब 10-11 दिन हो गये। बॉस ने बताया कि वह चीन की हिरासत में है। चीने ने उनसे पूछताछ की और शायद बातचीत या समझौते के बाद छोड़ दिया। वह पुूरी तरह से टूटकर लौटे थे।
जांच शुरू होने पर उन्हें लगा कि करियर खत्म हो गया और अब नया करियर शुरू करना होगा. उन्होंने घटना को बहुत गैर पेशेवर माना. जांच में वे दोषी नहीं पाए गए. शायद उन्होंने सब सही किया था, क्योंकि मुख्यालय से मिले स्केच और नक्शों में खामियां थीं.
डोभाल बहुत दुखी थे. यह जिंदगी का ऐसा दौर था जब इंसान बहुत निराश हो जाता है. अब तक करियर अच्छा चल रहा था. उनके साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो का एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा साथी काम करता था. उसने पूछा, “सर, आप इतने दुखी क्यों हैं?” डोभाल ने कहा कि बड़ी उम्मीदों से करियर चुना था, पर सब गलत हो गया. शेरपा बोला, “सर, ऐसा कुछ नहीं. ये सब मैप रीडिंग का चक्कर है.” जिंदगी बस एक सवाल है, कुछ लोग नक्शा सही पढ़ते हैं और कुछ गलत. वह कई साल बर्फीले पहाड़ों में रहा था. उसने तीन बातें बताईं. पहली, जानो कि तुम कहां हो. दूसरी, जानो कि कहां जाना है. तीसरी, वहां पहुंचने का रास्ता जानो.
