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निगमायुक्त ने किया शारदा विहार बावडी का निरीक्षण

ग्वालियर – जल गंगा संवर्धन अभियान योजना के तहत पुरानी बावड़ी एवं जल स्रोतों की साफ सफाई एवं संवर्धन को लेकर नगर निगम द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है। जिसकी मॉनिटरिंग निरंतर निगम आयुक्त संघ प्रिय द्वारा की जा रही है।
बुधवार को नगर निगम आयुक्त ने वार्ड 29 के अंतर्गत शारदा विहार बावडी का निरीक्षण किया तथा बावड़ी की साफ सफाई एवं अन्य व्यवस्थाओं को देखा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी एवं क्षेत्राधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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गेहूं खरीद आढ़तिया धर्मवीर भदौरिया फरार

ग्वालियर। ग्वालियर कृषि उपज मंडी में आज किसानों ने मंडी परिसर को सिर पर उठा लिया। यह वे किसान हैं जिन्होंने भरोसे में अपनी साल भर की मेहनत आढ़तिया को थमाई और किसानों का गेहूं तौलने के बाद जब पैसे लेने दोबारा आए तो आढ़तिया अपनी फर्म का शटर डाउन करके गायब हो गया। इसके खिलाफ आज किसानों ने मंडी में जमकर प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि कृषि उपज मंडी के अफसर इस आढ़तिया के मिले हुए हैं, इसलिए यहां से उनके खिलाफ शिकायत भी नहीं कर रहे हैं।
यह है मामला
इस मामले में किसान आढ़तिया धर्मवीर भदौरिया के खिलाफ भड़के हुए कृषि उपज मंडी में आढ़त है। 2 साल पहले इसने यह खरीद की थी। इसके बदले में किसानों को चेक भुगतान यही चेक दिए गए थे। किसानों ने साल से धर्मवीर सिंह भदौरिया के चेक लगाए गए हैं। जब इनका सब्र का बांध टूट गया तो आज यह प्रदर्शन करने पहुंच गए। किसानों का कहना है कि धर्मवीर भदौरिया और उसका मुनीम अर्चित शर्मा अब उन्हें लाखों लाख रुपये भी नहीं मिल रहे हैं। हमारा पैसा फंसा हुआ है।
इस मामले में सबसे अहम बात तो यह है कि किसानों के लाखों रुपये फंसे हुए हैं और सभी जिम्मेदार मौन हैं। दो साल से किसान कृषि उपज मंडी में चक्कर काट रहे हैं। पुलिस व्यवस्था लागू है। कृषि उपज मंडी के अधिकारियों की एक नहीं सुन रहे हैं और पुलिस कहकर किसानों को चलता कर देती है कि 3&4 दिन में पैसे मिल जाएंगे। जब किसान चेक दिखाते हैं तो पुलिस कहती है कि साबित करो कि यह चेक गेहूं की बिक्री के बदले में मिला है। कुल मिलाकर गेहूं खरीदने वाले किसानों का पैसा कृषि उपज मंडी, पुलिस के साथ-साथ लेनदेन करने वाले धर्मवीर सिंह भदौरिया के बीच फंस रहा है।
घर तक हो आए
धर्मवीर की खोज में किसान पिछले 2 सालों से लगे हैं। यह किसान दूर-दराज के गांवों के हैं और पूछते-पाछते धर्मवीर सिंह भदौरिया के घर तक पहुंच चुके हैं पर वहां से भी इन्हें भगा दिया जाता है। किसानों से जब इस मामले में बात की गई तो किसान फूट पड़े। उनका कहना था कि हद हो गई है। सारा सिस्टम आरोपी को बचाने के लिए खड़ा है। हम परेशान हो रहे हैं। वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर जब भदौरिया परिवार के पक्ष जानने की कोशिश की गई तो वे लगातार मोबाइल कॉल काटते रहे।

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घाटीगांव के जंगलों में फिर दिखाई दिया KGP-1 चीता, सोनचिरैया अभ्यारण्य इलाके में बढ़ी गतिविधियां

ग्वालियर. घाटीगांव स्थित सोन चिरैया अभ्यारण्य में केजीपी-1 चीता दोबारा पहुंच गया है। श्योपुर के कूनों नेशनल पार्क से लगभग 15 दिन पहले निकला था। यह चीता लम्बा सफर तय कर उसी इलाके में वापिस लौट गया है। जहां वह 3 महा पहले भी रह चुका है। वन विभाग के मुताबिक चीते को रेडियो कॉलर के माध्यम से ट्रैक किया जा रहा है।
क्ूनो से निकलने के बाद उसने आरोन और सिमरैया इलाकों को पार कर घाटीगांव के जंगलों में प्रवेश किया था। यह वही चीता केजीपी-1 चीता है। जिसने कुछ माह पहले घाटीगांव के जंगलों को अस्थाई ठिकाना बनाया था। दोबारा वापिसी को लेकर विभाग सतर्क है। एक्सपर्टो के मुताबिक इलाके में पर्याप्त शिकार और सुरक्षित परिस्थितियां चीते के बार-बार आने की वजह हो सकती है।
गांवों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश
वन विभाग ने अभयारण्य से लगे गांवों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मवेशियों को खुले में न छोड़ने और रात में सावधानी बरतने को कहा गया है।  विभाग के अनुसार चीता बकरी को आसान शिकार मानता है। जरूरत पड़ने पर वह नीलगाय और चीतल का भी शिकार कर सकता है। कूनो से बाहर चीते की मूवमेंट को विस्तार योजना के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह नए क्षेत्रों में आवास तलाशने का संकेत है।

 

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वायुसेना के चंबल गेट के सामने CNG कारों में लगी आग, 2 बच्चों समेत 4 लोग थे सवार

हाईवे पर कार जलकर खाक हो गई। - Dainik Bhaskar

ग्वालियर दोपहर लगभग 3.30 बजे वायुसेना के चंबल गेट पर 2 सीएनजी कारों में लगी आग से हड़कंप मच गया है। वायुसेना के केन्द्रीय विद्यालय के मुख्य द्वार के सामने 2 कारों आमने-सामने टकरा गयी। दोनों की कारें सीएनजी से लैस थी। इसलिये मौके पर जलकर राख हो गयी।

भिंड निवासी तिलक सिंह गोरैया अपनी टाटा टियागो कार (25BH-D2357) से ग्वालियर आ रहे थे। कार में उनके साथ 7 साल का बेटा, 6 साल का नाती और ड्राइवर था। इसी दौरान सामने से आ रही कार (MP07-AL 1696) ने साइड से टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही टियागो कार में अचानक आग लग गई। कुछ ही सेकेंड में कार आग की लपटों में घिर गई।हादसे के बाद तिलक सिंह ने बिना घबराए तुरंत सभी को कार से बाहर निकाला। उनकी तत्परता के चलते बच्चों और ड्राइवर की जान बच गई। आसपास मौजूद लोगों ने भी मदद की और तुरंत पुलिस व दमकल विभाग को सूचना दी।


वायुसेना की फायरब्रिगेड ने फोमयुक्त पानी से बुझाने का प्रयास किया गया तबतक दोनों कारे जलकर राख हो चुकी थी। घटनास्थल पर पहुंचे महाराजपुरा टीआई यशवंत गोयल ने बताया है कि दोनों कारों की आग पर काबू पा लिया गया है। दोनों कार में लगी आग से किसी प्रकार की कोई जानहानि नहीं हुई है।

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SKV में 9वाँ माधव राव सिंधिया धरोहर फैस्ट

ग्वालियर. SKV में 9वाँ माधवराव सिंधिया धरोहर फैस्ट का आयोजन किया जा रहा है। यह 3  दिवसीय कार्यक्रम 16 से 18 अप्रैल तक मनाया जाएगा। इस महोत्सव की परिकल्पना प्रियदर्शनी राजे सिंधिया की दूरदर्शी सोच और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट प्रतीक है, जो भारत की समृद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति उनके गहन समर्पण को दर्शाती। इस वर्ष इस उत्सव की थीम पारसी धरोहर है।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात पुरातत्वविद् एवं खाद्य मानवविज्ञानी माननीय डॉ. कुरुश दलाल, अतिथि के रूप में सुश्री रिया दलाल एवं विशेष अतिथि के रूप में यज़्दी करांजिया तथा निर्णायक मंडल में नवकाश जी, आनंदिता बनर्जी, कैनाज पारदीवाला हाथीराम, श्रीमती महारुख ज़ेड चिचगर एवं श्री मुस्ताक खान चौधरी उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों से लगभग 210 छात्र-छात्राएँ आ रही हैं।
रूपरेखा (16/04/2026) 

