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MP में सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से हाईकोर्ट का इंकार, ग्वालियर खंडपीठ का बड़ा फैसला

ग्वालियर. मध्यप्रदेश में विभिन्न सरकारी विभागों में कर्मचारियों, अधिकारियों के रिटायरमेंट की आयुसीमा में अंतर है जिसके कारण विरोधाभाषी स्थिति उत्पन्न होती है। प्रदेश में सेवानिवृत्ति की आयु में एकरूपता की लगातार मांग की जा रही है। हालांकि इस मामले में हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच ने महिला आयुर्वेद स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सेवा आयु 65 वर्ष तक बढ़ाने की मांग को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि केवल समान काम का तर्क देकर नियमों में बदलाव नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने यह फैसला निर्मला तोमर व अन्य की याचिका में सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सेवा निवृत्ति की आयु बढ़ाने का कोई आधार नहीं है।
याचिका में सेवानिवृत्ति की आयु 65 साल करने की मांग की थी
याचिकाकर्ताओं का दावा था कि वे नर्सों की तरह ही कार्य करती हैं, इसलिए उन्हें भी 65 वर्ष तक सेवा का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए समानता की मांग रखी। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि दोनों पदों में न तो कार्य समान है और न ही योग्यता। नर्स जहां अस्पताल में मरीजों की देखभाल करती हैं, वहीं महिला आयुर्वेद स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भूमिका सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, जागरूकता अभियान, टीकाकरण और पोषण कार्यक्रमों तक सीमित है।
सेवा निवृत्ति की आयु बढ़ाने का कोई आधार नहीं
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा निवृत्ति की आयु फंडामेंटल रूल 56 के तहत तय होती है, जिसमें इन पदों के लिए 62 वर्ष निर्धारित है। जब तक इस नियम को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक आयु बढ़ाने का कोई आधार नहीं बनता।

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MP बोर्ड पैटर्न में बड़ा बदलाव, खत्म हुआ सप्लीमेंट्री एग्जाम, फेल और पास छात्र दे सकेंगे दूसरी परीक्षा

भोपाल. माध्यमिक शिक्षा मंडल ने परीक्षा के संबंध में बड़ा बदलाव किया है। एमपी बोर्ड के लाखों छात्रों के हित में इसे बड़ा कदम बताया जा रहा है। एमपी बोर्ड ने दशकों से चली आ रही पारंपरिक पूरक परीक्षा यानी सप्लीमेंट्री एग्जाम प्रणाली को पूरी तरह से खत्म करने का फैसला लिया है। इसके बदले द्वितीय परीक्षा आयोजित की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत अब सिर्फ फेल हुए छात्र ही नहीं, बल्कि वो छात्र भी पास हो सकेंगे, जो एक प्रकार से अपने रिजल्ट के पर्सेंटेज में सुधार करेंगे और जो अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं है। खास बात ये है कि, छात्र किसी भी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। नए पैटर्न से छात्रों को अपने रिजल्ट को सुधारने का बेहतर मौका मिलेगा।
परीक्षार्थी को 7 दिन में करना होगा आवेदन
12वीं की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई तक आयोजित होगी। 10वीं की परीक्षा 7 मई से 19 मई के बीच होगी। छात्रों को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के मात्र 7 दिन के भीतर अपना आवेदन पूरा करना होगा। ये आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल रहेगी। छात्र अपने नजदीकी एमपी ऑनलाइन कियोस्क पर जाकर निर्धारित परीक्षा शुल्क जमा करके आसानी से पूरा कर सकते हैं।
7 मई से शुरू होगी परीक्षा
जो छात्र किसी भी विषय में फेल होंगे, उनके तो पास होने के लिए संबंदित विषय की परीक्षा देना जरूरी है। लेकिन, नई व्यवस्था के तहत जो छात्र परीक्षा में पास हैं पर अपनी पास होने के पर्सेंटेज से संतुष्ट नहीं हैं, उन्हें लगता है कि, वो और मेहनत कर अपने परिणाम का अंक प्रतिशत सुधार सकते हैं वो भी इच्छानुसार किसी भी विषय की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। बोर्ड ने द्वितीय परीक्षा को लेकर शेड्यूल जारी कर दिया गया है। हायर सेकेंडरी (12वीं) की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 के बीच आयोजित होगी। जबकि, हाईस्कूल (10वीं) की परीक्षा 7 मई से 19 मई के बीच आयोजित होगी।

