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1.17 करोड़ रूपये का मुआवजा लेने के बाद ज्यादा मुआवजे की मांग, हाईकोर्ट बोला कि यह दोहरी नीति नहीं चलेगी, न्याय प्रक्रिया का दुरूपयोग, अपील खारिज

जबलपुर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सख्त रूप् अपनाते हुए अपील खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि एक बार आपसी सहमति से मुआवजा लेने के बाद उसे चुनौती देकर अधिक रकम मांगना स्वीकार्य नहीं है। मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने की। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि मुआवजा लेने के बाद कम पैसे मिले कहकर हाईकोर्ट आना न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग है। इससे अदालत का कीमती समय बर्बाद होता है। हाईकोर्ट ने यह ीाी कहा है कि अपील बिना किसी वास्तविकता के दायर की गयी है।
पूरा मामला आधारताल तहसील का है। जहां मिलौनीगंज निवासी अजीत यादव और अन्य की जमीन का अधिग्रहण नगरनिगम जबलपुर द्वारा किया गया था। इस अधिग्रहण के बदले लगभग 1.17 करोड़ रूपये का मुआवजा आपसी सहमति से तय हुआ। संबंधित पक्षों ने बिना किसी आपत्ति के यह राशि स्वीकार कर ली है। लेकिन जैसे ही मुआवजा उनके खातों में पहुंचा, उन्होंने इसे कम बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अधिक रकम की मांग कर दी।
यह न्याय प्रक्रिया का दुरूपयोग है-हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला ‘‘दोहरी नीति’’ का उदाहरण है। जिसमें पहले फायदा लिया गया और बाद में उसी को चुनौती दी गयी। हाईकोर्ट ने इसे न्याय प्रक्रियाके साथ खिलवाड़ मानते हुए अपील को सिरे से खारिज कर दिया। यदि अपील कर्ता दोबारा सुनवाई चाहते है, तो उन्हें पहले लिया गया मुआवजा वापिस करना होगा। इस पर अपीलकर्ताओं के वकील ने साफ कहा है कि उनके मुवक्किल इतनी बड़ी राशि लौटाने की स्थिति में नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने माना कि जब उन्होंने स्वेच्छा से मुआवजा स्वीकारकर लिया। अब उसे लौटाने में असमर्थ है ता वह मुआवजे की अपर्याप्तता पर सवाल नहीं उठा सकते है।
सरकार ने कहा समझौता अंतिम होता है
शासन की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने इस तर्क का विरोध करते हुए कहा कि एक बार मुआवजा स्वीकार कर लिया जाता है, तो वह अंतिम माना जाता है और उसे बाद में चुनौती नहीं दी जा सकती।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता एक साथ मुआवजे का लाभ लेकर उसी को चुनौती नहीं दे सकते, क्योंकि यह कानून की नजर में दोहरी नीति मानी जाती है।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि जमीन में अन्य लोगों का भी हिस्सा था, जिसकी जानकारी छिपाकर मुआवजा हासिल किया गया। इंटरविनर की ओर से यह आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ताओं ने अन्य हिस्सेदारों के अधिकारों की अनदेखी करते हुए पूरी राशि खुद ले ली। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी पुरानी याचिकाओं की जानकारी भी कोर्ट से छिपाई, जिसे अदालत ने गंभीरता से लिया।

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राजस्थान पुलिस गुण्डे की तलाश में ग्वालियर पहुंची, सड़क पर गर्भवती को दबोचा चीखी तो छोड़कर भागा

सूनसान गली में युवती जाते हुए और पीछे से आरोपी आता हुआ। - Dainik Bhaskar

ग्वालियर. राजस्थान के जयपुर में गर्भवती महिला से सड़क पर छेड़छाड़ करने वाला ग्वालियर के मुरार का गुण्डा निकाला। बदमाश की तलाश में मंगलवार का जयपुर से स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ग्वालियर पहुंची। छेड़छाड़ करने वाला गुण्डा ग्वालियर के सरसपुरा गांव बिजौली का निवासी है। बदमाश ने जयपुर में महिला के साथ अश्लील हरकत की थी। महिला जोर से चीखते हुए भागी थी।