शीशा पर चित्रकम (ग्लास पेंटिंग) (प्रातः 11:30-1:30)
चाक-नु-पोरु (पारसी रंगोली) (दोपहर 2:00- 5:30)
उद्यम अतश (फायर ऑफ़ एंटरप्राइज) (प्रातः 11:30 -1:30)
पारसी गारा कढ़ाई (एम्ब्रायडरी) (प्रातः 11:30-1:30)
इलस्ट्रेटेड गहबर (इ-पोस्टर) (प्रातः 11:30 – 1:30)
नाटक (पारसी थियेटर) (शाम 6:30 – 8:30)
रूपरेखा (17/04/2026) 
उभार शिल्प (पारसी आर्ट रिलीफ़ स्कल्पचर) (प्रातः 8:00 -1:30)
पारसी रसोई (पारसी क्यूज़ीन) (प्रातः 8:00 – 2:00)
द क्रॉनिकल ऑफ़ आतश बेहराम (इ – इनफार्मेशन ब्रोशर) (प्रातः 9:30 – 1:30)
नक्शबंद (स्टोरीटेलिंग) (प्रातः 11:00 – 1:30)
कार्यक्रम की रूपरेखा (18/04/2026) 
दास्तान-ए-शाहनामा: (एपिक स्टोरीज़ इन मोशन) (प्रातः 9:00 -11:30)
समापन समारोह (दोपहर 1:00 – 2:00)

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अंबेडकर प्रतिमा लगाने पर विवाद, मंदिर के बगल में बिना अनुमति हो रही थी खुदाई, अनुमति मांगी तो वापिस लौटे लोग

दतिया. सेंवढ़ा चुं्रगी स्थित चिरईटोर माता मंदिर के पास मंगलवार की रात लगभग 8 बजे खाली पड़ी जमीन पर बिना अनुमति डॉ अम्बेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर झगड़ा हो गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं के विरोध और सूचना पर डायल 112 सिविल लाइन थाना पुलिस व तहसीलदार घटनास्थल पर पहुंचकर अधिकारियों द्वारा कलेक्टर की अनुमति मांगने पर संबंधित लोगों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। वह मूर्ति वापिस लेकर चले गये हैं। जिसके बाद मामला पूरी तरह से शांत हो गया है।
घटना मंगलवार की रात 8 बजे खुदाई शुरू करते ही विरोध शुरू हो गया था। चिरईटोर माता मंदिर पर श्रद्धालु मौजूद थे। तभी कुछ लोग पास की खाली जमीन पर अम्बेडकर की प्रतिमा लगाने पहुंच गये। जैसे ही उन्होंने मूति के लिये खुदाई शुरू की तो श्रद्धालुओं का इसकी भनक लग गयी।उन्होंने बाहर आकर उक्त लोगों को रोका। विवाद की स्थिति बनती देख तुरंत डायल 112 को सूचना दी गई। इसके बाद सिविल लाइन थाने से एसआई अमर सिंह गुर्जर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया।
तहसीलदार ने मांगी अनुमति तो वापस ले गए मूर्ति
विवाद की सूचना मिलने पर तहसीलदार बीएम आर्य करीब 20 मिनट बाद और सिविल लाइन थाना प्रभारी (TI) वैभव गुप्ता उनके 15 मिनट बाद मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने दोनों पक्षों से चर्चा की। तहसीलदार ने मूर्ति लगाने आए लोगों से अनुमति पत्र मांगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना कलेक्टर की अनुमति के कहीं भी मंदिर बनाना या प्रतिमा लगाना नियमों के विरुद्ध है। अनुमति न दिखा पाने पर उक्त लोगों ने अपनी गलती स्वीकार की और अंबेडकर की मूर्ति वापस लेकर चले गए।