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3 महीने बाद बंद हो जाएगी LPG सिलेंडरों की आपूर्ति

ग्वालियर. शहर अब सिलेंडर युग से निकलकर पाइपलाइन युग की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। अमेरिका- ईरान युद्ध के चलते उपजे वैश्विक गैस संकट और घरेलू सिलेंडरों की 10 से 12 दिन की लंबी वेटिंग ने सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। प्रशासन ने लक्ष्य रखा है कि अगले तीन महीने में शहर की 400 बड़ी मल्टियों को अनिवार्य रूप से पीएनजी (पाइप नेचुरल गैस) से जोड़ दिया जाए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी लाइन पहुंच चुकी है, वहां तीन महीने बाद एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।
928 किमी. लंबा नेटवर्क
शहर में पीएनजी के विस्तार की जिम्मेदारी दो प्रमुख कंपनियों पर है। अवंतिका गैस का 928 किलोमीटर लंबा विस्तृत नेटवर्क पहले से मौजूद है, वहीं अब राजस्थान गेल ने भी एंट्री मार ली है जिसने 19 किलोमीटर की नई लाइन बिछा ली है। वर्तमान में शहर में 85 हजार कनेक्शन देने की क्षमता है, लेकिन रिकॉर्ड में 66 हजार उपभोक्ता ही दर्ज हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से भी केवल 45 हजार लोग ही नियमित पीएनजी का उपयोग कर रहे हैं। इस खाई को पाटने के लिए अब मल्टियों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं।
क्या बोले जिम्मेदार
शहर को चरणबद्ध तरीके से पीएनजी की ओर शिफ्ट किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन उपलब्ध है, वहां निवासियों को कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा, क्योंकि तीन महीने बाद उन क्षेत्रों में सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। मल्टियों में शिविर लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अरविंद भदौरिया, जिला आपूर्ति नियंत्रक
कंट्रोल रूम में तैनात किए सेल्स मैनेजर
गैस और तेल कंपनियों की आपूर्ति चेन पर नजर रखने के लिए जिला आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय में सेल्स मैनेजरों को तैनात किया गया है। ये अधिकारी पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों के स्टॉक की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि किल्लत के समय कालाबाजारी न हो और जहां शिकायत मिले वहां तुरंत निराकरण किया जा सके।

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युद्ध खत्म होने के बाद भी MP की फार्मा कंपनियों का ₹1000 करोड़ का एक्सपोर्ट अटका

भोपाल. ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध का असर मध्य प्रदेश के फार्मा सेक्टर पर गहराता जा रहा है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव इस उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते मध्य प्रदेश की फार्मा कंपनियों का करीब 1000 करोड़ रुपए का निर्यात अटक गया है।


6 महीने से लेकर डेढ़ साल तक का समय लग सकता है
एमपी से हर महीने 20,000 से अधिक दवाइयों के कंटेनर दुनिया के 190 देशों में भेजे जाते हैं। वहीं, उद्योगपतियों का कहना है कि भले ही युद्धविराम हो गया हो, लेकिन स्थिति सामान्य होने में 6 महीने से लेकर डेढ़ साल तक का समय लग सकता है। प्रदेश की लगभग 100 फार्मा कंपनियों का निर्यात पूरी तरह प्रभावित हुआ है। इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के चेयरमैन परेश चावला का कहना है कि युद्धविराम के बाद उम्मीद है कि अगले दो से तीन महीनों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगेगी। लेकिन इस युद्ध ने इंडस्ट्री को काफी नुकसान पहुंचाया है।
ये तीन कारण, जिनसे एक्सपोर्ट अटका
मध्य प्रदेश से बड़ी मात्रा में दवाइयां और रॉ मटेरियल गल्फ देशों, अफ्रीकी देशों, यूरोपीय देशों और अमेरिका को निर्यात किए जाते हैं। वर्तमान में निर्यात प्रभावित होने के पीछे तीन प्रमुख कारण सामने आए हैं

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MP में एसीएस की तर्ज पर डीजी, एडीजी बने संभाग प्रभारी

