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नाराज मंत्री बोले-जोनल अफसर नालायक है सस्पेंड, भूमिपूजन में नहीं पहुंचे तो मंत्री ने निगमायुक्त को फोन पर कहा कि इतनी बेइज्जती

मंत्री नारायण सिंह कुशवाह नगर निगम आयुक्त से फोन पर बात करते हुए। - Dainik Bhaskar

ग्वालियर. मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नारायणसिंह कुशवाह शुक्रवार को भूमिपूजन के बीच अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर भड़क गये। वार्ड -52 में आयोजित कार्यक्रम में नगरनिगम का कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे, भूमिपूजन स्थल पर सिर्फ एक पम्प ऑपरेटर मिला था।
नाराज मंत्री ने भूमिपूजनस्थल से ही निगमायुक्त संघप्रिय को फोन कर बोले, एक मंत्री लेवल का व्यक्ति बैठा है और यहां कोई अधिकारी नहीं है। यह सीधी बेइज्जती है। मंत्री के फोन के बाद निगमायुक्त ने जोनल अधिकारी सौरभ शाक्य को तुरंत निलंबित कर दिया है। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय जनकार्य विभाग रहेगा। जबकि अतिरिक्त प्रभार उपयंत्री बृजेश राजपूत को सौंपा गया है।
मंत्री ने अधिकारियों को दी चेतावनी
नारायणसिंह कुशवाह ने कहा है कि यह क्या मजाक है यहां सिर्फ पम्प ऑपरेटर खड़ा है। जोनल अधिकारी को तत्काल हटाइये। नहीं हटा सकते तो मुझे बताइये, मैं आपसे बात नहीं करूंगा। ‘‘नालायक है, पहले भी बता चुका है।’’ जांच में सामने आया है कि में जोन अधिकारी को लेकर कई शिकायतें भी मिली थी। यह आरोप है कि सीमा हेल्पलाइन की शिकायत का समय पर समाधान नहीं किया। वार्ड-55 में बिना अनुमति सड़क खुदाई पर कार्यवाही नहीं की। क्षेत्र का नियमित निरीक्षण नहीं किया। भूमिपूजन की पूर्व सूचना केक बावजूद कार्यक्रम में अनुपस्थित रहा है।
विधानसभा में भी उठे ऐसे मामले
ग्वालियर में जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। नगर निगम परिषद की बैठकों में पार्षद इस पर हंगामा कर चुके हैं। अफसरों के रवैये को लेकर यह मुद्दा विधानसभा तक पहुंच चुका है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट भी सदन में कह चुके हैं कि अधिकारी उनकी बात तक नहीं सुनते।

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ग्वालियर में ट्रक ने कुचला RTO सब-इंस्पेक्टर, मौके पर मौत, जीजा गंभीर घायल, ट्रक चालक फरार

ग्वालियर. ग्वालियर में गुरुवार रात हुए दर्दनाक सड़क हादसे में आरटीओ सब-इंस्पेक्टर देवेंद्र मिश्रा की मौत हो गई, जबकि उनके जीजा बॉबी उर्फ आशीष गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा पनिहार थाना क्षेत्र में रात करीब 8:30 बजे हुआ। जानकारी के मुताबिक 37 वर्षीय देवेंद्र मिश्रा अपने जीजा के साथ बाइक (एम07 यूक्यू 0855) से ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि देवेंद्र मिश्रा ट्रक के पहिए के नीचे आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में घायल बॉबी उर्फ आशीष को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वे भी पनिहार आरटीओ कार्यालय में पदस्थ हैं। हादसे के बाद आरोपी ट्रक चालक वाहन लेकर फरार हो गया।


सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस
सूचना मिलते ही पनिहार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस हाईवे के होटलों और ढाबों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
इकलौते बेटे की मौत से परिवार में मातम
देवेंद्र अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। देवेंद्र मिश्रा माधौगंज क्षेत्र के निवासी थे। उनके पिता बिजली विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उनके परिवार में पत्नी, 10 साल का बेटा और 13 साल की बेटी है। घटना के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। देवेंद्र मिश्रा पहले होमगार्ड में थे और 2025 में कुंभ मेले के दौरान उनकी नौकरी लगी थी। इसी साल उनका ट्रांसफर पनिहार आरटीओ कार्यालय में हुआ था।

