शनिश्चरी अमावस्या पर एंती में शनिदेव की शरण में पहुंचे लाखों श्रद्धालु

ग्वालियर. शनिश्चरी अमावस्या पर एंती गांव के पहाड़ पर शनि मंदिर में लाखों श्रद्धालु पहुंचे। शनि की शरण में शुक्रवार रात से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। सुबह से ही लंबी कतारें शनि दर्शन के लिए लग गई। चूंकि वैशाख् महीने में शनिश्चरी अमावस्या पड़ी है। इसलिए इसका महत्व अधिक है इसलिए भी देश व प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से लोग दर्शन करने के लिए शनि मंदिर पहुंचे।

एंती पहाड़ पर त्रेता युगीन शनि मंदिर है। किवदंती है कि त्रेतायुग में जब हनुमानजी लंगा में सीताजी की खोज में गए थे। तब रावण ने शनि को कैद में रखा हुआ था। रावण की कैद से मुक्त कराकर शनि को हनुमान जी ने फेंक दिया। तब वे सीधे एंती पहाड़ पर आ गए। तभी से यहां पर उनका मंदिर है। शनिश्चरी अमावस्या को देखते हुए शनि प्रतिमा का विशेष श्रंगार किया गया साथ ही फूलबंगला भी सजाया गया। दोपहर तक करीब पचास हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। चूंकि शनि पर तेल चढ़ाने का अधिक महत्व माना जाता है। इसलिए मंदिर के गर्भग्रह के बाहर एक शनिदेव की प्रतिमा स्थापित की गई है। उस पर ही श्रद्धालुओं को तेल चढ़ाने की अनुमति दी जा रही है। शनि प्रतिमा के केवल दर्शन ही कराए जा रहे हैं।

भगवान शनिदेव का तेलाभिषेक कर श्रृद्धालु रात से ही दर्शन लाभ ले रहे है। प्रशासन ने श्रृद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा के लिये व्यापक प्रबंध किये गये है। ऐंती पर्वत पर अनवरत प्रवाहित हो रही जल गंगा में स्नान के बाद श्रृद्धालु भगवान शनि देव को काली वस्तुओं, कपड़े, जूतों, बाल का दान कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा महिला पुरूषों के लिये पृथक-पृथक स्नानागार तैयार कराये गए हैं। वहीं नाई जोन, कपड़ा व जूता जोन भी अलग-अलग बनाए गए हैं। देश भर के श्रृद्धालुओं द्वारा भण्डारे आयोजित किये जा रहे हैं। भगवान शनि देव की कृपा पाने के लिए शनिचरी अमावस्या को अति विशिष्ट व्यक्तियों का आगमन आज दिन भर होता रहेगा। बड़ी संख्या में पुलिस बल लगाया गया है।

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