आरोपी जिसने महिला से अश्लील हरकत की।
इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। यह वीडियो 25 मार्च को जवाहर सर्किल इलाके का बताया गया था। बदमाश की पहचान राहुल गुर्जर के रूप में की गयी है। ग्वालियर में उस पर कई लूट, डकैती, मारपीट की कई एफआईआर दर्ज है। अब पुलिस की टीम ग्वालियर में उसकी तलाश कर रही है। राजस्थान के जयपुर में रविवार को एक वीडियो सामने आया था। जिसमें सड़क पर जा रही एक गर्भवती महिला का पीछा करते हुए एक लड़का नजर आया। जब महिला सुनसान इलाके में पहुंची तो बदमाश पीछे से आया और महिला के साथ अश्लीलता करते हुए अश्लील हरकत कर दी। अचानक यह हरकत होते ही महिला जोर से चीखी और भागने लगी।
महिला के चीखते ही भागा बदमाश
महिला के चीखते ही बदमाश भी भाग गया। वीडियो के संबंध में सूचना को गंभीरता से लते हुए राजस्थान पुलिस मुख्यालय की तरफ से तत्काल संज्ञान लिया है। रविवार की दोपहर जवाहर सर्किल थाने में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की । जांच में पता लगा कि यह वीडियो 25 मार्च मतलब 15 दिन पहले का है। पीडि़ता की शिकायत देने के बाद भी ड्यूटी अधिकारी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया था।जिस पर जयपुर पुलिस के अधिकारियों ने प्रधान आरक्षक और ड्यूटी अधिकारी महेश चंद्र को निलंबित कर दिया था।

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डॉ. अंबेडकर ने हमें संविधान के माध्यम से अनेक अधिकार और कर्तव्य बताए हैं– सांसद

ग्वालियर – भारतरत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर जिला स्तरीय कार्यक्रम क्षेत्रीय सांसद भारत सिंह कुशवाह के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। समारोह में बाबा साहब अंबेडकर द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर देश को और सशक्त बनाने का संकल्प भी लिया गया। कार्यक्रम नगर निगम के बाल भवन सभागार में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गेश कुँवर सिंह जाटव ने की। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया, जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रियंका सिंह, कलेक्टर रुचिका चौहान, अपर आयुक्त प्रतीक राव, एडीएम सीबी प्रसाद, अपर आयुक्त नगर निगम मुनीष सिकरवार सहित बड़ी संख्या में महिलायें एवं स्कूली बच्चे शामिल हुए।
भारतरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम से अनेक जनकल्याण के कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से जरूरतमंदों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के महू में बाबा साहब अंबेडकर स्मारक के विस्तार का कार्य करने के साथ-साथ ग्वालियर के जौरासी में भी डॉ. अंबेडकर धाम का निर्माण किया जा रहा है।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश जाटव ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने समाज में समरसता लाने का संदेश दिया है। कलेक्टर ने भारतरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित जिला स्तरीय समारोह में कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर जयंती महिला समानता और सशक्तिकरण के लिये किए गए प्रयासों और उनके योगदान को स्मरण करने का दिन है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सहायता राशि देने का प्रावधान है। ग्वालियर जिले में पिछले दो वर्षों में लगभग 50 करोड़ रुपए की सहायता राशि प्रदान की गई है। कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती सम्पूर्ण प्रदेश की तरह ग्वालियर जिले में भी धूमधाम से मनाई जा रही है।
सांसद ने दिलाई समरसता की शपथ
भारतरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर आयोजित जिला स्तरीय समारोह के अंत में क्षेत्रीय सांसद ने सभी को सामाजिक समरसता की शपथ दिलाई।
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ग्वालियर पुलिस का अभिनव कदम-ग्वालियर रेंज का पहला “ई-मालखाना” एवं “पहरा प्लेटफार्म”

