यूको बैंक की याचिका को हाईकोर्ट ने वापिस लेने से रोका, जेसी मिल भूमि विवाद से कई हितधारकों के हक जुड़े
ग्वालियर. हाईकोर्ट ने जेसी मिल की भूमि को शासकीय भूमि के रूप में दर्ज किये जाने से जुड़े विवाद में यूको बैंक को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने यूको बैंक की हस्तक्षेप याचिका नम्बर 7484/2025 को वापिस लेने की अनुमति देने से मना कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल बैंक तक सीमित नहीं है। बल्कि इससे कई अन्य हितधारकों के हक भी प्रस्तावित हो सकते है। हाईकोर्ट ने कहा है कि याचिका वापिस लने की अनुमति नहीं दी जासकती है, क्योंकि यह प्रकरण व्यापक जनहित और अनेक पक्षकारोें से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि यूको बैंक 28 जनवरी 2026 के आदेश में उठाये गये सवालों से बचने के उद्देश्य से याचिका वापिस लेना चाहता था।
पक्ष भूमि की स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाया
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि किन-किन भू-भागों को शासकीय भूमि में परिवर्तित किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया जा सका कि नामांतरण प्रविष्टियां स्वामित्व का प्रमाण है या केवल राजस्व अभिलेखों के उद्देश्य से होती है। हाईकोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए दोहराया कि नामांतरण किसी भी स्थिति में स्वामित्व का दस्तावेज नहीं होता। इसके बावजूद, कस्टोडियन विभाग के नाम दर्ज प्रविष्टियों के आधार पर भूमित का स्वामित्व साबित करने का प्रयास किया। हाईकोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट इस विषय में पहले भी कई बार स्थिति स्पष्ट कर चुके है।
अब आगे क्या
10 दिन के भीतर विस्तृत आधिकारिक जवाब प्रस्तुत करना होगा।
यूको बैंक को कवरिंग लेटर अथवा ई-मेल से संबंधित रिकॉर्ड पेश करना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।
जानिए पूरा मामला
यूको बैंक की ओर से बताया गया कि उसने हस्तक्षेप याचिका वापस लेने के लिए नया आवेदन प्रस्तुत किया था।
इस याचिका के माध्यम से बैंक ने जेसी मिल भूमि विवाद में हस्तक्षेप की अनुमति मांगी थी।
17 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने माना था कि विवाद का मूल कारण नायब तहसीलदार, सर्किल लश्कर, तहसील एवं जिला ग्वालियर द्वारा जेसी मिल की कुछ भूमि को शासकीय भूमि के रूप में दर्ज किया जाना है।