 

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कार और फोन बैटरी होगी सस्ती, भारतीय वैज्ञानिक ने खोला न्यू मैटेरियल

नई दिल्ली. लीथियम-ऑयन बैटरी का सस्ता और सुरक्षित विकल्प खोजते हुए भारतीय साइंटिस्ट ने अहम कामयाबी हासिल की है। बेंगलुरू स्थित साइंटिस्ट की टीम ने एक न्यू कम्पोसिट मैटेरियल तैयार कर लिया है। जो एल्यूमिनियम बैटरी की मौजूदा सीमाओं को बढ़ाने का काम करेगा। एल्यूमीनियम बैटरी को लांग लास्टिंग बैटरी बैकअप और बेहतर सिक्योरिटी देगा।
बेंगलुरू स्थित डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के तहत काम करने वाले सेंटर में यह टीम काम कर रही है। साइंटिस्ट की टीम ने नोएडा की एक यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर न्यू कम्पोसिट मैटेरियल तैयार किया है। जो एल्यूमीनियम बैटरी में उपयोग किया जा सकेगा। एल्यूमीनियम बैटरी एक बेहतर साबित हो सकता है। लीथियम ऑयन बैटरी अपेक्षा में एल्यूमीनियम में बैटरी अधिक सस्ती होती है। साइंटिस्ट की टीम एल्यूमीनियम बैटरी की उन कमियों को दूर करने की दिशा में काम कर रही है। लिथियम आयन की तरह एल्यूमीनिय बैटरी का ऑप्शन तैयार किया जाता है। इसको भी फोन और इलेक्ट्रिक व्हीकल में उपयोग किया जा सकेगा। ऐसे में सस्ती बैटरी होने के कारण प्रॉडक्टके दाम कम होंगे। रिसर्चर ने बताया है कि उनका फोकस बैटरी में आमतौर पर उपयोग होने वाले मेटेरियल वेनेडियम ऑक्साइड पर है। इसमें एनर्जी को बेहतर तरीके से स्टोर किया जा सकेगा।
एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर काम करती हैं लिथियम आयन
लिथियम आयन बैटरी एक न्यू टेक्नोलॉजी है. यह कॉम्पैक्ट साइज में बेहतर बैटरी बैकअप देने का काम करती है. इसको  फोन – कार की बैटरी आदि में यूज किया जाता है. एल्युमीनियम बैटरी और लीथियम आयन बैटरी में काफी अंतर है. केमिकल रिएक्शन से लेकर बैटरी की सेफ्टी तक ढेरों अंतर हैं. आइए जानते हैं।

एल्युमीनियम बैटरी और लिथियम आयन बैटरी में अंतर 
पैरामीटर एल्युमीनियम बैटरी  लिथियम ऑयन
मैटेरियल  एल्युमीनियम बेस्ड लिथियम ऑयन 
एनर्जी डेंसिटी कम  ज्यादा 
चार्जिंग स्पीड  फास्ट  स्टैंडर्ड 
लाइफ साअकल बहुतत लंबी  सीमित 
सेफ्टी  ओवर हीटिंग का खतरा कम ब्लास्ट का खतरा
लागत  किफायती  महंगा 
वातावरण पर असर इको फ्रेंडली  नुकसान पहुंचाने वाला
कमर्शियल यूज  अभी टेस्टिंग फेज में  बड़े पैमाने पर 
वजन  हल्का  एल्यूमीनियम बैटरी से ज्यादा
परफॉर्मेंस  अभी स्टेबिलिटी पर काम  बेहतर बैटरी बैकअप 

लिथियम आयन बैटरी के खतरे 

लिथियम आयन जितने काम की है उतनी ही ये खबरों से भरी हुई है. लिथियम आयन बैटरी की सेफ्टी का ध्यान ना रखा जाए तो यह बम की तरह फट सकती है और इंसान और महंगे सामान को नुकसान पहुंचा सकती है. हीट और प्रेशर की वजह से यह बैटरी फट जाती है, जिसकी वजह से कई लोगों की जान तक जा चुकी है.