थाना पड़ाव में ग्वालियर रेंज का पहला “ई-मालखाना” एवं “पहरा प्लेटफार्म” का आईजी ग्वालियर जोन ने किया शुभारंभ
ग्वालियर। पुलिस व्यवस्था को आधुनिक एवं तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर धर्मवीर सिंह के निर्देश पर अति0 पुलिस अधीक्षक (मध्य/यातायात) श्रीमती अनु बेनीवाल(भापुसे) के मार्गदर्शन में ग्वालियर रेंज का पहला “ई-मालखाना” एवं “पहरा प्लेटफार्म” थाना पड़ाव में तैयार किया गया।
शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिरीक्षक अरविंद कुमार सक्सेना ने “ई-मालखाना” एवं “पहरा प्लेटफार्म” का अवलोकन किया और कहा कि पुलिसिंग के बदलते स्वरूप में तकनीक का समावेश अत्यंत आवश्यक हो गया है। ई-मालखाना और पहरा प्लेटफार्म ग्वालियर पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे साक्ष्यों के सुरक्षित रखरखाव एवं मॉनिटरिंग सिस्टम को आधुनिक बनाया जा सकेगा। इस अवसर पर उन्होने कहा कि ग्वालियर पुलिस का डिजिटल पुलिसिंग की तरफ एक अच्छा कदम है इस तकनीक को ग्वालियर रेंज के अन्य बड़े जिलों के थानों में भी शुरू किया जायेगा।
एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने कहा कि ग्वालियर पुलिस द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि पुलिसिंग को अधिक स्मार्ट, पारदर्शी और जवाबदेह कैसे बनाया जाए। ई-मालखाना और पहरा प्लेटफार्म इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आमजन को बेहतर, त्वरित एवं पारदर्शी पुलिस सेवा प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है और यह पहल उसी दिशा में एक ठोस प्रयास है। अंत में उपस्थित अधिकारियों को नई प्रणाली के प्रभावी उपयोग हेतु निर्देशित किया गया। एसएसपी ग्वालियर ने बताया कि जो केस प्रॉपर्टी होती है वह थाने के मालखाने मे रखी जाती है, और मालखाने के अंदर किसी भी केस की फाइल, जब्त सामान ढूंढने में काफी समय लग जाता है, इन परेशानियों से अब पड़ाव थाने का मालखाना मुक्त होगा। थाना पड़ाव के इस ई-मालखाने में केस की सभी फाइलों का डिजिटलाइजेशन किया गया है। इसके लिए वेब बेस्ड प्रोग्राम पर सारा डाटाबेस उपलब्ध है और एक क्लिक पर सारी जानकारी उपलब्ध होगी तथा मालखाने को सीसीटीवी कैमरे से लैस किया गया है, जिससे इस पर निगरानी रखी जा सकेगी।
क्या है ‘‘ई-मालखाना‘‘ व ‘‘पहरा प्लेटफार्म‘‘
“ई-मालखाना” एक डिजिटल सिस्टम है, जिसमें अपराध से संबंधित जब्त सामान, साक्ष्य एवं केस फाइलों का पूर्ण रिकॉर्ड ऑनलाइन एवं व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखा जाएगा। मालखाना में रखी प्रत्येक वस्तु को क्यूआर कोड़ से चिहिन्त किया गया है। इससे मालखाने की पारदर्शिता बढ़ेगी, रिकॉर्ड का त्वरित एक्सेस संभव होगा तथा माल के रख-रखाव एवं निगरानी में सुधार आएगा। साथ ही, न्यायालयीन कार्यवाही में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता भी सरल एवं तेज होगी।
‘‘पहरा प्लेटफार्म’’ प्रमाणों का रखरखाव एवं अभिरक्षा- यह एक वेब बेस्ड प्लेटफार्म है, जो अति0 पुलिस अधीक्षक(मध्य/यातायात) श्रीमती अनु बेनीवाल(भापुसे) द्वारा कोडिंग के ज़रिए बनाया गया है। प्लेटफार्म पर हर माल के सभी डिटेल जैसे अपराध क्रमांक, डिस्क्रिप्शन, लोकेशन, फोटो इत्यादि अपलोड करने पर यह ऑटोमैटिक यूनिक QR कोड जेनेरेट करता है। इस प्लेटफार्म पर विवेचक अपनी यूनिक आईडी और पासवर्ड से लॉगिन कर सकते है। माल की चैन ऑफ़ कस्टडी मेंटेन करने के लिए माल जब भी मालखाने से बाहर जाता है तो ले कर जाने वाले कर्मचारी का नाम एवं अधिकृत फॉर्म/ कोर्ट ऑर्डर अपलोड करना होता है। माल के चेक इन और डिस्पोजल के लिए भी इसी प्रकार से कस्टडी मेंटेन की जाती है। यह प्लेटफार्म हिंदी और अंग्रेज़ी भाषाओं में चलता है तथा ई-मालखाने और पहरा प्लेटफार्म की एक विशेषता यह भी है कि यह लगभग जीरो कॉस्ट में बनाया गया है। इसमें थाना पड़ाव की सबसे पुरानी जप्ती वर्ष 1993 की है।