 

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ग्वालियर में रिटायर्ड फौजी की गोली लगने से मौत

ग्वालियर. ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में रिटायर्ड फौजी की गुरुवार रात संदिग्ध हालत में गोली लगने से मौत हो गई। घटना आदित्यपुरम इलाके की है, जहां रात करीब 11 बजे घर में गोली चलने की आवाज के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
गोली की आवाज पर पहुंचे पड़ोसी
रामस्वरूप भदौरिया (58) घर में अकेले थे। परिवार गांव गया हुआ था। गोली की आवाज सुनकर पड़ोसी घर पहुंचे तो वे कमरे में घायल हालत में पड़े मिले। पास में उनकी लाइसेंसी राइफल और शराब का क्वार्टर मिला।
पड़ोसियों ने परिजनों को सूचना दी और उन्हें बिरला अस्पताल फिर जयारोग्य अस्पताल ले जाया गया। यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। रात करीब 1 बजे पुलिस को सूचना दी गई।
गोली सीने में लगी
पुलिस जांच में सामने आया है कि गोली उनके सीने में लगी थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। घटनास्थल से बंदूक और शराब का क्वार्टर मिला, लेकिन बंदूक साफ करने से जुड़ा कोई सामान नहीं मिला है, जिससे संदेह बना हुआ है।
पुलिस कर रही जांच
परिजन इसे बंदूक साफ करते समय हुआ हादसा बता रहे हैं, जबकि पुलिस शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या मान रही है। टीआई यशवंत गोयल के अनुसार, सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है।

 

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चांदी आज 4855 बढ़कर 2.41 लाख पर पहुंची, सोना 368 महंगा होकर 1.50 लाख के पार

नई दिल्ली. सोना-चांदी के दाम में शुक्रवार को तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, एक किलो चांदी 4,855 रुपए बढ़कर 2,41,013 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले 9 अप्रैल को कीमत 2,36,158 रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 368 रुपए बढ़कर 1,50,305 रुपए पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को कीमत 1,49,937 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी।


सोना इस साल 17,110 और चांदी 10,593 महंगी
इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 17,110 रुपए और चांदी 10,593 रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.50 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.41 लाख रुपए पर पहुंच गई है।
इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। लेकिन, 28 फरवरी को अमेरिका और इजारइल की ईरान से जंग शुरू होने के बाद लगातार गिरावट देखी जा रही है। तब से 42 दिन में सोना 8,792 रुपए और चांदी 25,687 रुपए गिरी है।

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10,000 से ज्यादा के ऑनलाइन-पेमेंट पर 1 घंटे का होल्ड, गलत ट्रांजैक्शन कैंसिल करने का मौका मिलेगा

नई दिल्ली. जल्द ही ऐसा हो सकता है कि आपका 10 हजार से ज्यादा का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तुरंत न हो। उसमें 1 घंटे की देरी हो सकती है। इससे ग्राहकों को गलत ट्रांजैक्शन रोकने या कैंसिल करने का मौका मिलेगा। देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए आरबीआई ने ये प्रस्ताव रखा है। आरबीआई का मानना है कि जालसाज अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं, यह देरी उस दबाव को खत्म करेगी। फिलहाल ज्यादातर डिजिटल ट्रांजैक्शन तुरंत होते हैं, जिससे यूजर को सोचने या गलती सुधारने का मौका नहीं मिलता।
सीनियर सिटीजंस के लिए ट्रस्टेड पर्सन सुविधा
70 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए सुरक्षा और सख्त होगी। 50,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए एक ‘ट्रस्टेड पर्सन’ (भरोसेमंद व्यक्ति) की मंजूरी जरूरी हो सकती है। यह फ्रॉड के खिलाफ सुरक्षा की एक दूसरी लेयर की तरह काम करेगा।
भरोसेमंद को व्हाइटलिस्ट में शामिल कर सकेंगे
अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति या मर्चेंट को पैसे भेज रहे हैं, जिसे आप जानते हैं, तो आप उसे अपनी ‘व्हाइटलिस्ट’ में शामिल कर सकते हैं। व्हाइटलिस्टेड लोगों को पेमेंट करने पर यह 1 घंटे की देरी लागू नहीं होगी, जिससे नियमित लेन-देन में परेशानी नहीं आएगी।
डिजिटल पेमेंट बंद करने के लिए किल स्विच
आरबीआई ने एक ‘किल स्विच’ का सुझाव भी दिया है। अगर किसी ग्राहक को लगता है कि उसका अकाउंट हैक हो गया है या कोई गलत ट्रांजैक्शन हो रहा है, तो वह एक क्लिक से अपनी सभी डिजिटल पेमेंट सेवाओं को तुरंत बंद कर सकेगा।

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22 साल बाद संसद लौट रहे नीतीश कुमार

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ लेकर अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे। गुरुवार को दिल्ली पहुंचने पर उन्होंने यह साफ कर दिया कि अब दिल्ली ही उनका ठिकाना होगा और वो वहीं रहकर काम करेंगे। साथ ही उन्होंने इस बात का संकेत भी दिया कि 3-4 दिन में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। नीतीश कुमार का केंद्रीय राजनीति से जुड़ाव बहुत पुराना है। 1989 में पहली बार सांसद बनने से लेकर 2004 तक उन्होंने दिल्ली के सत्ता के गलियारों में कई महत्वपूर्ण पदों को संभाला।
वीपी सिंह सरकार में पहली बार बने मंत्री
केंद्रीय राजनीति में नीतीश कुमार की यात्रा दिसंबर 1989 में शुरू हुई। बाढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतने के बाद वे पहली बार लोकसभा में पहुंचे। उनकी क्षमताओं को पहचानते हुए, तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) ने उन्हें कृषि और सहकारिता राज्य मंत्री नियुक्त किया। हालांकि, यह कार्यकाल छोटा रहा और नवंबर 1990 में सरकार गिरने के साथ ही समाप्त हो गया।
अटल सरकार में रेल मंत्री
नीतीश कुमार का कद सही मायने में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान बढ़ा। 1998 में उन्हें रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी दौरान 1999 में पश्चिम बंगाल के गैसल में एक भयानक रेल दुर्घटना हुई। इस त्रासदी की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए, नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राजनीति में नैतिकता का यह उदाहरण आज भी मिसाल के तौर पर पेश किया जाता है।
भूतल परिवहन और कृषि मंत्रालय
वाजपेयी सरकार के कार्यकाल के दौरान नीतीश कुमार ने अलग-अलग समय पर कई अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों की कमान भी संभाली। 1998 और 1999 के बीच उन्होंने भूतल परिवहन मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभाला। इसके बाद नवंबर 1999 से मार्च 2000 तक और फिर मई 2000 से जुलाई 2001 तक उन्होंने देश के कृषि मंत्री के रूप में कार्य किया। इस भूमिका में उन्होंने किसानों के हितों की रक्षा के लिए कई दूरगामी नीतिगत निर्णय लिए।

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गजराराजा मेडिकल कॉलेज में व्यापमं कांड में बर्खास्त छात्रों को बिना बहाली, बिना अटेंडेंस और बिना परीक्षा दिए MBBS की डिग्री दी

ग्वालियर. ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय से संबंधित गजराराजा मेडिकल कॉलेज में नियमों का उल्लंघन कर डिग्री बांटने का आरोप लगा है। छात्र शाखा (यूजी) प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी और उनके सहायक पंकज कुशवाह पर आरोप है कि व्यापमं कांड में बर्खास्त छात्रों को बिना बहाली, बिना अटेंडेंस और बिना परीक्षा दिए एमबीबीएस की डिग्री दे दी गई।

शाखा प्रभारी का ऑडियो सामने आया है, जिसमें वे जांच कमेटी द्वारा बर्खास्त छात्र को सफाई देते नजर आ रहे हैं। - Dainik Bhaskar
16 लाख रुपए में डिग्री देने के आरोप भी लगाए गए
मामले में शाखा प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी का एक ऑडियो भी सामने आया है, जिसमें वे जांच कमेटी द्वारा बर्खास्त एक छात्र को सफाई देते नजर आ रहे हैं। बातचीत में 16-16 लाख रुपए में डिग्री देने के आरोप भी लगाए गए हैं। पूर्व छात्र संदीप लहारिया ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत राज्यपाल से लेकर मेडिकल कॉलेज के डीन तक की है। शिकायत में जीवाजी यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और गोपनीय शाखा के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया है।
30 से ज्यादा छात्र हुए थे बर्खास्त
लहारिया ने बताया कि व्यापमं मामले में करीब 150 छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें से 30 से अधिक एमबीबीएस छात्रों को बर्खास्त किया गया था, जिनमें संदीप लहारिया खुद भी शामिल हैं। उनका दावा है कि बर्खास्त छात्रों में से किसी को भी अब तक बहाल नहीं किया गया है और न ही किसी नई कमेटी ने राहत दी है। इसके बावजूद कई छात्रों को एमबीबीएस की डिग्री जारी कर दी गई, जो धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।

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MP में बंद होंगी 899 बसें, सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट ने भी लगाई मुहर

भोपाल. मध्यप्रदेश में अब 15 साल पुरानी बसें नहीं दौड़ेंगी। ऐसी 899 बसों के सड़क से बाहर होने का रास्ता साफ हो गया। हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार के 14 नवंबर 2025 को जारी आदेश को पूरी तरह वैध करार दिया है। इसके तहत 15 साल से अधिक पुरानी कमर्शियल बसों को चलाने पर सरकार ने रोक लगाई थी। जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने बस ऑपरेटरों की दायर सभी 10 याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ किया कि राज्य सरकार को परिवहन नीति बनाने और जनता के हित में निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब नियमों में संशोधन को पहले ही वैध ठहराया जा चुका है, तो उस आधार पर जारी प्रशासनिक आदेश को अवैध नहीं कहा जा सकता। यात्री सुरक्षा और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सरकार को स्टेज कैरिज परमिट से जुड़ी नीतियां बनाने का अधिकार है। कोर्ट ने इसी साल 27 फरवरी को सुरक्षित रखा फैसला गुुरुवार को सुनाया।
बस ऑपरेटरों ने खोला मोर्चा, लगाई याचिका
सरकार के इस आदेश पर बस ऑपरेटरों ने मोर्चा खोल लिया। उन्होंने अपनी बसों को फिट बताया। कहा, उनके पास परमिट भी है। तब परिवहन विभाग ने प्रदेश भर में 15 साल की मियाद पूरी कर चुकी 899 बसों की सूची बनाई। परमिट निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद ऑपरेटरों ने हाईकोर्ट की शरण ली। विकास भार्गव जैसे बस ऑपरेटर समेत 10 याचिकाएं हाईकोर्ट में लगीं।

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ग्वालियर क्रिकेट एसोसिएशन में बड़ा बदलाव, नए चेहरों के साथ मैदान में उतरेंगे महानआर्यमन