 

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एडवोकेट की गलती की सजा याचिकाकर्ता को नहीं, सोशल ऑडिट का संदेश देकर याचिका बहाल -हाईकोर्ट

ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में न्यायिक संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण पेश किया है। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि वकील की गलती की सजा याचिकाकर्ता को नहीं दी जा सकती है। मामला गोविंद स्वरूप श्रीवास्तव की याचिका से जुड़ा है। जो सुनवाइर्ह के दौरान उनके वकील के उपस्थित न रहने की वजह से खारिज हो गयी थी। बहाली के लिये दिया गया आवेदन भी सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था।
राहत का फैसला मिला डिवीजन बेंच से
इस आदेश को चुनौती देने पर डिवीजन बेंच ने पाया कि एडवोकेट दूसरी अदालत में व्यस्त होने की वजह से पेश नहीं हो पाये थे। ऐसे में याचिकाकर्ता के अधिकारों को प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं है। हाईकोर्ट ने पूर्व आदेशों को निरस्त करते हुए याचिका को पुनः बहाल करने के निर्देश दिये थे।
‘सजा’ नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी की शर्त
हालांकि, अदालत ने याचिका बहाल करते हुए एक विशेष शर्त भी जोड़ी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता या उसका वकील माधव अंध आश्रम जाकर कम से कम 2 हजार रुपए की खाद्य सामग्री प्रदान करे और वहां के बच्चों व जरूरतमंदों के साथ कम से कम एक घंटा समय बिताए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह शर्त दंड नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन है। कोर्ट ने ‘सोशल ऑडिट’ की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए कहा कि समाज के जिम्मेदार लोगों को समय-समय पर ऐसे संस्थानों का निरीक्षण करना चाहिए, ताकि वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।

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ग्वादर में चीन-पार्किस्तान से निपटने के लिये बलोचों ने नेवी बनाकर हमले शुरू किये

नई दिल्ली. पाकिस्तान का ब्लोचिस्थान लम्बे समय से गरीबी और अस्थिरता का शिकार रहा है। लेकिन जब चीन ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के माध्यम से इस इलाके को अपने वैश्विक व्यापार नेटवर्क का हिस्स बनाने की योजना बनाई है।तब इसे पाकिस्तान के लिये गेमचेंजर बताया गया है। अरबों डॉलर के निवेशन, नयी सड़कें, रेल नेटवर्क और बंदरगाह के वादों के बीच एक नयी उम्मीद जरूर बनी है। लेकिन इसी के साथ एक नया संघर्ष भी पनप चुका था। यह संघर्ष सिर्फ विकास बनाम पिछड़ावन का नहीं, बलिक् पहचान, अधिकारी और संसाधनों पर नियंत्रण का बन गया है।
बलोचिस्तान के दक्षिण में स्थित ग्वादर पोर्ट इस पूरे विवाद का केन्द्र है। चीन इसे अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई प्रोजेक्ट) का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। जहां से वह सीधे अरब सागर तक पहुंच बना सकता है। इससे चीन को मध्यपूर्व के तेल और वैश्विक व्यापार तक सीधी पहुंच मिलती है।लेकिन बलोचों की नजर में यह प्रोजेक्ट उनके लिये नहीं है। उनका मानना है कि उनकी जमीन ली जा रही है। उसके संसाधनों का उपयोग बाहरी ताकतें कर रही है। बदले में उन्हें न तो रोजगार मिल रहा है। क्षेत्र का विकास हो रहा है।ग्वादर शहर जो कभी एक शांत तटीय कस्बा था। अबवहां भारी सैन्य मौजूदगी है। जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और बढ़ गयी है।
सीपीईसी में निवेश, कर्ज और बलोचों की नाराजगी
लगभग 60 अरब डीलर डॉलर से अधिक निवेश वाला सीपीईसी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को नयी दिशा देने के लिये लाया गया था। लेकिन समय के साम इसके कई नकारात्मक पहलू भी सामने आये। प्रोजेक्ट्स में अधिकतर काम चीनी कम्पनियों और इंजीनियरों को मिला है। जबकि स्थानीय लोगों को सीमित मौके ही मिले हैं।
समुद्र तक पहुंचा संघर्ष, BLA ने बनाई नौसेना
हालात तब और गंभीर हो गए जब BLA ने अपने नए नौसैनिक विंग हम्माल समुद्री रक्षा बल (HMDF) के गठन का ऐलान किया. यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि रणनीतिक बदलाव है. जिवानी क्षेत्र में गश्ती नौका पर हमले का दावा इस बात का संकेत है कि अब बलोच विद्रोह सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रह गई हैं।  अगर यह रणनीति आगे बढ़ती है, तो ग्वादर पोर्ट और समुद्री व्यापार दोनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता हैं।  यह चीन के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि उसका पूरा निवेश इसी क्षेत्र की स्थिरता पर टिका हुआ हैं।
क्या CPEC पाकिस्तान के लिए बन गया बोझ?
जिस CPEC को पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ कहा जा रहा था, वही अब उसके लिए चुनौती बना हुआ है. कर्ज का बोझ, सुरक्षा खर्च और प्रोजेक्ट्स की धीमी प्रगति ने इस प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  “क्राउन ज्वेल” कहा जाने वाला ग्वादर पोर्ट अब तक अपेक्षित व्यापारिक गतिविधि नहीं ला पाया हैं।  इससे चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए चिंता बढ़ गई हैं।