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भारत में सामान्य में कम वर्षा के संकेत, अल नीनो की आशंका

नई दिल्ली. देश में मानसून8 को लेकर बड़ा अनुमान जताया जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा लांग रेंज फोरकास्ट के अनुसार 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से थोड़ा कम रह सकता है। अनुमान है कि जून से सितम्बर के बीच देश भर में वर्षा का लांग पीरियड एवरेज (एलपीए) का लीगभग 92प्रतिशत रह सकती है। जिसमें 5 प्रतिशत मॉडल एरर संभव है।
जनवरी से मार्च तक रही बर्फ में कमी
आईएमडी ने यह भी बताया है कि जनवरी-मार्च 2026 के बीच उत्तरी गोलार्थ में बर्फ का स्तर सामान्य से थोड़ा कम रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक बर्फ और मानसून केबीच उल्टा संबंध होता है। यानी बर्फ मेंकमी का प्रभाव मानसून की तीव्रता पर पड़ सकता है। क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो देश के कई हिस्सोंमें सामान्य से कम वर्षा की संभावना है। हालांकि नार्थ-ईस्ट, नॉर्थवेस्ट और दक्षिणी प्राय द्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा हो सकती है। आईएमडी ने यह पूर्वानुमान उन्नत मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल (एमएमई) और मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (एमएमसीएफएस) जैसे आधुनिक मॉडल्स के आधार पर तैयार किया है। विभाग नेय यह भी कहा है कि मई 2026 के आखिरी सप्ताह में अपडेटेड फोरकास्ट जारी किया जायेगा। जिससे मानसून की और स्पष्ट तस्वीर सामने आयेगे। कुल मिलाकर इस साल मानसून पूरी तरह से कमजोर नहीं लेकिन सामान्य से थोड़ा नीचे रहने कमे संकेत है। जहां ईआर्र नीनो और आईओडी के बीच संतुलन ही तय करेगा कि देश में वर्षा का वास्तविक पैटर्न कैसा रहेगा।

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ग्वालियर हाईकोर्ट में पेंडिंग केसों की ख्या 7 हजार तक घटी, 119% अब स्ट्राइक रेट हैं