ग्वालियर. मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) के अध्यक्ष महानआर्यमन सिंधिया ने ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (जीडीसीए) की नई कार्यकारिणी का एलान कर लंबे समय से चल रहे कयासों पर विराम लगा दिया है। नई टीम में कई अहम बदलाव करते हुए उन्होंने सेवानिवृत्त आईएएस प्रशांत मेहता की जगह संग्राम कदम को अध्यक्ष मनोनीत किया है, जबकि सचिव पद की जिम्मेदारी विजयप्रकाश शर्मा ‘बेटू’ को सौंपी गई है। प्रशांत मेहता फिलहाल मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग (एमपीएल) की गवर्निंग काउंसिल में चेयरमैन बने रहेंगे। वहीं, मार्च 2020 से सचिव का दायित्व संभाल रहे वरिष्ठ क्रिकेटर संजय आहूजा ‘नान्चू’ को इस बार कार्यकारिणी में जगह नहीं मिली है।
महानआर्यमन सिंधिया पहली बार कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम पहुंचे
एमपीसीए अध्यक्ष बनने के बाद महानआर्यमन सिंधिया पहली बार कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम पहुंचे, जहां उन्होंने करीब 50 मिनट रुककर नई टीम के साथ चर्चा की। अपने पिता और दादा स्व. माधवराव सिंधिया की कार्यशैली से प्रेरित होकर उन्होंने क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प दोहराया। नई कार्यकारिणी में पूर्व सचिव निर्भय बाकलीवाल ‘झब्बू’ की उपाध्यक्ष पद पर वापसी कराई गई है। वर्ष 1997 से 2004 तक सचिव रहे झब्बू का अनुभव जीडीसीए के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा, तीन दशक से अधिक समय तक कोषाध्यक्ष रहे सीए वीरेंद्र बापना को विश्राम देते हुए उनकी जगह विकास गंगवाल को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नई टीम के सामने बड़ी चुनौतियां और लक्ष्य
सचिव बनाए गए विजयप्रकाश शर्मा लगातार तीसरी बार महत्वपूर्ण भूमिका में आए हैं। उन्हें पिछले वर्ष एमपीसीए और एमपीएल में सदस्य बनाया गया था। संग्राम कदम भी एमपीएल में सदस्य हैं। अब दोनों को जीडीसीए में बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद एमपीएल में उनके स्थान पर नए सदस्यों की नियुक्ति संभावित मानी जा रही है।
नव-मनोनीत अध्यक्ष संग्राम कदम ने कहा कि महानआर्यमन जी ने जिस भरोसे के साथ मुझे जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा। वहीं सचिव विजयप्रकाश शर्मा ने बताया कि उनकी कोशिश रहेगी कि ग्वालियर में अधिक से अधिक क्रिकेट गतिविधियां हों और क्लब क्रिकेट को बढ़ावा मिले।
जीडीसीए की नई कार्यकारिणी की सूची
जीडीसीए की नई टीम में संग्राम कदम को अध्यक्ष, विजय प्रकाश शर्मा ‘बेटू’ को सचिव, निर्भय बाकलीवाल ‘झब्बू’ को उपाध्यक्ष और विकास गंगवाल को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। संजय सांखला (शिवपुरी) संयुक्त सचिव और बीके शर्मा चेयरमैन ऑफ सिलेक्टर्स बनाए गए हैं। कार्यकारिणी सदस्यों में रमेश अग्रवाल, अंकुर मोदी, डॉ. पुनीत रस्तोगी, अनंत पुरोहित, रामाधर चौबे और सुनील गुप्ता शामिल हैं।

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देर रात 14 कलेक्टरों को इधर-उधर साथ ही 26 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया

भोपाल. लंबे इंतजार के बाद आखिरकार गुरुवार देर रात 14 कलेक्टरों को इधर-उधर करने के साथ ही 26 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया। तीन साल 4 महीने से ज्यादा समय तक धार कलेक्टर रहे 2013 बैच के प्रियंक मिश्रा अब भोपाल के नए कलेक्टर होंगे। भोपाल कलेक्टर रहे कौशलेंद्र विक्रम सिंह मुख्यमंत्री के सचिव बनाए गए हैं। उन्हें टीएंडसीपी का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है। कलेक्टरों के तबादले के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच एक सप्ताह में चार बार बैठक हुई। गुरुवार को ही पहले सुबह और फिर शाम को हुई बैठक में तमाम नामों पर सहमति बनी। इसके बाद सूची जारी की गई।


आईएएस संजीव सिंह का नाम अभी सूची से बाहर रखा गया
बताया गया है कि पूर्व में भोपाल कलेक्टर और कमिश्नर समेत कुछ नामों को लेकर सीएम-सीएस में सहमति नहीं बन रही थी। बाद में धार कलेक्टर रहे प्रियंक पर ही सहमति बनी। वे भोपाल कलेक्टर बनाए गए हैं। भोपाल संभागीय आयुक्त व 2005 बैच के आईएएस संजीव सिंह का नाम अभी सूची से बाहर रखा गया है।
बताया जाता है कि इनकी जगह आने वाले अफसर अभी चुनाव ड्यूटी पर हैं। दमोह कलेक्टर रहे सुधीर कोचर को सीएम ऑफिस में उप सचिव बनाया गया है। उन्हें एप्को के ईडी का प्रभार दिया गया है।
कौशलेंद्र के लिए भी तय थी जगह
कौशलेंद्र के लिए सीएम सचिव व टीएंडसीपी की चर्चा भी करीब दो माह से थी। वे दो साल भोपाल कलेक्टर रहे। इससे पहले जनवरी 2024 को उन्हें भोपाल कलेक्टर बनाया था, लेकिन 24 घंटे में ही वह आदेश बदलकर आशीष सिंह को यहां भेज दिया था।