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चंद्रशेखर समतामार्ग कार्यक्रम में गूंजे संघर्ष, समाजवाद और लोकतंत्र के स्वर


हरिवंश, नरेन्द्र सिंह तोमर, सुबोधकांत सहाय समेत कई दिग्गज हुए शामिल
ग्वालियर। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर  की जन्मशती के अवसर पर आयोजित चंद्रशेखर समतामार्ग : पदयात्री-राजनीति और जीवन संघर्षों के अनुभव”  विषयक कार्यक्रम गुरुवार शाम चेम्बर ऑफ कॉमर्स सभागार में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में देश की राजनीति, समाजवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार  हरिवंश  मुख्य वक्ता रहे, जबकि मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर  ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया।


मंच पर पूर्व केंद्रीय मंत्री  सुबोधकांत सहाय , पूर्व मंत्री  रमाशंकर सिंह, राज्यसभा सदस्य  अशोक सिंह  तथा चंद्रशेखर जन्मशती समारोह आयोजन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण श्रीवास्तव  सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री  रमाशंकर सिंह  ने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि कांग्रेस द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान करीब  डेढ़ लाख कार्यकर्ता जेलों में बंद किए गए थे । उन्होंने कहा कि उस समय कई साहसी अखबारों ने विरोध स्वरूप अपने एक पूरे पन्ने को काला प्रकाशित किया था। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे निंदनीय कदम बताया। रमाशंकर सिंह ने कहा कि जिस सरकार ने काला कानून बनाया, उसे बाद में दो बार माफी मांगनी पड़ी और तीसरी बार भी सरकार को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी।
उन्होंने चंद्रशेखर के व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि वे कांग्रेस कार्यसमिति के निर्वाचित सदस्य थे और उनमें अदम्य साहस था। उनका कहना था कि चंद्रशेखर का स्पष्ट मत था कि यदि समाजवाद को बचाया नहीं जा सका तो कांग्रेस पार्टी को तोड़ने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर का पूरा राजनीतिक जीवन लोकतंत्र में असहमति के सम्मान का प्रतीक था।
विशेष अतिथि सुबोधकांत सहाय ने अपने संबोधन में कहा कि चंद्रशेखर संघर्ष और संपूर्ण क्रांति की यात्रा के प्रतीक थे। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर ने  जयप्रकाश नारायण  के मार्गदर्शन में राजनीति की बारीकियां सीखीं और संगठन संचालन की अद्भुत क्षमता विकसित की। सहाय ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें वीपी सिंह, चंद्रशेखर, मनमोहन सिंह और पीवी नरसिंह राव जैसे प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर हर वर्ग के व्यक्ति से सहज संवाद स्थापित करने में सक्षम थे—चाहे बलिया का आम व्यक्ति हो या कोई विदेशी प्रतिनिधिमंडल।
अध्यक्षीय उद्बोधन में मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि चंद्रशेखर देश की राजनीति के प्रखर नेता और बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने कहा कि आज के दौर में राजनीतिक कार्यकर्ताओं का मन, शरीर और विचार अलग-अलग दिशाओं में होते हैं, जबकि चंद्रशेखर मन, वचन, कर्म और आत्मा से सच्चे समाजवादी थे। तोमर ने कहा कि समाजवाद को समझना और याद करना है तो चंद्रशेखर को याद करना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि भारत माता को परम वैभव तक पहुंचाने के संकल्प के साथ चंद्रशेखर ने साधारण चप्पलों में कन्याकुमारी से राजघाट तक 4260 किलोमीटर की ऐतिहासिक पदयात्रा की थी, जो उनके संघर्षशील जीवन का प्रतीक है।
कार्यक्रम का संचालन राजवीर सिंह राठौर ने किया, जबकि अंत में राकेश शर्माने आभार व्यक्त किया। समारोह में बड़ी संख्या में सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक वर्ग के लोग उपस्थित रहे।

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