भोपाल. राज्य सरकार ने अपर मुख्य सचिवों की तर्ज पर स्पेशल डीजी और एडीजी स्तर के अधिकारियों को संभागीय स्तर पर कानून व्यवस्था की समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है। यह अधिकारी रेंज स्तर पर पदस्थ आईजी के अलावा संभागों की कानून व्यवस्था की निगरानी करेंगे। डीजी वरुण कपूर को भोपाल, उपेंद्र जैन को उज्जैन तथा स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव को जबलपुर संभाग का प्रभारी बनाया गया है। यह व्यवस्था प्रदेश में यूसीसी लागू करने के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के फैसले के बाद प्रभावी की गई है।
यूसीसी लागू होने के पहले सुपरविजन और मॉनिटरिंग के लिए नियुक्तियां
गृह विभाग द्वारा यूसीसी (समान नागरिक संहिता) लागू करने की तैयारियों के बीच प्रदेश के सभी संभागों में डीजी, स्पेशल डीजी और एडीजी स्तर के अधिकारियों को संभागीय प्रभारी नियुक्त किया गया है। दरअसल मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में यूसीसी लागू करने को लेकर सीएम ने गृह विभाग को निर्देश दिए। यूसीसी का वर्ग विशेष की ओर से विरोध होना तय है और आने वाले दिनों में कानून व्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा। इसलिए गृह विभाग ने रेंज में पदस्थ आईजी के ऊपर संभागीय स्तर पर एडीजी, स्पेशल डीजी और डीजी स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है।
इंदौर, ग्वालियर के लिए आईपीएस अफसरों को संभागीय प्रभारी का दायित्व सौंपा गया
8 अप्रेल को जारी आदेश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संभाग स्तर पर कानून व्यवस्था और पुलिस के कामों की समीक्षा के सुपरविजन और मॉनिटरिंग के लिए यह दायित्व सौंपे गए हैं। इसमें पहले से इंदौर, ग्वालियर, रीवा संभाग के लिए आईपीएस अफसरों को संभागीय प्रभारी का दायित्व सौंपा गया है। इन संभाग में पहले से मौजूद अधिकारी भी अपना काम करते रहेंगे। इसके अलावा सात संभागों के लिए नए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आईपीएस अधिकारियों को सौंपी गई संभागवार जिम्मेदारी

क्रमांक आईपीएस अधिकारी वर्तमान पद आवंटित संभाग
1 वरुण कपूर डीजी जेल भोपाल
2 आदर्श कटियार स्पेशल डीजी प्रशासन इंदौर
3 उपेंद्र कुमार जैन डीजी ईओडब्ल्यू उज्जैन
4 प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव डीजी होमगार्ड ग्वालियर
5 पंकज कुमार श्रीवास्तव स्पेशल डीजी सीआईडी और इंटलिजेंस जबलपुर
6 अनिल कुमार स्पेशल डीजी महिला सुरक्षा रीवा
7 जी अखेतो सेमा स्पेशल डीजी जेल चंबल
8 रवि कुमार गुप्ता स्पेशल डीजी रेल नर्मदापुरम
9 अनंत कुमार सिंह स्पेशल डीजी एमपी पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन सागर
10 राजाबाबू सिंह एडीजी ट्रेनिंग शहडोल

आईएएस अधिकारियों को सौंपी गई संभागवार जिम्मेदारी

क्रमांक आईएएस अधिकारी का नाम आवंटित संभाग
1. डॉ. राजेश राजौरा उज्जैन
2. अशोक बर्णवाल ग्वालियर
3. मनु श्रीवास्तव चम्बल
4. संजय दुबे जबलपुर
5. नीरज मंडलोई नर्मदापुरम
6. अनुपम राजन इंदौर
7. संजय कुमार शुक्ल भोपाल
8. रश्मि अरुण शमी रीवा
9. दीपाली रस्तोगी सागर
10. शिवशेखर शुक्ला शहडोल

 

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MP में बनेंगे 11 नए रेलवे रूट, रेल नेटवर्क का होगा विस्तार, जल्द शुरू होगा सर्वे