ग्वालियर. मध्यप्रदेश की ग्वालियर बेंच का स्ट्राइक रेट पिछले वर्षो (2025-26) 119 रहा है, कन्फ्यूज ना हो। उदाहरण के तौर पर समझे कि यदि इस अवधि में 100 केस फाइल किये गये तो 119 का समाधान किया गया। परिणाम यह निकला कि ग्वालियर खंडपीठ में पेंडिंग केसों की संख्या जो जुलाई 22025 में करीब 89 हजार थी अब वह घटकर 82 हजार पर पहुंच गयी है। इस रिकॉर्ड उपलब्धि का ही परिणाम है। ग्वालियर बेंच ने केस डिस्पोज के मामले में प्रिंसिपल सीट जबलपुर, इन्दौर को पीछे छोड़ दिया गया है।इसका सबसे सुखद परिणाम यह निकल रहा है कि अधिकांश नये केसी भी जल्द निपट रहे हैं। वहीं कई सालों से पेडिंग केसों भी निपटारा तेजी से हा रहा है। आपको बता दें कि वर्तमान मंे ग्वालियर बेंच में 9 जज पदस्थ है।
1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक खंडपीठों का लेखा-जोखा
ग्वालियर खंडपीठ: कुल 34,336 नए मामले आए, लेकिन बेंच ने 40,794 मामलों का निपटारा कर 118.81% की क्लीयरेंस रेट दर्ज की।
जबलपुर मुख्य पीठ: जबलपुर में सबसे ज्यादा 93,251 केस दायर हुए और 92,017 का निराकरण हुआ। 98.67% की दर के साथ केस निपटे।
इंदौर खंडपीठ: इंदौर में 51,648 केस दायर हुए, पर निराकरण ​सिर्फ 41,759 का हो सका। यहां क्लीयरेंस रेट 80.85% रहा।
लागातार सुनवाई से निपटे केस
जेसी मिल्स का मामला 1997 से लंबित है। अभी नियमित अंतराल में सुनवाई हो रही।
सरकारी कर्मचारियों के 15 से 20 साल पुराने सजा संबंधी प्रकरणों में धड़धड़ा फैसले हो रहे।
पुराने केस निपटाने योजना के अंतर्गत लिस्टिंग की जा रही है।
केवल ग्वालियर बेंच में लंबित केसों की संख्या में कमी आई है।
बार-बेंच की संयुक्त उपलिब्ध
हमारे जज केसों के शीघ्र निराकरण के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है भविष्य में ऐसे ही काम होगा। पक्षकारों के लिए सुविधाएं भी बढ़ाई हैं। पवन पाठक, अध्यक्ष हाई कोर्ट बार एसो.,ग्वालियर

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केन्द्रीय जेल से 9 बंदी आजाद, आजीवन की सजा काट रहे थे अच्छे आचरण से मिली छूट

ग्वालियर. डॉ. भीमराव अंबेडकर जयन्ती के मौके पर केन्द्रीय जेल से आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 कैदियों को आजाद किया गया है। इनमें एक महिला कैदी भी शामिल है। अच्छे आचरण और सामाजिक -धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी के आधार पर शासन ने उनकी बाकी सजा माफ कर दी है। रिहा किये गये सभी कैदी बंदी हत्या जैसे गंभीर मामलों में दोषी थे। वह 14 साल से अधिक समय से जेल में सजा काट रहे थे। एक ही प्रकरण में दोषी पाये गये थे।
शासन को भेजे गये प्रस्ताव की मिली मंजूरी
जेल प्रशासन ने बंदियों के नाम शासन को भेजे थे। प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलने के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई।
परिवार से मिलकर भावुक है बंदी
जेल से बाहर आते ही बंदियों ने परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्ष भावुक नजर आए और लंबे समय बाद मिलने पर एक-दूसरे को गले लगाया।रिहाई से पहले जेल प्रशासन ने सभी बंदियों को शॉल और श्रीफल भेंट किए। कार्यक्रम में जेल अधिकारी और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।जेल अधीक्षक विदित सरवईया ने बताया कि बंदियों का आचरण अच्छा रहा। इसी आधार पर शासन ने उनकी शेष सजा माफ करने का निर्णय लिया।
ये बंदी हुए रिहा
रिहा किए गए बंदियों में सुरेश उर्फ सज्जन, पंचम जाटव, आशीष शर्मा, जमुना अहिरवार, छोटे और छोटया माली, अजय तोमर, मोहर सिंह, महेंद्र सिंह और लीलाबाई शामिल हैं।
गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस के साथ अन्य अवसरों पर भी रिहाई
पहले गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर ही बंदियों की सजा माफ की जाती थी। पिछले दो सालों से अंबेडकर और गांधी जयंती पर भी यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है

 

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केन्द्रीय जेल में नशा और वेश्यावृति के आरोप, वीडियो सामने आने के बाद मजिस्ट्रेट ने दिये जांच के आदेश

