मां ने मोबाइल पर गेम्स खेलने पर डाटा तो 12 वर्ष का छात्र से ट्रक से मुरैना पहुंचा, पुलिस ने बरामद किया
ग्वालियर. मोबाइल पर गेम्स खेलने पर मां ने डाटा तो एक बालक ने गुस्से में आकर घर छोड़ दिया। जब कुछ देर तक बेटे का कुछ पता नहीं चला तो परिजन थाने पहुंचे। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझा। पुलिस ने उसे मुरैना से तलाश लिया है। घटना रविवार को ग्वालियर शहर के नारायण बिहार गोला का मंदिर की है। पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी कैमरे खंगाले तो बच्चा किसी ट्रक पर चढ़ता हुआ दिखाई दिया। पुलिस उसी रूट को ट्रैक कर मुरैना के सिकरौदा पहुंची । यहां एक ढाबा से बच्चे को बरामद किया गया है। पुलिस जरा भी देर करती तो बच्चिे के साथ घटना भी घट सकती थी।
क्या है पूरा मामला
गोला का मंदिर स्थित नारायण विहार कॉलोनी में रहने वाला 12 राजू ;बदला हुआ नामद्ध रविवार को मोबाइल में गेम्स खेल रहा था। सुबह से जब वह दोपहर तक गेम्स खेलता रहा तो मां ने उसे डांटते हुए मोबाइल छुड़ा लिया। इस पर वह नाराज हुआ और घर से निकल गया। मां को लगा गुस्सा शांत होगी तो कुछ देर बाद वापस लौट आएगाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब वह काफी देर तक नहीं लौटा तो परिजन को चिंता होने लगी। बच्चे के पिता होतम सिंह गोला का मंदिर थाना पहुंचे पूरे मामले से अवगत कराया। लापता बच्चा कक्षा 7वीं का छात्र है। पुलिस को पूरा मामला समझते में देर नहीं लगी। अब टेंशन यह थी कि राजू कहीं गुस्से में कोई गलत कदम न उठा ले या वह किसी घटना का शिकार न हो जाए। क्योंकि ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले काफी संख्या में अंचल में होते हैं।
सीसीटीवी में दिखाई दिया मुरैना की ओर जाता हुआ
जब पुलिस ने नारायण बिहार के बाहर आकर आमरोड पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज चेक की तो छात्र सड़क पर आकर एक ट्रक पर सवार होता दिखाई दिया। यह ट्रक मुरैना हाइवे की ओर जा रहा था और इसके बाद पुलिस को दिशा मिली कि छात्र मुरैना की ओर गया है। हैरत भी थी कि इतने छोटे लड़के को ट्रक वाले ने आसानी से लिफ्ट कैसे दे दी।
ढाबा पर बैठा मिला मासूम
बालक को तलाशते हुए पुलिस की टीम मुरैना पहुंची। यहां मुरैना के सिकरौदा के पास हाइवे किनारे ढाबा पर एक लड़के को पुलिस ने बैठा देखा। हुलिया और चेहरा लापता छात्र से मिल रहा था। पुलिस ने पास पहुंची तो यकीन हो गया कि यह नारायण विहार से लापता बालक ही है। पुलिस ने उसे समझाया और वहां लेकर ग्वालियर आए। बच्चे को उनकी मां के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस अफसरों का मानना है कि वह जरा भी देर करते तो बच्चे के साथ कुछ भी हो सकता था।

