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जीवाजी विश्वविद्यालय मे ंबी फार्मेसी के छात्र के साथ की गयी रैगिंग, 15 दिन में रैगिंग का तीसरा मामला

ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट छात्रावास मे ंबी फार्मेसी चतुर्थ वर्ष के छात्र आशुतोष मरावी के साथ रैगिंग का मामला सामने लाया गया है। छात्र ने कुलसचिव और छात्र कल्याण अधिष्ठाता से लिख्ति शिकायत की है। छात्र ने बताया है कि सहपाठी छात्र उससे मारपीट करते हैं। नशा करने के लिये उस पर प्रेशर बना रहे हैं। विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट छात्रावास में रैगिंग का 15 दिन में यह तीसरा मामला नजर में आया है। पहले के 2 मामलों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कुलगुरू, कुल सचिव से शिकायत की गयी है लेकिन कार्यवाही नही हुई है। छात्र आशुतोष ने आरोप लगाया है कि फार्मेसी तृतीय और चतुर्थ वर्ष केछात्र सौरभ गुर्जर और अनंत प्रताप सिंह लगातार उनके साथ रैगिंग कर मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं।


छात्र के द्वारा शिकायत में कहा है कि नशा करने के ििलये उस पर कई बार प्रेशन बनाया जाता है। मना करने पर मारपीट की धमकी दी जाती है। उसने बतायाहै कि आरोपी छात्रों ने कई बार मेरे कमरे में घुसकर मारपीट की है। जबरन ऑडियो रिकॉर्डिंग भी की है। इससे पहले 2 फरवरी को इसी छात्रावास में फार्मेसी के छात्रों ने लॉ के सीनियर छात्र के साथ मारपीट की थी। जिसमें यूजीसी, कुलगुरू को शिकायत करने के साथ ही आरोपियों केखिलाफ एफआईआर दर्ज कराने छात्र ने कोर्ट की शरण ली है।
छात्र के प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने लिये बयान
2 फरवरी को लॉ के छात्र से की गयी मारपीट के मामले में विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने छात्र के बयान लिये है। ऐसा बताया जाता है कि छात्र ने बोर्ड के सदस्यों को पूरा घटनाक्रम बताया है। उसने कहा है कि आरोपी छात्र शराब के नशे में थे। मुझसे गालीगलौज करने लगे। मना करने पर संबंधित छात्रों ने लात-घूसों से मारपीट की है। वहीं आरोपी छात्रों ने मारपीट करने से मना कर दिया है। जबकि घटना का वीडियो है। अब यह मामला एंटी रैंगिंग कमेटी के सामने जायेगा।
प्रॉक्टोरियल बोर्ड जांच कर रहा है
कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने बताया कि विद्यार्थियों का आपसी खींचतान का मामला है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सामने सारे मामले आ गए हैं। बोर्ड जांच कर रहा है। दोषी छात्रों को बक्शा नहीं जाएगा। हमारे पास जो भी शिकायतें आई हैं, वे प्रॉक्टोरियल बोर्ड को दे दी हैं। बोर्ड ने अब तक मुझे कोई रिपोर्ट नहीं दी है। पहली रिपोर्ट यूजीसी के माध्यम से आई थी, उसमें छात्रों ने स्वीकारा है कि हमारे बीच बहस हुई थी, मारपीट नहीं। प्रताड़ित छात्र ने भी लिखकर दिया है कि हम इसमें कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। इसके बाद भी प्रॉक्टोरियल बोर्ड की अनुशंसा पर विश्वविद्यालय ने निर्णय लिए हैं।छात्रों ने आरोप लगाया है कि रैगिंग करने वाले छात्रों की गैंग है, जो एक छात्र संगठन से जुड़ी है। यही कारण है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन कार्रवाई करने से बच रहा है। जबकि ये चुनिंदा छात्र लगातार घटनाएं कर रहे हैं। इतना ही नहीं, आर्यभट्‌ट हॉस्टल में बाहरी छात्रों का आना जाना है। वे यहां रुकते भी हैं और शराब पार्टियां भी करते हैं।

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