ग्वालियर हाईकोर्ट में पेंडिंग केसों की ख्या 7 हजार तक घटी, 119% अब स्ट्राइक रेट हैं
ग्वालियर. मध्यप्रदेश की ग्वालियर बेंच का स्ट्राइक रेट पिछले वर्षो (2025-26) 119 रहा है, कन्फ्यूज ना हो। उदाहरण के तौर पर समझे कि यदि इस अवधि में 100 केस फाइल किये गये तो 119 का समाधान किया गया। परिणाम यह निकला कि ग्वालियर खंडपीठ में पेंडिंग केसों की संख्या जो जुलाई 22025 में करीब 89 हजार थी अब वह घटकर 82 हजार पर पहुंच गयी है। इस रिकॉर्ड उपलब्धि का ही परिणाम है। ग्वालियर बेंच ने केस डिस्पोज के मामले में प्रिंसिपल सीट जबलपुर, इन्दौर को पीछे छोड़ दिया गया है।इसका सबसे सुखद परिणाम यह निकल रहा है कि अधिकांश नये केसी भी जल्द निपट रहे हैं। वहीं कई सालों से पेडिंग केसों भी निपटारा तेजी से हा रहा है। आपको बता दें कि वर्तमान मंे ग्वालियर बेंच में 9 जज पदस्थ है।
1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक खंडपीठों का लेखा-जोखा
ग्वालियर खंडपीठ: कुल 34,336 नए मामले आए, लेकिन बेंच ने 40,794 मामलों का निपटारा कर 118.81% की क्लीयरेंस रेट दर्ज की।
जबलपुर मुख्य पीठ: जबलपुर में सबसे ज्यादा 93,251 केस दायर हुए और 92,017 का निराकरण हुआ। 98.67% की दर के साथ केस निपटे।
इंदौर खंडपीठ: इंदौर में 51,648 केस दायर हुए, पर निराकरण सिर्फ 41,759 का हो सका। यहां क्लीयरेंस रेट 80.85% रहा।
लागातार सुनवाई से निपटे केस
जेसी मिल्स का मामला 1997 से लंबित है। अभी नियमित अंतराल में सुनवाई हो रही।
सरकारी कर्मचारियों के 15 से 20 साल पुराने सजा संबंधी प्रकरणों में धड़धड़ा फैसले हो रहे।
पुराने केस निपटाने योजना के अंतर्गत लिस्टिंग की जा रही है।
केवल ग्वालियर बेंच में लंबित केसों की संख्या में कमी आई है।
बार-बेंच की संयुक्त उपलिब्ध
हमारे जज केसों के शीघ्र निराकरण के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है भविष्य में ऐसे ही काम होगा। पक्षकारों के लिए सुविधाएं भी बढ़ाई हैं। पवन पाठक, अध्यक्ष हाई कोर्ट बार एसो.,ग्वालियर