भोपाल. भारतीय रेलवे ने अन्य राज्यों के साथ एमपी के रेल नेटवर्क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से 11 नए रेलवे रूट बनाने की तैयारी को अंतिम रूप दिया गया है। इन रेल लाइनों को बनाने का एक मकसद प्रदेश के पिछड़े और अहम जिलों तक रेल कनेक्टिविटी बढ़ाना है। इस पहल के तहत भोपाल को खजुराहो से जोड़ने वाले रेल कॉरिडोर के निर्माण के लिए एक सर्वे शुरू किया जाएगा जो सागर, छतरपुर और दमोह से होकर गुजरेगा। बाकी 10 रूटों के लिए उनकी फिजिबिलिटी का पता लगाने के लिए रिकॉनिसेंस और ट्रैफिक सर्वे किए जाएंगे। सबसे अधिक रूटों की संख्या बुंदेलखंड क्षेत्र में होने वाली है। बता दें कि, इस 11 नए रेल मार्गों में जबलपुर-डिंडौरी-पेंड्रा रोड और झांसी-शिवपुरी-श्योपुर-सवाई माधोपुर मार्ग शामिल है। इन दोनों रुट्स का सर्वे क्रमशः वेस्ट सेंट्रल रेलवे और साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे द्वारा किया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने सर्वे के बजट भी स्वीकृत कर दिया है और सम्बंधित जोन को प्रोसेस आगे बढ़ाने के निर्देश भी दे दिए है।
दो चरणों में होगा सर्वे
रेलवे के अनुसार, यह सर्वे दो चरणों में किया जाना वाला है। पहले चरण में टोही सर्वे किया जाएगा। इसमें रुट्स की भौगोलिक स्थिति, संभावित ट्रैक, बजट और तकनीकी परेशानियों और चुनौतियों की स्टडी की जाएगी। इसके बाद दूसरा चरण में यातायात सर्वे किया जाएगा। इसमें यात्रियों और माल ढुलाई की संभावना की विश्लेषण किया जाएगा। दोनों सर्वे खत्म हो जाने के बाद इसे रेलवे बोर्ड के पास अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा। हालांकि, इनमे कई रेल रूट ऐसे भी है जहां पहले भी सर्वे किया जा चूका है लेकिन बजट की कमी और तकनिकी परेशानियों की वजह से योजना पर काम नहीं हो पाया।
रेलवे नेटवर्क से वंचित क्षेत्रों तक पहुंचेगी ट्रेन
मिली जानकारीं के अनुसार, रेलवे इस बार प्रदेश के उन जिलों या क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी में है जहां लंबे समय से या तो जनप्रतिनिधियों या स्थानीय लोगों द्वारा रेल लाइन की मांग की जा रही थी। भारतीय रेलवे की इस मुहीम से प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है जिससे लाखों लोगों को इसका फायदा होगा। यही नहीं इससे क्षेत्र का विकास भी होगा और स्थानीय व्यापर और पर्यटन को भी तेजी मिलेगी।
ये होंगे 11 रेलवे रुट्स (रीजन वाइज)
भोपाल से खजुराहों कॉरिडोर (वाया सागर, छतरपुर और दमोह)
दमोह- हटा नगर- खजुराहो
झांसी-शिवपुरी-श्योपुर- सवाई माधोपुर (राजस्थान)
जबलपुर-डिंडौरी-पेंड्रा रोड
सिवनी से कटंगी
जयसिंह नगर-रीवा
जयसिंह नगर- शहडोल
पेंड्रा रोड-अमरकंटक-मंडला-घंसौर
मक्सी-हरदा
बालाघाट-भरवेली-उकवा
वारासिवनी-खैरलांजी-तिरोड़ा

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MP में भूकंप के झटके, घरों से बाहर भागे लोग, रिक्टर स्केल पर 3.6 मापी गई तीव्रता

बड़वानी. मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में बुधवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। जानकारी के मुताबिक बड़वानी जिले के अंजड़ थाना इलाके के मोहिपुरा गांव में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.6 मापी गई है। लोगों के मुताबिक बुधवार दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर भूकंप आया और घर के बर्तन और फंखे हिलने लगे। दहशत में लोग घरों से भागकर बाहर आ गए। लोगों का कहना है कि करीब 2 मिनट तक भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।
धरती डोली तो दहशत में आए लोग
अंजड़ थाना क्षेत्र के मोहीपुरा गांव में भी बुधवार दोपहर 12.48 बजे हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। जिले में स्थित भूकंप केंद्र में लगी एमईक्यू मशीन में ये कंपन रिक्टर स्केल पर 3.6 दर्ज हुआ। नर्मदा नदी किनारे बसे मोहिपुरा गांव व अन्य गांवों के लोगों ने घरों में रखे बर्तन, फर्नीचर और पंखों को हिलते देखा। मोहिपुरा निवासी लोकेेद्रसिंह तोमर ने बताया कि वे घर में थे तभी अचानक जमीन में कंपन हुआ और भारी वाहन निकलने जैसा अहसास हुआ। वे तत्काल घर के बाहर निकले। सोशल मीडिया व फोन से संपर्क करने पर हल्का भूकंप होने की जानकारी मिली, जिससे लोगों में डर और दहशत का माहौल बन गया। फिलहाल भूगर्भीय हलचल से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि प्रशासन द्वारा अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दिनभर क्षेत्र में भूकंप को लेकर चर्चाएं चलती रहीं।
3.6 मापी गई रिक्टर स्केल पर तीव्रता
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.6 दर्ज की गई है। भूकंप से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। भूकंप केन्द्र की वेबसाइट पर भी 12 बजकर 48 मिनट पर भूकंप आने की पुष्टि हुई है और भूकंप की तीव्रता 3.4 दर्ज की गई है। शहर में स्थापित भूकंप केंद्र के ऑपरेटर हुकुम कुमार ने बताया कि हर दिन सुबह नर्मदा नगर (पुनासा, खंडवा) सेंटर से रिपोर्ट जारी होती है। बुधवार दोपहर को बड़वानी जिले के अंजड़ क्षेत्र में जमीन में हलचल दर्ज की गई है। ये मशीन 40 से 50 किलोमीटर क्षेत्र में जमीनी हलचल की तीव्रता दर्ज करती है।
उज्जैन से 178 किमी दूर था भूकंप का केन्द्र
भूकंप केन्द्र के अधिकारियों के मुताबिक भूकंप का केन्द्र उज्जैन से 178 किमी दूर दक्षिण-पश्चिम में था। जो गुजरात के सूरत से 217 किमी पूर्व-उत्तर और महाराष्ट्र के नासिक से 232 किमी उत्तर-उत्तर-पूर्व में स्थित था।

 

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कश्मीर के शोपियां में 14.5 किलो IED बरामद, बड़ा हमला टला

जम्मू कश्मीर. जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां सुरक्षाबलों की सतर्कता ने एक संभावित बड़े आतंकी हमले को नाकाम कर दिया। भारतीय सेना की चिनार कोर और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर एक संयुक्त अभियान में 14.5 किलो का शक्तिशाली (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बरामद कर उसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया। यह पूरा ऑपरेशन जैनापोरा इलाके के चित्रगाम के पास चलाया गया। सेना ने इस कार्रवाई को ऑपरेशन चित्रगाम नाम दिया। अधिकारियों के मुताबिक, यह इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस बेहद खतरनाक था, इसे हाई एक्सप्लोसिव से तैयार किया गया था और इसमें रिमोट कंट्रोल से विस्फोट करने की व्यवस्था भी थी।
सुबह की तलाशी में मिला खतरनाक जाल
जानकारी के अनुसार, यह बम जैनापोरा-चित्रगाम सड़क पर लगाया गया था। सुरक्षाबलों की रोजाना होने वाली जांच (जिसे सैनिटाइजेशन कहा जाता है) के दौरान इसे सुबह-सुबह देखा गया। आशंका है कि इसका निशाना सुरक्षा बलों के वाहन थे । जैसे ही इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस की सूचना मिली, तुरंत बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया। कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात रोक दिया गया, ताकि किसी तरह का खतरा न रहे। इसके बाद विशेषज्ञों ने बेहद सावधानी के साथ इस विस्फोटक को निष्क्रिय किया।
लगातार जारी है सतर्कता अभियान
जम्मू-कश्मीर में सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां रोज सुबह सड़क मार्गों की जांच करती हैं। इसे रोड ओपनिंग पार्टी की कार्रवाई कहा जाता है। इस प्रक्रिया का मकसद यही होता है कि कहीं भी छिपे ऐसे खतरनाक विस्फोटकों को पहले ही ढूंढ लिया जाए, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके।

