महंगाई भत्ता-ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका, कर्मचारियों को 25% बकाया महंगाई भत्ता देने के आदेश
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह अपने कर्मचारियों को 2009 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता (डीए) जारी करें। सुप्रीम कोर्ट ने इसे कर्मचारियों का वैधानिक अधिकारी करार दिया है। जस्टिस संजय करोल और पीके मिश्रा की बेंच ने कहा है कि आरओपीए नियमों तहत परिलब्धियों की गणना के लिये डीए अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की उन दलीलों को खारिज कर दिया। जिसमें वित्तीय क्षमता का हवाला देकर भत्ते से मना कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित करने के लिये पूर्व जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक स्पेशल कमेटी का गठन किया है। इस समिति में 2 सेवानिवृत्त हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश और कैग (कैग) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्य सरकार द्वारा उन पिछली कानूनी हारों के खिलाफ दायर अपीलों पर आया है। जिनमें कर्मचारियों के पक्ष में आदेश दिये गये थे।
वित्तीय अधिकारी छीन संकती है
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के उसतर्क ‘‘कल्पना की उपज’’ बतायाहै जिसमें केन्द्र सरकार द्वारा शक्ति थोपने की बात कही गयी थी। न्यायिक समीक्षा के दौरान बैंच ने कड़ा रूख अपनाते हुए कहा है कि एक बार जब किसी कोई अधिकार प्रदान कर दिया जाता है। वित्तीय नीति उसके रास्ते में नहीं आ सकती है। हालांकि हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्ष में 2 बार डीए नहीं दिया जा सकता है। मंहगाई भत्ते को मौलिक अधिकार मानने के सवाल को कोर्ट ने भविष्य के उपयुक्त मंच के लिये छोड़ दिया है।

