दो दिवसीय द्वितीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘भारतीय ज्ञान परम्परा के विशेष संदर्भ में’ कार्यशाला का समापन
ग्वालियर– भारतीय ज्ञान परम्परा तथा प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 के परिप्रेक्ष्य में सत्र 2026-27 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम निर्माण पर इतिहास विषय पर केन्द्रित दो दिवसीय द्वितीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘भारतीय ज्ञान परम्परा के विशेष संदर्भ में’ कार्यशाला का समापन विभागीय संग्रहालय में सम्पन्न हुआ।
कार्यशाला के समापन सत्र की अध्यक्षता जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. दिवाकरसिंह राजपूत ने की एवं अतिथि डॉ. राजकुमार आचार्य, पूर्व कुलगुरु, जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर उपस्थित रहे। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत ने कार्यशाला के प्रथम दिवस पर “बृहत्तर भारत का सांस्कृतिक विस्तार” विषय पर हुए उन्मुखीकरण व्याख्यान के मुख्य बिंदुओं की प्रासंगिकता पर चर्चा की। उन्होंने विभाग एवं विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को बताते हुए विभाग में हो रहे शोध एवं अकादमिक कार्य के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं। कार्यशाला के आयोजक डॉ. शान्तिदेव सिसोदिया नोडल, भारतीय ज्ञान परम्परा एवं विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला, जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर ने कार्यशाला में आए सभी विद्वान एवं अतिथिगणों का आभार प्रकट किया। कार्यशाला के आयोजक एवं मध्यप्रदेश में भारतीय ज्ञान परम्परा के नोडल अधिकारी डॉ. शान्तिदेव सिसोदिया, विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला, जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के अनुसार इस कार्यशाला का आयोजन इतिहास विषय में स्नातकोत्तर प्रथम, द्वितीय, एवं चतुर्थ सेमेस्टर के पाठ्यक्रम निर्माण हेतु राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप किया जा रहा है। दो दिवसीय कार्यशाला के प्रतिवेदन को प्रस्तुत करते हुए कहा कि स्नातकोत्तर इतिहास के पाठ्यक्रम को औपनिवेशिक दृष्टिकोण से मुक्त होते हुए तथा भारतीय दृष्टिकोण से भारतीयकरण करने हेतु विचार-विमर्श किया जा रहा है। जिससे कि इतिहास के विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास को भारतीय दृष्टिकोण के अंतर्गत समृद्ध भारतीय ज्ञान परम्परा के साथ-साथ भारतीय जीवंत परंपराओं एवं क्षेत्रीय इतिहास को समग्र रूप से पढ़ने समझने का अवसर प्राप्त हो। इस दो दिवसीय कार्यशाला में सदस्यों द्वारा आये सुझावों उच्च शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा जिसके आधार पर आगामी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
पाठ्यक्रम निर्माण कार्यशाला के द्वितीय दिवस विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. मुकेश कुमार मिश्रा, निदेशक, दत्तोपन्त ठेंगड़ी शोध संस्थान, भोपाल, डॉ. अलकेश चतुर्वेदी, अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा जबलपुर संभाग एवं प्राचार्य, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शा. महकौशल महाविद्यालय, जबलपुर, डॉ. प्रशांत पौराणिक, प्राध्यापक एवं प्राचार्य, शा. कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उज्जैन उपस्थित रहे। कार्यशाला में केंद्रीय अध्ययन मंडल के चेयरमैन, डॉ. श्रद्धा शुक्ला, प्राध्यापक, माता जीजाबाई शा. कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, इंदौर तथा केंद्रीय अध्ययन मंडल के सदस्य के रूप में डॉ. मीना श्रीवास्तव, प्रभारी प्राचार्य, डॉ. भगवत सहाय शा. महाविद्यालय, लिर, डॉ. वंदना गुप्ता, विभागाध्यक्ष-इतिहास, शा. मानकुंवर बाई कला एवं वाणिज्य स्वशासी महिला महाविद्यालय, जबलपुर, डॉ. रंजना शर्मा व्यास, प्राध्यापक-इतिहास, शा. कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उज्जैन, डॉ. मंजुला निंगवाल, सहायक प्राध्यापक-इतिहास, भेरुलाल पाटीदार, शा. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महू, डॉ. सुनीता मालवीय, विभागाध्यक्ष-इतिहास, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस अटल बिहारी वाजपेयी शा. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, इन्दौर, डॉ. भुवनेश्वर कुमार त्यागी, प्राध्यापक-इतिहास, जवाहर लाल नेहरू स्मृति शा. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शुजलपुर, डॉ. गणेश राम चौहान, प्राध्यापक-इतिहास, शा. नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय, देवरी, सागर, डॉ. मानसिंह अजनार, सहा. प्राध्यापक-इतिहास, शा. महर्षि महाविद्यालय मनावर, धार तथा डॉ. मधुसूदन प्रकाश, सहा. प्राध्यापक-इतिहास, शा. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय, भोपाल उपस्थित रहे। कार्यशाला में फैलेस्टेटर के रूप में डॉ. नवीन गिडीयन, प्राध्यापक-इतिहास, शा. स्वशासी कन्या स्नातकोत्तर उत्कृष्टता महाविद्यालय, सागर तथा डॉ. धर्मेन्द्र तिवारी, सहा. प्राध्यापक-इतिहास, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शा. माधव महाविद्यालय, उज्जैन उपस्थित रहे। कार्यशाला में जीवाजी विश्वविद्यालय के इतिहास मंडल के अध्यक्ष डॉ. रमेश भारद्वाज, प्राध्यापक-इतिहास, शा. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मुरैना तथा सदस्य डॉ. मनोज अवस्थी, प्राध्यापक-इतिहास, माधव महाविद्यालय, ग्वालियर एवं डॉ. नंदिनी काटजू, प्राध्यापक, इतिहास, शा. म.ल.बा. महाविद्यालय (स्वशासी), ग्वालियर उपस्थित रहे। समापन सत्र का संचालन शोधार्थी प्रिया सुमन ने किया। कार्यक्रम में पाठ्यक्रम निर्माण कार्यशाला में आये सभी सदस्यों सहित प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला तथा इतिहास अध्ययनशाला के शोधार्थी एवं शिक्षकगण डॉ. अमिता खरे, वैभव शर्मा, राहुल कुमार, आकाश शर्मा, राहुल बरैया, वैशाली गुर्जर, सामिन खान एवं चाँदनी नरवरिया सहित विभाग के सभी गैर-अकादमिक स्टाफ उपस्थित रहा।
