रमोआ पर 45 MLD वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का काम शुरू
साल में दो बार मुड़खेड़ा से भरा जाएगा रमोआ बांध, बाउंड्रीवॉल बनाकर जगह कर रहे सुरक्षित
ग्वालियर। शहर में पेयजल सप्लाई निर्बाध बनी रहे इसके लिए नगर निगम द्वारा रमोआ बांध पर 45 MLD क्षमता वाला वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है, इस प्लांट के लिए इसी सप्ताह से बाउंड्रीवॉल बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। इस प्लांट के बन जाने से मुरार क्षेत्र में पेयजल सप्लाई की समस्या समाप्त हो जाएगी। रमोआ बांध से पानी की सप्लाई के लिए नगरनिगम ने जल संसाधन विभाग के साथ अनुबंध कर 21 जनवरी 2025 को 67.12 MLD पानी को आरक्षित किया है।
पानी की सप्लाई के लिए रमोआ बांध को साल में 2 बार हर्सी बांध से भरा जाएगा। नगरनिगम द्वारा रमोआ बांध के पास 45 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है। इस प्लांट के लग जाने से मुरार, हुरावली, कलेक्टर के पीछे वाले क्षेत्र आदि में पानी की सप्लाई रमोआ बांध से करने की योजना है। इसके लिए नगर निगम रमोआ बांध के पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए बाउंड्रीवॉल करने जा रहा है। इसके साथ ही अलापुर में पानी की टंकी का निर्माण कार्य भी प्रारंभ किया गया है। मुरार के कई क्षेत्रों एवं नवीन वार्डों के 79 गांवों को पेयजल सप्लाई रमोआ बांध से होगी।
इसके लिए नगरनिगम अमृत 2.0 योजना के तहत ग्रामीण एवं मुरार क्षेत्र के कई इलाकों में पानी की लाइन बिछा रहा है। वहीं वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के बन जाने के बाद मुरार एवं ग्रामीण इलाकों में पानी सप्लाई के लिए पाइप को रमोआ बांध से 24 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी चाहिए, जबकि रमोआ बांध की क्षमता 12 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) है। इसके चलते जल संसाधन विभाग ने रमोआ बांध को हर्सी बांध से साल में 2 बार भरने की योजना बनाई है।
2 बांध और बने हैं रमोआ के ऊपर
रमोआ बांध में पानी घाटीगांव – शीतला माता क्षेत्र में हुई बारिश से आता है। घाटीगांव-पनिहार क्षेत्र से बहकर आने वाले पानी को पहले छोड़ा गांव में बने बांध में स्टोर किया जाता है। जबकि शीतला माता मंदिर से बहकर आए पानी को आदिवासी पुरा के पास बने बांध में स्टोर किया जाता है। इन दोनों बांधों के पानी को स्टोर कर इसका उपयोग भी पेयजल के लिए किया जा सकता है।
हर्सी की नहर से आएगा पानी
हर्सी बांध एशिया का एक मात्र ऐसा बांध है जो कि पूरी तरह से मिट्टी का बना हुआ है। हर्सी बांध से काफी बड़े क्षेत्र में सिंचाई की व्यवस्था की जाती है। हर्सी बांध एशिया का एक मात्र ऐसा बांध है जो कि पूरी तरह से मिट्टी का बना हुआ है। हर्सी बांध से निकली नहर रमोआ बांध से मिली है, जिसके चलते इस नहर के जरिए रमोआ बांध को भरा जाता है।