सामने आए वीडियो में एक पुराने कैदी को जेल की अवैध गतिविधियों के बारे में बताते हुए जेल प्रहरी।

ग्वालियर. केन्द्रीय जेल में अवैध गतिविधियों का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो सामने आने केबाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने पूरे मामले की न्याचिक जांच के आदेश दिये है। विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। यह वीडियो जेल के एक प्रहरी और एक बंदी द्वारा शेयर किया गया था। इसमें जेल के भीतर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, कैदियों की प्रताड़ना, नशे की सच्चाई, पैसे लेकर बैरक बदलने और वेश्यावृति तक के गंभीर आरोप लगाये जा रहे हैं।
पैसे देकर मिल रही नशा और वेश्यावृत्ति की सुविधाएं
कैदी और जेल प्रहरी ने अपने बयान में पूरे गोरखधंधे का खुलासा किया। आरोपों के मुताबिक 5 रुपये का बिस्किट 10 रुपये में, राजश्री 250 रुपये में और 50 रुपये की नमकीन 150 रुपये में दी जाती है। यह भी आरोप है कि जेल के अंदर नशा जैसे गांजे की पुड़िया 1000 रुपए में, 100 रुपये में चार बीड़ी, जबकि 600 रुपये में ” बीड़ी के बंडल” मिलता है। ज्यादा पैसे देने पर वेश्यावृत्ति तक की सुविधा मिलने की बात कही गई है। आरोप यह भी है कि जेल में आने वाले नए कैदियों को काफी प्रताड़ित किया जाता है, जब तक उनके घर से पैसे नहीं आ जाते। जेल के अंदर दो-तीन कैदियों द्वारा आत्महत्या करने की बात भी सामने आई है। एक सिपाही ने जेल के अंदर गांजा पकड़ा था, जिसे तुरंत हटा दिया गया।
तय दरों से खाने के लिये अधिक वसूली
वीडियो में खाने की सामग्री के लिये तय दरों से अधिक वसूली और पैसों का गलत हिसाब-किताव का भी जिक्र किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित प्रहरी को निलंबित कर दिया है। प्रशासन ने बताया है कि प्रहरी की बयानबाजी से जेल की छवि खराब हुई है। हालांकि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है यह जांच के बाद ही साफ हो पायेगा। फिलहाल जेल प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था दोनों की नजर इस जांच पर टिकी है।
लाखों रूपये की डिमांड बैरक बदलने के लिये
नये कैदियों की हवालात अलग होती है। वहां से बैरक बदलने के लिये 50 हजार-1 लाख रूपये की डिमांड की जाती है। अगर पैसा नहीं दिया तो कैदियों से काम कराया जाता है। गोबर डलवाया जाता है। मारपीट भी कराई जाती है। जिसने पैसे दे दिये। उसे कोई हाथ नहीं लगाता है। लेकिन जिसने पैसे नहीं दिये तो उससे मारपीट की का सामना करना पड़ता है। एक कैदी ने बताया कि वह 18 नवम्बर बैरक में था और 50 हजार रूपये देकर उसे 49-50 नम्बर बैरक में शिफ्ट कराया गया है।

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ईरान के परमाणु बम का कच्चा किसके हवाले, रूस रखने को तैयार, यूएस छीनने को तैयार, ईरान 5 वर्ष के लिये सस्पेंड

