Newsमप्र छत्तीसगढ़

आदमपुर कचरा खंती प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई यही नियम पूरे में होंगे लागू

आदमपुर खंती में पिछले साल आग लगने की घटनाएं हो चुकी है। - Dainik Bhaskarभोपाल. आदमपुर कचरा खंती में आग लगने के केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2025 भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश में लागू हो। एक्सपर्ट इसे ऐतिहासिक फैसला बता रहे हैं। यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से जुड़ा हे। पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी पांडे नेआदमपुर खंती में आग लगने की घटनाओं को लेकर एनजीटी में मार्च 2023 में याचिका दाखिल की थी। इस परद 31 जुलाई 2023 को नगर निगम पर 1 करोड़ 80 लाख रूपये का जुर्माना लगाया था।
एनजीटी के इस आदेश के खिलाफ निगूम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। जिस पर 10 मई 2025 को सुनवाई हुई थी। इससे निगम की तरफ से जुर्माने की राशि माफ किये जाने की मांग रखी गयी थी। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। मामले में ़6 दिन पहले सुनवाई हुई थी। जिसमें मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित 6 वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया गया था। इसके बाद 19 फरवरी को फिर से सुनवाई है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि
पर्यावरणविद् डॉ. पांडे ने बताया, सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 1 अप्रैल से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 लागू हो जाएंगे। नए नियम देश में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या की पहचान करने और उसे हल करने के तरीके में पूरी तरह से शामिल हैं। इस नियम के मकसद को पूरा करने के लिए ऐसे निर्देश जारी करना सही समझते हैं, जो न सिर्फ भोपाल नगर निगम पर बल्कि पूरे देश पर लागू हों। इसका कारण यह है कि लोकल बॉडीज द्वारा SWM रूल्स, 2016 के हिसाब से पालन की स्थिति कुछ हद तक या तो पालन कर रही हैं या नहीं। नियम के तहत आने वाली चुनौतियों को उस तरह से हल नहीं किया जा सकता, जैसे उन्हें पुरानी व्यवस्था में उन अधिकारियों द्वारा हल किया जाता था। जिन्हें संसद का अधिकार क्षेत्र है।
कोर्ट ने कहा, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की वेस्ट मैनेजमेंट पर सालाना रिपोर्ट 2021-2022 बताती है कि देश में घरेलू, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और सहायक कामों से हर दिन करीब 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (TPD) पैदा होता है। हम देखते हैं कि भले ही भोपाल और इंदौर जैसे कई शहरों में कलेक्शन एफिशिएंसी में सुधार हुआ है, लेकिन प्रोसेसिंग की दर अभी भी एक बड़ी रुकावट बनी हुई है। जो कचरा बिना प्रोसेस किया जाता है, वह अक्सर बिना साइंटिफिक लैंडफिल या पुराने डंपसाइट में चला जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *