नियमित वेतनमान के साथ 28 वर्षो से सेवा करने के बाद पेंशन से वंचित नहीं कर सकते-हाईकोर्ट
अनियमित नियुक्ति पर भी मिलेंगे सेवानिवृत्ति का लाभ
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ की एकल पीठ ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसिी कर्मचारी को दशकोंतक सेवा में लेने के बाद पेंशन और सेवानिवृत्त लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि नियुक्ति अवैध नहीं बल्कि अनियमित थी। कर्मचारी ने लम्बे समय तक लगातार सेवा दी है। तो उसे नियमित मानते हुए सभी सेवानिवृत्ति लाभ दिये जाना अनिवार्य है।
3 महीने के अन्दर करना होगा आदेश का पालन
राज्य सरकार ने एक कर्मचारी से 28 वर्षो तक नियमित वेतनमान पर सेवायें ली और उसे सेवानिवृत्ति की अनुमति भी दी है। ऐसे में अब उसे पेंशन से भी मना करना अनुचित है। हाईकोर्ट ने 14 दिसम्बर 2016 के एक आदेश को निरस्त करते हुए शासन को निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की सेवा को 27 अक्टूबर 1987 से नियमित मानने का आदेश दिया है। इसके साथ ही पेंशन प्रकरण तैयार कर पीपीओ, जीपीओ जारी करने और 30 अगस्त 2014 से एरियर समेत पेंशन का पेमेंट करने के निर्देश दिये गये है। यदि 3 महीने में आदेश का पालन नहीं होता है तो 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
क्लास-2 गजेटेड पद के लिए लेखा प्रशिक्षण आवश्यक नहीं
न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहारावत ने पूर्णिमा सक्सेना बनाम मध्यप्रदेश शासन प्रकरण में यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने मानसिक उत्पीड़न के लिए 50 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति देने के निर्देश भी दिए हैं याचिकाकर्ता पूर्णिमा सक्सेना की नियुक्ति 27 अक्टूबर 1987 को करुणा नियुक्ति के तहत पीजी कॉलेज शिवपुरी में रजिस्ट्रार पद पर हुई थी। बाद में उनका स्थानांतरण शासकीय पीजी कॉलेज गुना किया गया। याचिकाकर्ता 30 अगस्त 2014 को सेवानिवृत्त हुईं, लेकिन सेवा नियमित न होने का हवाला देकर उन्हें पेंशन से वंचित कर दिया गया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि विभाग स्वयं स्पष्ट कर चुका था कि क्लास-2 गजेटेड पद के लिए लेखा प्रशिक्षण आवश्यक नहीं है। साथ ही, लोक सेवा आयोग द्वारा इस पद के लिए कभी विज्ञापन भी जारी नहीं किया गया था। ऐसे में शर्ते पूरी न होने का दोष कर्मचारी पर नहीं डाला जा सकता।