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मणिपुर के विष्णुपुर में फैला भारी तनाव, सादा कपड़ों में सुरक्षाकर्मियों को देखकर भड़के लोग, झड़प् में 18 जख्मी

इंफाल. मणिपुर के विष्णुपुर जिले के थिगुंनेई इलाके मंगलवार की दोपहर लगभग 1त्र30 बजे तनाव फैल गया। जब प्रदर्शनकारियों ने सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मियों का ले जा रही 3 गाडि़यों को रोक लिया। ट्रोंगलाओबी बम धमाके में 2 बच्चों की मौत से गुस्सायें स्थानीय लोगों ने बोलेरो, स्विफ्ट और वर्ना गाडि़यों की चैकिंग की । गाडि़यों में सवार लोगों ने स्वयं को असम राइफल्स का सैनिक बताया। लेकिन पहचान पत्र नहीं दिखा पाने पर प्रदर्शनकारियों का शक गहरा गया।
भीड़ ने 5 लोगों को बंधक बना लिया। जबकि अन्य भाग निकले, इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने 2 गाडि़यों को आग के हवाले कर दिया। इस पूरी घटना और सुरक्षा बलों की कार्यवाही में 5 महिलाओं समेत लगभग 18 लोग मामूली घायल हो गये हैं। सुरक्षाबलों ने बादमें बंधक बनाये व्यक्तियों को अपनी हिरासत में ले लिया।
नारकोटिक्स ऑपरेशन बनाम उग्रवादी शक
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि हथियारों से लैस ये शख्स संदिग्ध कुकी उग्रवादी हो सकते हैं। हालांकि, एक सुरक्षा अधिकारी ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ये कर्मी एक नशीली दवाओं के मामले से जुड़े ऑपरेशन का हिस्सा थे।  दरअसल, इम्फाल एयरपोर्ट पर 7 किलो मॉर्फिन के साथ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा बल सादे कपड़ों में क्वाकटा की ओर जा रहे थे।
प्रदर्शनकारियों ने टिड्डिम रोड को ब्लॉक कर दिया और निंगथौखोंग व नामबोल जैसे स्थानों पर सुरक्षा बलों से भिड़ गए। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए मणिपुर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने आंसू गैस के गोले, धुआं बम और कुछ जगहों पर गोलियों का इस्तेमाल किया। जिला अस्पताल के पास आंसू गैस छोड़े जाने से कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत और चोटें आईं. ताजा हिंसा के बाद बिष्णुपुर जिले में स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। घाटी के 5 अन्य जिलों में सुबह 5 से शाम 5 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई है, लेकिन मौजूदा हालातों के मद्देनजर बिष्णुपुर जिले में कर्फ्यू में कोई ढील नहीं दी गई है. सुरक्षा बल पूरे इलाके में कड़ी निगरानी रख रहे हैं, जिससे हिंसा को दोबारा भड़कने से रोका जा सके।