नयी दिल्ली. ईरान-अमेरिका तनाव इस समय चरम पर है। होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसैनिक ब्लॉकेड शुरू हो चुका है। इस दौरान दुनिया का ध्यान ईरान के परमाणु बम बनाने वाले कच्चे माल यानी एनरिच्ड यूरेनियम पर टिका हुआ है। ईरान के नजदीक 450 किमी एनरिच्ड यूरेनियम है जो हफ्तों में हथियार ग्रेड बनाया जा सकता है। 10 से अधिक परमाणु बम बनाने लायक मैटेरियल ईरान के पास पड़ा है। अब प्रश्न यह है कि यह यूरेनियम किसके हवाले हागी? रूस इसे रखने के लिये तैयार है। ईरान 5 साल के लिये अपना न्यूक्लीयर प्रोग्राम सस्पेंड करने के लिये तैयार है। लेकिन अमेरिका इसे छीनने या पूरी तरह हटाने पर अड़ा हुआ है। यह मुद्दा पाकिस्तान में हुई हालियां शांति की बातचीत टूटने और होर्मूज ब्लॉकेड की मुख्य वजह है।
क्या है एनरिच्ड यूरेनियम
ईरान काफी समय से कहता आ रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली और मेडीकल के लिये है। लेकिन अमेरिका और इजरायल इसे परमाणु हथियार बनाने की तैयारी मानते है। ईरान के पास 60 प्रतिशत तक एनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक है। सामान्य बिजली प्लांट के लिये 3-5 प्रतिशत एनरिचमेंट काफी होता है। लेकिन 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंचते ही यह बम बनाने लायक हो जाता है।
रूस क्यों तैयार है यूरेनियम रखने को?
रूस ने सोमवार 13 अप्रैल 2026 को फिर से अपना ऑफर दोहराया है । क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही अमेरिका और क्षेत्रीय देशों से बात कर चुके है।  रूस ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को अपने यहां सुरक्षित रखने को तैयार है।  रूस का कहना है कि यह शांति समझौते का हिस्सा हो सकता है।   रूस दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार रखने वाला देश है और ईरान का पुराना दोस्त भी है।  रूस को लगता है कि अगर वह यह सामग्री रख ले तो ईरान-अमेरिका युद्ध रुक सकता है।  रूस की मध्यस्थ की भूमिका मजबूत हो जाएगी । रूस ने स्पष्ट किया कि ऑफर अब भी टेबल पर है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

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अवैध खनन रोकने में मध्यप्रदेश की सरकार रही फेल, वनरक्षक की हत्या का जिम्मेदार कौन-सुप्रीम कोर्ट

मुरैना. वनरक्षक की हत्या और चम्बल नदी पर बने पुल की नींव तक अवैध खनन के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार पर कड़ा रूख अपनाया है। हाईकोर्ट ने इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाये है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के बीच में कहा है कि यदि रेत माफिया पुल की नींव तक खोद रहे है। वन अधिकारियों को कुचलकर मार रहे है। ऐसे में राज्य सरकार की भूमिका पर प्रश्न खड़े होते है। हाईकोर्ट ने पूछा कि यदि पुल गिर जाता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

भास्कर ने ग्राउंड रिपोर्ट में पिलर के नीचे गड्‌ढों का खुलासा किया था।
ऑफीसर की मिली भगत से हो सकती है
हाईकोर्ट ने कहा है कि यह घटनायें संकेत देती हैकि यदि या तो राज्य सरकार अवैध खनन रोकने में असफल रही है या फिर इसमें ऑफीसरों की मिलीभगत हो सकती है। होईकोर्ट ने टिप्पणी की कि सब राज्य सरकार की निगरानी में हो रहा है जो बेहद चिंताजनक है।
पुुल की नींव तक खुदाई
राजस्थान और मध्यप्रदेश को जोड़ने वाला नेशनल हाइवे -44 का चम्बल पुल मुरैना के राजघाट क्षेत्र में स्थित इस पुल की कई पिलरों के नीचे तक रेतमाफिया द्वारा लगभग 15 फीट तक खुदाई किये जाने की बात सामने आई है। जिससे संरचना की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो गया है। क्या मुरैना पुलिस प्रशासन को चम्बल नदी में अवैध रेत उत्खनन होता दिखाई नहीं देता क्या प्रशासन अंधा है। अवैध उत्खनन रोकने क्या-क्या प्रयास किये गये। यह क्यों रूक नहीं पा रहा है। इस सब की जानकारी सुप्रीम कोर्ट ने तलब की है।
वनरक्षक को कुचल कर मारने की रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने वनरक्षक की हत्या के मामला में अभी तक की जांच की स्थिति रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज पेश करने के निर्देश दिये है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। जो 17 अप्रैल को सुनाया जायेगा।