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MP में UCC की तैयारी तेज, CM मोहन यादव ने गृह विभाग को दिया 6 महीने का अल्टीमेटम

भोपाल. मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार का लक्ष्य इस ऐतिहासिक कानून को इस साल दिवाली तक अमलीजामा पहनाने का है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गृह विभाग को अगले छह महीनों के भीतर विधेयक का मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है। इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए जल्द ही एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें कानूनी विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति उत्तराखंड और गुजरात द्वारा लागू किए गए यूसीसी कानूनों का गहन अध्ययन करेगी।
शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी
दिसंबर 2022 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का संकल्प लिया था। हालांकि, विधानसभा चुनावों की व्यस्तता के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। अब मोहन यादव सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए उत्तराखंड मॉडल का विश्लेषण शुरू कर दिया है, जो 27 जनवरी 2025 से देश में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है।
क्या हैं यूसीसी की विशेषताएं?
लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण
समान नागरिक संहिता का सबसे क्रांतिकारी प्रभाव महिलाओं की स्थिति पर पड़ेगा। यह कानून धर्म से ऊपर उठकर सभी महिलाओं को समान अधिकार देता है। इसमें बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटों के समान अधिकार प्राप्त होगा। साथ ही तलाक की प्रक्रिया अब मजहबी परंपराओं के बजाय कानूनी और पारदर्शी होगी, जिससे महिलाओं का शोषण रुकेगा। इसके अलावा तलाक के बाद गुजारा भत्ता पाने के नियम सभी के लिए एक समान और स्पष्ट होंगे, जिससे महिलाओं का भविष्य सुरक्षित होगा।
वैवाहिक कुरीतियों पर अंकुश
एक से ज्यादा शादी करने की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा। यह नियम समाज में महिलाओं को बढ़ावा देगा। विवाह का अनिवार्य पंजीकरण होने से धोखाधड़ी और बाल विवाह जैसे मामलों में कमी आएगी। समान नागरिक संहिता आधुनिक सामाजिक बदलावों को भी कानून के दायरे में लाता है। इसके तहत लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को जिला प्रशासन के पास अपनी जानकारी दर्ज करानी होगी। इससे सुरक्षा और जवाबदेही तय होगी। साथ ही लिव-इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को ‘अवैध’ नहीं माना जाएगा। उन्हें कानूनी मान्यता और माता-पिता की संपत्ति में पूर्ण अधिकार मिलेगा। हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों का मानना है कि ‘लव-जिहाद’ और ‘भूमि-जिहाद’ जैसी समस्याओं पर लगाम कसने के लिए समान नागरिक संहिता एक प्रभावी हथियार साबित होगा।

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MP-राजस्थान के बीच नई रेल लाइन, यह होगा किराया

भोपाल. मध्यप्रदेश के रेल यात्रियों को 2026 के अंत तक एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। भोपाल-रामगंज मंडी नई रेल लाइन परियोजना तेजी से अंतिम चरण में पहुंच रही है, जिसके पूरा होने पर प्रदेश के कई हिल और दूरदराज इलाकों में पहली बार ट्रेन पहुंचेगी और राजस्थान से सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा।हाल ही में कोटा मंडल के अंतर्गत खिलचीपुर-राजगढ़ सिटी (17.8 किमी) रेलखंड पर रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सफल स्पीड ट्रायल भी किया गया। यह ट्रायल इस रूट पर जल्द यात्री सेवा शुरू होने का संकेत माना जा रहा है।


कितना काम हुआ, कितना बाकी
करीब 276 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना में अब तक 187 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें शेष 89 किलोमीटर का कार्य मार्च 2026 तक वित्तीय वर्ष 2026-27 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे कई स्टेशन
इस परियोजना के तहत मध्यप्रदेश के राजगढ़ और सीहोर जिले के कई स्टेशन पहली बार रेल नक्शे पर आएंगे। इनमें पिपलहेड़ा, सोनकच्छ, नरसिंहगढ़, जमुनियागंज, कुरावर, श्यामपुर, दुराहा, झारखेड़ा, मुगलियाहाट, आदि शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लोग अब तक सड़क मार्ग पर निर्भर थे, लेकिन रेल सेवा शुरू होने के बाद भोपाल और राजस्थान के शहरों तक पहुंच आसान हो जाएगी।