हमें जान से मारना और अस्पताल जलाना चाहते हैं, यह हालात जिला प्रशासन की जानकारी में है-आईएमए
ग्वालियर. कोरोना त्रासदी के दौर में वेंटीलेटर खाली नहीं थे इन परिस्थितियों में बच्चों की हालत को देखते हुए 35 दिन तक नवजात बच्चों को ऑक्सीजन और वेंटीलेकर के सपोर्ट पर रखा और इस बीच 9 डॉक्टरों की टीम बच्चों को मॉनीटरिंग कर रही थी और इसकी जानकारी परिजनों को समय-समय पर दी जा रही थी। इसके अलावा बच्चों को दिल्ली ले जाने के लिये कहा गया था। शहर के डॉक्टरों को दिखाने के लिये कभी नहीं रोका गया है। वैसे भी बच्चे आईवीएफ से जन्मे थे 35 दिनों के इलाज के बाद जिसमें मेल बच्चे की मौत हो गयी और फीमेल बच्चा जीवित है। ऐसी परिस्थितियों में हमें अस्पताल में जाकर परिजनों की ओर 17 अगस्त को विनोद जोशी ने अस्पताल में आकर डॉ. दीपक अग्रवाल जान से मारने और अस्पताल को जला देने की धमकी दी इस सारा खुलासा आईएमए द्वारा आयोजित पत्रकारवार्ता में डॉ. दीपक अग्रवाल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताई। पत्रकारवार्ता में डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. नीरज कौल, डॉ. एएस भल्ला, डॉ. प्रदीप राठौर, डॉ. सुहास घौंडे उपस्थित रहें।
हमारे खिलाफ पुतलादहन, जुलूस निकाल रहे
हमारे खिलाफ लगातार पुतलादहन, जुलूस निकाल रहे है और इसकी सूचना हमने पड़ाव थाना प्रभारी और जिला प्रशासन के अधिकारियों को दी है। जबकि पुतलादहन और जुलूस निकालने की परमिशन जिला प्रशासन से लेना होती है लेकिन इनके पास कोई परमिशन नहीं थी और न ही पुलिस ने इन पर किसी प्रकार के प्रकरण दर्ज किये।
9 डॉक्टरों की टीम मॉनीटर कर रही थी
डॉ. दीपक अग्रवाल ने बताया कि लगातार नवजात बच्चों को 9 डॉक्टर की टीम मॉनीटर कर रही थी जिसकी सूचना समय समय पर परिजनों को दे रहे थे उस समय तो परिजन उपचार से संतुष्ट थे।
दोनों बच्चों के इलाज का बिल
डॉ. दीपक अग्रवाल ने बताया कि 35 दिन तक चले इलाज में से 23 दिन तक दोनों बच्चे ऑक्सीजन और वेंटीलेटर सपोर्ट पर रखे गये थे जिसका बिल 2 लाख 80 हजार रूपये था जिसमें परिजनों के द्वारा 1 लाख 72 हजार रूपये भुगतान किया गया।

