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केन्द्रीय जेल में नशा और वेश्यावृति के आरोप, वीडियो सामने आने के बाद मजिस्ट्रेट ने दिये जांच के आदेश

सामने आए वीडियो में एक पुराने कैदी को जेल की अवैध गतिविधियों के बारे में बताते हुए जेल प्रहरी।

ग्वालियर. केन्द्रीय जेल में अवैध गतिविधियों का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो सामने आने केबाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने पूरे मामले की न्याचिक जांच के आदेश दिये है। विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। यह वीडियो जेल के एक प्रहरी और एक बंदी द्वारा शेयर किया गया था। इसमें जेल के भीतर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, कैदियों की प्रताड़ना, नशे की सच्चाई, पैसे लेकर बैरक बदलने और वेश्यावृति तक के गंभीर आरोप लगाये जा रहे हैं।
पैसे देकर मिल रही नशा और वेश्यावृत्ति की सुविधाएं
कैदी और जेल प्रहरी ने अपने बयान में पूरे गोरखधंधे का खुलासा किया। आरोपों के मुताबिक 5 रुपये का बिस्किट 10 रुपये में, राजश्री 250 रुपये में और 50 रुपये की नमकीन 150 रुपये में दी जाती है। यह भी आरोप है कि जेल के अंदर नशा जैसे गांजे की पुड़िया 1000 रुपए में, 100 रुपये में चार बीड़ी, जबकि 600 रुपये में ” बीड़ी के बंडल” मिलता है। ज्यादा पैसे देने पर वेश्यावृत्ति तक की सुविधा मिलने की बात कही गई है। आरोप यह भी है कि जेल में आने वाले नए कैदियों को काफी प्रताड़ित किया जाता है, जब तक उनके घर से पैसे नहीं आ जाते। जेल के अंदर दो-तीन कैदियों द्वारा आत्महत्या करने की बात भी सामने आई है। एक सिपाही ने जेल के अंदर गांजा पकड़ा था, जिसे तुरंत हटा दिया गया।
तय दरों से खाने के लिये अधिक वसूली
वीडियो में खाने की सामग्री के लिये तय दरों से अधिक वसूली और पैसों का गलत हिसाब-किताव का भी जिक्र किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित प्रहरी को निलंबित कर दिया है। प्रशासन ने बताया है कि प्रहरी की बयानबाजी से जेल की छवि खराब हुई है। हालांकि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है यह जांच के बाद ही साफ हो पायेगा। फिलहाल जेल प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था दोनों की नजर इस जांच पर टिकी है।
लाखों रूपये की डिमांड बैरक बदलने के लिये
नये कैदियों की हवालात अलग होती है। वहां से बैरक बदलने के लिये 50 हजार-1 लाख रूपये की डिमांड की जाती है। अगर पैसा नहीं दिया तो कैदियों से काम कराया जाता है। गोबर डलवाया जाता है। मारपीट भी कराई जाती है। जिसने पैसे दे दिये। उसे कोई हाथ नहीं लगाता है। लेकिन जिसने पैसे नहीं दिये तो उससे मारपीट की का सामना करना पड़ता है। एक कैदी ने बताया कि वह 18 नवम्बर बैरक में था और 50 हजार रूपये देकर उसे 49-50 नम्बर बैरक में शिफ्ट कराया गया है।

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